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Friday, 18 August 2017

Dasabhas Lekhni Part 3

Dasabhas Lekhni Part 3


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           दासाभास लेखनी
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💎 भाग 3⃣

1⃣ होली के साथ साथ प्रिया प्रियतम की झूलन लीला भी निकुंज में नित्य होती है।

2⃣ जिसके पास एक सौ रुपये की पूंजी नहीं, धन नहीं उसका शनि ग्रह बिगाड़ेगा तो क्या बिगाड़ेगा ऐसे ही जो भजन की एबीसीडी जानता नहीं, भजन करता नहीं, भक्ति का परिचय नहीं, केवल निंदा ही निंदा; तो उसका अपराध बिगाड़ेगा भी तो क्या ? भजन हो तो ही तो कुछ बिगड़ेगा। क्या सोचते हैं आप?

3⃣ विरक्ति या वैराग्य केवल बाबा जी या विरक्तों के लिए नहीं है संसारी, गृहस्थी व्यक्ति को भी धीरे धीरे विरक्ति - वैराग्य का अभ्यास करना चाहिये।

🔔 ।। जय श्री राधे ।। 🔔
🔔 ।। जय निताई  ।। 🔔

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Wednesday, 19 September 2012

247. 6 BHAG

6 bhag


वैराग्य

१. भगवत स्वरुप में 
श्री, विद्या, यश, वीर्य, वैराग्य,ऐश्वर्य 
इन ६ भगों में 'वैराग्य' भी है.

श्री राम ने तुरंत उसी समय मरते पिता को छोड़कर 
राज - काज  परिवार को छोड़कर बनगमन किया, 
यह उनके अनलिमिटिड वैराग्य का उदहारण है.

वनवास तो लेना ही था 
और चौदह वर्ष काबनवास था, आराम से कुछ दिन रुक कर
पिता का और अन्य राज्य की व्यवस्था आदि करवाकर फिर चले जाते, 
लेकिन वैराग्य की पराकाष्ठा इसी में है की 
तुरंत ही पीछे की व्यवस्थाओ की चिंता किये बिना चल दिए.

२. यही बात कृष्ण ने भी की. 
प्राण प्रियतम  नन्द यशोदा ब्रिजवासी तथा श्री राधा आदि
गोपी गण  को छण   में छोड़कर चले गए .

३. यही बात महाप्रभु गौरांग ने भी दिखाई 
विधवा असहाए वृद्ध शची माँ 
नवविवाहिता विष्णुप्रिया को छोड़कर गृह त्याग दिया.  

श्री, विद्या, यश, वीर्य, वैराग्य,ऐश्वर्य  
यह ६ औरों में भी हो सकते हैं, लेकिन भगवान् में 
ये शत-प्रतिशत होते हैं.

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia