Showing posts with label धन. Show all posts
Showing posts with label धन. Show all posts

Friday, 18 August 2017

Dasabhas Lekhni Part 3

Dasabhas Lekhni Part 3


🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒
           दासाभास लेखनी
✉️ ✉️ ✉️ ✉️ ✉️ ✉️ ✉️ ✉️ ✉️

💎 भाग 3⃣

1⃣ होली के साथ साथ प्रिया प्रियतम की झूलन लीला भी निकुंज में नित्य होती है।

2⃣ जिसके पास एक सौ रुपये की पूंजी नहीं, धन नहीं उसका शनि ग्रह बिगाड़ेगा तो क्या बिगाड़ेगा ऐसे ही जो भजन की एबीसीडी जानता नहीं, भजन करता नहीं, भक्ति का परिचय नहीं, केवल निंदा ही निंदा; तो उसका अपराध बिगाड़ेगा भी तो क्या ? भजन हो तो ही तो कुछ बिगड़ेगा। क्या सोचते हैं आप?

3⃣ विरक्ति या वैराग्य केवल बाबा जी या विरक्तों के लिए नहीं है संसारी, गृहस्थी व्यक्ति को भी धीरे धीरे विरक्ति - वैराग्य का अभ्यास करना चाहिये।

🔔 ।। जय श्री राधे ।। 🔔
🔔 ।। जय निताई  ।। 🔔

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Tuesday, 27 December 2016

Suksham Sutra 32



⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱
सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 32

💡 मित्र दुराचारी है, अहंकारी है,
मतलबी है, पसन्द नही है,
उसकी मित्रता एकपक्षीय है,
ये सब पीठ पीछे कहने के लिए है.
पर सामने ससब कुछ नजरअंदाज
करते है हम लोग और
उसका साथ नही छोड़ते. क्यों?
क्योंकि वह धनवान है.
'सर्वे गुणाः कांचनमाश्रयन्ति'

💡 सबसे बड़ा धनी वह है जो
अपनी आय से कम व्यय करता है
किसी से ऋण से नही लेता.
किसी का धन बाकि नही रखता.
उधार खरीदारी नही करता,
यदि कोई कारण बन जाए तो
मांगने से पूर्व ही उसे चूका देता है.

💡 धन अर्जन करना साधन है.
साध्य है-उस धन को भोगना,
परिवार का पालन करना,
समाज और राष्ट्र कल्याण करना.
परन्तु कभी कभी मनुष्य धनोपार्जन में ही
इतना तल्लीन हो जाता है की
साध्य को भूल जाता है और केवल साधन में ही
लगा रह जाता है. परिणामतः जीवन पर्यन्त
क्लेश और कष्ट भोगता रहता है|

 ॥ जय श्री राधे ॥ 
 ॥ जय निताई  ॥ 

 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Saturday, 30 July 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 22

⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱
सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 22

💡 दुष्ट व्यक्ति ईमानदार है
वह अपनी दुष्टता
कभी नहीं छोड़ता
ऐसे ही
सज्जन व्यक्ति को भी
अपनी सज्जनता
छोड़नी नहीं चाहिए

💡 भक्ति : सबसे कठिन
यदि वह श्री कृष्ण प्रेम प्राप्ति
के लिए की जाए
भक्ति : सबसे सरल
यदि वह पलायन अथवा
दिखावे के लिए की जाए

💡 साईं इतना दीजिए
जामे कुटुम्ब समाय
मैं भी भूखा ना रहूं
साधु न भूखा जाए
हे प्रभु बस इतना ध्यान दीजिए जिसमें मेरे
परिवार का पालन पोषण हो जाए और
यदि कोई साधु द्वार पर आ जाए तो वह
भी भूखा ना जाए। अतः धन की कामना
सिमित रखे. अत्याधिक धन सब अनर्थो
की जड़ है और भयंकर उत्पातकारी है.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn



Sunday, 10 July 2016

अतिवादिता


अतिवादिता

*अतिवादिता*

यह बात केवल whatsapp पर ही लागू नहीं होती है। यह बात हमारी समस्त क्रियाओं पर लागू होती है ।

हम में से कुछ लोग केवल *धन* धन धन कमाने में ही लगे रहते हैं

कुछ लोग *कर्जा* ले लेकर धन खर्च करने में ही लगे रहते हैं

कुछ लोग मान *प्रतिष्ठा* में लगे रहते हैं कुछ लोग *स्वाद* में लगे रहते हैं

सब करना है कुछ भी मना नहीं है लेकिन सीमा में *अति* सर्वत्र वर्जयेत्

 मशीन या कंप्यूटर या whatsapp या मोबाइल तभी बुरा है जब उसके चक्कर में हम अपने *दैनिक दायित्वों* को भूल जाए

अथवा वह हमारे जीवन पर इतना हावी हो जाए कि हमारा जीवन *अस्तव्यस्त* हो जाए

अतः अति सर्वत्र वर्जयेत्

ना अति भोजन
ना अति शयन

ना अती कार्य
न अति परिश्रम

ना अती घूमना
ना अती अंतरंग

*अति सर्वत्र वर्जयेत*्
संतुलन में यदि सब होता रहेगा तो कोई भी चीज कोई भी परिस्थिति हमें हानि नहीं पहुंचा सकती अपितु उन सब साधनों से हमें लाभ होता रहेगा


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn




💬 फेसबुक पर https://www.facebook.com/dasabhasgirirajnangia
💻 अधिकृत फेसबुक पेज : https://www.facebook.com/ShriHarinamPress
💻 अधिकृत ब्लॉग : http://www.shriharinam.blogspot.in
🖥 वेबसाइट : http://harinampress.com/
📽यूट्यूब चैनल  : https://www.youtube.com/channel/UCP1O_g-hYWlSJVkRiko0qwQ
🎤 वौइस् नोट्स : http://YourListen.com/Dasabhas
📢 ट्विटर पर : https://twitter.com/dasabhas_vbn

अतिवादिता

Sunday, 20 November 2011

144. अहंकार या विचार




धन होने पर यदि धन का अहंकार है तो
धन कम या नष्ट होने पर 
अहंकार भी नष्ट हो जाएगा

धन न होने पर भी धन के  वृथा अहंकार 
का कारण धन नहीं कुविचार है
जो सत्शास्त्र, सद्विचार, सत्संग से नष्ट होगा !! 


JAI SHRI RADHE


DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia
made to serve ; GOD  thru  Family  n  Humanity