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Tuesday, 28 November 2017

Hamara Target Kya



✔ *हमारा टारगेट क्या* ✔

↪सृष्टि में विविधता है और विविधता सृष्टि का प्रथम महत्वपूर्ण गुण है । दो पत्ता भी एक सा नहीं है दो मनुष्यों की शक्ल भी एक सी नहीं है ।

 ↪इसी विविधता के कारण कुछ मनुष्य सदाचार परोपकार स्वधर्म पालन में लगे हुए हैं और उनका टारगेट संभवत यश है ।

↪कुछ मनुष्य धनोपार्जन में लगे हुए हैं येन केन प्रकारेण धनोपार्जन करना उनका टारगेट धन है।

 ↪कुछ मनुष्य येन-केन-प्रकारेण अपनी कामनाओं की पूर्ति में लगे हुए हैं यह कामना यह वासना यह इच्छा वह इच्छा ।

↪कुछ लोग ऐसे हैं जो इस जीवन के दुखों से परेशान हो गए हैं वह इस संसार में बार-बार आने जाने से मोक्ष चाहते हैं ।

↪इन सब के अतिरिक्त हम आप जैसे कुछ लोग हैं जो भक्ति में लगे हुए हैं भजन में लगे हुए हैं कृष्ण चरण सेवा चाहते हैं भगवान की कृपा चाहते हैं भगवान की कृपा से भगवान की चरणों की परमानेंट सेवा चाहते हैं ।

↪अब बात यह है कि जो जो चाहते हैं उस में लगे हुए हैं हम लोग यदि भजन भक्ति चाहते हैं तो हम यह समझ लें कि हमारे जीवन का जो मुख्य उद्देश्य है भजन । भक्ति । हमारा जीवन, कम से कम हमारा जीवन भजन भक्ति के लिए मिला है ।

 ↪और यदि भजन भक्ति के लिए जीवन मिला है तो सबसे अधिक प्राथमिकता हम भजन भक्ति को दें अधिक समय भजन भक्ति को दें और संसार में जो दायित्व हमारे ऊपर हैं उन्हें अनासक्त होते हुए निभाते रहे और संतुलन रखें । जो विभिन्न विषयों में संतुलन रखकर साधते हुए चलता है वही साधु है ।

↪फिर भी जैसे किसी का टारगेट धन है किसी का टारगेट यश है किसी का टारगेट कामना है किसी का टारगेट मोक्ष है । हमारा टारगेट भजन है, भक्ति है ।

↪यह सदा स्मरण रहे तो हमारे प्रयास भी इस ओर अधिक से अधिक होने लगेंगे ।

जय श्री राधे जय निताई
समस्त वैष्णव जन को दासाभास का प्रणाम

Wednesday, 25 October 2017

Dasabhas Lekhni Part 6


🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒
             दासाभास लेखनी
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💎 भाग 6⃣

1⃣ शिव जीः त्रिलोचना सखी - श्रीगौरदास जी महाराज ने चर्चा में बताया कि श्रीभक्तमाल में श्रीप्रियादास जी श्री नरसी मेहता के चरित्र में गान किया है कि एक वीहड़ में शिवलिंग की उपासना करने पर श्री शिवजी साक्षात प्रकट हुए और नरसी मेहता का हाथ पकड़ कर उन्हें भी श्री रासलीला के दर्शन कराये। वहां पर शिवजी को त्रिलोचना सखी बताया है और उनकी दीपक सेवा का वर्णन है शिवजी ने नरसी मेहता जी को भी दीपक सेवा देते हुए उन्हें सखी नाम दिया है। आदि - आदि। त्रिलोचना सखी की जय हो। ये स्थान जूनागढ़ में है। द्वारका यात्रा में इस स्थान के दर्शन भी करेंगे हम लोग।

2⃣ श्रीकृष्ण जन्म अवसर पर श्रीशिव जी नन्द भवन में दर्शन हेतु गये सम्बन्धी श्री शिवजी की जो-जो लीला प्रचलित है हम श्रवण करते हैं। वह भी श्रीमद्भागवत चै. च.। गोपाल चम्पू में नहीं है .

3⃣ किसी बात का अभिमान नहीं है यही सबसे बड़ा अभिमान है.

🔔 ।। जय श्री राधे ।। 🔔
🔔 ।। जय निताई  ।। 🔔

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Tuesday, 24 October 2017

Paap nahi hota


🌹🌳🌹🌳🌹🌳🌹🌳

✔ *पाप नहीं होता* ✔

➡ भजन, भक्ति में नियमों का
पालन न करने से कोई पाप
नहीं होता है, जिसका कोई
अलग से फल भोगना पड़ता हो

➡ भजन, भक्ति में अपराध होता है
अपराध के कारण भजन, भक्ति की
गति में बाधा या असंतोष होता है, जो कि
भजन से ही मार्जित या दुर् होता
जाता है, विशेषकर नामजप से ।

➡ नाम जप प्रारम्भ में योग्य बनाता है,
फिर साधन बनता है, फिर साध्य बन
जाता है । ये तीन अलग अलग नहीं,
नाम वही एक ही है, बचपन, जवानी
बुढापे जैसी स्थिति है ।

➡ अतः जैसे भी बन पड़े, भजन अंगों को
आज से ही शुरू कर दो, निष्ठा एवं
भाव पूर्वक लगे रहो । भजन के प्रभाव से
ही शुद्ध होता जाएगा, मार्ग मिलता
जाएगा । असंतोष या अपराध दुर् होते
जाएंगे ।

🖊 लेखक

दासाभास डा गिरिराज नांगिया

LBW - Lives Born Works at vrindabn

Monday, 23 October 2017

Bhagwan ki Lilaen

भगवान की लीलाएं


✔ *भगवान की लीलाएं* ✔

➡ भगवान श्री कृष्ण ने जब पृथ्वी पर अवतरण किया और विभिन्न लीलाएं की तो उनके देवगण भी उनकी उस लीलाओं के दर्शन करने या अपने घर भगवान श्रीकृष्ण की पधरावनी करने का लोभ संवरण ना कर सके ।

➡ ऐश्वर्यमय सृष्टि नियंता भगवान के रूप में तो उन पर कृपा है ही । रहती ही है । लेकिन वे देवगन भी यही चाहते थे कि भगवान की नर स्वरूप लीला की भी कृपा हमारे ऊपर हो ।

➡ इसी भावना से ब्रह्मा ने गोवत्स चुराए और अंततः भगवान के उस बाल स्वरुप का दर्शन कर उनकी स्तुति कर यहां तक कि उन को कष्ट देने पर भी आनंद ही लाभ किया ।

➡ जब ब्रह्मा ने इस प्रकार किया और इंद्र ने भी भगवान के साथ कुछ गड़बड़ी की लेकिन जब उन्हें समझ आया कि यह तो मेरे स्वामी परात्पर ब्रम्ह साक्षात श्रीकृष्ण ही है ।

➡ तो इंद्र ने भी उनकी कृपा लाभ की ओर इंद्र पर भी श्री कृष्ण प्रसन्न हुए और इंद्र ने भी नर रूप श्री कृष्ण के दर्शन कर अपने आप को धन्य किया ।

➡ वरुण देवता ने भी जब देखा कि ब्रह्मा आनंद ले चुके हैं । इंद्र आनंद ले चुके हैं । तो क्यों ना मैं भी परात्पर ब्रम्ह परमात्मा के श्री कृष्ण रूप की पधरावनी अपने महल में करवाऊं । उनकी इच्छा होते ही कृष्ण ने उनकी इच्छा पूरी करने की योजना बना ली ।

➡ और एक दिन द्वादशी का पारण करने के लिए नंद बाबा ने रात्रि 3 बजे जैसे ही यमुना में स्नान हेतु प्रवेश किया तो उनको वरुण लोक् ले जाया गया ।

➡ जैसे ही कृष्ण को पता चला कृष्ण भी यमुना में प्रवेश कर वरुण लोक् चले गए वहां पाताल में वरुण या जल देवता ने श्री बाबा की तो पूजा की ही श्रीकृष्ण की भी सपरिवार पूजा की ।

➡ और अंत में वरुण ने यह कहा । प्रभु मैंने यदि आपके प्रति आपके पिता के प्रति अपराध किया है तो आप मुझे दंड दीजिए ।

➡ लेकिन मेरी हार्दिक इच्छा आप जानते हैं मैंने यह जो उत्पात् किया यह आपके चरण वरुण लोक में पड़ जाएं इस भावना से किया ।

 ➡ यदि आप प्रसन्न है तो मुझ पर कृपा कीजिए कृष्ण ने मंद मुस्कान भरी दृष्टि वरुण की तरफ की और वरुण समझ गए कि भगवान नाराज नहीं है प्रसन्न ही है ।

➡ इस प्रकार कृष्ण की जो वृंदावन धाम की लीलाएं हैं वह इतनी आकर्षक है इतनी माधुर्य भरी हैं उनका स्वरूप इतना आनंदप्रद है कि देवगण़् भी उनका दर्शन । उनका सानिध्य प्राप्त करने के लिए लालायित रहते हैं ।

➡ भले ही उसके लिए उनको उत्पात् ही क्यों ना करना पड़े । ऐसे वृंदावन बिहारी लीलाधारी पुरुषोत्तम बाल कृष्ण भगवान की जय ।

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Monday, 4 September 2017

Suksham Sutra Part 51


⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱

     सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

🔮 भाग 5⃣1⃣

💡 किसी कार्य को कर के यह देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है कि जैसा हम चाहते थे वैसा वह हुआ भी है कि नहीं.

💡 सब काम का जिम्मा सरकार पर मत थोपो, एक करोड़ खर्च करके कोठी बनवा सकते हो, कार खरीद सकते हो, विदेश घूम सकते हो तो घर और आॅफिस के सामने की दस गज सड़क भी आप बनवाकर उसकी स्वच्छता का जिम्मा ले लो, उदार बनो - आनंद मिलेगा.

💡 जो कार्य कोई और कर सकता है वह आप भी सीख सकते हो और जो आप नहीं सीख सकते उसे कोई और कैसे कर सकता है? ऐसी विचारधारा मन में रखकर जीवन के अन्तिम क्षण तक कर्मशील रहना चाहिए.

🐚 ।। जय श्री राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय निताई  ।। 🐚

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Imandaar



✔ *ईमानदार* ✔

➡ वो है जो मन वचन कर्म में एक सा है । कहता है कुछ , करता है कुछ, मन मे है कुछ उसे बोलचाल की भाषा मे बेईमान कह सकते हैं ।

➡ ऐसे ही
आर्त भक्त
जिज्ञासु भक्त
अर्थार्थी भक्त

➡ ये तीनो कहे तो भक्त ही जाते है, लेकिन ये विशुद्ध भक्त नही हैं । विशुद्ध भक्त वे हैं जो प्रिया लाल जु के सुख के अतिरिक्त कुछ नहीं सोचते ।

➡ इसी प्रकार एक बार कृष्ण नाम लेने वाला भी वैष्णव तो है ही, लेकिन वो विशुद्ध वैष्णब नहीं, विशेष कर आज के समय मे हम

➡ बात तो भजन भक्ति की करते हैं,
मन मे है प्रतिष्ठा, और
काम करते है धन उपार्जन के

➡ ऐसे हम जिनकी कोरी बातें हैं, भजन की । हमारा ना तो मन है, ना प्रयास है, ऐसे हम

➡ बेईमान वैष्णव की श्रेणी में आते हैं । सूक्ष्म चिंतन है, साथ ही मेरा स्तर बहुत ही प्राथमिक है, इसलिए अभी इतना ही समझ आया, बहुत ऊंची बात अभी समझ नही आती । सन्त सज्जन कृपा से आने लगेगी ।

➡ दासाभास का वैष्णवजन को प्रणाम

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚

🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚



  लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया  
LBW - Lives Born Works at vrindabn  

Friday, 18 August 2017

Dasabhas Lekhni Part 3

Dasabhas Lekhni Part 3


🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒
           दासाभास लेखनी
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💎 भाग 3⃣

1⃣ होली के साथ साथ प्रिया प्रियतम की झूलन लीला भी निकुंज में नित्य होती है।

2⃣ जिसके पास एक सौ रुपये की पूंजी नहीं, धन नहीं उसका शनि ग्रह बिगाड़ेगा तो क्या बिगाड़ेगा ऐसे ही जो भजन की एबीसीडी जानता नहीं, भजन करता नहीं, भक्ति का परिचय नहीं, केवल निंदा ही निंदा; तो उसका अपराध बिगाड़ेगा भी तो क्या ? भजन हो तो ही तो कुछ बिगड़ेगा। क्या सोचते हैं आप?

