Wednesday, 24 April 2013

284. chhoom lun tere charan




चूम लूं तेरे चरण, कंजों से कोमल सुख-भरण 
बन के अली गूंजा करू, फूलों से जब सजा हो तू 
मन के मंदिर में मेरे मोहन सदा बसा हो तू 

JAI SHRI RADHE

Monday, 22 April 2013

283. balaatkaar kyon ?



बलात्कार क्यों ???


बलात्कार के बाद रोष, गुस्सा, होना 
स्वाभाविक है, होना चाहिए, ठीक है. 

लेकिन 

बलात्कार आखिर होता ही क्यों है ?
क्या परिस्थितियां है , जो इसके लिए प्रेरित करती हैं ?
उनको कैसे रोका जाय ? जिससे बलात्कार हो ही नहीं 
या सहजता या संभावना कैसे  कम हों 

इस विषय पर बहस होनी चाहिए 
और सभी को मिलकर सावधानियों पर अमल करना चाहिए 

बाद में किये जाने वाले रोष से बहुत बेहतर है 
सावधानियो पर चिंतन व उन पर अमल !!!

जय श्री राधे 

Tuesday, 9 April 2013

282.khak me moti







रूठे हैं अगर श्याम तो उनको मनाये कौन ?
अपनी जो बनी शान है उसको घटाए कौन ?

ग़र क़द्र करें वो तो ये दृग "बिंदु" नज़र हैं ,
वरना फ़िज़ूल ख़ाक में मोती मिलाये कौन ?

कुछ उनका भला होता तो करते भी खुशामद
अपनी गरज के वास्ते अहसान उठाये कौन ?

अब तक तो रहे दोस्त, बराबर का था दावा ,
अब फ़र्जे ज़िन्दगी की शरायत उठाये कौन ?

माना की जान उनकी है, लेंगे वही आखिर,
पर बन के खतावार ये गर्दन झुकाए कौन ? 



JAI SHRI RADHE

Monday, 8 April 2013

281. VRAJ KI KHOJ




व्रज की खोज 




A DOCUMENTARY FILM BY SHRI DAYAVEER DAS N SCRIPT EDITING BY DASABHAS IS LAUNCHED ON 04/04/2013.

यह  फिल्म व्रज , श्री चैतन्य महाप्रभु एवं छः गोस्वामि पाद पर प्रमाणिक व भावपूर्ण प्रस्तुति है . यह सी दी मैं उपलब्ध है 

महाप्रभु के विषय में यह एक प्रथम व सफल प्रयास है . २ घंटे में महाप्रभु को इसके द्वारा जितना समझा जा सकता है , उतना शायद २ वर्ष के अध्ययन व ग्रन्थ पाठ से नहीं समझा जा सकता 



Friday, 29 March 2013

280. bhakti yaa bhiksha



bhakti yaa bhiksha

भक्ति अर्थात भिक्षा 


जो देश के लिए समर्पित हो जाये 
वह देश भक्त 

जो पिता  के लिए समर्पित हो जाये 
वह पितृ भक्त 

जो माता के लिए समर्पित हो जाये 
वह माता भक्त 

जिसका भक्त , जिसकी भक्ति 
उसके लिए पूर्ण समर्पण 
अपने सुख दुःख की कोई बात नहीं 

यही बात भगवान की भक्ति में होनी चाहिए 
उनके लिए पूर्ण समर्पण 
अपने सुख दुःख की कोई बात नहि।

क्या हम ऐसा करते हैं ? शायद नहीं 
हम भगवान् के लिए नहीं , अपने दुःख सुख के लिए 
भगवान् की भक्ति करते हैं 

ये भक्ति नहीं, भिक्षा है 
निश्चित हो की हम भक्त हैं या भिखारी ?

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban

Saturday, 9 March 2013

279. dikhnaa



इस संसार में कुछ चीजें दिखती हैं 
कुछ को अनुभव करना पड़ता है 

सभी कुछ इन आँखों से नहीं दिखता है 
जैसे वायु मंडल में होने वाला 
अनेक कंपनी का नेटवर्क आँखों से नहीं दिखता 


JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Monday, 4 February 2013

278. guru - chela

guru - chela

गुरु - चेला 

कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं की 
हम कृष्ण से डायरेक्ट प्रेम करते हैं 

दो प्रेमियों के बीच में तीसरे = गुरु को लाने की 
क्या ज़रुरत है ?

एक बार शांति से अपने आप से पूछें की 
फिर आप बीच मैं गुरु क्यों बने हुआ हो ?

आपके पास आने वाले लोगों को अपना चेला 
क्यों बनाते हो ?

जो पहले से किसी के चेले हैं , शास्त्र केवल व केवल 
उन्हें ही चेला बनाने की इजाज़त देता है 

बिना स्वयं गुरु धारण किये गुरु बन्ने से 
समय आने पर बहुत बुरा हश्र होता है।
-- 
JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban