Thursday, 24 December 2015

📢📢📢 प्रतिवर्ष
📢📢📢 25 दिसंबर

🐘🐘🐘🐘🐘🐘🐘🐘

🙏श्रीतुलसी 🌿 पूजन दिवस

🎊🎈🎈🎈🎈🎈🎈?🎊

✨स्वधर्मे निधनम् श्रेयः
       परधर्मो भयावह✨

📚अर्थात अपने धर्म में मर जाना श्रेष्ठ है । दूसरे का धर्म भय ही देता है । ऐसे उपदेश हमारे शास्त्रों में हैं । फिर भी

💛-सहन शीलता
🙏-विनम्रता
👏 -समझौता
🙌 -दूसरे को सम्मान
😔-स्वयं को दीन
⛳-सर्व धर्म समभाव
      आदि आदि

🔗 🍁कुछ उदारवादी🍁🔗
🐘 अभ्यास🐘 हमारे अंदर संस्कारों में हैं । जिसके कारण अन्य धर्मों 🎭 को भी सदा ही आदर देते हैं ।

🙌  विनम्रता आदि ये हमारी शक्तियां 🐎🐎हैं इन्हें कमज़ोरी बनने नही देना है  और दृढ़ता पूर्वक 💪🏻 25 दिसम्बर को परम पावन

🙏श्रीतुलसी 🌳 पूजन दिवस
के रूप में मनाना 🎊🎈🎉 ही है । 💯 ।

✅ तुलसी जी को वस्त्र ।
✅ धूप ।
✅ आरती ।
✅ परिक्रमा आदि से पूजित कर ये दिन व जन्म सफल करना है ।

🌾 तुलसी कृष्ण की पत्नी हैं
🌾 इसके बिना कुछ भी
        स्वीकार नहीं करते प्रभू
🌾 वैष्णव भी कंठ में धारण
        करते है
🌾 इसके पूजन से कृष्ण प्रसन्न
        होकर भक्ति देते है । रोग
        नाश होते हैं । अनंत महिमा है

और आपको चाहिए भी क्या

🙌जय श्री राधे। जय निताई 🙌



तकलीफ

दादा । आपको

पैरों म तकलीफ है
😳 नहीं

फिर टांगों में
😳 नहीं

पेट में
😳 नहीं

चक्कर आते हैं
😳 नहीं

आप कहीं आते जाते नहीं
सारा दिन यही
अपने कमरे में ही ....

आप काम पर भी नही जाते

😳 में यहीं झूठा सच्चा भजन
करता हूँ । कुछ लिखता हूँ
सत्संग करता हूँ  । यही मेरा काम है अब ।

मतलब आपको कोई रोग नहीं
फिर भी काम धाम ...

😳 मेरा यही काम है दीदी

वो ऐसे😏😏😏 करते हुए
चली गई ।

ये वार्तालाप डस्टिंग करने वाली एक नई बाई ने मुझसे आज किया

😳😏🙈😎🙊😏
[12:59, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


मैंने पूछ
लिया-
क्यों
इतना दर्द
दिया
मोहन
तुमने

वो हँसे
और बोले-

मेरी
याद
बनी
रही न

🐎
[13:01, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


 उन दिनों
हम
अमीर थे

मोहन

जब
तुम्हारे
करीब थे

👜💼
[13:02, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia: इ[12:59, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


मैंने पूछ
लिया-
क्यों
इतना दर्द
दिया
मोहन
तुमने

वो हँसे
और बोले-

मेरी
याद
बनी
रही न

🐎
[13:01, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


उन दिनों
हम
अमीर थे

मोहन

जब
तुम्हारे
करीब थे

👜💼
[13:02, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


 इस
ज़ुबां से
न कर सके
कभी

अपना
हाले दिल
बया

सुनो

आप ही
कह देना
उनसे
कि वो
मज़े में है

🐎🐎🐎
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


आज धुंध बहुत है


काश
किसी गली
मैं टकरा
जाऊँ आज
नटखट
श्याम सलोने
से 🌹
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


लफ्ज़
जब बरसते हैं
बन कर बूँदें

मौसम
कोई भी हो
सब
भीग ही
जाते है.






देखो ना !
खोये
हम खुद रहते हैं,

और ढूढते
श्याम सुन्दर
को हैं ....

😳😳
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


 ख़्वाब
ही ख़्वाब
कब तलक
देखूँ

मोहन

अब
दिल चाहता
है
तुझको भी
इक
झलक
देखू

💃🏻💃🏻💃🏻💃🏻
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


नींद में भी
गिरते हैं
मेरी
आँख से आंसू

जब भी
तुम
मेरे हाथ से

चरणों को
छुड़ा
लेते हो
मेरे नाथ ।

💧💧💧💧💧
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


यूँ
अकेला
छोड़ कर
मत
जाया करो
हमे...

मोहन


सब कुछ
जाना
मंजूर है
आपका
नही...

🙏🏻🙏🏻🙏🏻
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


तासीर
इतनी ही
काफी है

कि
तू मेरा

ठाकुर है..


क्या
ख़ास है
तुझमे,
ऐसा
मैंने
कभी
सोचा ही नही

🍁🎈🍁🎈
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


ज़िन्दगी में
एक तुम
ही ऐसे
मिले

जिसे हम
पा नहीं
सकते

सिर्फ
चाह सकते हैं.

💼👜🚗

बैग खाली
शुभ रात्रि
[13:06, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


ना जाने
कौनसी
दौलत हैं..!
आपकी
नज़रों में

मोहन

देखते हो
तो.!
हमे
खरीद
लेते हो

💃🏻💃🏻स
ज़ुबां से
न कर सके
कभी

अपना
हाले दिल
बया

सुनो

आप ही
कह देना
उनसे
कि वो
मज़े में है

🐎🐎🐎
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


आज धुंध बहुत है


काश
किसी गली
मैं टकरा
जाऊँ आज
नटखट
श्याम सलोने
से 🌹
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


लफ्ज़
जब बरसते हैं
बन कर बूँदें

मौसम
कोई भी हो
सब
भीग ही
जाते है.






देखो ना !
खोये
हम खुद रहते हैं,

और ढूढते
श्याम सुन्दर
को हैं ....

😳😳
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


ख़्वाब
ही ख़्वाब
कब तलक
देखूँ

मोहन

अब
दिल चाहता
है
तुझको भी
इक
झलक
देखू

💃🏻💃🏻💃🏻💃🏻
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


नींद में भी
गिरते हैं
मेरी
आँख से आंसू

जब भी
तुम
मेरे हाथ से

चरणों को
छुड़ा
लेते हो
मेरे नाथ ।

💧💧💧💧💧
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


 यूँ
अकेला
छोड़ कर
मत
जाया करो
हमे...

मोहन


सब कुछ
जाना
मंजूर है
आपका
नही...

🙏🏻🙏🏻🙏🏻
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


तासीर
इतनी ही
काफी है

कि
तू मेरा

ठाकुर है..


क्या
ख़ास है
तुझमे,
ऐसा
मैंने
कभी
सोचा ही नही

🍁🎈🍁🎈
[13:03, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


ज़िन्दगी में
एक तुम
ही ऐसे
मिले

जिसे हम
पा नहीं
सकते

सिर्फ
चाह सकते हैं.

💼👜🚗

बैग खाली
शुभ रात्रि
[13:06, 12/24/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


ना जाने
कौनसी
दौलत हैं..!
आपकी
नज़रों में

मोहन

देखते हो
तो.!
हमे
खरीद
लेते हो

💃🏻💃🏻

Sunday, 20 December 2015



[15:24, 12/19/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia: •¡✽🌿﹏*)🍁(*﹏🌿✽¡•

🍁    संत जन कहते है कि भगवान अपना अपराध सहन कर सकते हैं लेकिन संत का अपमान सहन नहीं कर सकते l हिरण्यकशिपु ने भगवान का विरोध किया भगवान कुछ नही बोले l जब हिरण्यकशिपु ने भक्त प्रह्लाद को सताना शुरू किया तब भगवान स्तम्भ से प्रकट हुए l

🍁     इसलिये संतो ऋषियों की निंदा से बचो l अकारण निंदा करोगे तो हमारे दुष्कृत्य से ही भगवान की अवकृपा होती है l किसी की भी निंदा न करें और उसमे संतो ऋषियों की तो कभी भी नहीं l

🍁     हम सब भी निंदा से बचते हुए प्रभुभक्ति से जीवन को प्रकाशित करे l भक्ति ही भगवान तक ले जायेगी l
                       ✏ मालिनी
 
        ¥﹏*)•🍁•(*﹏¥
             •🌿✽🌿•
       •🍁कृष्णमयरात्रि🍁•
 •|🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿|•
     •🍁जैश्रीराधेश्याम🍁•
             •🌿✽🌿•
         ¥﹏*)•🍁•(*﹏¥
   
•¡✽🌿﹏*)🍁(*﹏🌿✽¡•
[15:24, 12/19/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


Dwaarka m
ऐश्वर्य सर्वाधिक ह । मुख्य है

मथुरा में
ऐश्वर्य है लेकिन माधुर्य भी है

वृन्दाबन में
केवल माधुर्य है
[15:24, 12/19/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


 ✽🌿﹏*)(*🌺*)(*﹏🌿✽

     1⃣9⃣*1⃣2⃣*1⃣5⃣
   
           शनिवार  मार्गशीर्ष
            शुक्लपक्ष अष्टमी

                     •ө•
               ◆~🌺~◆
       ◆!🌿जयनिताई🌿!◆  
     •🌺 गौरांग महाप्रभु 🌺•
       ◆!🌿 श्री चैतन्य 🌿!◆
                ◆~🌺~◆
                      •ө•

       ❗अध्यापक निमाई❗

🌿     कुछ दिन पीछे आपने एक पाठशाला का संचालन किया l सोलह वर्ष के अध्यापक निमाई ने अनेक विद्यार्थियों को अपनी शक्ति से पंडित बना दिया l नवद्वीप के विख्यात विद्धान श्री मुरारि गुप्त तो आपकी विद्या वैभव को देखकर लटटू हो गये और श्री मुकुन्द दत्त आदि बड़े बड़े विद्वान इनसे आँख बचाकर निकल जाते l

❗जय शची नंदन गौर हरि जय मालाधारी
जय नवद्वीप बिहारी जय कल्मष हारी❗

🌺   उपरोक्त सार व्रजविभूति श्रीश्यामदास जी के ग्रंथ से लेते हुए हम भी अपने जीवन को भक्तिमय बनाये यही प्रार्थना है प्रभु के चरणों में l
          क्रमशः........
                      ✏ मालिनी
 
       ¥﹏*)•🌺•(*﹏¥
            •🌿✽🌿•
         •🌺सुप्रभात🌺•
 •|🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿|•
     •🌺जैश्रीराधेश्याम🌺•
             •🌿✽🌿•
         ¥﹏*)•🌺•(*﹏¥
   
✽🌿﹏*)(*🌺*)(*﹏🌿✽
[15:24, 12/19/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


ना जाने
कोैन सी
दवा है आप
सबके पास

कुछ पल
साथ
गुजार लूं
तो सुकून सा
मिलता है

और

बड़ा ही
सरल है,

कुछ मैं
तुम्हारी
मान लूँ,

और कुछ
तुम मनवा लो ।

शांति ही शांति

जय श्री राधे । जय निताई
[15:24, 12/19/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia: 🎉


अपना ध्यान राखिये

आप या हम🎎
जब बीमार पड़ते हैं । तो हमे जितना कष्ट होता है  । उससे अनेक गुना कष्ट 😩हमारे आस पास के परिवारी जनों को होता ह ।

हमारे कारण किसी को कष्ट न हो । यह भावना रखते हुए सदा ही चेष्टा सहित अपने शारीर का ध्यान रखें । लापरवाही न करें ।

💊💊 समय पर दवा एवम् भोजन का ध्यान रखें । इसमें भावना दूसरों के कष्ट की । अपनी सुंदरता या बुड्ढे होने का भय नही ।👴🏻

शरीरमाद्यम् खलु धर्म साधनम्
शरीर से ही भजन होता है । और आप ध्यान से नॉट करें की सबसे पहले कुछ  छूटता है तो भजन ।
💧🐠💧🐠💧

अतः भजन के लिए एवम् दूसरों को कष्ट न हो । ये भावना रखते हुए सदा अपने को स्वस्थ रखें

अपना ध्यान राखिये
💃🏻💃🏻💃🏻💃🏻

समस्त वैष्णवजन को सादर प्रणाम जय श्री राधे । जय निताई
[15:24, 12/19/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
                 
💐💐ब्रज की उपासना💐💐

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻            

🌷 निताई गौर हरिबोल🌷

       क्रम संख्या 12

   🔴सार का सार🔴

   ⚡पुरुषार्थ क्या है⚡

👳🏻पुरुषार्थ कहते हैं- पुरुष होने का अर्थ, उद्देश्य ।

👪 जीवन मिलने का परम उद्देश्य क्या है। क्या जन्मना, शादी, बच्चे, कमाई, बुढ़ापा- मरना यही जीवन का उद्देश्य है।

💰नहीं तो क्या वर्ण एवं आश्रम के धर्म का पालन, अर्थ- पैसा कमाना, कामनाओं की पूर्ति या अधिक से अधिक मोक्ष= धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति ही पुरुषार्थ है ?

🌹नहीं ।कदापि नहीं । इन चारों के अतिरिक्त एक पंचम- महान् पुरुषार्थ है- 'प्रेम' ।

👳🏻😳👴🏻 और प्रेम भी लड़का💃🏻 लड़की । माता पिता या अन्य संसारी लोगों 🎎👬से नही । कदापि नहीं । इन सबका प्रेम स्वार्थ 🚗 पर टिका है । इसलिए स्वार्थ पूरा न होने पर ये प्रेम । क्लेश में बदलते देखते हैं रोज़ हम ।

😡😠 वही माँ । जिसे हम प्राण🍼 प्यारे थे । मुह बना कर कहती है । ये तो बीबी 😏🙎का गुलाम है । इसलिए प्रेम केवल और केवल कृष्ण से ।

🌷इस जीवन की प्राप्ति उस दुर्लभ श्रीकृष्ण- प्रेम प्राप्ति के लिए ही हुई है।

💐 यहाँ तक कि श्रीकृष्ण को भी प्राप्त नहीं करना है । जी हाँ कान खड़े करके सुनिए ।👂🏻👂🏻

🌞हमें श्रीकृष्ण- प्रेम प्राप्त करना है । श्री कृष्ण तो पूतना,  कंस, दुर्योधन आदि असुरों  को भी प्राप्त हुए थे।

🔆हमें श्रीकृष्ण- प्रेम प्राप्त करना है यही हमारा पुरुषार्थ है।

❄ पंचम पुरुषार्थ प्रेम या भक्ति में ही जीवन को लगा लो तो तुम्हारा पुरूष होना (पुरुषार्थ) सफल हो जाएगा।

 क्रमशः.........

 💐जय श्री राधे
 💐जय निताई

📕स्रोत एवम संकलन
दासाभास डा गिरिराज नांगिया श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन द्वारा लिखित व्रज की उपासना ग्रन्थ से

✏प्रस्तुति ।
मोहन किंकरी 🐠 मीनाक्षी 🐠
[15:07, 12/20/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


जीवन प्राण हमारे रहो

पहने यह कुण्डल यूँ ही रहो
अलकावली यूँ ही संवारे रहो
अधरामृत पान कराते हुए
कर कंज में मुरली धारे रहो
नहीं और विशेष करो कुछ तो
अनियारे दृगों से निहारे रहो
कहीँ जाओ न प्यारे छोड़ हमें
बनि जीवन प्राण हमारे रहो ....

एडिटेड
[15:07, 12/20/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्री  राधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 2⃣8⃣


🌿प्रेम के प्रकार 🌿

🐚भक्ति यद्यपि त्रिगुणातीत है

 लेकिन फिर भी गुणों के आधार पर :
    🌷तीन प्रकार की है 🌷

💎सात्विक

इस प्रेम में केवल देना ही देना स्वभाव बन जाता है । उसका सुख, उसकी अनुकूलता, इसे ही भक्ति या शुद्ध प्रेम कह सकते हैं । उसके लिए सब कुछ।

🌵राजसिक

इस प्रेम में लेना व देना दोनों चलते हैं। मैंने तुमको इतना प्रेम किया- बदले में तुमने मुझे क्या दिया ? यही सिला दिया मेरे प्यार का ?

📯तामसिक

प्रेम के कारण जान देने या लेने उतारू हो जाना । जैसे कि आंतकवादी, उसे भी कुछ ना कुछ प्रेम हो जाता है कि वह उसके लिए दूसरे की जान लेने और अपनी जान देने को तैयार रहता है ।

🚩सर्वोत्तम : प्रेम -भक्ति

और इन तीनों से परे श्रीकृष्ण की अनुकूलतामयी स्वसुख गंध लेश शून्य जो क्रिया है - वह सर्वोत्तम प्रेम है । इसी का नाम भक्ति है ।

🌿 पुराण 🌿

🙌श्रीमद्भागवत के अनुसार 18 पुराणों के नाम इस प्रकार हैं

🌕 ब्रहम पुराण
🐾 पद्म पुराण
🐚 विष्णु पुराण
🔔 शिव पुराण
🌑 लिंग पुराण
🐌 गरुड़ पुराण
👳🏻 नारद पुराण
📖 भागवत महापुराण
🔥 अग्नि पुराण
💡 स्कंद पुराण
⌚ भविष्य पुराण
📈 ब्रह्मवैवर्त पुराण
📕 मार्कंडेय पुराण
👶🏻 वामन पुराण
🐺 वराह पुराण
🐠 मत्स्य पुराण
🐗 कुर्म पुराण
🐚 ब्रम्हांड पुराण

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

📕स्रोत एवम् संकलन
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन द्वारा लिखित व्रज की खिचड़ी ग्रन्थ से

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू
[15:07, 12/20/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia: 'परिप्रश्नेन सेवया'

अर्थात साधु । गुरु की सर्वोत्तम सेवा है कि उससे भजन । साधन विषय में प्रश्न करो ।
[15:07, 12/20/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:

B । बहुत
A । अच्छी
R । रूहानी
F । फीलिंग
[15:07, 12/20/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia: •


¡✽🌿﹏)(🍂)(﹏🌿✽¡•

     2⃣0⃣*1⃣2⃣*1⃣5⃣
   
           रविवार  मार्गशीर्ष
            शुक्लपक्ष दशमी

                     •ө•
               ◆~🍂~◆
       ◆!🌿जयनिताई🌿!◆  
     •🍂 गौरांग महाप्रभु 🍂•
       ◆!🌿 श्री चैतन्य 🌿!◆
                ◆~🍂~◆
                      •ө•

       ❗दिग्विजयी मिलन❗

🌿     श्री केशव कश्मीरी सब जगह शास्त्रार्थ करता हुआ विद्वानों के गढ़ नवद्वीप में आया lवहाँ समस्त विद्वान उसके साथ शास्त्रार्थ करने से घबड़ाये परन्तु श्री गौरांग ने उसे परास्त कर दिया l दुखित चित्त से उसने अपनी इष्ट सरस्वती देवी का स्मरण किया l देवी ने बताया कि गौरांग सर्वेश्वर है और मेरे स्वामी और इष्ट हैं l तुम उनकी कृपा प्राप्त करो l

🌿     दिग्विजयी जी श्री महाप्रभु की शरण में आये l श्री गौरांग ने बताया कि विद्या का फल श्री भगवान की भक्ति लोगो का हित एवं मानव धर्मो का पालन करना है l उसी समय दिग्विजयी भगवद् भजन करने के लिए मथुरा मण्डल चले आये l

🌿      निमाई की नवद्वीप के सब लोग प्रशंसा करते थे लेकिन श्री गदाधर श्री वासादि भक्तितत्ववेत्ता भक्तिशास्त्रवेत्ता बड़े दुखी होते थे कि निमाई में भक्ति का कुछ भी लक्षण नहीं थे l वे कहा करते यदि श्री निमाई में कृष्ण भक्ति उदित हो उठे तो अनेक बहिर्मुख लोगो का उद्धार हो जावे lश्री निमाई कहते कि आप मुझे ऐसा आशीर्वाद दीजिये l भक्तो की कृपा के बिना आपके आशीर्वाद के बिना भक्ति कैसे प्राप्त हो सकती है ❓

🌿   उपरोक्त सार व्रजविभूति श्रीश्यामदासजी के ग्रंथ से लेते हुए हम भी अपने जीवन को भक्तिमय बनाये यही प्रार्थना है प्रभु के चरणों में l
          क्रमशः........
                        ✏ मालिनी
 
       ¥﹏*)•🍂•(*﹏¥
            •🌿✽🌿•
         •🍂सुप्रभात🍂•
 •|🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿|•
     •🍂जैश्रीराधेश्याम🍂•
             •🌿✽🌿•
         ¥﹏*)•🍂•(*﹏¥
   
•¡✽🌿﹏)(🍂)(﹏🌿✽¡•
[15:07, 12/20/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


एकादशी

कल 21 दिस को एकादशी है

🍎🍏🍊🍌🍈🍑🍓🍉
कुछ खाना या कुछ न खाना का नाम एकादशी नही है

🎸🎸🎸 सब कुछ को सेकेंडरी करते हुए 15 दिन में एक बार आज भजन को प्राथमिकता देने का नाम एकादशी है

आज अधिक भजन करना है
जेसे सन्डे का मुख्य काम रेस्ट
मस्ती है । उसी तरह एकादशी का मुख्य काम भजन ।

भजन में मन लगे । खाने खिलाने में समय व्यर्थ न हो । इसलिए खाने की या तो छुट्टी । या
🍎फल
🍁फूल
🍌कंद
🍐मूल
दूध आदि से शरीर रक्षा करते हुए भजन में अधिक से अधिक समय देना ही एकादशी है

😌😌 सोने से पूर्व अधिक भजन । रात्रि जागरण ।

आज से योजना बनाइये ।

समस्त वैष्णवजन को सादर प्रणाम जय श्री राधे । जय निताई
[15:07, 12/20/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:

yiuitu

Y । ये
I । इतना
U । उत्तम
I । इक
T । ताप निवारक
U। । उपाय है

जय श्री राधे
[15:07, 12/20/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:



OOHAFGJKLBCR


O । ओहो
O ।और क्यो ?ं
H । हरिनाम
a । आश्रय
G । गान
J । जगत का
k । कल्याण
L । लायक
B । बहुत
C । चिन्मय । चंगा
R । रास्ता है

जय श्री राधे
प्रत्येक शब्द शब्द में प्रभु हैं
उनका गुणगान है बेटे ।
[15:07, 12/20/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
                 
💐💐ब्रज की उपासना💐💐

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻            

🌷 निताई गौर हरिबोल🌷

       क्रम संख्या 13

   🔴सार का सार🔴

  🍃किसका मत है🍃

🍁यह सब जो  बताया-
इसके प्रवर्तक कौन है यह  किसका मत है-

💐'श्रीमन्महाप्रभोर्मतमिदम्-  यह श्रीमन्महाप्रभु  श्रीकृष्ण- चैतन्यदेव का मत है,

🎷जो श्री राधाकृष्ण मिलित स्वयं श्री ब्रजेंद्रनंदन कृष्ण हैं ।

🔱न:= हम सभी इनके इस मत का पर:= परम आदर करते हैं और इसी मत अनुसार अपने जीवन को चलाने का, उपासना का अभ्यास करते हैं। प्रयास करते हैं ।
 
✖माध्व मत नहीं✖

🌿यहाँ यह बात भी स्पष्ट है कि हमारा मत श्री चैतन्यमत है।
माध्व मत नहीं है।

🌴न ही माध्व और चैतन्य का मिश्रण है -इसीलिए हमारी संप्रदाय भी श्रीचैतन्य संप्रदाय ही है या देश या इलाके की दृष्टी से गौड़ीय संप्रदाय है।

💎महाप्रभु श्रीचैतन्य का जन्म 'गौड़' प्रदेश में हुआ था, गौड़ देश से ही महाप्रभु के इस मत का प्रचार-प्रसार उदघोष हुआ इसलिए इसे 'गौड़ीय' कहने में कोई हर्ज नहीं है, उचित है ।

🌾लेकिन 'माध्व-गौड़ीय' या माध्व-गौडेश्वर'  कहना तो कोरा भ्रम ही नहीं, अत्यधिक  असंगत है ।

🎈🎈पूर्व में गौड़ीय सम्प्रदाय का अपना भाष्य नही था । बाद में अभी लगभग 300 वर्ष पूर्व श्री बलदेव विद्याभूषण से साक्षात श्री गोविन्द देव जू ने श्री गोविन्द भाष्य प्रकट कराया ।

💧💧और गौड़ीय सम्प्रदाय का प्रामाणिक आधार भी प्रस्तुत हुआ

😳😳माध्व सम्प्रदाय में ब्रह्मा को सर्व श्रेष्ठ भक्त एवम् गोपी गण को निकृष्ट 👄चरित्रहीन नारियां कहा गया है । जबकि

🎌🎌गौड़ीय सम्प्रदाय में गोपियाँ प्रेम की ध्वजा हैं । प्रेम का उदाहरण हैं हमारी सारी उपासना गोपियों के आनुगत्य में है ।

😌ब्रह्मा भक्त तो हैं लेकिन ब्रह्म मोहन लीला के कारण ब्रह्मा को ब्रजवासियों का अपराधी कहा जाता है ।


 क्रमशः.........

