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Monday, 17 April 2017

Sadhak Sadhna Sadhya Teeno Chahiye

Sadhak Sadhna Sadhya Teeno Chahiye


​ ✔  *साधक साधना साध्य
तीनो चाहिए​*  ✔

▶ साधक हैं हम जीव और
साध्य हैं भगवान ब्रजेंद्र नंदन के श्री चरणों की सेवा या प्रिया प्रियतम का सुख और
साधन है भक्ति । भक्ति यानी भजन । भजन यानि अनुकूलता पूर्वक श्रीकृष्ण की सेवा ।

▶ कृष्ण की सेवा या कृष्ण हमारे साध्य हैं ।और राधारानी आश्रय तत्व है । मालिक हैं श्रीकृष्ण की ।

▶ जैसे किसी मकान का कोई एक मालिक होता है मकान को प्राप्त करना है तो मालिक से सौदा कर के मालिक को पैसा दे के मालिक से चाबी प्राप्त करनी होती है ।

Friday, 13 January 2017

Sadhak Sadhan Sadhya

Sadhak Sadhan Sadhya


✔  *साधक, साधना, साध्य*    ✔

▶ यह तीनों ही आवश्यक है ।
साधक है जीव, जिसने साधना करनी है ।
साधना है भजन और
साध्य है प्रिया लाल जू का सुख

▶ यह बात जब जीव को समझ आ जाती है और उसको अपना स्वरूप समझ आ जाता है कि मेरा जीवन प्रियालाल के सुख के लिए ही मुझे मिला है ।

▶ तो उसके लिए वह उपाय ढूंढता है । कि प्रिया लाल को  मैं कैसे सुख प्रदान कर सकता हूं ।

▶ प्रिया लाल को सुख देने वाले जो भी उपाय हैं उनको साधन कहा गया है ।

▶ साधन में तब तक प्रवृत्ति नहीं होती जब तक प्रिया लाल में दासाभास का आकर्षण नहीं होता ।

▶ प्रिया लाल में आकर्षण तब तक नहीं होता जब तक उनकी महिमा का ज्ञान नहीं होता ।

▶ उनकी महिमा का ज्ञान कराने के लिए दो ही उपाय हैं । एक हैं संत । दूसरे हैं ग्रंथ ।

▶ संत से भी बेहतर है ग्रंथ । क्योंकि संत की उपलब्धि में कठिनाई हो सकती है । समय की पाबंदी हो सकती है । लेकिन ग्रंथ राउंड द क्लॉक आपके पास है ।

▶ संत शायद कभी भूल भी कर जाएं । लेकिन ग्रंथ कभी भूल नहीं करते हैं । जब भी सन्त से मिलें तो उनसे पूछे की हम कौन सा ग्रन्थ पढ़ें । ऐरे गेरे ग्रन्थ अपने मन से न पढ़े ।

▶ इस प्रकार ग्रंथों के अध्ययन से और संतो के संग से प्रिया लाल की महिमा का दासाभास को ज्ञान होता है ।

▶ प्रिया लाल की महिमा के ज्ञान के साथ-साथ दासाभास को अपने स्वरूप का ज्ञान होता है । तब साधन में स्वाभाविक ही रुचि हो जाती है ।

▶ बिना जाने, बिना समझे भी यदि साधन किया जाए तो फल तो देता ही है लेकिन विलंब होता है ।

▶ अतः सबसे पहले स्वयं को जानें,
फिर प्रिया लाल को जाने ।
उनकी महिमा को जाने ।
फिर उस को प्राप्त करने का साधन जाने ।
और उस साधन में यदि हम जुट जाएं तो हमारा जीवन सफल हो जाए और आनंद से भर जाए ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Monday, 12 September 2016

हमारी औकात


​​​✔  *हमारी औकात*    ✔

▶ जीवन में जिस प्रकार हम अपनी योग्यता अपनी शक्ति, अपने धन, अपनी शिक्षा, अपने परिवार के आधार पर ही कामनाएं करते हैं । इच्छाएं करते हैं, कार्य करते हैं । सुख साधन विलासिता जुटाते हैं

