Showing posts with label आत्मा. Show all posts
Showing posts with label आत्मा. Show all posts

Saturday, 11 March 2017

Dasabhas Kahin 11317



​​🙌🏼      🙏🏼     🙌🏼      🔏🔓
🎪जय गौर हरि🎪

📮📮कुछ जिज्ञासाएँ❓
💽💽💽उनके समाधान....।
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮करवाचौथ का व्रत।

 http://yourlisten.com/Dasabhas/karva

💽⏰01:50
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮अक्षत,हल्दी और कुमकुम के बारे में।

http://yourlisten.com/Dasabhas/kumkum

💽⏰02:19
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮एक फोन वार्ता। क्या हमारा भगवान् के साथ कभी संगती हुई है?

http://yourlisten.com/Dasabhas/kyahum

💽⏰20:55
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮जब आत्मा नहीं मरती, फिर सवर्ग नर्क में यातनाये या सुख कैसे कोई ले सकता है।

http://yourlisten.com/Dasabhas/atma

💽⏰02:22
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮कर्म और प्रारब्ध।

http://yourlisten.com/Dasabhas/karmodb

💽⏰04:22
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮खाटु श्याम जी के बारे में।

http://yourlisten.com/Dasabhas/khatu-2

💽⏰02:30
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮एक उपासना और एक भजन।

http://yourlisten.com/Dasabhas/khichadi

💽⏰06:37
➖➖➖➖➖➖➖➖
📮गरुड़ गोविन्द जी का मन्दिर कहाँ और उसका माहात्म्य।

http://yourlisten.com/Dasabhas/garud-2


💽⏰04:49
➖➖➖➖➖➖➖➖
🎤 डा:श्री गिरिराज दासाभास नांगिया जी
      श्री धाम वृन्दावन से
➖➖➖➖➖➖➖➖
⚠⚠⚠⚠
   

Wednesday, 4 January 2012

174. aa t maa naraz hai



क्यों तू नाराज़ है ?

हे परमात्मा !
तुझसे मिलना चाहती है आत्मा 
कई जन्मों से तेरी ओर आ रही है 
बेहद छटपटा रही है 
लेकिन मिल नहीं पा रही है 
इसका क्या राज है 
क्या तू इससे नाराज़ है 

हे कविराज !
कैसा बेतुका प्रश्न करता है आज ?
फिर भी मैं तुझे तेरे प्रश्नों का उत्तर देता हूँ
मैं मनुष्य को देने के सिवाय 
आखिर उससे क्या लेता हूँ 
फिर भी मनुष्य मुझको नहीं 
मुझसे चाहता है 
इसलिए मिल नहीं पता है 
केवल अपनी आत्मा को तडफाता है 

कविवर श्रीहरिबाबू ओम - परासोली, गोवर्धन 

JAI SHRI RADHE

Wednesday, 30 November 2011

152. kis me कौन हूँ मैं

 kis me कौन  हूँ मैं


सब प्राणियों मैं स्थित - आत्मा 
प्राणियों का - आदि, मध्य, अंत यानी जन्म जीवन मृत्यु
अदिति के  बारह पुत्रों मैं - विष्णु 
ज्योतियों मैं - सूर्य 
उन्चाश देवताओं मैं - तेज 
नसत्रों का अधिपति - चन्द्र 
वेदों मैं - सामवेद 
इन्द्रियों मैं - मन 
प्राणियों मैं - जीवन शक्ति 
एकादश रुद्रों मैं - शंकर 
यक्ष - राक्षसों मैं - कुबेर
आठ वसुओं मैं - अग्नि 
पर्वतों मैं - सुमेरु 
पुरोहितों मैं - ब्रहस्पति 
सेनापतियों मैं - स्कन्द 
जलाशयों मैं - समुद्र 
महर्षियों मैं - भ्रगु 
शब्दों मैं - ॐ 
यज्ञों मैं - जप यग्य 
स्थिर रहने वालों मैं - हिमालय 
वृक्षों मैं - पीपल 
देवर्षियों मैं - नारद 

JAI SHRI RADHE

Friday, 28 October 2011

126. कैसे जीतें ?


कैसे जीतें ?



हमारे इस स्थूल शरीर से श्रेष्ठ हैं, बलवान हैं, सूक्ष्म हैं : 'दस इन्द्रियाँ' 
इन्द्रियों से श्रेष्ठ, बलवान है 'मन'
मन से भी सूक्ष्म है, श्रेष्ठ है, बलवान है : 'बुद्धि'
और बुद्धि से श्रेष्ठ, बलवान, सूक्ष्म है : 'आत्मा' 

आत्मा न तो वशीभूत हो सकती है, न आत्मा का प्रयोग किया जा सकता है
अतः आत्मा को छोड़ने पर 'बुद्धि' ही एक ऐसा तत्त्व है
जिसके द्वारा हम
मन को
मन के द्वारा 
इन्द्रियों को जीत सकते हैं

इन्द्रियों को जीतने पर यह शरीर 'ऑटो-मोड' में आ जाता है
समस्त बढ़ा-व्याधियों, दुःख-सुख से ऊपर उठ जाता है

JAI SHRI RADHE