Sunday, 19 March 2017
Thursday, 16 March 2017
Aadhyatmik Mane Kya
✔ *आध्यात्मिक माने क्या* ✔
▶ तीन चर्चाएं हैं ।
▶ आधिदैविक,
जिसमें देवी देवताओं के बारे में चर्चा है ।
▶ आधिभौतिक,
जिसमें शरीर, पंचभौतिक इस जगत, कार, बंगले, सुख-समृद्धि आदि के बारे में चर्चा है ।
▶ आध्यात्मिक
इसमें यह जो हमारी आत्मा है जिसको हम दार्शनिक भाषा में जीव कहते हैं और जो जीव श्रीकृष्ण का अंश है, उस जीवात्मा की चर्चा है ।
Wednesday, 15 March 2017
Granth Prichay : ShriVilapKusumanjli
ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
टीका सहित
1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस
पोस्टेज फ्री
Saturday, 11 March 2017
Dasabhas Kahin 11317
🙌🏼 🙏🏼 🙌🏼 🔏🔓
🎪जय गौर हरि🎪
📮📮कुछ जिज्ञासाएँ❓
💽💽💽उनके समाधान....।
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📮करवाचौथ का व्रत।
http://yourlisten.com/Dasabhas/karva
💽⏰01:50
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📮अक्षत,हल्दी और कुमकुम के बारे में।
http://yourlisten.com/Dasabhas/kumkum
💽⏰02:19
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📮एक फोन वार्ता। क्या हमारा भगवान् के साथ कभी संगती हुई है?
http://yourlisten.com/Dasabhas/kyahum
💽⏰20:55
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📮जब आत्मा नहीं मरती, फिर सवर्ग नर्क में यातनाये या सुख कैसे कोई ले सकता है।
http://yourlisten.com/Dasabhas/atma
💽⏰02:22
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📮कर्म और प्रारब्ध।
http://yourlisten.com/Dasabhas/karmodb
💽⏰04:22
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📮खाटु श्याम जी के बारे में।
http://yourlisten.com/Dasabhas/khatu-2
💽⏰02:30
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📮एक उपासना और एक भजन।
http://yourlisten.com/Dasabhas/khichadi
💽⏰06:37
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📮गरुड़ गोविन्द जी का मन्दिर कहाँ और उसका माहात्म्य।
http://yourlisten.com/Dasabhas/garud-2
💽⏰04:49
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🎤 डा:श्री गिरिराज दासाभास नांगिया जी
श्री धाम वृन्दावन से
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⚠⚠⚠⚠
Wednesday, 8 March 2017
Mahima Bina Shrddha Asmabhav
✔ *महिमा के बिना श्रद्धा असंभव* ✔
▶ किसी भी व्यक्ति वस्तु की जब तक हमें महिमा का ज्ञान ना हो तब तक हम उसे सामान्य रुप में लेते हैं ।
और किसी ने कहा इनको नमस्ते करो तो हम नमस्ते कर देते हैं । लेकिन जब हमें पता चलता है कि यह कोई
▶ अच्छा संत है या
कोई राजनेता है या
हमारी कॉलोनी का चेयरमैन है या
हमारे पिताजी का मित्र है या
यह एक सज्जन व्यक्ति है
Friday, 3 March 2017
Thursday, 2 March 2017
Niyam Bhang Nahi Hoga
✔ *नियम भंग नही होगा* ✔
▶ हम जैसे प्रतिदिन श्री तुलसी जी की परिक्रमा करते हैं और तुलसी जी को सुबह शाम दीपक अर्पण करते हैं ।
