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Tuesday, 28 November 2017

Hamara Target Kya



✔ *हमारा टारगेट क्या* ✔

↪सृष्टि में विविधता है और विविधता सृष्टि का प्रथम महत्वपूर्ण गुण है । दो पत्ता भी एक सा नहीं है दो मनुष्यों की शक्ल भी एक सी नहीं है ।

 ↪इसी विविधता के कारण कुछ मनुष्य सदाचार परोपकार स्वधर्म पालन में लगे हुए हैं और उनका टारगेट संभवत यश है ।

↪कुछ मनुष्य धनोपार्जन में लगे हुए हैं येन केन प्रकारेण धनोपार्जन करना उनका टारगेट धन है।

 ↪कुछ मनुष्य येन-केन-प्रकारेण अपनी कामनाओं की पूर्ति में लगे हुए हैं यह कामना यह वासना यह इच्छा वह इच्छा ।

↪कुछ लोग ऐसे हैं जो इस जीवन के दुखों से परेशान हो गए हैं वह इस संसार में बार-बार आने जाने से मोक्ष चाहते हैं ।

↪इन सब के अतिरिक्त हम आप जैसे कुछ लोग हैं जो भक्ति में लगे हुए हैं भजन में लगे हुए हैं कृष्ण चरण सेवा चाहते हैं भगवान की कृपा चाहते हैं भगवान की कृपा से भगवान की चरणों की परमानेंट सेवा चाहते हैं ।

↪अब बात यह है कि जो जो चाहते हैं उस में लगे हुए हैं हम लोग यदि भजन भक्ति चाहते हैं तो हम यह समझ लें कि हमारे जीवन का जो मुख्य उद्देश्य है भजन । भक्ति । हमारा जीवन, कम से कम हमारा जीवन भजन भक्ति के लिए मिला है ।

 ↪और यदि भजन भक्ति के लिए जीवन मिला है तो सबसे अधिक प्राथमिकता हम भजन भक्ति को दें अधिक समय भजन भक्ति को दें और संसार में जो दायित्व हमारे ऊपर हैं उन्हें अनासक्त होते हुए निभाते रहे और संतुलन रखें । जो विभिन्न विषयों में संतुलन रखकर साधते हुए चलता है वही साधु है ।

↪फिर भी जैसे किसी का टारगेट धन है किसी का टारगेट यश है किसी का टारगेट कामना है किसी का टारगेट मोक्ष है । हमारा टारगेट भजन है, भक्ति है ।

↪यह सदा स्मरण रहे तो हमारे प्रयास भी इस ओर अधिक से अधिक होने लगेंगे ।

जय श्री राधे जय निताई
समस्त वैष्णव जन को दासाभास का प्रणाम

Sunday, 6 August 2017

Dasabhas Lekhni Part 2

Dasabhas Lekhni Part 2


🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒
       दासाभास लेखनी
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💎 भाग 2⃣

1⃣ निकुंज में प्रियाप्रियतम द्वारा प्रतिदिन होली लीला खेली जाती है होली नित्य है.

2⃣ दुर्वासा ऋषि ने श्रीराधा जू को वरदान दिया था कि तुम अपने हाथ से जो भी भोज्य पदार्थ बनाऔगी उसमें अमृत का अंश आ जायेगा। उस भोजन को करने वाला अतुलित बलशाली हष्ट पुष्ट रहेगा और समस्त रोगों से बचा रहेगा। इसलिए यशोदा की प्रार्थना पर कीर्ति मैया श्रीराधा जू को यशोदा जी के घर प्रतिदिन भेजती हैं और प्रिया जू यशोदा की रसोई में रन्धन करती हैं और यही पदार्थ श्रीकृष्ण रोज आरोगते हैं। प्रतिदिन रसोई बनाकर प्रिया जू वापिस बरसाना आ जाती हैं।

Saturday, 22 July 2017

Suksham Sutra Part 45

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

🔮 भाग 4⃣5⃣

💡 भगवान की कृपा से मनुष्य जन्म प्राप्त होता है और उनकी अति कृपा से भक्ति प्राप्त होती है .

💡 भगवदीय आचरण में संलग्न रहने पर अधिक पूजे जाऔगे, यह ऐसे ही है जैसे हाथी पर भगवान की सवारी निकले और सब लोग उन्हें प्रणाम करें - इस पर हाथी ये समझे कि लोग मुझे प्रणाम कर रहे हैं, यह उसका भ्रम ही तो है, अतः भगवत कृपा को अपना पुरुषार्थ मान अहंकार करना क्या भूल नहीं है?

Saturday, 24 June 2017

Lokik Priyata Ke karan

Lokik Priyata Ke /karan


 ✔  *लौकिक प्रियता के कारण*    ✔

▶ वैसे तो प्रिय लगने के अनेक कारण है
जो हमारी हां में हां मिलाये
जो हमारी प्रशंसा करे । वह सहज ही हमें प्रिय लगता है

▶ भगवान कृष्ण को भी उनकी प्रशंसा करने वाले
उनके गुण लीला का गान करने वाले
उनकी स्तुति करने वाले
उनकी पूजा करने वाले
उनकी भक्ति करने वाले

▶ इतने प्रिय है, इतने प्रिय है, कि भगवान उनको प्रिय तो क्या, उनके वशीभूत हो जाते हैं

▶ दूसरे हैं हमारे रिश्तेदार जैसे पति, पत्नी, बेटे-बेटिया, मामा, चाचा,  साले, जीजा आदि-आदि ।

▶ लेकिन यह जो रिश्तेदार हैं कोई कोई तो वास्तव में प्रिय लगते हैं कोई-कोई केवल रिश्ते  के कारण प्रिय लगाने पड़ते हैं, प्रिय लगते नहीं निभाने पड़ते हैं

▶ और कुछ होते हैं जो अकारण ही प्रिय लगते हैं उनके प्रिय लगने का कोई विशेष कारण नहीं होता है । या तो स्वभाव मिलता है या प्रभाव मिलता है या ऐसे ही पता नहीं क्यों अच्छे लगते हैं । कुछ मित्र भी प्रिय लगते हैं । भक्तों के मित्र भक्त ही होते हैं

▶ कुल मिलाकर जो प्रिय के लिए प्रिय लगते हैं उन्हीं से ही निभाना श्रेयस्कर है । क्योंकि प्रियता का आधार प्रियता ही होगा तभी ठीक होगा ।

▶ प्रियता का आधार रिश्ता होगा,
प्रियता का आधार चाटुकारिता होगी,
प्रियता का आधार धन के प्रति आकर्षण होगा,
प्रियता का आधार चटर-पटर होगा
प्रियता का आधार प्रशंसा होगा

▶ तो यह कारण समाप्त होने पर इनका कार्य प्रियता समाप्त हो जाएगा और यदि प्रियता का आधार प्रियता होगा । कारण भी प्रियता कार्य भी प्रियता वह कभी समाप्त नहीं होगा  ।

▶ प्राय देखा भी गया है कि जहां प्रियता का अभाव होता है वहां रिश्ता टूट जाता है।

▶ लेकिन जिस प्रियता मेंं रिश्ते का भले ही अभाव हो वहाँ प्रियता कभी नहीं टूटती ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Tuesday, 9 May 2017

Shri Narsimha Caturdasi

Shri Narsimha Caturdasi


🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

श्री नृसिंह जयंती आज

▶ स्वयंभगवान श्री कृष्ण ने
अनेक अवतार धारण किए हैं

▶ पुरुष अवतार
▶ लीला अवतार
▶ मन्वंतर अवतार
▶ युगावतार आदि
▶ अनंत अवतार भगवान ने लिए है

▶ किसी में उन्होंने युगधर्म का प्रवर्तन किया
किसी में उन्होंने वेदों की रक्षा की
किसी में सागर मंथन करवाया
लेकिन साथ ही
▶ आज के दिन जो श्री नरसिंह जयंती है
नरसिंह अवतार है

▶ यह केवल और केवल अपने भक्त श्री प्रह्लाद की रक्षा के लिए अवतार लिया

▶ इससे यह प्रमाणित होता है के भक्तों की रक्षा करने को भी भगवान पूरा महत्व देते हैं

▶ यदाकदा किसी भी रुप में तो हर समय हर क्षण वे भक्त की रक्षा अप्रकट रूप में करते ही हैं और प्रह्लाद की की भी

▶ लेकिन यदि विशेष रूप से एक अवतार लेना भी पढ़ें तो वह एक क्षण भी देर नहीं लगाते हैं और तुरंत प्रकट होकर भक्त रक्षा करके भक्तों के प्रति अपनी प्रणत  पालता को सिद्ध कर देते हैं

 ▶ नरसिंह जयंती के अवसर पर अपने प्रभु स्वयं भगवान श्री कृष्ण के इस नरसिंह रूप को हमारा शत-शत वंदन
नमन
अभिनंदन
प्रणाम

▶ समस्त वैष्णव वृन्द को दासाभास का प्रणाम

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Saturday, 6 May 2017

Granth Parichay : ShriMadBhagwat Mahapuran Dasham 1


📖 ग्रन्थ परिचय 2⃣ 3⃣ 📖

💢 ग्रन्थ  नाम : श्रीमदभागवत महापुराण
      दशम-1
💢 लखक : श्रीकृष्णद्वैपायन-वेदव्यास
💢 भाषा : संस्कृत मूल-हिन्दी अनुवाद-टीका
💢 साइज़ : 14 x 22 सेमी
💢 पृष्ठ : 425 हार्ड बाउंड
💢 मूल्य : 200 रूपये

Wednesday, 3 May 2017

Janamdin

Janamdin


🌿जन्मदिन🌿

🎂जन्म दिन यानि खुशियों का दिन , साथ ही एक
🔖 चेतावनी का दिन,
क्योंकि हमारे पूरे जीवन में से 😳आज एक वर्ष कम हो गया ।

👤यह मनुष्य जीवन 84 लाख योनियों के बाद मिला है
अतः दुर्लभ है। यह सब जानते हैं। लौकिक भौतिक प्रगति को यदि हम जीवन का उद्देश्य मानते हैं और हमने यह कर ली है तो हम 💃💃💃खुशियां मनाएं,  कोई हर्ज नहीं है।

Monday, 17 April 2017

Sadhak Sadhna Sadhya Teeno Chahiye

Sadhak Sadhna Sadhya Teeno Chahiye


​ ✔  *साधक साधना साध्य
तीनो चाहिए​*  ✔

▶ साधक हैं हम जीव और
साध्य हैं भगवान ब्रजेंद्र नंदन के श्री चरणों की सेवा या प्रिया प्रियतम का सुख और
साधन है भक्ति । भक्ति यानी भजन । भजन यानि अनुकूलता पूर्वक श्रीकृष्ण की सेवा ।

▶ कृष्ण की सेवा या कृष्ण हमारे साध्य हैं ।और राधारानी आश्रय तत्व है । मालिक हैं श्रीकृष्ण की ।

▶ जैसे किसी मकान का कोई एक मालिक होता है मकान को प्राप्त करना है तो मालिक से सौदा कर के मालिक को पैसा दे के मालिक से चाबी प्राप्त करनी होती है ।

Sunday, 19 March 2017

Suksham Sutra Part 42

Suksham Sutra Part 42


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 4️⃣2️⃣

💡 मृत्यु के बाद किसी से
बिछुड़ना
ईश्वर का विधान है परन्तु
जीते जी अपनों से बिछुड़ना
आपका अपना संविधान है

Thursday, 16 March 2017

Aadhyatmik Mane Kya

Aadhyatmik Mane Kya


 ✔  *आध्यात्मिक माने क्या*    ✔

▶ तीन चर्चाएं हैं ।

▶ आधिदैविक,
जिसमें देवी देवताओं के बारे में चर्चा है ।

▶ आधिभौतिक,
जिसमें शरीर, पंचभौतिक इस जगत, कार, बंगले, सुख-समृद्धि आदि के बारे में चर्चा है ।

▶ आध्यात्मिक
इसमें यह जो हमारी आत्मा है जिसको हम दार्शनिक भाषा में जीव कहते हैं और जो जीव श्रीकृष्ण का अंश है, उस जीवात्मा की चर्चा है ।

Saturday, 11 March 2017

Dasabhas Kahin 11317



​​🙌🏼      🙏🏼     🙌🏼      🔏🔓
🎪जय गौर हरि🎪

📮📮कुछ जिज्ञासाएँ❓
💽💽💽उनके समाधान....।
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮करवाचौथ का व्रत।

 http://yourlisten.com/Dasabhas/karva

💽⏰01:50
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮अक्षत,हल्दी और कुमकुम के बारे में।

http://yourlisten.com/Dasabhas/kumkum

💽⏰02:19
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮एक फोन वार्ता। क्या हमारा भगवान् के साथ कभी संगती हुई है?

http://yourlisten.com/Dasabhas/kyahum

💽⏰20:55
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮जब आत्मा नहीं मरती, फिर सवर्ग नर्क में यातनाये या सुख कैसे कोई ले सकता है।

http://yourlisten.com/Dasabhas/atma

💽⏰02:22
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮कर्म और प्रारब्ध।

http://yourlisten.com/Dasabhas/karmodb

💽⏰04:22
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮खाटु श्याम जी के बारे में।

http://yourlisten.com/Dasabhas/khatu-2

💽⏰02:30
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮एक उपासना और एक भजन।

http://yourlisten.com/Dasabhas/khichadi

💽⏰06:37
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮गरुड़ गोविन्द जी का मन्दिर कहाँ और उसका माहात्म्य।

http://yourlisten.com/Dasabhas/garud-2


💽⏰04:49
➖➖➖➖➖➖➖➖
🎤 डा:श्री गिरिराज दासाभास नांगिया जी
      श्री धाम वृन्दावन से
➖➖➖➖➖➖➖➖
⚠⚠⚠⚠
   

Friday, 3 March 2017

Suksham Sutra Part 41



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 4️⃣1️⃣

💡 यदि शरीर में कष्ट आने पर
आपको वह कष्ट बहुत अधिक
भासता है आप बहुत अधिक
बेचैन हो जाते हैं
तो समझिये आपका
देह में बहुत अधिक अध्यास है
और इसके विपरीत जिसका
देहाध्यास कम हो जाता है
उसे कष्ट भुत कम भासते है.

Saturday, 25 February 2017

Sukshm Sutra Part 40



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 4️⃣0️⃣

💡 श्रीमहाशिवरात्रि की जय
भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीगीता  में कहा
वैष्णवानां यथा शम्भु:

Monday, 20 February 2017

TriSandhya

Trikaal Sandhya


✅ त्रिसंध्या ✅

▶ संध्या उस समय को कहते हैं जब एक समय जा रहा होता है और दूसरा समय आ रहा होता है ।

▶ जैसे सूर्योदय से कुछ समय पूर्व रात्रि जा रही होती है और दिन आ रहा होता है ।

▶ ऐसे ही दोपहर में जब सूर्य चढ़ते-चढ़ते उतरने लगता है लगभग 12:00 बजे का समय वह भी संध्या होती है ।दोपहर म् पूर्वान्ह । मध्यान्ह । अपराह्न । ये तीन काल होते हैं ।

▶ ठीक ऐसे ही शाम को जब दिन छुप रहा होता है और रात्रि आ रही है होती है उसको भी संध्या कहते हैं ।

▶ इस प्रकार दिन में तीन संध्या होती है
एक प्रातः वाली
एक दोपहर वाली और
एक शाम वाली

▶ संध्या का समय भजन के लिए, उपासना के लिए बहुत ही उपयुक्त माना गया है ।

▶ वैष्णव लोग त्रिकाल संध्या करते हैं ।
जैसे काल भी तीन हैं
भूत
वर्तमान और
भविष्य

▶ ऐसे ही संध्याएं भी तीन हैं । संध्या का समय शांत होता है,  नीरव होता है । जो जा रहा होता है वह भी शांत होता है और जो आ रहा होता है वह भी शांत होता है ।

▶ अतः हम वैष्णवजन को प्रयास करके त्रिकाल संध्या के समय अवश्य थोड़ा-थोड़ा भजन बन् पड़े तो करना चाहिए ।

▶ अन्यथा नाम के लिए तो कोई देश, कोई काल कोई परिस्थिति की अपेक्षा नहीं है । कभी भी, कैसे भी कर सकते हैं ।

▶ जिनका मन अधिक चंचल हो, मन न लगता हो वह प्रयास करके इन तीनों संध्याओं में यदि कुछ भजन करें  ।

▶ कुछ उपासना करें , कुछ ध्यान लगाएं , कुछ नाम करें तो उनकी चंचलता अपेक्षाकृत जल्दी ठीक हो सकती है ।

▶ संध्याओं का अपना एक महत्त्व है । उसका लाभ उठाना चाहिए ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Sunday, 19 February 2017

Sukshm Sutra Part 39



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 3⃣9⃣

💡 इच्छा दो प्रकार की होती है-
प्राप्त वस्तु को भोगने की इच्छा और
सुनी सुनाई अप्राप्त वास्तु को
प्राप्त करने की इच्छा .
साधक को दोनों का परित्याग कर
भजन करना चाहिए अन्यथा 
मन इच्छाओं में ही रमता रहेगा
भजन नही हो पायेगा

💡 बुद्धिमान और ज्ञानवान मनुष्य
का भक्त होना कठिन है.
भक्ति के लिए तो सब कुछ का
त्याग करना आवश्यक है.
अपनी बुद्धि भी- अपना ज्ञान भी
क्रुश्नार्प्न करना पड़ेगा तभी
वह भक्त बन पायेगा.
अन्यथा इस अहंकार से ही वह
अधर में लटका रह जाएगा.

💡 जो संसाधन हमे प्राप्त है
उनसे ही अपना वर्तमान
श्रेष्ठतम बनाने का प्रयास करना है.
भविष्य के लिए अपना वर्तमान
बिगाड़ना कोई बुद्धिमानी नही है.
हर अवस्था में यदि इस मूल मन्त्र
को अपना ले तो संतोष-सुख
अवश्य प्राप्त होगा.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Saturday, 18 February 2017

Madhurya Kadambini 6

Madhurya Kadambini 6

✴️माधुर्य कादम्बिनी कथा ✴️

भाग 6⃣

🎙  सवर: दासाभास डा गिरिराज

🏚 वृन्दावन  धाम

🙇🏼 प्रस्तुती  : अनंत हरिदास

http://yourlisten.com/Dasabhas/madhurya-6-6

Tuesday, 14 February 2017

Suksham Sutra Part 38

Suksham Sutra Part 38


⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱
सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 3⃣8⃣

💡 निंद्रा का त्याग और जागना दोनों
एक ही क्षण होता है.
ऐसे ही सांसारिक विषयों का त्याग
और भगवान् की ओर सन्मुखता
एक ही क्षण में होगी. इसलिए
ये सोचना मुर्खता है कि अभी संसार से
मन हटा रहे है फिर भगवान् में लगायेंगे.

💡 कड़वा किन्तु सत्य
जीवन भर प्रवचन सुनते रहना
मोटे मोटे ग्रंथो का स्वाध्याय करना
गुरुचरणों में बैठकर
अनेक ज्ञान की बातें सीखते रहना
ऐसे ही है जैसे जीवन भर एम बी ए की क्लास में
बैठे रहना पर नौकरी के लिए किसी कम्पनी को
ज्वाइन न करना. इसलिए आज ही
भजन करो -भजन.
सुनते ही रहोगे-आचरण में कब लाओगे
   
💡 जाने या अनजाने में भी
यदि किसी वैष्णव के प्रति
अपराध बन जाये तो
सविनय उन्ही के
चरणों में ही जाकर उनसे
क्षमायाचना करनी चाहिए
क्योंकि अपने भक्त के प्रति
किये गये किसी अपराध को
स्वयं प्रभु भी क्षमा नही करते

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Monday, 13 February 2017

Panchdev Aur Bhagwan

Panchdev Aur Bhagwan


✔  *पंचदेव और भगवान*    ✔

▶ सृष्टि में 5 देवों की उपासना प्रचलित है ।

▶ विष्णु
▶ शिव
▶ देवी
▶ सूर्य
▶ गणेश

▶ वैसे तो सभी की उपासना सब करते ही हैं, लेकिन जो लोग गणेश को सर्वोपरि सत्ता मानते हैं वह गाणपत्य कहलाते हैं ।

▶ जो सूर्य को सर्वोपरि सत्ता मानते हैं वह सौर कहलाते हैं ।

▶ जो देवी को सर्वोपरि सत्ता मानते हैं वे शाक्त कहलाते हैं ।

▶ जो शिव को सर्वोपरि सत्ता मानते हैं वह शैव कहलाते हैं और जो

▶ विष्णु को सर्वोपरि सत्ता मानते हैं वह वैष्णव कहलाते हैं ।

▶ विष्णु आदि यह सभी पांच "देव" हैं और यह सभी किसी न किसी प्रकार से भगवान श्री कृष्ण के अंश ही है या आवेश है या शक्तियां हैं या अंश के अंश है । इनमें से कोई भी भगवान नहीं है ।

▶ इसीलिए पंचदेवोपासना कही गई है "पंच भगवान उपासना" नहीं कही गई है । देव अनेक होते हैं । भगवान एक ही होता है ।

▶ श्रीमद भागवत में इन सब का वर्णन करते हुए स्पष्ट कहा है "एते चांश कला पुंसः कृष्णस्तु भगवान स्वयं" । कृष्ण साक्षात भगवान हैं ।

▶ इन् देवों की पूजा करना कोई मना नहीं है लेकिन यदि इनको सर्वोपरि सत्ता या ईश्वर या भगवान मानकर पूजा किया जाए तो श्री कृष्ण के प्रति यह उपेक्षा एवं अपराध है ।

▶ कृष्ण के दास, कृष्ण के सेवक, कृष्ण के अनुचर मान के इनकी पूजा प्रणाम में कोई हानि नहीं है अपितु ऐसा करने से यह देवी देवता भी साधक को कृष्ण प्रेम पथ प्रदान करते हैं । कृष्णा सेवा प्रदान करते हैं । कृष्ण की ओर मोड़ देते हैं ।

▶ भगवान श्री कृष्ण के प्रकाश हैं बलराम । बलराम के अंश है महा विष्णु । महा विष्णु के फिर अंश के अंश है यह ब्रम्हा विष्णु महेश । विष्णु शब्द एक तो इन विष्णु का वाचक है ।

▶ दूसरा विष्णु शब्द का अर्थ होता है विभु जो सर्वत्र व्याप्त है । अथवा विष्णु शब्द का अर्थ इष्ट भी है । जहां लिखा गया इसके पश्चात विष्णु की पूजा करें अर्थात अपने इष्ट की पूजा करें ।

▶ भगवत स्वरुप इष्ट वह कृष्ण, राम, वामन, नरसिंह जो स्वयं भगवत स्वरुप हैं । उनकी पूजा करें यह भाव है ।

▶ विष्णु का अर्थ इष्ट है और वेदों में अथवा पुराणों में विष्णु तक का ही वर्णन है । विष्णु के जो मूल तत्व है श्रीकृष्ण उनका वर्णन विशेष रूप से श्री मदभागवत में हुआ है ।

▶ इसलिए जो श्रीमद्भागवत के परिचय में है वह श्रीकृष्ण को अच्छी तरह जानते हैं और जो कर्मकांडी लोग पुराण आदि के टच में रहते हैं वह विष्णुस्वरूप तक ही पहुंच पाते हैं ।

▶ उसके ऊपर जो उनका मूल तत्व श्री कृष्ण है जो स्वयं भगवान है वहां तक उनकी गति नहीं जा पाती है । इसीलिए हम वैष्णव जन को अपने इष्ट के प्रति समर्पित हमें सदा श्री कृष्ण का ही पूजन उपासना करनी चाहिए ।

▶ श्रीराम से भी श्री कृष्ण में चार माधुर्य अधिक है । श्रीकृष्ण ही मूल तत्व है । परात्पर तत्व हैं । सर्वोपरि सत्ता है । परम ब्रह्म है । परात्पर ब्रहम है । इस बात को सदैव समझे रहना चाहिए ।

🙇🏼समस्त वैष्णव जन को दासाभास का  प्रणाम

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Thursday, 9 February 2017

Shri Nityanand Tryodashi

Shri Nityanand Tryodashi


✔️  *श्री नित्यानंद त्रयोदशी​​​​*    ✔️

▶️ गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के अनेक आचार्यों में से एक श्रील नरोत्तम दास ठाकुर भगवान की स्तुति में लिखते हैं कि जब कोई भगवान श्री नित्यानंद प्रभु के चरणकमलों का आश्रय लेता है तो उसे सहस्त्र चंद्रमाओं की शीतलता का आभास होता है । यदि कोई वास्तव में राधा-कृष्ण की नृत्य-मंडली में प्रवेश करना चाहता है तो उसे दृढ़ता से उनके(नित्यानंद प्रभु के) चरण-कमलों को पकड़ लेना चाहिए ।
कलियुग में भगवान श्री कृष्ण इस भौतिक जगत में श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतरित होते हैं और उनके साथ बलराम जी, श्री नित्यानंद प्रभु के रूप में आते हैं । भगवान नित्यानंद, निताई, नित्यानंद प्रभु और नित्यानंद राम के नाम से भी पुकारे जाते हैं । उन्होंने श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रधान पार्षद की भूमिका में भगवान श्री कृष्ण के पवित्र-नाम को हरिनाम-संकीर्तन द्वारा प्रचार करने का उत्तरदायित्व उठाया था ।

▶️ उन्होंने सामूहिक रूप से भगवान के पवित्र-नाम का कीर्तन करके भौतिक जगत के पतित एवं बद्ध जीवों के मध्य भगवान श्री कृष्ण की कृपा को वितरित किया । हमारे पूर्वाचार्यों की शिक्षाओं के अनुसार ब्रह्माण्ड के आदि (मूल) गुरु, श्री नित्यानद प्रभु का आश्रय लिए बिना श्री चैतन्य महाप्रभु तक पहुँचना या उन्हें समझना असंभव है । वे श्री चैतन्य महाप्रभु और उनके भक्तों के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं । वे भगवान का प्रथम विस्तार हैं, जो श्री कृष्ण के संग बलराम, श्री राम के संग लक्ष्मण एवं श्री चैतन्य महाप्रभु के सं नित्यानंद प्रभु के रूप में प्रकट होते हैं ।

▶️ वे भगवान कृष्ण की सेवा के लिए पांच अन्य रूप लेते हैं । वे स्वयं भगवान कृष्ण की लीलाओं में सहायता करते हैं तथा वासुदेव, संकर्षण, अनिरुद्ध और प्रद्युम्न के चतुर्व्यूह रूप में सृष्टि के सृजन में सहायता करते हैं । वे अनंत-शेष के रूप में भगवान की अन्य कई सेवाएं करते हैं । हर रूप में वे भगवान कृष्ण की सेवा का दिव्य-आनंद का अनुभव करते हैं ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊  लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindan

Tuesday, 7 February 2017

Sabhi Ki Alag Alag Kksha

Sabhi Ki Alag Alag Kksha


✔  *सभी की अलग-अलग कक्षा*    ✔


▶ 'जिस प्रकार एक विद्यालय में पढ़ने वाले 400 बच्चे एक ही क्लास में नहीं पढते हैं ।

▶ 'कोई 2 में कोई 8 में कोई 6 में कोई 12  में पड़ता है । उसी प्रकार भजन करने वाले समस्त भक्त एक ही स्तर के नहीं होते हैं ।

▶ 'उनके भी स्तर होते हैं । बहुत से प्राइमरी स्तर वाले किसी के कहने से या अपने मनमाने ढंग से किसी भी देवी देवता की उपासना या मंत्र या आधा-अधूरा जप करते रहते हैं ।

▶ 'करते करते उन्हें किसी वैष्णव से संपर्क होता है वह वैष्णव फिर उन्हें सही जप,  सही मंत्र, सही राय , सही उपाय बताता है ।