Showing posts with label Suksham Sutra. Show all posts
Showing posts with label Suksham Sutra. Show all posts

Monday, 4 September 2017

Suksham Sutra Part 51


⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱

     सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

🔮 भाग 5⃣1⃣

💡 किसी कार्य को कर के यह देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है कि जैसा हम चाहते थे वैसा वह हुआ भी है कि नहीं.

💡 सब काम का जिम्मा सरकार पर मत थोपो, एक करोड़ खर्च करके कोठी बनवा सकते हो, कार खरीद सकते हो, विदेश घूम सकते हो तो घर और आॅफिस के सामने की दस गज सड़क भी आप बनवाकर उसकी स्वच्छता का जिम्मा ले लो, उदार बनो - आनंद मिलेगा.

💡 जो कार्य कोई और कर सकता है वह आप भी सीख सकते हो और जो आप नहीं सीख सकते उसे कोई और कैसे कर सकता है? ऐसी विचारधारा मन में रखकर जीवन के अन्तिम क्षण तक कर्मशील रहना चाहिए.

🐚 ।। जय श्री राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय निताई  ।। 🐚

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Saturday, 22 July 2017

Suksham Sutra Part 45

⚱️⚱️⚱️⚱️⚱️⚱️⚱️⚱️⚱️⚱️
सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

🔮 भाग 4⃣5⃣

💡 भगवान की कृपा से मनुष्य जन्म प्राप्त होता है और उनकी अति कृपा से भक्ति प्राप्त होती है .

💡 भगवदीय आचरण में संलग्न रहने पर अधिक पूजे जाऔगे, यह ऐसे ही है जैसे हाथी पर भगवान की सवारी निकले और सब लोग उन्हें प्रणाम करें - इस पर हाथी ये समझे कि लोग मुझे प्रणाम कर रहे हैं, यह उसका भ्रम ही तो है, अतः भगवत कृपा को अपना पुरुषार्थ मान अहंकार करना क्या भूल नहीं है?

Saturday, 25 February 2017

Sukshm Sutra Part 40



⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱
सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 4️⃣0️⃣

💡 श्रीमहाशिवरात्रि की जय
भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीगीता  में कहा
वैष्णवानां यथा शम्भु:

Tuesday, 27 December 2016

Suksham Sutra 32



⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱
सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 32

💡 मित्र दुराचारी है, अहंकारी है,
मतलबी है, पसन्द नही है,
उसकी मित्रता एकपक्षीय है,
ये सब पीठ पीछे कहने के लिए है.
पर सामने ससब कुछ नजरअंदाज
करते है हम लोग और
उसका साथ नही छोड़ते. क्यों?
क्योंकि वह धनवान है.
'सर्वे गुणाः कांचनमाश्रयन्ति'

💡 सबसे बड़ा धनी वह है जो
अपनी आय से कम व्यय करता है
किसी से ऋण से नही लेता.
किसी का धन बाकि नही रखता.
उधार खरीदारी नही करता,
यदि कोई कारण बन जाए तो
मांगने से पूर्व ही उसे चूका देता है.

💡 धन अर्जन करना साधन है.
साध्य है-उस धन को भोगना,
परिवार का पालन करना,
समाज और राष्ट्र कल्याण करना.
परन्तु कभी कभी मनुष्य धनोपार्जन में ही
इतना तल्लीन हो जाता है की
साध्य को भूल जाता है और केवल साधन में ही
लगा रह जाता है. परिणामतः जीवन पर्यन्त
क्लेश और कष्ट भोगता रहता है|

 ॥ जय श्री राधे ॥ 
 ॥ जय निताई  ॥ 

 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn