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Thursday, 3 August 2017

Dasabhas Lekhni Part 1

 दासाभास लेखनी

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        दासाभास लेखनी
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💎 भाग 1⃣

1⃣ रुचि एवं आसक्ति का अंतर -   रुचि भजन में होती है और आसक्ति कृष्ण में .

2⃣ रोना सीखना है प्रभु के लिए - कथा गाना नहीं सिखाती रोना सिखाती है, कबिरा हसना बन्द कर रोने से कर प्रीत .

3⃣ प्राय सभी स्तव स्तोत्रों में फल श्रुति होती है कि इसके पाठ से पाप नष्ट हो जाते हैं लेकिन फिर भी व्यक्ति कष्ट क्यों भोगता है। इसमें भाव ये है कि हमारे अनन्तानन्त पाप हैं। अवश्य ही पाठ-स्तव आदि से कुछ हमारे पाप कट ही जाते हैं फिर भी कुछ रह जाते हैं, हमें उन्हें भोगना पड़ता है. पाठ आदि न करें तो इतने पाप हो जाय, भोगने पड़े कि हद हो जाय।

🔔 ।। जय श्री राधे ।। 🔔
🔔 ।। जय निताई  ।। 🔔

🖋 लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Wednesday, 27 July 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 22

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 22

💡 शरीर की आसक्ति
तब समाप्त हो जाएगी
जब यह समझ आ
जायेगा कि में
इस शरीर से परे
आत्मा रूप में अवस्थित
हु नित्य हु और 
श्रीभगवान का दास हु


💡 योग माने अप्राप्त की प्राप्ति
और
क्षेम माने प्राप्त की रक्षा.
भक्तो के इस ‘योगक्षेम’ को
प्रभु स्वंय वहन करते है.

💡दीक्षा गुरु ऐसे होते है जैसे
एक पुरोहित कन्या का विवाह पढ़ते है
विवाह करके उसके पति  से मिलते
है और उसे गृहस्थाश्रम में प्रवेश
करा देते है परन्तु शिक्षा गुरु
उन ननद और सास के समान है
जो पग पग पर उस नव वधु को शिक्षा
देती रहती है. इस लौकिक उदाहरण से
शिक्षा गुरु के महत्व को समझना है.


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn