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Monday, 4 September 2017

Imandaar



✔ *ईमानदार* ✔

➡ वो है जो मन वचन कर्म में एक सा है । कहता है कुछ , करता है कुछ, मन मे है कुछ उसे बोलचाल की भाषा मे बेईमान कह सकते हैं ।

➡ ऐसे ही
आर्त भक्त
जिज्ञासु भक्त
अर्थार्थी भक्त

➡ ये तीनो कहे तो भक्त ही जाते है, लेकिन ये विशुद्ध भक्त नही हैं । विशुद्ध भक्त वे हैं जो प्रिया लाल जु के सुख के अतिरिक्त कुछ नहीं सोचते ।

➡ इसी प्रकार एक बार कृष्ण नाम लेने वाला भी वैष्णव तो है ही, लेकिन वो विशुद्ध वैष्णब नहीं, विशेष कर आज के समय मे हम

➡ बात तो भजन भक्ति की करते हैं,
मन मे है प्रतिष्ठा, और
काम करते है धन उपार्जन के

➡ ऐसे हम जिनकी कोरी बातें हैं, भजन की । हमारा ना तो मन है, ना प्रयास है, ऐसे हम

➡ बेईमान वैष्णव की श्रेणी में आते हैं । सूक्ष्म चिंतन है, साथ ही मेरा स्तर बहुत ही प्राथमिक है, इसलिए अभी इतना ही समझ आया, बहुत ऊंची बात अभी समझ नही आती । सन्त सज्जन कृपा से आने लगेगी ।

➡ दासाभास का वैष्णवजन को प्रणाम

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚

🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚



  लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया  
LBW - Lives Born Works at vrindabn  

Friday, 7 October 2011

100. bhakt 4 prakaar ke

✅  भक्त चार प्रकार के ✅  

१. आर्त
▶ जो अपने दुखों से छुटकारा पाने के लिए भक्ति  करते हैं

२. जिज्ञासु
▶ जो कृष्ण को  जानने के लिए या केवल जानकारी के लिए भक्ति  करते हैं

३. अर्थार्थी
▶ जो अर्थ, यश, पुत्र,व्यापार=किसी लौकिक कामना के लिए भक्ति करते हैं

४. ज्ञानी
▶ जो कृष्ण की प्रीती, उनको सुख, उनकी अनुकूलता मयी सेवा या ये कहिये की भक्ति के लिए
भक्ति करते हैं, न कोई कामना, न दुःख की निवृत्ती - ये विशुद्ध भक्त हैं

▶ अनपढ़ा से ४ क्लास पढ़ा हो,ना अच्छा है,- अभक्त से कोई भी भक्त होना अच्छा है
▶ लेकिन क्लास आगे और भी हैं, चलते रहिये



 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया  
LBW - Lives Born Works at vrindabn

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