▶ कदाचित हमें अपना नगर छोड़कर बाहर जाना पड़ा और हम यह कहते हैं कि हमारी यह परिक्रमा और दीपक का नियम टूट जाएगा ।
▶ इस विषय में शास्त्र का आदेश है कि आपके घर की तुलसी और दासाभास के घर की तुलसी एक ही बात है ।
▶ आप यदि अपना घर छोड़ कर दासाभास के घर आए हैं तो यहाँ घर में विराजमान तुलसी की परिक्रमा करें और दीपक जलाए तो आप का नियम भंग नहीं होगा ।
▶ ऐसे ही आपके ठाकुर आपके घर में विराजमान हैं आप उनके सामने बैठकर जो भी पूजा अर्चना करती हैं ।
▶ आप वहां से मेरे घर आ गए तो मेरे ठाकुर के घर में बैठकर पूजा अर्चना कर सकती हैं । आप का नियम भंग नहीं होगा ।
▶ हां यह आवश्यक है कि आपके घर में जो ठाकुर हैं उनकी सेवा पूजा की व्यवस्था करके आएं ऐसा ना हो कि आपके ठाकुर तो ताले में 4 दिन बंद रहे । और आप मेरे ठाकुर की सेवा पूजा करते रहें तो यह सेवा अपराध माना जाएगा ।
▶ ऐसे ही अन्य नियम जो भी है वह देश बदलने पर दूसरे स्थान पर उनको यदि किया जाए तो नियम भंग नहीं माना जाता है ।
▶ लाला बाबू के चरित्र में ऐसी ही कथा आती है । ल्ाला बाबू एक सिद्ध संत हुए हैं । उन्होंने मंदिर बनवाया । श्री विग्रह प्रतिष्ठित करवाया ।
▶ श्रीविग्रह के बाकायदा हृदय पर हाथ रख के स्पंदन को महसूस किया ।
नाक के सामने रुई रखकर और मस्तक पर मक्खन रखकर जब उन्हें यह पक्का हो गया के मेरे ठाकुर विग्रह में विराजमान हो गए तभी उन्होंने सेवा पूजा प्रारंभ की ।
▶ आज भी वह मंदिर धाम में है । प्रभु ने एक बार उनको आदेश दिया कि आप जाओ और ब्रज के मंदिर तीर्थ स्थानों के लीलास्थलियोन के दर्शन कर आओ ।
▶ लाला बाबू ने कहा । प्रभु आप तो यहां विराजते हो । मेरे जागृत ठाकुर तो आप ही हो । आप जागृत भी हो । मैं आपको छोड़कर कैसे जाऊं ?
▶ तो स्वयं ठाकुर ने कहा जैसे मैं यहां जागृत हूं ऐसे हो जो जो व्रज की स्थलियां हैं । वह मेरे से कम जागृत नहीं है ।
▶ आप इन लीला स्थलियों का सेवन करो । मैं अपनी व्यवस्था अपने आप करूंगा । आपके जो नियम हैं । वह आप कहीं भी किसी भी स्थान पर कर सकते हैं । आप के नियम भंग नहीं होंगे ।
▶ तब लाला बाबू अपने मंदिर को छोड़ के 84 कोस ब्रज में भ्रमण करते रहे । लीला स्थलियों के दर्शन करते रहे ।
▶ इस विषय में स्थान परिवर्तन या देश परिवर्तन से जहां भी आप हैं अपने नियम को वहां एक तरफ बैठ कर पूरा कर सकते हैं ।
▶ क्योंकि कृष्ण विभु हैं । वह सर्वत्र व्याप्त है । और आपके जो ठाकुर है दासाभास ने अनेक बार निवेदन किया है कि उसको हृदय में बैठाने का प्रयास करें ।
▶ जब आप आंख बंद करें तो आपके सेवित श्री विग्रह आपको दीखने चाहिए , आप कहीं भी रहे आंख बंद करके आप अपने श्रीविग्रह से लाड़ लड़ा सकते हैं ।
▶ अवश्य अपने श्रीविग्रह को हृदय में धारण करने का प्रयास करेंगे तो वह सदा हमारे साथ रहेंगे ।
🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई ॥ 🐚
🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn
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