 💐जय श्री राधे
 💐जय निताई

📕स्रोत एवम संकलन
दासाभास डा गिरिराज नांगिया श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन द्वारा लिखित व्रज की उपासना ग्रन्थ से

✏प्रस्तुति ।
मोहन किंकरी 🐠 मीनाक्षी 🐠

Saturday, 19 December 2015

19।12।15 1।24 तक
 12:44, 12/17/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्रीराधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    


📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 2⃣5⃣

🌿भक्ति अमर है 🌿

🌻अमृतस्वरूपा 🌻

🌞नारद भक्ति सूत्र का दूसरा सूत्र है । जिसके अनुसार भक्ति अमृत स्वरुप है,  अथवा अमृत है। अमृत यानी अ + मृत जो मृत नहीं होती, जिसका नाश नहीं होता,  जो सदैव है, अमर है ।

🏂इस जन्म में जितनी भक्ति करोगे,  जितनी सीढ़ी चढ़ोगे, मृत्यु के साथ वह समाप्त नहीं होगी,  अगले जन्म में अगले सीढ़ी से प्रारंभ करना होगा।

🔕पिछली सीढ़ियां अमर है,  हर जन्म में जुड़ती जाएंगी। भक्ति का नाश नहीं,  न ही भक्त का नाश है -

🎐'न मे भक्तः प्रणशयति'

💀जबकि कर्म का फल भोग या  मृत्यु के साथ समाप्त हो जाता है ।

🙏अतः इस भक्ति अमृत का अवश्य पान करो । जितना हो उतना करो- यह आगे जुड़ता रहेगा।

 🌿काली और वैष्णव 🌿

🌑काली, महाकाल श्री विष्णु की ही एक शक्ति है - ऐसा सोच कर यदि कोई काली की उपासना करता है तो काली भी अपने स्वामी श्री विष्णु या कृष्ण की और उसे उन्मुख करती है ।

🐃 काली को पशु बलि दे कर स्वतंत्र मान कर जो उनकी उपासना करता है वह वैष्णवता से पतित होकर  तामसिक पूजक ही कहलाता है।

 📌वैष्णव नहीं रह जाता

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

📕स्रोत एवम् संकलन
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन द्वारा लिखित व्रज की खिचड़ी ग्रन्थ से

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू
[12:44, 12/17/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


✽🌿﹏*)(*🌹*)(*﹏🌿✽

     1⃣7⃣*1⃣2⃣*1⃣5⃣
   
           गुरुवार  मार्गशीर्ष
            शुक्लपक्ष षष्ठी

                     •ө•
               ◆~🌹~◆
       ◆!🌿जयनिताई🌿!◆  
     •🌹 गौरांग महाप्रभु 🌹•
       ◆!🌿 श्री चैतन्य 🌿!◆
                ◆~🌹~◆
                      •ө•

          ❗विद्याध्ययन❗

🌿     श्री गौरांग ने श्री गंगादास पंडित की पाठशाला में विद्या प्रारम्भ की l इनकी असाधरण बुद्धि देखकर सब चकित रह गये और माता पिता चिंतित हो ऊठे कि कहीं विश्वरूप की तरह पढ़ लिख कर यह बीही सन्यासी न हो जाये lअतः इनका पढाई बन्द कर दी l निमाई बहुत दुखी हुए किन्तु माता पिता की आज्ञा का उल्लंघन न कर सके l

🌿     आपने फिर पढाई की एक राह निकाली l एक दिन निमाई कूड़े पर जाकर बैठ गये माता शची यह देखकर अत्यंत दुखी हुई कि ब्राह्मण की सन्तान होकर अचार विचार शुद्ध अशुद्ध का ज्ञान नहीं lनिमाई बोले शुद्ध अशुद्ध अचार विचार तो विद्या पढ़ने से पता लगता है l आपने तो मेरी पढाई बन्द कर दी l तब माता पिता ने पुनः इन्हें विद्याध्ययन के लिए भेजा l

🌿    निमाई विद्या में इतने प्रवीण थे कि गुरुदेव भी आश्चर्यचकित रह जाते l दस वर्ष की आयु में आपके पिता जी का परलोक गमन हो गया lपिता जी के बाद निमाई और अधिक उद्दण्ड हो गए किन्तु फिर समस्त शास्त्रों के आप परम विद्वान के रूप में विख्यात हो गये l

🌿   उपरोक्त सार व्रजविभूति श्रीश्यामदासजी के ग्रंथ से लेते हुए हम भी अपने जीवन को भक्तिमय बनाये यही प्रार्थना है प्रभु के चरणों में l
          क्रमशः........
                      ✏ मालिनी
 
       ¥﹏*)•🌹•(*﹏¥
            •🌿✽🌿•
         •🌹सुप्रभात🌹•
 •|🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿|•
     •🌹जैश्रीराधेश्याम🌹•
             •🌿✽🌿•
         ¥﹏*)•🌹•(*﹏¥
   
✽🌿﹏*)(*🌹*)(*﹏🌿✽
[12:44, 12/17/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


भक्ति या भजन

को कभी भी इगो
या अपनी महानता
या अपनी पहचान
बनाते हुए
जब हम अपने
दायित्वों से
भागते हैं तो
घर गृहस्थी में
क्लेश होता। है

प्रारम्भिक स्तर
पर अपने दायित्वों
के साथ साथ भजन
भक्ति की जानी
चाहिए ।

बाद में परिपक्वता
आने पर
सब छूट जाता है
छोड़ना नही पड़ता

24 में से 10 घंटे
काम नौकरी
6 या 8 घण्टे सोने के
फिर भी 6 घण्टे बचते हैं
3 बीबी बच्चों
माता पिता को देदो
फिर भी 3 बचते हैं

इन 3 घण्टों को
भजन भक्ति में लगाना ह
फालतू चैटिंग
इधर उधर की बातें
तेरी मेरी
राजनीति क्रिकेट
लेना एक न देना दो
वाली बातों को छोड़ कर
भजन करना है
न कि माता पिता
बीबी बच्चों से भागकर

फालतू समय का सदुपयोग
करते करते आनंद
प्राप्त होगा
क्लेश नही होगा ।

समस्त वैष्णवजन को मेरा सादर प्रणाम ।
जय श्रीराधे । जय निताई
[12:44, 12/17/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
                 
💐💐ब्रज की उपासना💐💐

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻            

🌷 निताई गौर हरिबोल🌷

       क्रम संख्या 10

   🔴सार का सार🔴

🌹किसने स्थापित की🌹

🌷यह जो रमणीक एवं चमत्कारपूर्ण  दुर्लभ उपासना है इसकी शुरुआत कहाँ से हुई ?

🌷तो कहते हैं- 'व्रजवधू' । यानि  व्रज के जो गोप हैं, उनकी वधू यानी पत्नियों द्वारा यह उपासना प्रारंभ की गई ।

🌷 यहाँ यदि 'कृष्ण-वधू' कहा होता तो यह उपासना स्वकीया होती है।

 🌷लेकिन 'व्रज-वधू' से स्पष्ट उद्घोष है कि यह उपासना 'परकीया  भावमयी' उपासना है।

🌷साथ ही 'व्रजवधू' मात्र ही नहीं कहा। साथ में कहा है 'वर्गेण' अर्थात केवल किसी एक गोप की पत्नी ने यह उपासना नहीं की अपितु  'वर्गण'  अर्थात एक पूरा का पूरा झुंड़ या समूह यानि ब्रजवधुओं के एक पूरे समूह ने यह उपासना प्रतिष्ठापित  की ।

🌷अर्थात अष्टसखी सहित श्री राधा एवं अन्य यूथेश्वरी मंजरी गण द्वारा जो उपासना सर्वप्रथम की गई है- वह परकीया भावमयी ब्रजेंद्रनंदन श्रीकृष्ण की  मधुर रागानुगा उपासना ही हमारी उपासना है।

यहाँ ये समझना है कि
उपास्य कृष्ण । राधा नही
धाम वृन्दाबनं । बरसाना नही
उपासना वो जो राधादि ने की
प्रमाण भागवत । अन्य पुराण नही
मत चैतन्य का । माध्व का नही

प्रिया जी वाली उपासना पकड़नी है । इसलिए आनुगत्य प्रिया जी का । उनके धाम का । उनकी सखी वृन्द का। मञ्जरी वृन्द का
लेकिन उपास्य ब्रजेन्द नंदन कृष्ण
     
  क्रमशः.........

 💐जय श्री राधे
 💐जय निताई

📕स्रोत एवम संकलन
दासाभास डा गिरिराज नांगिया श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन द्वारा लिखित व्रज की उपासना ग्रन्थ से

प्रस्तुति ।
मोहन किंकरी 🐠 मीनाक्षी 🐠
[20:27, 12/18/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


सिंधु बिंदु एवम्
माधुर्य कादम्बिनी यदि घोट के पी ली तो फिर साधन भक्ति के लिए कुछ और नही चाहिए । दोनों मेरे प्राण प्रिय ग्रन्थ रत्न मुकेश जी
15479
[20:27, 12/18/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:



💐श्रीराधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 2⃣6⃣

🌿पाप का फल
       परिवार नहीं भोगेगा?🌿


👵🏻 बाल्मीकि एक व्याध या बहेलिया थे।  वृक्षों पर बैठने वाले पक्षियों का शिकार करना - उसे पकाकर खाना,  बेचना यह उनका स्वभाविक कर्म था। इसी से वे परिवार का पालन पोषण करते थे।

👳🏻 एक दिन वहां से गुजरते समय नारद ने देखा तो पूछा  कि तुम जो यह काम करते हो - यह जीव हिंसा है और यह पाप है।  यद्यपि उनकी समझ में बात कहां आनी थी ; लेकिन भगवान के 'मन'  नारद जब किसी को समझाना चाहे, और समझ में आए - ऐसा तो नहीं हो सकता ।

🙉अतः क्षण भर में यह समझ आ गया कि यह पाप है ।

👪वाल्मीकि ने कहा कि यह पाप मैं केवल अपने पेट के लिए नहीं करता हूं , मेरे माता - पिता,  पत्नी -पुत्र आदि  है । वे - सभी थोड़ा-थोड़ा फल भोगेगे।

👽नारद ने कहा - जरा तुम पूछ लो - क्या वे तैयार है । वाल्मीकि ने जब पूछा तो सभी बोले - हम क्यों भागेंगे,  तुम पाप करते हो तो तुम भोगोगे ।

👀बाल्मीकि की आंखें खुल गई । प्रभु कृपा करें हमारी भी खुल जाए

✔भले ही परिवार -पालन के लिए सही, जो भी झूठ फरेब, छल, कपट,  मक्कारी अन्याय हम करते हैं, उसका फल हमें ही भोगना है -  दूसरा नहीं भोगेगा।

 📌यह निश्चित है । अतः आज से ही सावधान होने की आवश्यकता है ।  और दूसरे के लिए पाप कमाने में तो समझदारी क्या है?

 🎧वाल्मीकि के समझ आने पर पाप से मुक्ति के उपाय पूछने पर नारद ने कहा -'राम' 'राम' जपो।

 👂वाल्मीकि ने कहा- मैंने तो जीवन भर 'मरा' 'मरा' सुना  है । और मारा ही है।  नारद बोले- ' मरा ' 'मरा' ही जपो। इनका नाम कुछ और था

🎍इन्होंने अन्न जल त्याग कर हजारों वर्ष तक एक आसन पर इतना जप किया कि इनके शरीर के इर्द गिर्द  मिट्टी की एक परत जम गयी और उस पर दीमक चीटियां लग गई ।

⛳ उस ऐसे ढेर को 'वाल्मीकि'  कहते हैं ।

📝इसी से इनका नाम बाल्मीकि हुआ। इन्होंने संस्कृत में रामायण की रचना की ।

🍃पुनः दूसरे जन्म में तुलसी बनकर रामचरित मानस की हिंदी में रचना की,
🙏जो जग पूज्य  है।


 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

📕स्रोत एवम् संकलन
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन द्वारा लिखित व्रज की खिचड़ी ग्रन्थ से

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू
[20:27, 12/18/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


✽🌿﹏*)(*🌺*)(*﹏🌿✽

     1⃣8⃣*1⃣2⃣*1⃣5⃣
   
           शुक्रवार  मार्गशीर्ष
            शुक्लपक्ष सप्तमी

                     •ө•
               ◆~🌺~◆
       ◆!🌿जयनिताई🌿!◆  
     •🌺 गौरांग महाप्रभु 🌺•
       ◆!🌿 श्री चैतन्य 🌿!◆
                ◆~🌺~◆
                      •ө•

         ❗मान प्रदाता गौर❗

🌿     श्री गौरांग न्याय व्याकरण एवं अलंकार शास्त्र के अद्वितीय विद्वान थे l आपने न्याय शास्त्र पर एक टिप्पणी ग्रन्थ लिखा l इनके सहपाठी ने भी दिधति नामक ग्रन्थ लिखा lजब श्री रघुनाथ को श्री गौरांग द्वारा लिखित ग्रन्थ का पता चला तो उसने देखने की उत्कट इच्छा हुई l ग्रन्थ देखकर श्री रघुनाथ का गर्व चूर चूर हो गया और दुखी होकर रोने लगा l

🌺     गौरांग ने उसी समय अपना ग्रन्थ गंगा में डाल दिया यह कहकर कि रघुनाथ तुम्हारा ही ग्रन्थ समादृत हो तुम कष्ट मत पाओ l आज से मैं तुम्हारी प्रसन्नता के लिए न्याय पाठ को ही छोड़ देता हूँ lआपने न्याय शास्त्र का अध्ययन छोड़ दिया l आपने श्री रघुनाथ का मानवर्द्धन करते हुए उसे तृणवत् त्याग दिया l

   ❗विद्या का अभिमान बड़ा दुसत्यज होता है ❗

🌺   उपरोक्त सार व्रजविभूति श्रीश्यामदास जी के ग्रंथ से लेते हुए हम भी अपने जीवन को भक्तिमय बनाये यही प्रार्थना है प्रभु के चरणों में l
          क्रमशः........
                      ✏ मालिनी
 
       ¥﹏*)•🌺•(*﹏¥
            •🌿✽🌿•
         •🌺सुप्रभात🌺•
 •|🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿|•
     •🌺जैश्रीराधेश्याम🌺•
             •🌿✽🌿•
         ¥﹏*)•🌺•(*﹏¥
   
✽🌿﹏*)(*🌺*)(*﹏🌿✽
[20:27, 12/18/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


भाव

भाव यदि शास्त्रीय या उचित
हों तो स्थायी होते हैं
परिणाम देने वाले होते हैं

अन्यथा आनंद आता तो है
लेकिन स्थिरता नही होती ।
भटकन बनी रहती है । क्योकि
हमे पता नही है । लेकिन प्रभु तो जानते हैं

ये उचित अनुचित का ज्ञान वेसे तो अनुचित करते करते पता चल जाता ह एक दिन अपने आप
लेकिन जन्म लग जाते हैं

इसके लिए गुरुजन । वरिष्ठजन
अनुभविजन। एवम् सर्व श्रेष्ठ है ग्रन्थ । ग्रन्थ शास्त्र अध्ययन से वास्तविक मार्ग मिलता है ।

समस्त वैष्णवजन को मेरा सादर प्रणाम ।
जय श्री राधे । जय निताई
[20:27, 12/18/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🎈जय हो🎈

🎌 🎌 श्री राधा रानी के व्रज रखवारी के बारे में एक फैक्ट और भी है जो बहुत जन जानते है और बहुत नही जानते ।

🔨🔨वृन्दाबनं में जो शासन है
प्रशासन है उसकी अधीश्वरी राधा रानी हैं ।

🎎 एक बार इस विषय में सब सखा सखियों में बहस छिड़ गयी कि राजा कौन ।

👳🏻सखा बोले नंदलाल कृष्ण ही राजा हैं । और कौन ।

💃🏻सखिया बोली । राजा हैं
हमारी राधा रानी ।

👬👬👬👬👬👬👬

सखा एवम् सखियों की सभा हुई

👭👭👭👭👭👭👭

सबने अपने अपने तर्क रखे ।
कृष्ण एवम् सखा हार गए । हार स्वीकार की । एवम् सर्व सम्मति से स्वयं कृष्ण एवम् सखाओं ने
श्री प्रिया जी का तिलक व 🔔🔔राज्याभिषेक किया ।

💃🏻तब से श्री राधारानी ही ब्रज की रानी हैं । प्रशासक हैं । व्रज रखवारी हैं ।

📙📘📗 इस पूरी लीला का वर्णन माधव महोत्सव नामक ग्रन्थ में श्री जीव गोस्वामी जी ने किया है । प्रामाणिक ग्रन्थ है । काल्पनिक नहीं ।

जय श्री राधे । जय निताई



[20:27, 12/18/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


क्रोध

😠 पितामह भीष्म ने समय पर क्रोध नहीं किया  और

😡 जटायु ने समय पर क्रोध किया।

परिणामस्वरुप .........
एक को बाणों की ⚡⚡शैय्या मिली और एक को प्रभु श्रीराम की गोद🌺🌺


😠😡 अतः क्रोध भी उचित है, जब वह धर्म और मर्यादा के लिए किया जाए

😷😷 और सहनशीलता भी अनुचित है, जब वह धर्म और मर्यादा को बचा ना पाये।

जय श्री राधे ।जय निताई
एडिटेड



[20:27, 12/18/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
                 
💐💐ब्रज की उपासना💐💐

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻            

🌷 निताई गौर हरिबोल🌷

       क्रम संख्या 11

   🔴सार का सार🔴

   ❓प्रमाण क्या है❓

💧 बोले- यह जो उपासना है इसका कोई प्रमाण भी है या मनमाने ढंग से जो मर्जी आए  करते रहो ।

📚अथवा उपासना के साथ- साथ तुम्हारा कोई प्रमाण ग्रंथ भी है ?

📖जी हाँ हमारा प्रमाण ग्रंथ है- 'श्रीमद्भागवत'।

 ❄और वह श्रीमद्भागवत 'अ+मल' अमल है यानि मल रहित है। मल वह होता है जिसका त्याग करना होता है।

💦श्रीमद्भागवत में ऐसा एक भी शब्द नहीं जिसे छोड़ना पड़े या जिसका त्याग करना पड़े।

 🔷श्रीमद्भागवत से पूर्व के जितने भी पुराण हैं वे सब 'समल' हैं।

🔵 इसलिए व्यास- देव को शांति नहीं मिली ।जब उन्होंने मलरहित 'अमल' इस श्रीमद् भागवत की रचना की तो उन्हें परम शांति की प्राप्ति हुई।

🔆 ऐसा अमल -ग्रंथ रत्न श्रीमद्भागवत हमारा प्रमाण- ग्रंथ है । प्रमाण का अर्थ या भाव है कि जब एक ही बात दो ग्रंथों में वर्णित है और दोनों में एकरूपता नही है तो किस ग्रन्थ की बात माननी चाहिए ।

📕📕विशेषकर दोनों ही वेदव्यास जी द्वारा प्रचारित हों । तो क्योंकि हमारा प्रमाण ग्रन्थ श्री मद्भागवत है । इसलिए हम श्रीमद् भागवत की ही बात मानेंगे ।

💃🏻💃🏻और श्रीमद्भागवत
तेनेयं वांगमयी मूर्ति
अर्थात श्री कृष्ण की शब्द मयी मूर्ति या विग्रह है ।

🌂इस मत के स्थापक कौन हैं
इसकी चर्चा कल करेंगे
     
  क्रमशः.........

 💐जय श्री राधे
 💐जय निताई

📕स्रोत एवम संकलन
दासाभास डा गिरिराज नांगिया श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन द्वारा लिखित व्रज की उपासना ग्रन्थ से

✏प्रस्तुति ।
मोहन किंकरी 🐠 मीनाक्षी 🐠


[20:27, 12/18/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्री  राधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 2⃣7⃣

🌿ध्रुव की भक्ति🌿

🙌भगवान की भक्ति करते हुए अपने लिए कुछ मांगना शतप्रतिशत भक्ति नहीं है  । सकाम भक्ति है । लेकिन सकाम भक्ति करते- करते एक अवसर ऐसा आता है कि भक्त विशुध भक्ति तक पहुंच कर भगवान के श्री चरणों की सेवा के अतिरिक्त कुछ नहीं मांगता ।
 
🙏ना करने से बेहतर है,  सकाम भक्ति ही सही ...., भक्ति करो, ध्रुव को जब उनकी सौतेली मां ने दुत्कार दिया तो ध्रुव ने  भगवान की उपासना शुरू की।  कामना यही थी कि मुझे पिता से बड़ा राज्य मिले,  और पिता स्वयं मुझे गोदी में बिठाने के लिए बुलाए ।

🌻लेकिन भक्ति भजन करते- करते जब भगवान प्रकट हुए,  कहा वर मांगो तो ध्रुव ने कहा कि जब आपके श्री चरणों के दर्शन हो गए तो अब क्या राज्य और क्या गोदी?

 🙌मुझे तो अपने श्री चरणों की सेवा दे दीजिए ।

🐚प्रभु ने कहा ध्रुव तुम निश्चित ही मेरी सेवा के अधिकारी हो। लेकिन तुम ने जिस कामना के लिए भक्ति प्रारंभ की थी वह भी पूर्ण करूंगा

 🏬भगवान ने विशाल राज्य दिया । हजारों वर्षो तक ध्रुव ने राज्य सुख होगा और अंत में मृत्यु के सिर पर पैर रखकर भगवद् धाम को गए और आज भी तारामंडल में दर्शनीय है ।

🐾सकाम  भक्ति वाला विशुद्ध भक्ति तक पहुंचता तो है लेकिन उसे देर लगती है । बीच का समय या अनेक-अनेक जन्म कामना पूर्ति में नष्ट हो जाता है ।

🌹अतः जल्दी प्रभु चरण प्राप्ति हेतु विशुद्ध भक्ति पर केंद्रित करना चाहिए। कामनाओं का अंत नहीं है इन्हें छोड़ना ही पड़ता है

💐छोड़ना चाहिए भी

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

📕स्रोत एवम् संकलन
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन द्वारा लिखित व्रज की खिचड़ी ग्रन्थ से

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू

15479


Thursday, 17 December 2015

[15:57, 12/3/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


📚🍵बज की खिचडी🍵📚

🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

💐श्री  राधारमणो विजयते 💐

       क्रम संख्या 1⃣1⃣

   ⚡ 🌿  जन्माष्टमी 🌿⚡

🎈🎈श्री कृष्ण के प्रकट होने के दो कारण-

सामान्य जगत के लिए :
🌸 'अभ्युत्थानम् धर्मस्य'
🌸 'परित्राणाय साधुनाम'
🌸'विनाशाय च  दुष्कृताम'
       
            अर्थात

🐚धर्म की स्थापना
👳🏻साधुओं की रक्षा
👹दुष्टों का विनाश
करने के लिए प्रभु प्रकट होते है।

💐अपने भक्तों के लिए
'मद्वक्तानांम विनोदार्थम
करोमि विविदा क्रिया: '

🌺अपने भक्तों को आनंद प्रदान करने के लिए प्रभु प्रकट होते हैं

 वास्तव में प्रभु अपने भक्तों के लिए ही प्रकट होते हैं क्योंकि अपने भक्तों को वह स्वयम ही आनंद प्रदान कर सकते हैं बाकी का काम तो उन के चुटकी बजाने मात्र से हो सकता है,

🌺चाहे वह धर्म की स्थापना हो या दुष्टों का विनाश।

⚡🌿शुद्ध प्रेम 🌿⚡

🌻कामना, वासना, स्वार्थ या किसी मक्सद के लिए किया गया प्रेम लौकिक है। यह उद्देश्य - पूर्ति के साथ-साथ समापत हो जाता है।  या ढीला पड़ जाता है।

🌻 विशुद्ध प्रेम आत्मिक है।आत्मा की वस्तु है शरीर रहे ना रहे,  मकसद रहे ना रहे, प्रेम रहता ही है।

 🌟🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻🌟

लेखकः-दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
 📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

🌞प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू
[15:57, 12/3/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


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       3⃣◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

             गुरुवार मार्गशीर्ष
             कृष्णपक्ष अष्टमी

                     5⃣5⃣
                   
             ❗वैष्णव सेवा❗

🌸       भगवान श्री कृष्ण श्री राम आदि के भक्तों की सेवा करना l यह साधन भक्ति का एक प्रधान अंग है l क्योकि भक्ति तथा भगवान की प्राप्ति के मूल कारण हैं वैष्णव भक्त l उन्हीं की कृपा से भक्ति की प्राप्ति होती है l

🌸     वैष्णवों की अन्न वस्त्रादि से सेवा करने के साथ ही उन्हें भजनानुकूल उपकरण प्राप्त कराना मुख्य वैष्णवव् सेवा है l वैष्णवों की यह सेवा उस वैष्णव के द्वारा भगवान तक पहुँचेगी lइसमें अत्यधिक सावधानी रखने की आवश्यकता है नहीं तो उल्टा अपराध बनेगा l निरपराध होकर वैष्णव सेवा करने से साक्षात् प्रभु प्रसन्न होते है और हमारा जीवन सफल होता है l

🌸    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                  क्रमशः........
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥
              •🌿♡🌿•
        "🌸सुप्रभात 🌸"
◆🌿श्री कृष्णायसमर्पणं🌿◆
      "🌸जैश्रीराधेकृष्ण🌸"
              •🌿♡🌿•
          ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥    

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[15:57, 12/3/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🌸 ब्रज की वार्ता ग्रन्थ से 🌸  
 
वाल पुट्टी का बेस                

💎 किसी कमरे में पेंट कराना हो तो पेंटर पहले पुराने पेंट को घिसता है पुट्टी लगाता है

💎 पुराने वाले रंगों को दबाने के लिए प्राइमर करता है  । यदि आपने ध्यान दिया हो तो  base बनाने में ही तीन चार दिन लगा देता है

💎 फिर पेंट को फटाफट एक ही दिन में कर देता है और यदि वह बिना बेस बनाए

🍁 ऑरेंज रंग के पुराने पेन्ट पर लाइट क्रीम पेंट कर दे तो करना ना करना बेकार हो जाता है,

💎 इसी प्रकार भगवत प्राप्ति के श्रवण लीला चिंतन  आदि कुछ भी अंगों का आश्रय लेने से पहले आवश्यक है कि  base बन

💎 अर्थात चित्त शुद्ध हो जिस पर इन का  प्रभाव होना है ।।                                 चित शुद्ध होता है केवल और केवल नाम से ही

💎 श्री चैतन्य महाप्रभु ने स्वयं सत्य कहा है

चेतो दर्पण मार्जनम्
बिना चित्त शुद्धि के वही हाल होगा जो ऑरेंज पेंट पर क्रीम पेंट करने से होता है ।  

💎 इससे तात्पर्य यह है कि पहले नाम सिमरन या संकीर्तन द्वारा हम अपने चित्त को शुद्ध करें तभी उस पर भगवत भक्ति के अन्य अंगों का साक्षात्कार होगा।।  

😏😏

जय जय श्री राधे । जय निताई

लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
श्री हरिनाम प्रेस । वृन्दाबन

प्रस्तुति । श्यामा किंकरी शालू
[15:57, 12/3/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🍁जय श्री राधे 🍁

गोवर्धन वासी पूज्य पंडित बाबा
श्री गयाप्रसाद जी महाराज के
🐠 दिव्य वचन 🐠

🌷 1 लक्ष्य

💎 मानव जीवन कौ परम लक्ष्य श्री भगवत प्रेम प्राप्ति  ही है
💎 यह दृढ़ निश्चय कर लें कि याही जन्म में श्री भगवत प्रेम प्राप्त करनौ है।

 💎 संपूर्ण जीवन श्री भगवत प्रेम प्राप्ति के लिए ही बनै।

💎 श्री भगवत प्रेम प्राप्ति के लिए ही जीवनभर पूर्ण प्रयत्न, अदम्य एवं उत्कट उत्कंठा

💎 शरीर तथा संसार हूं प्रेम प्राप्ति के लिए ही बन्यो है

💎 अपनो मानो भयो जो कछु तुम्हारे पास है । सबकुं श्री प्रेम देव की भेंट चढ़ानो पड़ेगो

💎 धर्म । अर्थ ।काम । मोक्ष । इन चारों कुं बलिदान करके पंचम पुरुषार्थ प्रेम की प्राप्ति होय है ।

जय निताई

संपादक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
श्री हरिनाम प्रेस ।वृन्दाबन

प्रस्तुति । किंकरी प्रिया गुलाटी
[13:14, 12/4/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

🌷 श्री राधारमणो विजयते 🌷

  🌻 निताई गौर हरिबोल🌻

       क्रम संख्या 1⃣2⃣

   ⚡ 🌿 अभिस्नेह 🌿⚡

👳🏻 महात्मा में अभिस्नेह नहीं होता । महात्मा तो स्नेह की मूर्ति है स्नेह तो उनके हृदय में है , उनके रोम-रोम में है जैसे आग के पास जाओ तो तपिश मिलेगी और तुम्हारी ठंड दूर हो जाएगी ।यह आग का स्वभाव है ।

💎 इसी प्रकार महात्मा के पास जाओ तो स्नेह तो उसकी आंखों में झरता  है, उसकी जीभ से झरता  है  उसके रोम रोम से स्नेह की तन्मात्रा निकलती है ।

💛जो शुद्ध हृदय से जाएगा वह उसमें डूब जाएगा । अगर वहां स्नेह नहीं मिलता है तो समझो कि तुम्हारे मन में कोई गांठ पड़ गई है। कोई धारणा,  कोई पूर्वाग्रह ऐसा बैठ गया है कि जिससे तुमको वह स्नेह प्राप्त नहीं हो रहा है।

🔥 यदि गर्मी नहीं मिल रही तो हो सकता है कि वह आग ही न हो ।ऐसे ही यदि स्नेह नहीं है तो पहला कारण तुम्हारे मन की गांठ, दूसरा कारण हो सकता है कि वो  महात्मा ही न  हो केवल महात्मा जैसा हो।

💥परंतु एक बात अवश्य है, असली महात्मा में "अभिस्नेह " नहीं होता । अभिस्नेह अर्थात जैसे संसारी लोग अपने पुत्र में अटकते हैं । दूसरे के पुत्र में नही ।

👪 अपने रिश्तेदार - नातेदार में अटकते हैं, दूसरे में नहीं । यही अभिस्नेह है । जो महात्मा है वे एक में नहीं अटकते  सब में सामान रहते हैं।

 🙌🏻जय श्री राधे ।जय निताई🙌🏻

लेखकः-
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन

🌞प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू
[13:14, 12/4/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

🌷 श्री राधारमणो विजयते 🌷

  🌻 निताई गौर हरिबोल🌻

       क्रम संख्या 1⃣2⃣

   ⚡ 🌿 अभिस्नेह 🌿⚡

👳🏻 महात्मा में अभिस्नेह नहीं होता । महात्मा तो स्नेह की मूर्ति है स्नेह तो उनके हृदय में है , उनके रोम-रोम में है जैसे आग के पास जाओ तो तपिश मिलेगी और तुम्हारी ठंड दूर हो जाएगी ।यह आग का स्वभाव है ।

💎 इसी प्रकार महात्मा के पास जाओ तो स्नेह तो उसकी आंखों में झरता  है, उसकी जीभ से झरता  है  उसके रोम रोम से स्नेह की तन्मात्रा निकलती है ।

💛जो शुद्ध हृदय से जाएगा वह उसमें डूब जाएगा । अगर वहां स्नेह नहीं मिलता है तो समझो कि तुम्हारे मन में कोई गांठ पड़ गई है। कोई धारणा,  कोई पूर्वाग्रह ऐसा बैठ गया है कि जिससे तुमको वह स्नेह प्राप्त नहीं हो रहा है।

🔥 यदि गर्मी नहीं मिल रही तो हो सकता है कि वह आग ही न हो ।ऐसे ही यदि स्नेह नहीं है तो पहला कारण तुम्हारे मन की गांठ, दूसरा कारण हो सकता है कि वो  महात्मा ही न  हो केवल महात्मा जैसा हो।

💥परंतु एक बात अवश्य है, असली महात्मा में "अभिस्नेह " नहीं होता । अभिस्नेह अर्थात जैसे संसारी लोग अपने पुत्र में अटकते हैं । दूसरे के पुत्र में नही ।

👪 अपने रिश्तेदार - नातेदार में अटकते हैं, दूसरे में नहीं । यही अभिस्नेह है । जो महात्मा है वे एक में नहीं अटकते  सब में सामान रहते हैं।

 🙌🏻जय श्री राधे ।जय निताई🙌🏻

लेखकः-
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन

🌞प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू
[13:14, 12/4/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia: °


🔔🌿◆!◆🌹◆!◆🌿🔔°

       4⃣◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

             शुक्रवार मार्गशीर्ष
             कृष्णपक्ष नवमी

                     5⃣6⃣
                   
         ❗यथाशक्ति महोत्सव❗

🔔     जिस प्रकार हम अपने जन्मदिन व् पार्टियाँ मनाते है उसी प्रकार हमें यथाशक्ति ठाकुर के उत्सवों को भी मनाना चाहिये l इससे भगवद् स्मृति बढ़ती है l हमारे साथ ठाकुर भी आनन्दित होते हैं l

      🎉श्रावण में ठाकुर को झूले में विराजमान करना l होली में रंगों का खेल l गर्मियों में फूल बंगले सजाना l रथयात्रा में रथ पर विराजमान करना आदि उत्सव सदैव मनाने चाहिये l🎉

🔔    साथ ही अपने जन्मदिन मैरिज एनीवर्सरी वाले दिन भी ठाकुर के लिए भई विशेष भोग श्रृंगार की व्यवस्था करके उन्हें भी शामिल करना चाहिये l प्रभु के इन उत्सवो को मनाने से भगवदभक्ति पुष्ट होती है l प्रभु प्रसन्न होते हैं हमे और आपको सात्विक आनन्द की प्राप्ति होती है l

🔔    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                  क्रमशः........
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🌹•(*﹏¥
              •🌿🔔🌿•
        "🌹सुप्रभात 🌹"
◆🔔श्री कृष्णायसमर्पणं🔔◆
      "🌹जैश्रीराधेकृष्ण🌹"
              •🌿🔔🌿•
          ¥﹏*)•🌹•(*﹏¥    

°🔔🌿◆!◆🌹◆!◆🌿🔔°



[13:14, 12/4/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱
🌱🌱ब्रज की वार्ता 🌱🌱
🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱


🌹 निताई गौर हरिबोल🌹  


🌻🌻 नाम संख्या 🌻🌻            
👀 वैष्णवों में दोष देखना
कोई अच्छा वैष्णव ही ना दीखना दूसरों की आलोचना आत्मनिरीक्षण का अभाव
 संप्रदाय, सिद्धांत ,एवं अन्य मतों के प्रति दुर्भाव, द्वेष ,
अपनी लापरवाही का दोष कलयुग, समय, देश ,काल, पर मड़ना, तथा
सामान्य ,लोकिक राग, द्वेष ,अहंकार, कटुता, दुष्टता, एवं

😎 ग्रुप में महत्वपूर्ण एवं अलग दिखने की बढती चाह का एक ही कारण है ।

 🌚 हमारे चित की मलिनता ।

 हमारे चित्त पर जमी हुई जन्म जन्मांतर की मैल से हमारा चित मैला हो चुका है । गंदगी की अनेक परतों से दूषित हो चुका है हमारा चित   ।  

🌕 कोई चिंता नहीं,
मैला हुआ है तो डिटर्जेंट भी है । श्री चैतन्य महाप्रभु ने उपाय भी बताया है
" चेतो  दर्पण मार्जन" ।
वह उपाय हैं नाम संकीर्तन ।।                                

🎼 नाम संकीर्तन  से भी सरल उपाय है_ नाम जप
नाम जप और वह भी यदि संख्या सहित किया जाए तो चित् की मलिनता दूर होकर चित् शुद्ध हो जाता हैl और सारी कुटिलताए दूर होकर आत्म निरीक्षण होने लगता है..        

🔜 नाम जप की संख्या में 16 माला तो कम से कम है.| भले ही दो चार माला का नियम लो लेकिन नियम अवश्य लो। उसे पूरा करो और यदि पूरा होने लगे तो धीरे-धीरे बढ़ाते जाओ और जहां तक ले जा सको ले जाओ।

😳 और संख्या पूर्वक एवं बिना संख्या पूर्वक नाम जप का अन्तर  अनुभव करो।                                  

✔🍁यह निश्चित है - यह होगा संख्या पूर्वक से ।  बिना नियम एवं संख्या के करने से पहले संख्या में निष्ठा होगी।

🔒फिर कल्याण होगा बिना संख्या के होगा तो सही -समय अनेक गुना लगेगा । आज से ही संख्या निश्चित करके जप शुरु कर दो,  फिर देखो कमाल।।                  

🏠जैसे घरों में दिन में एक बार मार्जन #पोछा लगता है और एयरपोर्ट व हॉस्पिटल में पूरे दिन पोछा लगता है।

1⃣6⃣ इसी प्रकार 16 माला तो रोज़ होनी ही है।- रोज की गंदगी को साफ करने के लिए । अधिक सफाई करनी है तो अधिक माला करनी होगी।  यह निश्चित है कि गंदगी# मलिनता बहुत अधिक है।।      

✅ इसका तात्पर्य यह है कि हमें जप तो करना ही है लेकिन संख्या सहित ।संख्या निर्धारित करने पर संख्या बढ़ाते रहना है । एक ही संख्या पर रुकना नहीं बल्कि संख्या बढ़ाते हुए जप को बढ़ाते हुए अपनी स्प्रिचुअल ग्रोथ को आगे बढ़ाना है।।                            

 🌺जय श्री राधे
 🌺जय निताई

लेखकः
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन.              

प्रस्तुति 🔔  श्यामा किंकरी शालू



[18:19, 12/5/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱
🌱🌱ब्रज की वार्ता 🌱🌱
🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱


🌹 निताई गौर हरिबोल🌹  


🌻🌻 नाम संख्या 🌻🌻            
👀 वैष्णवों में दोष देखना
कोई अच्छा वैष्णव ही ना दीखना दूसरों की आलोचना आत्मनिरीक्षण का अभाव
 संप्रदाय, सिद्धांत ,एवं अन्य मतों के प्रति दुर्भाव, द्वेष ,
अपनी लापरवाही का दोष कलयुग, समय, देश ,काल, पर मड़ना, तथा
सामान्य ,लोकिक राग, द्वेष ,अहंकार, कटुता, दुष्टता, एवं

😎 ग्रुप में महत्वपूर्ण एवं अलग दिखने की बढती चाह का एक ही कारण है ।

 🌚 हमारे चित की मलिनता ।

 हमारे चित्त पर जमी हुई जन्म जन्मांतर की मैल से हमारा चित मैला हो चुका है । गंदगी की अनेक परतों से दूषित हो चुका है हमारा चित   ।  

🌕 कोई चिंता नहीं,
मैला हुआ है तो डिटर्जेंट भी है । श्री चैतन्य महाप्रभु ने उपाय भी बताया है
" चेतो  दर्पण मार्जन" ।
वह उपाय हैं नाम संकीर्तन ।।                                

🎼 नाम संकीर्तन  से भी सरल उपाय है_ नाम जप
नाम जप और वह भी यदि संख्या सहित किया जाए तो चित् की मलिनता दूर होकर चित् शुद्ध हो जाता हैl और सारी कुटिलताए दूर होकर आत्म निरीक्षण होने लगता है..        

🔜 नाम जप की संख्या में 16 माला तो कम से कम है.| भले ही दो चार माला का नियम लो लेकिन नियम अवश्य लो। उसे पूरा करो और यदि पूरा होने लगे तो धीरे-धीरे बढ़ाते जाओ और जहां तक ले जा सको ले जाओ।

😳 और संख्या पूर्वक एवं बिना संख्या पूर्वक नाम जप का अन्तर  अनुभव करो।                                  

✔🍁यह निश्चित है - यह होगा संख्या पूर्वक से ।  बिना नियम एवं संख्या के करने से पहले संख्या में निष्ठा होगी।

🔒फिर कल्याण होगा बिना संख्या के होगा तो सही -समय अनेक गुना लगेगा । आज से ही संख्या निश्चित करके जप शुरु कर दो,  फिर देखो कमाल।।                  

🏠जैसे घरों में दिन में एक बार मार्जन #पोछा लगता है और एयरपोर्ट व हॉस्पिटल में पूरे दिन पोछा लगता है।

1⃣6⃣ इसी प्रकार 16 माला तो रोज़ होनी ही है।- रोज की गंदगी को साफ करने के लिए । अधिक सफाई करनी है तो अधिक माला करनी होगी।  यह निश्चित है कि गंदगी# मलिनता बहुत अधिक है।।      

✅ इसका तात्पर्य यह है कि हमें जप तो करना ही है लेकिन संख्या सहित ।संख्या निर्धारित करने पर संख्या बढ़ाते रहना है । एक ही संख्या पर रुकना नहीं बल्कि संख्या बढ़ाते हुए जप को बढ़ाते हुए अपनी स्प्रिचुअल ग्रोथ को आगे बढ़ाना है।।                            

 🌺जय श्री राधे
 🌺जय निताई

लेखकः
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन.              

प्रस्तुति 🔔  श्यामा किंकरी शालू



[18:19, 12/5/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


📚🍵 ब्रज  की खिचड़ी 🍵📚

🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

💐श्री  राधारमणो विजयते 💐

       क्रम संख्या 1⃣3⃣

🌿सृष्टि के आधार-
श्रीबलराम 🌿

🙌 🌹बलराम जी प्रेमाभक्ति का मूर्तिमान विग्रह है।  श्री कृष्ण के वस्त्र, अस्त्र, आसन, शय्या,  पादुका के रूप में बलराम ही है। साथ ही इस समस्त सृष्टि का सीधा संपर्क भी बलराम जू से  है ।

☀ श्रीकृष्ण चार रूपों में स्वयं को प्रकट करते हैं ।

🌸वासुदेव
🌸बलराम
🌸प्रद्युमन
🌸अनिरुद्ध

🌝इसमें से बलराम के अंश है ।
कारण समुद्र -शायी
कारण समुद्र- शायी के अंश है ।
गर्भोदक शायी -  गर्भोदक शायी के अंश है क्षीरोदक शायी - विष्णु एवम् ब्रह्मा, महेश जो सृष्टि का पालन करते है।

🙏सृष्टि के प्रधान तत्व व् प्रेमभक्ति के मूर्तिमान स्वरुप श्री बलराम जू  को कोटि-कोटि प्रणाम व कृपा की याचना

💂दाऊ दयाल बिरज  के राजा,  भंग  पियो तो ब्रिज में आजा ।

🍁बलदाऊ जी की आरती🍁

🍃बलदाऊ की आरती कीजै
🍂कृष्ण कन्हैया को दादा भैया,
🍃अति प्रिय जाकी रोहिणी मैया
🍂श्री वासुदेव पिता सो जीजै....

🍃नंद को प्राण, यशोदा प्यारो, 💧तीन लोक सेवा में न्यारो
🍂कृष्ण सेवा में तन-मन भीजै....
🍃हलदर  भैया, कृष्ण कन्हैया, 💧दुष्टन के तुम नाश करैया
🍂रेवती,  वारुणी ब्याह रचीजें..

🍃दाऊदयाल बिरज के राजा, 💧भंग पिए नित खाए खाजा
🍂नील वस्त्र  नित ही धर लीजे..

🍃जो कोई बल की आरती गावे, 💧निश्चित कृष्ण चरण रज पावे।

 🍂बुद्धि,भक्ति 'गिरि'
         नित  नित लीजे.....

💧बलदाऊ जी की आरती कीजे

 🌟🙌🏻 जय श्री राधे ।जय निताई🙌🏻🌟

✏....लेखकः-
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन

🌞प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू



[18:19, 12/5/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


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       5⃣◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

             शनिवार मार्गशीर्ष
              कृष्णपक्ष दशमी

                     5⃣7⃣
                   
               ❗कार्तिक व्रत❗

🌿     कार्तिक मास को दामोदर मास भी कहते हैं l इस मास में विशेष व्रत नियम ग्रहण करना और उसे निभाना भी भक्ति का एक अंग हैं l यह दामोदर मास आदर पूर्वक थोड़े से भजन नियम को बहुत मानकर भगवान की बड़ी भारी अमूल्य भक्ति सम्पति को प्रदान कर देता है l

🌿      एक माह के लिये कुछ नियम लेने चाहिए जिनसे भजन निष्ठा में वृद्धि हो l और हम एक और सोपान चढ़ने में सफल हो सके l

1⃣ यथा सम्भव वृन्दावन या राधा कुण्ड में वास l

2⃣ नाम की संख्या में वृद्धि और प्रतिदिन कुण्ड स्नान यमुना स्नान या परिक्रमा का नियम ले l

3⃣ बाहर रहने वाले मानसिक रूप से प्रतिदिन वृन्दावन आएं l

4⃣ आँगन में तुलसी जी विराजमान कर 108 परिक्रमा करें l

5⃣ किसी सद्ग्रन्थ का प्रतिदिन पाठ l

6⃣ यथा सम्भव हल्का सात्विक आहार ले l

7⃣ एकादशी व्रतों का निष्ठा सहित पालन करे l केवल भूखा रहना या कुछ न खाने का नाम एकादशी नहीं है l

    🍓सात्विकता रखकर अधिकाधिक नाम भजन करना एकादशी व्रत है l🍓

🌿    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                  क्रमशः........
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥
             •🌿🔃🌿•
        "🌸सुप्रभात 🌸"
  *🔃श्रीकृष्णायसमर्पणं🔃*
      "🌸जैश्रीराधेकृष्ण🌸"
              •🌿🔃🌿•
          ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥  

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[12:32, 12/6/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


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🌱🌱ब्रज की वार्ता 🌱🌱
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🌹 निताई गौर हरिबोल🌹  

🌻 भक्ति करते हुए
होने वाले 8 अनर्थ🌻

1⃣  निषिद्ध आचरण
जीव हिँसा ,
मुक्ति,
पूजा ,
प्रतिष्ठा ,
लाभ ,
भोग ,
कुतर्क          

दो माला जप किया  नहीं की हम अपने आप को भक्त  समझने लगते हैं और तो और अपने आसपास के लोगों को भक्त बनाने की फैक्ट्री खोलने लग जाते हैं।

और भक्ति  जात अनर्थों में फँस जाते हैं। बहुत सूक्षम चिंतन हैं।  अतः चेष्टा  पूर्वक इन  से बचते हुए एकान्तिक रूप से भजन में लगना चाहिए

 🙏 हम अपना कल्याण कर ले इतना बहुत है । लोगों के कल्याण की चिंता करने वाला स्वयं करेगा
                               
  💥 निषिद्ध आचरण।💥

शास्त्रों में दो प्रकार से आदेश दिए गए है  🔓🔒

 ✅ यह करो  (विधि )
 ❎ यह मत करो (निषेध) ।

🏂 दोनों प्रकार के निर्देशों का साधको को पालन करना ही चाहिए तभी वह अगली सीढ़ियों चढ़ता हुआ अपने  साध्य  की ओर बढ़ता चला जाता है ।  

2⃣🚶 भक्ति करते-करते कभी कभी आलस्य वश निषेध करने वाला आचरण भी कर लिया जाता है।

🚗 जैसे शास्त्रों में कहा है कि मंदिर दर्शन हेतु यथासंभव पैदल ही जाना चाहिए ।रिक्शा या कार को बिल्कुल मंदिर द्वार तक नहीं लेकर जाना चाहिए।      

3⃣📃  लेकिन यह सोच कर कि अब यह सब हमारे लिए थोड़े ही लिखा है। हम तो अब भक्त है

🌇 भगवान से हमारी घनिष्टता है। भक्त  या विशेषकर जो भक्ति के आचार्य बने हैं वह इन निषिद्ध कार्यों को करते हैं ।जिससे अवश्य ही अनर्थ उत्पन्न होते हैं।
                           
4⃣ 🙎 किसी भक्ति पथ पथिक को एकांत में स्त्री से बात नहीं करनी चाहिए। ऐसा आदेश है लेकिन इसका पालन न के बराबर होता है ।और अनर्थ उत्पन्न होते हैं    
                                   
 5⃣ ⛪ मंदिर में शिष्य से पैर नहीं पूजवाने  चाहिए ।आशिर्वाद नहीं देना चाहिए -लेकिन होता है। और अनर्थ भी होता है ।

6⃣  ⛺ बहुत शिष्य , मंदिर ,मठ , आश्रम , नहीं बनाने चाहिए- लेकिन बन रहे हैं -और अनर्थ हो रहे हैं ।

🔎 परिणाम भी सामने हैं कि पंडित बाबा एवं अन्य प्राचीन संतो जैसे संत वैष्णव आज नहीं है

🔒आज के अधिकतर संतो ,आचार्यों के पास भक्ति का बल कम, शिष्य आश्रम, प्रसाद ,प्रचार-, प्रसार, होडिंग ,रंगीन कार्डों का बल अधिक है।।                                            
7⃣  👳🏻यदि इस पर ध्यान दिया जाए तो आज भी पंडित बाबा जैसे अन्य अनेक संत हो सकते हैं। इसमें कोई संशय नहीं और विरले आज भी होंगे ही उनका पता नहीं है प्रचार नहीं है इस प्रकार हमें निषिद्ध आचरण से बचना चाहिए

 🌺जय श्री राधे
 🌺जय निताई

लेखकः
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन.              

प्रस्तुति 🔔  श्यामा किंकरी शालू



[12:32, 12/6/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

💐श्री  राधारमणो विजयते 💐

       क्रम संख्या 1⃣4⃣

 🌿  क्रोध कैसे कम हो ?🌿

🐝मधुमक्खियां जिस बाग़ से मधु एकत्र करती हैं,  उस बाग में यदि नीम के पेड़ अधिक है तो उस मधु में नीम के गुण भी आ जाते हैं। मधु के गुण तो होते ही हैं।

🌹इसी प्रकार गुलाब के, गेंदा के, अथवा अन्य किसी के गुण उस मधु में होते हैं।  साधारणतया वह मधु ही है। लेबोरेटरी में इस सूक्ष्मता का पता चलता है।

💥इसी प्रकार हमारे शरीर में बहने वाला रक्त साधारणतया एक जैसा ही लगता है । लेकिन जो भोजन हम करते हैं,  उसका प्रभाव उस रक्त पर पड़ता है, अपितु उसी भोजन का वैसा ही रक्त बनता है ।

🍲यदि भोजन तामसिक है तो रक्त  तामसिक बनेगा । रक्त तामसिक होगा तो हमारा आचरण, सोच , बर्ताव , क्रिया सभी कुछ तामसिक होगा । सभी कुछ तामसिक होने पर क्रोध होगा ही । अतः क्रोध या तमोगुण कम करना है तो अपने भोजन को ठीक करना होगा।

👀 और हमे सर्वप्रथम यह भी देखना है कि हमारा धन शुद्ध है कि नहीं । यह न्याय से अर्जित है या रिश्वत से । आटे में नमक है या भैंस समेत खोया ?

🔎अतः हम सदैव चेष्टाशील रहे की हमारा धन शुद्ध हो । धन शुद्ध होगा तो अन्न शुद्ध होगा। अन्न शुद्ध होगा तो मन वातावरण सब शुद्ध होगा । और होगा सर्वत्र आनंद ही आनंद।

📌इस प्रकार हमारी इस कथा का संक्षेप में यही अर्थ है कि भाई

💵जैसा होगा धन
🍲वैसा होगा अन्न    और
💝वैसा होगा मन
बहुत पुरानी कहावत है

जय श्री राधे। जय निताई

लेखकः-
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

🌞प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू
[12:32, 12/6/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


•🌿¡~✽~¡°🌸°¡~✽~¡🌿•

       6⃣◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

             रविवार मार्गशीर्ष
              कृष्णपक्ष दशमी

                     5⃣8⃣
                   
         ❗सदा हरिनाम ग्रहण❗

🌸   हर समय हर अवस्था में श्री हरिनाम का उच्चारण कीर्तन करना चाहिये l संख्या पूर्वक नाम करना या संख्या रहित नाम करना साधक की इच्छा एवं सुविधा पर अथवा चित्त की अवस्था पर निर्भर करता है l फिर भी संख्या पूर्वक नाम ग्रहण करने की रीति सर्वत्र प्रचलित एवम् अनुमोदित है l

🌸    संख्या पूर्वक नाम ग्रहण का व्रत लेने से एक विशेष अनुशासन रहता है l चिंतामणि की तरह श्री भगवान के समस्त नाम समान फल प्रदान करने वाले हैं l लेकिन आवश्यकता है श्री नाम पर केंद्रित होने की lश्रद्धा सहित हो या अवहेलना पूर्वक नाम प्रभाव पड़ेगा और श्री नाम की कृपा से भगवदभक्ति की प्राप्ति होगी l

🌸    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                  क्रमशः........
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥
              •🌿★🌿•
        "🌸सुप्रभात 🌸"
✽🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿✽
      "🌸जैश्रीराधेकृष्ण🌸"
              •🌿★🌿•
          ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥    

•🌿¡~✽~¡°🌸°¡~✽~¡🌿•
[15:23, 12/7/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia: 💐श्री  राधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

         📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 1⃣5⃣

   🌿 किसमें कौन हूं मैं 🌿

☀सब प्राणियों में स्थित -आत्मा
प्राणियों का -  आदि,  मध्य, अंत यानी
👶🏻   जन्म
👥   जीवन
💀   मृत्यु

☀   अदिति के बारह पुत्रों में  
          विष्णु          
🌅   ज्योतियों  में - सूर्य
🌝   उनचाश देवताओं में - तेज
🌙   नक्षत्रों का अधिपति - चंद्र
🐚   वेदो में - सामदेव
🎼   इंद्रियों में - मन
🎭   प्राणियों में -जीवन शक्ति
🙌   एकादश रुद्रों में - शंकर
💶   यक्ष - राक्षसों में- कुबेर
🔥   आठ  वसुओं में - अग्नी
🗻   पर्वतों में - सुमेरु
🌾   पुरोहितों में - वृहस्पति
👮🏻   सेनापति में - स्कन्द
🌁   जलाशयों में - समुद्र
👳🏻   महर्षियों में - भृगु
📖   शब्दों में -ऊँ
🌇   यज्ञों में - जप यज्ञ
🗾   स्थिर रहने वालों में-  
        हिमालय
🎄   वृक्षों में - पीपल
🎅   देवऋषियो  में - नारद

🌿 कौन क्या चाहता है 🌿

👳🏻 योगी -
        आत्म स्वरूप का दर्शन
👤 कर्मी - स्वर्ग
📚 ज्ञानी - ब्रह्म में लींन
🙏 भक्त - प्रभु की सेवा।

🌕अब जब यह समझ आ गया कि मैं शरीर नहीं हूँ। मैं ईश्वर की अंशभूत एक शक्ति हूँ; तो प्रश्न उठता है कि मुझे क्या प्राप्त करना है और कैसे? मेरा कार्यक्षेत्र क्या है?

💐 यही सबसे कठिन बात है। इसे समझना ही आवश्यक है। एक जीव को जो प्राप्त करना है उसे हम 'साध्य' कहते हैं । और उस 'साध्य' को जिसके द्वारा प्राप्त किया जाएगा- उसे कहते हैं 'साधन' ।

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

लेखकः-
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू



[15:23, 12/7/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


तुम्हारा
सिर्फ
हवाओं पे
शक गया होगा..!

चिराग़
खुद भी तो
जल जल के
थक गया होगा..!!

जय श्री राधे । जय निताई
शुभ रात्रि



[15:23, 12/7/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


•🍒~◆🍐🍓🍐◆~🍒•

       7⃣◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

            सोमवार मार्गशीर्ष
            कृष्णपक्ष एकादशी
                     5⃣9⃣
                   
             ❗जन्माष्टमी❗

🍓     श्री कृष्ण के जन्मउत्सव को मनाना l इस दिन श्री भगवान के विग्रह का पंचामृत दूध दही घी शहद एवं जल द्वारा अभिषेक कराना चाहिये l प्रभु को नवीन वस्त्र श्रृंगार धारण कराना चाहियेl स्वादिष्ट व्यंजन माखन मिश्री का भोग लगाना चाहिये l

🍓     स्वयं उपवासी रहना चाहिये ताकि शरीर मन इंद्रियों में विकार न हो और प्रभु का भजन होता रहे l प्रभु लीलाओं का गान संकीर्तन मालाजप श्री गीता जी का पाठ पढ़कर समझना चिंतन करना मनन करना आदि है l

🍓    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                  क्रमशः........
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🍐•(*﹏¥
              •🍒♀🍒•
        "🍍सुप्रभात 🍍"
✽🍓श्रीकृष्णायसमर्पणं🍓󟼽
      "🍍जैश्रीराधेकृष्ण🍍"
              •🍒♀🍒•
          ¥﹏*)•🍐•(*﹏¥    

•🍒~◆¡🍐🍓🍐¡◆~🍒•



[15:23, 12/7/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


ये चित्र श्री विष्णुप्रिया जू का है
आप श्री चैतन्य महाप्रभु की दूसरी पत्नी हैं ।

महाप्रभु के गृहत्याग । संन्यास के बाद उनकी पादुकाओं को रखकर

एक महामन्त्र पर एक चावल का दाना अलग रखती । भजन के अंत में जितने दाने चावल के हो जाते

उन्हें ही बना कर स्वयं पाती थी साथ ही कुछ प्रसाद सेविका आदि को भी देती थी

इसके अतिरिक्त कुछ भी नही खाना दिन भर

ऐसे ही नही बनती कोई
विष्णुप्रिया

सोचिये । भजन की कितनी ऊंचाई । और एक हम हैं की बस

जय श्री राधे । जय गौर
जय निताई

समस्त वैष्णवजन को मेरा सादर प्रणाम ।



[11:49, 12/8/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


जिस प्रकार एक लौकिक
व्यक्ति को
किसी महिला से बात
करना मना नही है ।
लेकिन हर महिला को पत्नी की
दृष्टि से देखना मना है ।
पत्नी तो एक ही काफी है
बाकी कोई बहिन । बेटी । माँ । चाची ।मामी ।आदि

ठीक उसी प्रकार
एक वैष्णव को अन्यान्य देवी
देवताओं या विग्रहों को प्रणाम
करना आदर देना मना नहीं ह
सबको अपना इष्ट मानना मना है । इष्ट एक । प्रभु एक ।
आदर सबका । उपासना एवम्
आशा । कामना एक से ही

इसे ही अनन्यता कहते हैं

जय श्री राधे । जय निताई



[11:49, 12/8/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


 तेरी
यही आदत
हम
सब को
सदा
याद रहेगी,

मोहन

न शिकवा
न कोई गिला,
जब भी मिला,
मुस्कुरा के मिला..

जय श्री राधे । जय निताई



[11:49, 12/8/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्री  राधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

         📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 1⃣6⃣

       🌿  छह भग  🌿

📖 भगवतस्वरुप में

1 । श्री,
2 । विदया,
3 ।यश,
4 । वीर्य,
5 । वैराग्य,
6 । ऐश्वर्य,

🌷 ये 6 भग शतप्रतिशत होते हैं ।
इन्ही के कारण उन्हें भग वान कहते हैं । जेसे बल वाले को बलवान । ऐसे ही इन भगो सें जो युक्त है । वह भगवान ।

 इन 6  भगो में एक वैराग्य भी है

🐠 श्रीराम का वैराग्य

🙌श्रीराम ने तुरंत उसी समय मरते पिता को छोड़कर राज्य को परिवार को छोड़कर वन गमन किया,  यह उनके अनलिमिटेड वैराग्य का उदाहरण है । बनवास तो लेना ही था । और चौदह  वर्ष का बनवास था,

🌷 आराम से कुछ दिन रुक कर पिता का अंतिम संस्कार और  राज्य की अन्य व्यवस्था आदि करवा कर फिर चले जाते,

🌷 लेकिन वैराग्य की पराकाष्ठा इसी में है कि तुरंत ही पीछे की व्यवस्थाओं की चिंता किए बिना चल दिए।

🐠 श्री कृष्ण का वैराग्य

🙏 यही बात कृष्ण ने भी की।  प्राण प्रियतम नंद यशोदा बृजवासी तथा श्री राधा आदि गोपीगण को क्षण में छोड़ कर चले गए।

🐠 श्री चैतन्य महाप्रभु

💫यही बात महाप्रभु श्रीगौरांग ने भी दिखाई । विधवा असहाय वृद्ध शची माँ,  नवविवाहिता  विष्णुप्रिया को तुरंत छोड़कर ग्रह त्याग कर  किया।

📈श्री, विद्या, यश, वीर्य,  वैराग्य,  ऐश्वर्य यह 6 औरों में भी हो सकते हैं ।

लेकिन भगवान में यह शत- प्रतिशत या अनलिमिटेड होते हैं।


🌿🌿 दिखना🌿🌿

👀इस संसार में कुछ चीजें दिखती हैं , कुछ को अनुभव करना पड़ता है ।सभी कुछ इन आंखों से नहीं दिखता है।

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

लेखकः-
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू



[11:49, 12/8/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


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       8⃣◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

           मंगलवार मार्गशीर्ष
            कृष्णपक्ष द्वादशी

                    6⃣0⃣
                   
         ❗श्री मूर्ति सेवा❗

🌸    श्रद्धा या प्रीति एवं आदर सहित भगवान की मूर्ति की सेवा भक्ति का 60वाँ अंग है l भक्ति में श्रेष्ठ है नवविधा भक्ति और उसमे सर्वश्रेष्ठ है श्री नाम संकीर्तन l पुनः पाँच ऐसे अंग है जिनके पालन से चौसठ अंग भक्ति स्वतः पूर्ण हो जाती है l उन पाँचों में प्रथम है श्री मूर्ति पूजा l

🌸     शास्त्रों में आठ प्रकार की मूर्तियों का वर्णन है l मूर्ति भी चल और अचल दो प्रकार की होती है l जो प्रीति पूर्वक जिस श्री विग्रह हो सुसज्जित करते हैं भक्त वत्सल श्री भगवान भक्त की प्रीति के वशीभूत होकर उस श्री विग्रह को आत्मसात करते हैं l इससे श्री विग्रह और श्री भगवान में कुछ भी पार्थक्य नहीं है l

    ❗श्री मूर्ति भगवत स्वरुप से अभिन्न मानी गयी है lमूर्ति को अर्चावतार कहा है l❗

 🌸    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                  क्रमशः........
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥
              •🌿★🌿•
        "🌸सुप्रभात 🌸"
    🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿
      "🌸जैश्रीराधेकृष्ण🌸"
              •🌿★🌿•
          ¥﹏*)•🌸•(*﹏¥    

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[13:12, 12/9/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्री  राधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

         📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 1⃣7⃣

   🌿भक्त चार प्रकार के🌿

✔🍁 आर्त-  जो अपने दुखों से छुटकारा पाने के लिए भक्ति करते हैं ।

✔🍁जिज्ञासु - जो कृष्ण को जानने के लिए । केवल जानकारी के लिए भक्ति करते हैं ।

✔🍁अर्थार्थी- जो अर्थ,  यश,  पुत्र,  व्यापार या किसी लौकिक कामना के लिए भक्ति करते हैं ।

✔🍁ज्ञानी - जो कृष्ण की प्रीति,  उनकी अनुकूलतामयी सेवा या ये कहिए की भक्ति के लिए भक्ति करते हैं,

न कोई कामना,  ना दुख की निवृत्ति -  ये विशुद्ध भक्त  है ।

📗अनपढ़ से चार क्लास पढ़ा होना अच्छा है,

अभक्त से कोई भी भक्त होना अच्छा है ।लेकिन क्लास आगे और भी है चलते रहिए।

🌿🌿श्रद्धा 🌿🌿

📃श्री कृष्ण - प्रेम प्राप्त करने की प्रथम सीढ़ी है।  श्रद्धा अनेक प्रकार की है । श्रद्धा का वर्णन शास्त्रों में मिलता ।

🙌  श्रीकृष्ण की पूजा करने से समस्त देवताओं की पूजा हो जाती है,  किसी और की पूजा की कोई आवश्यकता ही नहीं रह जाती ।

जैसे पेड़ की जड़ में जल देने से उस पेड़ का तना, शाखा, फूल, फल सब तृप्त हो जाते हैं , सब को अलग अलग जल देने की जरूरत नहीं है ।

🙏ऐसी यह श्रद्धा ही कृष्ण प्रेम भक्ति प्राप्ति की प्रथम सीढ़ी है।  इस श्रद्धा के बाद-  साधु संग भजन करना, अनर्थों  की समाप्ति, निष्ठा,  रुचि, आसक्ति, भाव एवं अंत में प्रेम की प्राप्ति हो जाती है।

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

लेखकः-
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू



[13:12, 12/9/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


"मेरे कान्हा"

तुम्हारे
बगैर ये
वक़्त

ये दिन
और ये रात

मोहन

गुजर
तो जाते हैं
मगर
गुजारे
नहीं जाते

समस्त वैष्णवजन को सादर प्रणाम
जय श्री राधे । जय निताई



[13:12, 12/9/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


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       9⃣◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

           बुधवार मार्गशीर्ष
           कृष्णपक्ष त्रयोदशी

                    6⃣1⃣
                   
  ❗रसिकों केसाथ भागवत अर्थों का आस्वादन❗

🌹    रसिक भक्तों के साथ बैठकर श्रीमद्भागवत के एक एक पद का आस्वादन करना उसके तात्पर्य एवं रहस्य को समझना और मनन करना l श्रीमद्भागवत कृष्ण भक्ति रस स्वरुप है l श्री मद्भागवत कल्पतरू का फल है lइस फल में केवल रस ही रस है अतः यह रस स्वरुप या रसमय है l इस प्रकार श्री भगवद्धाम से
                        💧
                श्री नारायण
                         🔽
                श्री नारद जी
                         🔽
                श्री वेद व्यास जी
                         🔽
                श्री शुकदेव मुनि
                         🔽
                राजा परीक्षित
                         🔽
                समस्त जगत को आस्वादन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ l

🌹     इसका आस्वादन एक बार नहीं दो बार नहीं मोक्ष पर्यन्त करना चाहिये l अर्थ आस्वादन का तात्पर्य श्रीमद्भागवत को पढ़कर गुजर जाना नहीं अपितु उसके अर्थ या भाव को इसके अधिकारी रसिक विद्वानो के साथ बैठकर मनन चिंतन करना आस्वादन है l अर्थ एवं भाव को समझना और समझकर पाठ करना अधिक श्रेष्ठ है l

 🌹    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                  क्रमशः........
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🌹•(*﹏¥
              •🌿★🌿•
         "🌹सुप्रभात 🌹"
    🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿
      "🌹जैश्रीराधेकृष्ण🌹"
              •🌿★🌿•
          ¥﹏*)•🌹•(*﹏¥    

•¶🌿¡~✽◆🌹◆✽~¡🌿¶•



[21:42, 12/10/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्री  राधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

         📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 1⃣8⃣

   🌿 श्री गुरुदेव की जय 🌿

👳🏻श्रीलरघुनाथ गोस्वामी कह रहे हैं

सर्वश्रेष्ठ हरिनाम,
दीक्षा -मंत्र
शचिनंदन श्री गौरहरि
और उनके परिकर
श्री स्वरुप दामोदर गोस्वामी, श्रीलरूप गोस्वामी
तथा उनके जेष्ठ भ्राता श्रीलसनातन गोस्वामी,
सर्वश्रेष्ठ श्री मथुरा पुरी
और उसमें भी अत्यधिक श्रेष्ठ
श्री वृंदावन धाम

🐚उस वृंदावन धाम में क्रमशः श्रेष्ठता को प्राप्त
श्री गिरिराज गोवर्धन,
श्री राधा कुण्ड और
अहो !  वहां पर
श्री राधा माधव की सेवा
प्राप्त करने की
परम उत्कट आशा -

🙏यह सब जिनकी अहैतुकी कृपा से
मेने  प्राप्त किया है
उन श्रील गुरुदेव के चरणो में नतमस्तक होकर मेरा बारम्बार  प्रणाम ।

🌿व्रत नियम निभाएं कैसे🌿

🕐 प्रारंभ में कोई भी व्रत नियम लंबे समय के लिए तभी लें जब आपको पक्का विश्वास हो,

डगमग स्थिति में यह नियम कम समय के लिए, कम मात्रा में लें।

💯 उसे दृढ़ होकर पूरा करें, एक बार फिर कुछ अधिक समय के लिए अधिक व्रत लें ।

🎓इस प्रकार आप को व्रत करने की आदत और अभ्यास दोनों हो जाएगा , और आप द्रढ़ होकर लंबा व्रत ले सकते हैं ।

और यह निश्चित भी है और आप सफल  होंगे।

😷जैसे मौन रहना हो तो पहले दिन 2 घण्टे मौन रहें । सफलता मिले तो अगले दिन 3 या 4 घण्टे का । इसी तरह बढ़ाते जांय ।

😧 पहले दिन ही 12 घण्टे का मौन ले लिया तो परेशान हो सकते हैं

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू



[21:42, 12/10/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


•¶🌿¡~✽◆🌷◆✽~¡🌿¶•

       🔟◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

            गुरुवार मार्गशीर्ष
           कृष्णपक्ष चतुर्दशी

                    6⃣2⃣
                   
        ❗सजातीय स्निग्ध महत्तर साधु संग❗

🌷     समान भाव वाले स्नेही रसिक एवं अपने से श्रेष्ठ साधु पुरुषों का संग करना इस भक्ति अंग का अभिप्राय है l साधु संग ही कृष्ण भक्ति का मूल कारण है l अपने से श्रेष्ठ अपनी ही साधन निष्ठा से मेल खाने वाले सजातीय साधु वैष्णव विद्वान का संग करना चाहिये l अन्य भाव वाले का नहीं l

🌷       सजातीय और स्निग्ध साधु का संग करना चाहिये l स्निग्ध का अर्थ है जो स्नेही हो हितकारी हो l कोमल हृदय वाले साधु भक्त का संग उपादेय है l जो अपने से श्रेष्ठ हो जो भजन विषय में महान हो उसी भक्त का संग करने से साधक अपने पथ पर क्रमशः उन्नत हो सकता है l

🌷    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                  क्रमशः........
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🌷•(*﹏¥
              •🌿★🌿•
         "🌷सुप्रभात 🌷"
    🌿श्रीकृष्णायसमर्पणं🌿
      "🌷जैश्रीराधेकृष्ण🌷"
              •🌿★🌿•
          ¥﹏*)•🌷•(*﹏¥    

•¶🌿¡~✽◆🌷◆✽~¡🌿¶•
[21:42, 12/10/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:

खुले बाल

मनु स्मृति में लिखा है कि

जिस घर में स्त्रियां बाल खुले रखती हैं । उस घर के स्वामी पर सदा ही संकट बने रहते है

यहाँ तक की पति या पिता की मृत्यु । वैधव्य का कारण भी होते हैं खुले बाल । दुःख । बिमारी । संकट तो सदा रहता ही है ।

अतः सावधान

समस्त वैष्णवजन को सादर प्रणाम जय श्री राधे । जय निताई



[21:42, 12/10/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


🙌🙌जय जय श्री राधे 🙌🙌

🌹जब तक नेत्र प्राकृतिक वस्तुओं को देखकर रस ले रहे हैं तब तक भगवद-दर्शन कैसे संभव है? दर्शन के लिये तो नेत्रों को भी पवित्र करने की आवश्यकता है।

🌹पवित्र नेत्र वह हैं जो अपवित्र वस्तुओं को न देखें। और यदि एकमात्र श्रीभगवद-दर्शन की ही ललक हो तो श्रीहरि के विरह में इन नेत्रों से अश्रु बहाते हुए नेत्रों को और अपने-आपको पवित्र करें। दृष्टि-संयम से भी मन को लगाम लगानी चाहिये। जो देखने योग्य है, केवल उसे ही देखा जाये !

🙌🙌जय जय श्री राधे !🙌🙌



[21:42, 12/10/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्री  राधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

         📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 1⃣9⃣

   🌿 ताकते रहते 🌿

🌸सतोगुण
🍄रजोगुण
🌵तमोगुण

तीनों सदैव ही सभी में रहते हैं । हां ! इन की मात्रा कम अधिक होती रहती है ।साथ ही इन तीनो में भारी कंपटीशन भी रहता है।

👀जिस गुण की मात्रा कम हो जाती है वह ताक में रहता है और मौका मिलते ही हावी होने की कोशिश करता है वह सफल भी हो जाता है

💧सतोगुण को मौका दो, लेकिन रजोगुण और तमोगुण को सिर उठाते ही कुचल  दो ।

तुम भी ताक में रहो!!!!!!!!

🌿भगवान तीनो के साथ🌿

🌳जब रजोगुण या तमोगुण की वृद्धि सृष्टि में अपेक्षित होती है तो भगवान -तमोगुण की वृद्धि को होने देते हैं।

🌷जब सतोगुण -की वृद्धि की आवश्यकता होती है उसे भी होने देते हैं ।

लेकिन प्राय: देखने में आता है कि भगवान देवताओं के साथ है।
सात्विक लोगों के साथ है,

सत्वगुण प्रकाशमय या ट्रांसपेरेंट होता है।  अतः भगवान की उपस्थिति दिखती है।

🎍 तमो-गुण  एवम् रजो-गुण  आवरणात्मक होते हैं। अतः भगवान की उपस्थिति दिखती नहीं ।

ठीक वैसे,  जैसे-  शीशे के बर्तन में अंदर जो है वह दिखता है स्टील या मिट्टी के बर्तन में नहीं दिखता।

🙌भगवान पक्षपाती तो नहीं हैं, लेकिन निष्ठुर भी नहीं है।  राजा हिरण्यकश्यप ने जब वत  मांग कर देवताओं को अपने अधीन कर लिया तो प्रभु शांत रहे उस समय भी हिरण्यकश्यप को असहयोग कर सकते थे, लेकिन जब अपने भक्त प्रल्हाद पर आई तो खंबे से प्रगट भी हो गए।

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
 📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

🌞प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू


[21:42, 12/10/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


DON'T CHEAT YOURSELF:

वद्धावस्था में भक्ति करेंगे, गृहस्थी की जिम्मेदारियों से मुक्त होने पर भक्ति करेंगे ।

वृन्दावन में कुटिया बनाकर भक्ति करेंगे, किसी एकान्त स्थान में भक्ति करेंगे, कुछ वर्ष बाद केवल भक्ति ही करेंगे ।

यह सभी बातें हम अपने आप से कपट करने के लिये कहते हैं, सत्य तो यह है कि भोगों में मन रमता है, कुछ और भोग लें, फ़िर मिले न मिले, भक्ति तो कभी भी हो सकती है ।

भक्ति कभी भी हो सकती है ऐसा नहीं है, भक्ति केवल अभी ही हो सकती है जब हम स्वस्थ हैं, यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिये ।

 श्वासों का पता नहीं, क्षणभंगुर देह का पता नहीं, तो किस आधार पर हम अपने आप को धोखा देते हैं । हम भोगों को नहीं भोग रहे, भोग ही हमें भोगते हैं ।

⚠संकलित श्री गिरिराज प्रभु द्वारा रचित


[11:42, 12/11/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:

चार मिले , चौसठ खिले ,
बीस रहे कर जोड
हरिजन से हरिजन मिले ,
तो बिंहसे सात करोड .

जब दो वैष्णव मिलते है तब सर्व प्रथम उनकी चार आंखे मिलती है तो दोनो के मुखमें से उनके ३२×२=६४ दांत खिल उठते है मतलब मलकते है तो आपो आप हाथ जोडने से १०×२=२० उंगली जोडी जाती है । और जब हरि के जन आपस में मिलने से एक के साडे तीन करोड रोम रोम मिलके दोनो के सात करोड रोम रोम(रुंवाटी) में खुशी व्याप्त हो जाती है ।।
[11:42, 12/11/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


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    1⃣1⃣◆1⃣2⃣◆1⃣5⃣

            शुक्रवार मार्गशीर्ष
            कृष्णपक्ष अमावस

                     6⃣3⃣
                   
              ❗नाम संकीर्तन❗

🌿    यह सर्वश्रेष्ठतम अंग है l इससे श्री भगवान के नामों का उच्च स्वर से कीर्तन अभिप्रेत है l नाम नामी से अभिन्न ही नहीं नामी से अधिक महत्वपूर्ण है l नाम भी भगवान की तरह अप्राकृत चिन्मय सच्चिदानंद है पूर्ण शुद्ध नित्य मुक्त एवं रसरूप है l श्री नाम संकीर्तन से समस्त मनोवंछितों
की प्राप्ति होती है l

🌿    स्वयं भगवान ब्रजेंद्र नंदन श्री शची सुत श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतीर्ण होकर कलियुग में श्री नाम संकीर्तन को स्वयं करते है और जग जीवों से कराते हैं l इस कारण कलियुग को भी धन्य तथा प्रशंसनीय माना गया है l

🌿    उपरोक्त सार डॉ दासाभास जी द्वारा प्रस्तुत ब्रजभक्ति के चौसठ अंग से लेते हुए  हम सबका जीवन भी प्रभु की भक्ति से प्रकाशित हो यही प्रार्थना है राधेश्याम के चरणों में l 👣👣
                  क्रमशः........
                               ✏ मालिनी
 
         ¥﹏*)•🍀•(*﹏¥
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         "🌿सुप्रभात 🌿"
 ◆🍀श्री कृष्णायसमर्पणं🍀◆
      "🌿जैश्रीराधेकृष्ण🌿"
                ◆\\★//◆
           ¥﹏*)•🍀•(*﹏¥    

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[11:42, 12/11/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


जय श्री राधे

सर्दी है । अपने ठाकुर जू को तो आप गर्म जल से स्नान करा ही रहे होंगे । साथ ही तुलसी महारानी को भी अच्छा गर्म जल से सिंचन या स्नान कराएं ।

सेवा भाव पूर्ण ।

समस्त वैष्णवजन को सादर प्रणाम
 जय श्री राधे । जय निताई


[20:48, 12/12/2015] Dasabhas DrGiriraj Nangia:


💐श्रीराधारमणो विजयते 💐
🌻 निताई गौर हरिबोल🌻    

📚🍵ब्रज की खिचड़ी 🍵📚

       क्रम संख्या 2⃣0⃣

🌿नटवर कृष्ण मुरारी🌿

🐚तुम नटवर कृष्ण मुरारे हो ।
🐟तड़पत है प्राण तुम्हारे बिना
🎊तुम जीवन- प्राण हमारे हो
🏄इस डूबती जीवन नैया के
🎑तुम ही 'गिरि' एक किनारे हो
👶🏻इस दीन पै इतनी दिया कीजै
💫निशिवासर नाम पुकारे हो

सतयुग में ध्यान द्वारा
त्रेता में यज्ञ द्वारा
द्वापर में सेवा द्वारा
जो प्राप्त होता है । कलियुग में वाही का वही फल श्री हरि के नाम संकीर्तन या जप द्वारा प्राप्त होता है ।

कलौ तद् हरि कीर्तनात

अतः नाम का आश्रय । नाम जप से ही हम लौकिक कामना एवम् पंचम पुरुषार्थ श्री कृष्ण प्रेम को प्राप्त कर सकते हैं ।

👼तुम दीनन के प्रतिपाल सदा
✨तुम भक्तन के रखवारे हो
🐚तुम नटवर कृष्ण मुरारे हो

         
🍃अब छोड़ दिया इस जीवन का 👏सब भार तुम्हारे हाथों में
🙌नित नाम जपूं नित कृष्ण रटूं
🙉अब क्या रखा सब बातों में


♻बातों में जीवन बीत गया
🙏वर्षों गए हाथ ही हाथों में 🌟सुबह शाम जपूं, दिन-रात जपूं🎇'गिरि' नाम जपूं मैं रातों में

🌿हरिनाम को ही बस🌿

नहीं चित्र लखा, न चरित्र लिखा
बस नाम को ही सब मानता हूँ मैं
नामी अरू नाम अभिन्न सदा,
बस नाम को ही पहचानता हूँ मैं
हरिनाम लिखूं, हरिनाम पढ़ूं
हरिनाम को ही बस चाहता हूँ मैं
हरि नाम से बढ़कर और किसी,
साधन को 'गिरि'नहीं मानता हूँ मैं

 🙌🏻जय श्री राधे। जय निताई🙌🏻

लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
📕श्रीहरिनाम प्रेस वृन्दावन ।

📝 प्रस्तुति : श्रीलाडलीप्रियनीरू