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Tuesday, 24 October 2017

Paap nahi hota


🌹🌳🌹🌳🌹🌳🌹🌳

✔ *पाप नहीं होता* ✔

➡ भजन, भक्ति में नियमों का
पालन न करने से कोई पाप
नहीं होता है, जिसका कोई
अलग से फल भोगना पड़ता हो

➡ भजन, भक्ति में अपराध होता है
अपराध के कारण भजन, भक्ति की
गति में बाधा या असंतोष होता है, जो कि
भजन से ही मार्जित या दुर् होता
जाता है, विशेषकर नामजप से ।

➡ नाम जप प्रारम्भ में योग्य बनाता है,
फिर साधन बनता है, फिर साध्य बन
जाता है । ये तीन अलग अलग नहीं,
नाम वही एक ही है, बचपन, जवानी
बुढापे जैसी स्थिति है ।

➡ अतः जैसे भी बन पड़े, भजन अंगों को
आज से ही शुरू कर दो, निष्ठा एवं
भाव पूर्वक लगे रहो । भजन के प्रभाव से
ही शुद्ध होता जाएगा, मार्ग मिलता
जाएगा । असंतोष या अपराध दुर् होते
जाएंगे ।

🖊 लेखक

दासाभास डा गिरिराज नांगिया

LBW - Lives Born Works at vrindabn

Monday, 20 June 2016

अपराध

✅   अपराध   ✅  

▶ यह एक ऐसा शब्द है कि हर वैष्णव के मुख पर विराजमान है । लेकिन इसका भाव और अर्थ बहुत कम लोग शायद जानते होंगे ।

▶ अपराध दो शब्दों से बना है

▶ अप एवं राध ।
▶ राध माने संतोष । अप माने बाधा । जिससे भजन के संतोष में बाधा हो उस कार्य क्रिया को अपराध कहते हैं ।

▶ अपराध का शरीर से कोई मतलब नहीं है
▶ अपराध आत्मा का विषय है ।

▶ अपराध से शरीर में कोई कष्ट नहीं होता है
▶ ना अपराध से एक्सीडेंट होता है
▶ ना अपराध से बीमारी होती है
▶ ना अपराध से दुकान की बिक्री कम होती है
▶ ना अपराध से संतान में बाधा होती है

▶ कुल मिलाकर अपराध से लौकिक विषय
▶ में कुछ भी प्रभाव नहीं पड़ता है और

▶ ना ही अपराधका फल
▶ भोगने के लिए कोई नर्क बने हुए हैं

▶ इन सब कामों पर पाप पुण्य का प्रभाव पड़ता है पाप पुण्य शरीर से संबंधित हैं और अपराध भजन और आत्मा से संबंधित है ।

▶ अपराध होने एक बहुत बड़ी बात होती है वह होती है भजन में बाधा । भजन में बाधा होने से भजन करने से ▶ जो आनंद और संतोष प्राप्त होता है वह प्राप्त होना बंद हो जाता है ।

▶ साथ ही भजन उसी का बंद होगा ना जो भजन करता होगा । मेरी तरह भजन का नाटक करने वालों का क्या ▶ भजन बंद होगा । भजन तो हो ही नहीं रहा वैसे भी ।

▶ अतः अपराध और पाप के अंतर को हम समझे रहे । पाप यदि किया या हुआ  और उसका फल भोग लिया तो वह समाप्त हो जाता है लेकिन अपराध का एक ही फल है  कि हमारा भजन नहीं बनता है  ।

▶ शायद यह ही जीवन की सबसे बड़ी हानि है  क्योंकि यह जीवन भजन के लिए मिला है  भजन यदि नहीं बना  तो फिर जीवन किस काम का ।

▶ अतः अपराध को  हल्के में नहीं लेना चाहिए  यह एक ऐसा अवरोध है जो हमारे  जीवन के फल भजन को तुरंत बाधित कर देता है । अगले जन्म का भी कोई चक्कर नहीं इसमें । यहीं । अभी । इंस्टेंट असर है इसका । ▶ जबकि पाप तो कुछ अभी । कुछ अगले जन्म में भोगते हैं । कुछ नर्क में भोगते हैं ।

▶ पाप करते हुए भी चैन और मस्ती से पूर्व पुण्यों के कारण जीते हुए रह सकते हैं लेकिन अपराध् यदि हो गया तो चैन छीन गया समझो ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया  
LBW - Lives Born Works at vrindabn

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अपराध

Thursday, 2 June 2016

अपराध



  अपराध  

 पाप वो है जो लौकिक विषय में गलत कार्य है । पाप कुछ किया उसका फल कुछ मिलेगा ।

 भोगना ही पड़ता है । यहाँ या नर्क में । अवश्यमेव भोक्तव्यं

 अपराध का
1 लौकिक जगत स कोई सम्बन्ध नही है ।
2 ये भगवत विषय में की जाने वाली भूलें हैं ।
3 दो शब्दों से बना है । आप एवम् राध । राध माने संतोष । आप माने बाधा ।
4 जब संतोष में बाधा लगे । तब समझो अपराध हुआ ।
5 संतोष में बाधा या असंतोष ।
किसमे असंतोष । चार विषय में । क्योंकि अपराध 4 प्रकार के है
6 नाम अपराध
       सेवा अपराध
      वैष्णव अपराध
       भगवद् अपराध
7 जब जब इन चार विषयों में असंतोष हो तो समझो अपराध हुआ है ।
8 वैष्णव अपराध को वैष्णव से क्षमा कराना होता है ।बाकी के तीनो नाम लेने से दूर हो जाते हैं
9 पाप के लिए जेसे नरक हैं ऐसे अपराध के लिए कोई नर्क नही है
10 न ही कोई शारिरिक कष्ट होता है । क्योंकि अपराध का शरीर से कोई लेना देना नही
11 अपराध का सम्बन्ध भजन से है । भजन में असंतोष ही इसका फल है
12 या यों समझिये की प्रोसेस डिले होगा । जो काम 1 साल में होना ह वो 10 साल में होगा ।

अतः पाप और अपराध का अंतर समझे रहिये । बचिए । और डिले होने से बचाइये

🐚 ॥ जय श्री राधे 🐚
🐚 ॥ जय निताई   🐚