3⃣ विरक्ति या वैराग्य केवल बाबा जी या विरक्तों के लिए नहीं है संसारी, गृहस्थी व्यक्ति को भी धीरे धीरे विरक्ति - वैराग्य का अभ्यास करना चाहिये।

🔔 ।। जय श्री राधे ।। 🔔
🔔 ।। जय निताई  ।। 🔔

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Saturday, 3 June 2017

Granth Prichay : Shri Parmatm Sandrbh

​​​​​​​📖 ग्रन्थ परिचय 4⃣8⃣ 📖

💢 ग्रन्थनाम : श्रीपरमात्म   सन्दर्भ
💢 लखक  : श्रीजीव गोस्वमिपाद
💢 भाषा : संस्कृत-हिंदी अनुवाद-टीका  |
     ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
💢 साइज़ : 15 x 23  सेमी
💢 पृष्ठ  : 228 हार्ड   बाउंड
💢 मूल्य : 225  रूपये

💢 विषय वस्तु :
    परमात्म स्वरूप का सुक्ष्मातिसुक्ष्म
    विवेचन (तीसरा संदर्भ )

💢 कोड : M048-Ed1

💢 प्राप्ति  स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री

📗🔸📘🔹📙🔶📔


Thursday, 1 December 2016

ग्रन्थ परिचय : श्रीउज्ज्वलनीलमणि

​​📖 ग्रन्थ    परिचय 5⃣ 8⃣    📖

💢 ग्रन्थ   नाम : श्रीउज्ज्वलनीलमणि
💢 लेखक  : श्रीरूपगोस्वामीपाद
 💢 भाषा : संस्कृत-हिंदी अनुवाद-टीका
   ब्रजविभूति श्रीश्यामदास

💢 साइज़ : 14 x 22 सेमी
💢 पृष्ठ     : 432 हार्ड     बाउंड
💢 मूल्य    : 400  रूपये

💢 विषय वस्तु :
      श्रीराधादि-सिद्ध मधुर रस-परिकारों के स्वरूप-
      भावों के सूक्ष्म विवेचन के साथ श्रीराधाकृष्ण
      की निकुंज लीलाओं का अनुपम वर्णन

💢 कोड : M058-Ed3


💢 प्राप्ति    स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री

📗🔸📘🔹📙🔶📔

श्रीउज्ज्वलनीलमणि

Monday, 15 August 2016

श्री राधा रानी ब्रज की रखवारी

जय हो
  श्री राधा रानी के व्रज रखवारी
के बारे में एक फैक्ट और भी है
जो बहुत जन जानते है
और बहुत नही जानते ।
वृन्दाबनं में जो शासन है
प्रशासन है उसकी अधीश्वरी
श्रीराधा रानी हैं ।
 एक बार इस विषय में
सब सखा सखियों में
बहस छिड़ गयी कि राजा कौन ।
सखा बोले नंदलाल
श्रीकृष्ण ही राजा हैं । और कौन ।
सखिया बोली । राजा हैं
हमारी राधा रानी ।

सखा एवम् सखियों की सभा हुई

सबने अपने अपने तर्क रखे ।
कृष्ण एवम् सखा हार गए ।
हार स्वीकार की । एवम् सर्व सम्मति
से स्वयं कृष्ण एवम् सखाओं ने
श्री प्रिया जी का तिलक व
राज्याभिषेक किया ।
तब से श्री राधारानी ही
ब्रज की रानी हैं ।
प्रशासक हैं । व्रज रखवारी हैं ।
 इस पूरी लीला का वर्णन
माधव महोत्सव नामक ग्रन्थ में
श्री जीव गोस्वामी जी ने किया है ।
प्रामाणिक ग्रन्थ है । काल्पनिक नहीं ।
▼ Hide quoted text
 ॥ जय श्री राधे ॥ 
 ॥ जय निताई  ॥ 
 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
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Monday, 1 August 2016

ग्रन्थ परिचय - ब्रज के छह गोस्वामी और सप्त देवालय सचित्र

📖   ग्रन्थ  परिचय   1️⃣0️⃣  📖

💢 ग्रन्थ   नाम :
ब्रज के छह  गोस्वामी  और सप्त देवालय सचित्र

💢 लेखक : व्रज विभूति श्रीश्यामदास
💢 भाषा : हिंदी
💢 साइज़ : 14 x 22   सेमी
💢 पष्ठ : 112 सॉफ्ट बाउंड
💢 मल्य : 60 रूपये

💢 विषय वस्तु :
श्रीचैतन्य के अनुयायियों छह गोस्वामियो का
जीवन परिचय एवं उनके द्वारा श्रीवृन्दवन
में स्थापित सप्त देवालयों

एवम् नित्यानंद प्रभु स्थान श्री श्रृंगारबट
का परिचय 


💢कोड : M010 – Ed2

प्राप्ति स्थान ।
1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा ।  09068021415
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ब्रज के छह  गोस्वामी  और सप्त देवालय सचित्र
ब्रज के छह  गोस्वामी  और सप्त देवालय सचित्र

Wednesday, 27 July 2016

ग्रन्थ परिचय ब्रज की तुलसी

📖 📖   ग्रन्थ परिचय 6️⃣   📖

💢 ग्रन्थ  नाम : ब्रज की तुलसी

💢 लेखक : पंडित बाबा श्री श्यामारमणदास
💢 भाषा : हिन्दी
💢 साइज़ : 14 x 22   सेमी
💢 पृष्ठ : 176 सॉफ्ट बाउंड
💢 मूल्य : 100 रूपये

💢 विषय वस्तु : तुलसी, तिलक, संकीर्तन,
एकादशी व्रत क्यों – कैसे – और कितनी
एवं अन्य विषयों पर प्रमाणिक प्रस्तुति

💢कोड : M006  – Ed1

प्राप्ति स्थान ।
1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस
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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 22

⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱
सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 22

💡 शरीर की आसक्ति
तब समाप्त हो जाएगी
जब यह समझ आ
जायेगा कि में
इस शरीर से परे
आत्मा रूप में अवस्थित
हु नित्य हु और 
श्रीभगवान का दास हु


💡 योग माने अप्राप्त की प्राप्ति
और
क्षेम माने प्राप्त की रक्षा.
भक्तो के इस ‘योगक्षेम’ को
प्रभु स्वंय वहन करते है.

💡दीक्षा गुरु ऐसे होते है जैसे
एक पुरोहित कन्या का विवाह पढ़ते है
विवाह करके उसके पति  से मिलते
है और उसे गृहस्थाश्रम में प्रवेश
करा देते है परन्तु शिक्षा गुरु
उन ननद और सास के समान है
जो पग पग पर उस नव वधु को शिक्षा
देती रहती है. इस लौकिक उदाहरण से
शिक्षा गुरु के महत्व को समझना है.


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn


Tuesday, 26 July 2016

भजन आत्मा का विषय है

✅   *भजन आत्मा का विषय है *   ✅

3⃣ तीन विषय हैं

1⃣ आधिदैविक जिसमें देवताओं से संबंधित विषय कार्यकलाप होते हैं

2⃣ आधिभौतिक इसमें भूत । यानी प्राणी । प्राणी यानी मानव । यानी लौकिक विषयों के बारे में वर्णन होता ह

3⃣ तीसरा है आध्यात्मिक । जैसाकि शब्द से ही स्पष्ट है इसमें आत्मा के बारे में कार्यकलाप एवं वर्णन होता है

🚼 चाहे करने वाला शरीर ही होता है और सब कुछ इसी संसार में ही होता है लेकिन होता आत्मा के लिए है

🚺 जो आत्मा विभिन्न शरीर धारण करके विभिन्न योनियों में भटकती है उसके भटकाव को रोककर सदा सदा के लिए उसे कृष्ण चरण सेवा में लगा देने से संबंधित जो भी होता है वह आध्यात्मिक होता है वह भजन होता है

♿️ इसलिए क्योंकि इसका विषय आत्मा है । आत्मा न ब्राह्मण होता है न शूद्र होता है ना वैश्य होता है ना क्षत्रिय होता है आत्मा इन चारों वर्णों का शरीर धारण करता है

❇️ और भजन या आध्यात्मिक शरीर से संबंधित नहीं है इसलिए चैतन्य चरितामृत में कहा गया कृष्ण भजने नहीं जाती कुल आदि विचार

✳️ किसी भी जाति का व्यक्ति भजन कर सकता है साथ ही किवा विप्र किवा शूद्र न्यासी केने न्य जेई श्री कृष्ण तत्ववेत्ता से गुरु हय

☢ गरु भी जरूरी नहीं कि ब्राह्मण हो कोई भी क्यों ना हो श्री कृष्ण तत्व को यदि जानता है तो वह गुरु हो सकता है क्योंकि भजन भजन भजन भक्ति या आत्मा इन सब चीजों से परे है

📛 इसीप्रकार जो पाप है वह शरीर द्वारा किया जाता है और शरीर को भोगना पड़ता है अपराध भजन में होते हैं वह आत्मिक होते हैं आत्मा को कुछ नहीं भोगना पड़ता इसीलिए केवल प्रगति में बाधा बन कर रह जाते हैं और उन्हें दूर करना पड़ता है

💯 अतः हम सब समझे रहे की भजन आत्मा की खुराक है और परोपकार सदाचार आदि यह शरीर की खुराक है

🆎 हम प्रयास करके भजन द्वारा इस आत्मा को सदा सदा के लिए शरीरों के बंधन से छुड़ाकर कृष्ण चरण सेवा के बंधन में बांध दें

⭕️ इसीलिए इस पथ को आध्यात्मिक कहा जाता है


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
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भजन आत्मा का विषय है


Sunday, 24 July 2016

कृष्ण की एक बच्चे के रूप म पूजा

🙇 कष्ण की एक बच्चे के रूप म पूजा

👼यदि आपको श्रीकृष्ण की बच्चे के रुप में पूजा उपासना या भावना करनी है तो

🎅आप ऐसा सोचो जैसे आपका कोई एक बालक आपकी बाई के घर गया हो

🕵आपकी बर्तन धोने वाली मेड के घर गया हो आपकी डस्टिंग करने वाली के घर गया हो

💂और वह डस्टिंग करने वाली आप के बच्चे को जैसे रखेगी । वैसे आपने यशोदा मैया के लाला को अपने घर में रखना है

👷जीव हम या आप यशोदा नहीं बन सकते हैं । हम यशोदा मैया की बाई या मेड सर्वेंट या साहित्य भाषा में कहें तो एक दासी है

👮और हमारी मालकिन जो हमसे हर प्रकार से बहुत ही बड़ी है । सोभाग्यशाली है । उसका बालक हमारे घर में है । हम उसके बालक का कितना ध्यान रखेंगे यह आप समझ सकते हैं ।

👳भाव उसमें बालक का ही रहेगा लेकिन यह बालक हमारी मालकिन का बालक है यह भाव रखते हुए बाल भाव से हम यदि अपने आप को एक यशोदा की दासी समझकर उस लाला की उपासना करेंगे

👲तो यशोदा भी खुश और लाला भी खुश । इसी प्रकार अन्य अन्य भावों की उपासना होती है ।

👸मधुर भाव की उपासना में भी श्री कृष्ण हमारी स्वामिनी श्री राधा के पति है या कांत है या प्रेमी हैं

😘हमें राधा और कृष्ण के मिलन में सहायक एक छोटी सी दासी । एक छोटी सी किंकरी के रूप में अपने आप को देखते हुए मधुर भाव की लीलाओं का केवल दर्शन करने मात्र का अधिकार है

🙏और दर्शन की भी बार बार प्रार्थना से दर्शन प्राप्त हो जाए तो बहुत बड़ा सौभाग्य है

😻अतः जीव का जो मुख्य भाव है दास्य । वह हर भाव में मिश्रित रहना ही चाहिए मिश्रित भी क्या प्रमुख रहना चाहिए

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
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कृष्ण की एक बच्चे के रूप म पूजा

Friday, 22 July 2016

ग्रन्थ परिचय - श्रीलघुभागवतामृत

📖   ग्रन्थ  परिचय 4️⃣    📖

💢 ग्रन्थ   नाम : श्रीलघुभागवतामृत  

💢 लेखक   : श्रीरूप गोस्वामिपाद 
💢 भाषा : संस्कृत -हिंदी
💢 साइज़ : 14 x 22 सेमी
💢 पृष्ठ   : 160 सॉफ्ट  बाउंड
💢मूल्य    : 100 रूपये

💢 विषय वस्तु :
उपास्य-उपासक एवं अवतार विषयक
दुर्लभ समाधान कारक ग्रन्थ 

💢कोड : M004  – Ed1 

प्राप्ति स्थान ।
1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
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ग्रन्थ  परिचय - श्रीलघुभागवतामृत

Wednesday, 20 July 2016

ग्रन्थ परिचय ~ ब्रज की पाठ पूजा

📖   ग्रन्थ  परिचय    📖

💢 ग्रन्थ  नाम : ब्रज की पाठ पूजा 

💢 लेखक : व्रज विभूति श्रीश्यामदास
💢 भाषा : हिंदी
💢 साइज़ : 14 x 22 सेमी
💢 पृष्ठ  : 196 सॉफ्ट  बाउंड
💢 मूल्य  : 100 रूपये

💢 विषय वस्तु : अनेकानेक स्त्रोत, नित्यपाठ के अष्टक,
आरति, चरणचिह्न युक्त
उपादेय 17  ग्रन्थ एकसाथ 

💢कोड : M003  – Ed1 

प्राप्ति स्थान ।
1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री
📗🔸📘🔹📙🔶📔 
ब्रज की पाठ पूजा

Tuesday, 19 July 2016

ग्रन्थ परिचय   : ब्रज के संत : श्रीचैतन्य भक्तगाथा


   ग्रन्थ परिचय    
 ग्रन्थ नाम :
ब्रज के संत : श्रीचैतन्य भक्तगाथा
 लेखक : व्रज विभूति श्रीश्यामदास
 भाषा : हिंदी
 साइज़ : 14 x 22 सेमी
 पृष्ठ : 464 हार्ड बाउंड
 मूल्य : 250 रूपये
 विषय वस्तु :
श्रीचैतन्य के पूर्वज, गुरुवर्ग, छः गोस्वामी
परिकर-स्वरूप विभिन्न भक्तो के
चमत्कारी जीवन चरित्र
कोड : M001 – Ed3
प्राप्ति स्थान ।
1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
 डाक द्वारा । 09837021415
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

महा अपराध



    *महा अपराध*      

एक होता है *अपराध* दूसरा होता है *महा अपराध*

किसी *वैष्णव* के प्रति / श्री *विग्रह* के प्रति / *नाम* के प्रति / जो दुर्भावना है या लापरवाही है या कटाक्ष है या निंदा है या आलोचना है वह है अपराध ।

और कदाचित जिसकी आप निंदा कर रहे हैं आपको यह अनुमान हुआ कि हम जो उनकी निंदा कर रहे थे वह  इनको पता चल गई है तो रोते हुए 😭😭दो इस्माइली लगाकर और उनसे हम गिड़ गिडा कर माफी मांगने लग गए

हमारे से कोई भूल हुई हो तो आप क्षमा करना हमें माफ करना हमसे गलती हुई हमसे अपराध हुआ ऐसा कह कर उनसे क्षमा मांग लेना और शायद वैष्णव द्वारा क्षमा कर भी देना

लेकिन यह सब करने के बाद भी उस वैष्णव के प्रति दुबारा से अपराध करना निंदा करना आलोचना करना पीठ पीछे फिर भी बुरा भला कहते रहना यह है *महा अपराध*

अपराध का *शमन* तो फिर भी हो जाता है लेकिन महा अपराध का शमन होना बहुत कठिन है क्योंकि एक वैष्णव जो पहले क्षमा कर चुका है

जब उसे मालूम होगा कि क्षमा होने/ मांगने /करने के बाद भी यह अमुक व्यक्ति फिर मेरा मेरे प्रति अपराध करता है और वह जब उनसे क्षमा मांगेगा तो वैष्णव भी संभवता उसे हृदय से *क्षमा नहीं करेगा*

क्योंकि उसे पता है यह अभी *क्षमा* मांगेगा दो 😭😭इस्माइली लगाएगा रोते हुए और घर जाकर फिर राधे राधे श्याम मिलादे शुरू हो जाएगा

अतः हम प्रयास करें कि अपराध ही ना हो और कदाचित जीव हैं हम लोग हमसे *अपराध होते ही हैं* कदाचित अपराध हो ही जाए और हम क्षमा मांग भी ले

तो *क्षमा मांगने के बाद* उस व्यक्ति उस वैष्णव के विषय में यदि हम पुनः निंदा आलोचना करते हैं तो फिर हमारा कल्याण होने की उम्मीद लगभग समाप्त ही है

*अतः सावधान*


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn


महा अपराध