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Friday, 18 August 2017

Dasabhas Lekhni Part 3

Dasabhas Lekhni Part 3


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           दासाभास लेखनी
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💎 भाग 3⃣

1⃣ होली के साथ साथ प्रिया प्रियतम की झूलन लीला भी निकुंज में नित्य होती है।

2⃣ जिसके पास एक सौ रुपये की पूंजी नहीं, धन नहीं उसका शनि ग्रह बिगाड़ेगा तो क्या बिगाड़ेगा ऐसे ही जो भजन की एबीसीडी जानता नहीं, भजन करता नहीं, भक्ति का परिचय नहीं, केवल निंदा ही निंदा; तो उसका अपराध बिगाड़ेगा भी तो क्या ? भजन हो तो ही तो कुछ बिगड़ेगा। क्या सोचते हैं आप?

3⃣ विरक्ति या वैराग्य केवल बाबा जी या विरक्तों के लिए नहीं है संसारी, गृहस्थी व्यक्ति को भी धीरे धीरे विरक्ति - वैराग्य का अभ्यास करना चाहिये।

🔔 ।। जय श्री राधे ।। 🔔
🔔 ।। जय निताई  ।। 🔔

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Tuesday, 5 July 2016

सूक्ष्म सूत्र गागर में सागर भाग 16

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 16

💡 आजकल कुछ नए नए साधक
मानसी सेवा की उपासना की
बड़ी-बड़ी बातें करते हैं.
उन्हें अपने श्री गुरुदेव से समझना
चाहिए कि यह मानसी सेवा है क्या?
केवल नए शब्द सुन लेना और
उनका प्रयोग चाहे जहां कर लेना
हास्यास्पद ही है

💡 'मानसी सेवा'
मैं कोई साधक यदि प्रिया-प्रीतम
की होली लीला में प्रवेश कर जाता है
तो इसकी सफलता तभी मानी जाएगी
जब कि साधक का आवेश टूटने के बाद
उसके वस्त्रों पर होली के रंग दिखें.
अन्यथा उसका मानसी में प्रवेश
हुआ ही नहीं ऐसा मानना होगा।

💡 दैन्यता
शब्दों में नहीं-प्रदर्शन में नहीं
आचरण में होनी चाहिए.
आपको प्रयास ना करना पड़े सामने वाला स्वत: अनुभव करे
वह है दीनता.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
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