▶ उसी प्रकार भजन के क्षेत्र में भी अपनी योग्यता और अपनी परिस्थिति के अनुसार प्रवेश होता है और प्रवेश करने का आदेश है

▶ आजकल सोशल मीडिया पर भगवान की निकुंज लीलाओं को तमाशा बना दिया गया है । यह तमाशा इसलिए बना है के नाम तो भगवान की लीलाओं का और उद्देश्य अपना विषय सुख प्राप्त करने का

▶ हम अभी पहली दूसरी कक्षा के साधक हैं । निकुंज लीला एकदम अल्टीमेट क्लास है । निकुंज लीला के लिए हमें सर्वप्रथम स्त्री-पुरुष के भेद से रहित होना है ।

▶ हम यह भूल जाएं हम स्त्री है या पुरुष है  । यह पहली योग्यता जो कि सोशल मीडिया पर रहने वाले एक भी व्यक्ति में नहीं है

▶ मेरी यह गारंटी है यदि यह योग्यता आ जाएगी तो वह सोशल मीडिया पर नहीं मिलेगा निश्चित निश्चित निश्चित

▶ दूसरी योग्यता दीक्षा

▶ तीसरी योग्यता कम से कम 100000 नामजप

▶ चौथी योग्यता गुरुदेव द्वारा प्रणाली प्रदान करते हुए साधक को चिन्मय देह प्रदान करना

▶ पांचवीं योग्यता साधक को अपने स्वरूप अपने देह अपनी वयस् और अपनी सेवा का ज्ञान होना

▶ इत्यादि अनेक बातें हैं जो शायद मुझे भी अभी पूरी तरह से पता नहीं है

▶ इसको एक गंदे से  उदाहरण से समझता हूं
आपकी माता जब वस्त्र बदलती है तो शायद पिता को भी कमरे से बाहर निकाल देती है और पुत्र होते हुए भी हम उस कक्षा में प्रवेश नहीं कर सकते हैं

▶ लेकिन जब उसका ऑपरेशन होता है तो थिएटर में सारे वस्त्र उतार कर एक गाउन में उसे ले जाया जाता है और थिएटर में डॉक्टर नर्स आदि उसके गाउन को इधर-उधर करके उसका ऑपरेशन करते हैं

▶ तो यह जो है यह उस डॉक्टर और नर्सों की विशेष योग्यता है जो की पुत्र में भी नहीं है । यह उदाहरण बिलकुल भी उपयुक्त नही ।

▶ इसी प्रकार प्रिया प्रीतम की जो निकुंज लीलाएं है वहां उनके निकुंज में आलिंगन चुम्बन मिलन मान राग अनुराग की लीलाएं हैं उनमें हर किसी का प्रवेश कदापि नहीं है

▶ यहां तक कि हमारे सिद्ध स्वरूप गोस्वामी पाद भी यही प्रार्थना करते नजर आते हैं कि आपकी इन लीलाओं का दर्शन कब में किसी निकुंज के झरोखे से करूंगा

▶ तो आप हम किस खेत की मूली है और हमारी औकात क्या है कि हम ठाकुर के निकुंज की अंतरंग लीलाओं की खुले में चर्चा करें साथ ही

▶ उनका सोशल मीडिया पर चिंतन करें उनके निकुंज के चित्रों को यहां प्रकाशित करें आप सच मानिए अपने हृदय को टटोल कर देखिए कहीं न कहीं इस प्रकार की चर्चा से हम अपनी विषय सुखों को पुष्ट करते हैं

▶ मेरी गारंटी है कि हम में से किसी को भी वहां प्रवेश करने की औकात नहीं है । नहीं है । नहीं है ठाकुर की निकुंज लीलाएं केवल श्री गुरुदेव के साथ बैठकर, सिद्ध संतो के साथ बैठकर या मानसिक लीला में एकांत में बैठ कर की जाती है

▶ जहां तक पहुंचने में अभी बहुत देर हे अनेक जन्म लगेंगे अतः सावधान सावधान सावधान

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

हमारी औकात

Thursday, 7 July 2016

अफसोस अवश्य रहे

अफसोस अवश्य रहे


😌 अफसोस अवश्य रहे

🐿शास्त्र में एक साधक के पालन करने के लिए अनेक बातें अनेक आदेश दिए गए हैं । चाहे वह आदेश ना करने के लिए हो या करने के लिए हो

🌳हम गृहस्थी एवं प्राथमिक स्तर के साधक उन आदेश और उपदेशों का पूरा पूरा पालन नहीं कर पाते हैं

🌰और कहीं-कहीं तो बहुत छोटे से आदेश का भी पालन नहीं कर पाते हैं । समझ आते हुए भी ऐसे अनेक लोग हैं जो प्याज खाना भी नहीं छोड़ पा रहे ह ।

🌷ऐसे में शास्त्र के आदेशों का जो पालन हम लोग नहीं कर पा रहे हैं उनमें एक भाव तो यह है कि

🎯अरे भाई अब बड़ा मुश्किल है । कलयुग है । उन्होंने लिख दिया  । कोई ऐसे थोड़ी होता है ।ऐसे थोड़ी हो सकता है । अरे यह तो बड़ा मुश्किल काम है । यह तो हमारे बस का नहीं है यह हो ही नहीं सकता है ।

🎯कोई ऐसा दिखाओ हमको जो ऐसा करता हो यह भाव यदि है तो जीवन में हम उसको प्राप्त नहीं कर पाएंगे

🎯और यदि शास्त्र आदेश का पालन । विधि निषेध का पालन हम नहीं कर पा रहे हैं । साथ ही हमारे मन में एक अफसोस है ।

🕹अरे क्या करें हम तो फस रहे हैं ।

🕹हम चाहते हुए भी एक लाख नाम नहीं कर पा रहे हैं ।

🕹हम चाहते हुए भी प्याज नहीं छोड़ पा रहे हैं

🕹हमारी आसक्ति नहीं छूट रही है

🕹हमारी निष्ठा नहीं बन पा रही है

🕹हम क्या करें हमें बड़ा अफसोस है

🕹प्रभु कब कृपा करेंगे जब हमारा यह सब ठीक होगा

🕹संत कब कृपा करेंगे

🕹गुरुदेव कब कृपा करेंगे जब हम इन आदेशों का पालन कर पाएंगे

🕹यह ग्लानी और यह अफ़सोस यदि बना रहेगा तो एक ना एक दिन छूटने वाली चीजें छूट जाएंगी और प्राप्त करने वाली चीज अवश्य प्राप्त हो जाएगी

🏇क्योंकि हमारे मन में कहीं ना कहीं उस प्राप्ति का या उसको न कर पाने का जो खेद है वही हमें उस और बढ़ाएगा

🏆इसलिए शास्त्र का पालन जितना हो सके उतना हम करें यदि न हो सके तो दादागिरी न करते हुए मन में ग्लानि या अफसोस अवश्य रखें तो सफलता प्राप्त हो जाएगी



🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn


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अफसोस अवश्य रहे


Wednesday, 9 November 2011

134.संतुलन

some rare pics of shri shyamdas ji



मन द्वारा इन्द्रियों को वश मैं करके 
एक साधक सदैव मेरा भजन करता रहता है 
लेकिन मन का यह वशीकरण सतुलन से ही प्राप्त होता है 

न ज्यादा खाने वाले को, न बिलकुल न खाने वाले को,
न बहुत सोने वाले को, न बहुत जागने वाले को 
यह वशीकरण करना संभब नहीं है | 

जीवन के हर क्षेत्र मैं संतुलन बनाये रखने
वाले ही मन को  नियंत्रित करके इन्द्रियों को वश मैं कर लेते हैं

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban