✔ *शास्त्र आदेश आपके लिए* ✔
▶ हम लोग प्रतिदिन कोई ना कोई ग्रंथ पढ़ते हैं । टेलीग्राम पर भी पढ़ते हैं । कथा में भी सुनते हैं । संतों से भी सुनते हैं ।
▶ शास्त्रों में साधक के लिए अनेक बातें जो बताई गई हैं, वह हम सुनते हैं, समझते हैं
▶ बस एक गड़बड़ी कर जाते हैं। वह गड़बड़ी यह है के उन शास्त्र की बातों को हम स्वयं पालन न करते हुए दूसरों पर घटाने लग जाते हैं
▶ प्रभु जी । ठाकुर जी को बिना तुलसी दिए कोई भोग नहीं लगाना चाहिए ना लेकिन वह मिसेज वर्मा जो है वह तो बिना तुलसी के भोग लगाती हे । प्रभु जी वह ऐसा क्यों करती हे
▶ प्रभु जी प्रभु जी वस्त्र पहनकर साष्टांग प्रणाम नहीं करना चाहिए ना प्रभु जी बहुत सारे लोग करते हैं मंदिर में ऐसा क्यों करते हैं
▶ प्रभु जी एक वैष्णव को झूठा नहीं खाना चाहिए ना वह मिसेज वर्मा तो एक ही थाली में दो-तीन लोग खा लेते हैं प्रभु जी ऐसा क्यों करते हैं ऐसा नहीं करना चाहिए ना
▶ बस यही हम मात खा जाते हैं । अरे भाई शास्त्र के जो आदेश या उपदेश तुमने पढ़े तुमने समझे वो तुम्हारे लिए हैं मिसेज वर्मा को बताने के लिए नहीं ।
▶ तुम उन्हें अपने ऊपर लागू करो ना । दूसरों के ऊपर लागू क्यों करना चाहते हो । यह शास्त्र आदेश आपके लिए हैं । जी हां आपके लिए । पक्का आपके लिए । आप उनको आज से अपने जीवन में पालन करना शुरू कर दो ।
▶ दूसरा कोई करे या न करे दूसरों से पालन करवाने के लिए आचार्य हैं गुरुदेव हैं श्रेष्ठ संत जन हैं वह करवाएंगे
▶ और आप देखें वह तो करवाते नहीं है और हम जो हैं दूसरों को डंडा करते रहते हैं । अतः आज से दूसरे की तरफ देखना बंद ।
▶ आदेश अपने लिए । अपने ऊपर लागू । दूसरा जैसा करेगा सो भरेगा । पूछे तो उसे बता दीजिए माने तो खुश ना माने तो खुश । आप अपने पर हम अपने पर केंद्रित रहे बस इतना ही ध्यान रखना है
🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई ॥ 🐚
🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn
▶ हम लोग प्रतिदिन कोई ना कोई ग्रंथ पढ़ते हैं । टेलीग्राम पर भी पढ़ते हैं । कथा में भी सुनते हैं । संतों से भी सुनते हैं ।
▶ शास्त्रों में साधक के लिए अनेक बातें जो बताई गई हैं, वह हम सुनते हैं, समझते हैं
▶ बस एक गड़बड़ी कर जाते हैं। वह गड़बड़ी यह है के उन शास्त्र की बातों को हम स्वयं पालन न करते हुए दूसरों पर घटाने लग जाते हैं
▶ प्रभु जी । ठाकुर जी को बिना तुलसी दिए कोई भोग नहीं लगाना चाहिए ना लेकिन वह मिसेज वर्मा जो है वह तो बिना तुलसी के भोग लगाती हे । प्रभु जी वह ऐसा क्यों करती हे
▶ प्रभु जी प्रभु जी वस्त्र पहनकर साष्टांग प्रणाम नहीं करना चाहिए ना प्रभु जी बहुत सारे लोग करते हैं मंदिर में ऐसा क्यों करते हैं
▶ प्रभु जी एक वैष्णव को झूठा नहीं खाना चाहिए ना वह मिसेज वर्मा तो एक ही थाली में दो-तीन लोग खा लेते हैं प्रभु जी ऐसा क्यों करते हैं ऐसा नहीं करना चाहिए ना
▶ बस यही हम मात खा जाते हैं । अरे भाई शास्त्र के जो आदेश या उपदेश तुमने पढ़े तुमने समझे वो तुम्हारे लिए हैं मिसेज वर्मा को बताने के लिए नहीं ।
▶ तुम उन्हें अपने ऊपर लागू करो ना । दूसरों के ऊपर लागू क्यों करना चाहते हो । यह शास्त्र आदेश आपके लिए हैं । जी हां आपके लिए । पक्का आपके लिए । आप उनको आज से अपने जीवन में पालन करना शुरू कर दो ।
▶ दूसरा कोई करे या न करे दूसरों से पालन करवाने के लिए आचार्य हैं गुरुदेव हैं श्रेष्ठ संत जन हैं वह करवाएंगे
▶ और आप देखें वह तो करवाते नहीं है और हम जो हैं दूसरों को डंडा करते रहते हैं । अतः आज से दूसरे की तरफ देखना बंद ।
▶ आदेश अपने लिए । अपने ऊपर लागू । दूसरा जैसा करेगा सो भरेगा । पूछे तो उसे बता दीजिए माने तो खुश ना माने तो खुश । आप अपने पर हम अपने पर केंद्रित रहे बस इतना ही ध्यान रखना है
🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
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🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
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