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Monday, 4 September 2017

Suksham Sutra Part 50


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     सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

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🔮 भाग 5⃣0⃣

💡 प्रातःकाल एक रोटी गौ के नाम से बनाकर उसे खिलायें, प्रतिदिन एक रुपया गौ के नाम से अलग निकालें और जब सुविधा हो गौशाला में दान दे, समय निकालकर किसी गौशाला में जाकर गौ दर्शन करें, गौ हत्या रोकने में आपका इतना योगदान भी कम महत्वपूर्ण नहीं.

💡 कुछ साधक भगवान की भक्ति कैसे करें - यह जानने के लिए गुरु की शरण में जाते हैं परंतु वे गुरु भक्ति में ही इतने लीन हो जाते हैं कि उन्हें भगवद भक्ति की विस्मृति हो जाती है, यहाँ तक कि भगवान को भी भूल जाते हैं और गुरु को ही भगवान समझने की भारी भूल कर बैठते हैं.

💡     भजन और भोजन
एकान्त में करने का शास्त्रीय विधान है, विशेषकर नाम जप का प्रदर्शन करना एक अपराध है, वैष्णव लोग माला झोली में माला जपते हैं तो भी उसे छिपा कर रखते हैं, कहते हैं झोली के बिना यदि माला पर जाप किया जाए तो उससे आसुरी शक्तियों को बल मिलता है .

🐚 ।। जय श्री राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय निताई  ।। 🐚

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Sunday, 6 August 2017

Suksham Sutra Part 49



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

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🔮 भाग 4⃣9⃣

💡 एक एम.बी.ए. का शिक्षक छात्रों को पढ़ाता है, पास करके काॅलेज से विदा करता है, जाऔ बेटा धन कमाऔ और स्वधर्म का पालन करो, एम.बी.ए. पढ़कर अनेको छात्र डी.एम,  सी.एम., कंपनी के चेयरमैन और अन्य शीर्ष स्थानो पर पहुँच जाते हैं, परंतु शिक्षक वहीं का वहीं, क्या इससे शिक्षक का महत्व या सम्मान कम हो जाता है? बिल्कुल नहीं. चाहे कितना भी बड़ा अफसर क्यों न बन जाए शिष्य तो शिष्य ही रहेगा. अपने गुरु का सम्मान करेगा ही, ऐसे ही अध्यात्म-गुरु को चाहिए कि शिष्य को ज्ञान देकर भगवद् भक्ति का मार्ग दिखाये और विदा करे. शिष्य से अपना प्रचार न करवाता रह जाये.

💡 श्रीमद्भागवत 8.19.43 में कहा गया है स्त्रियों को प्रसन्न करने के लिए, हास परिहास में, विवाह योग्य कन्या की प्रशंसा करते समय , अपनी जीविका की रक्षा के लिए, प्राण रक्षा के लिए, गौ और ब्राह्मण के हित के लिए तथा किसी को मृत्यु से बचाने के लिए असत्य भाषण उतना निन्दनीय नहीं है.

💡 शास्त्र कल्पतरु हैं : जो बात सिद्ध करना चाहो एक सीमा तक की जा सकती है. अकेले श्रीगीताजी में ही ऐसे दृष्टान्त हैं जिनसे आप ईश्वर को निराकार और साकार दोनों ही सिद्ध कर सकते हैं. इसलिए ये आवश्यक है कि उस विषय का सम्पूर्ण विवेचन हो. विशेषकर इस बात का कि कौन सी बात - कब कही गयी ? किस परिप्रेक्ष्य में कही गयी ? किससे कही गयी ? और क्यों कही गयी ?

🐚 ।। जय श्री राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय निताई ।। 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Sunday, 30 July 2017

Suksham Sutra Part 48


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

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🔮 भाग 4⃣8⃣

💡 शास्त्र में विधि और निषेध दोनों ही बातों का उल्लेख है केवल एक बात को मानने से काम नहीं बनेगा इसलिए - सत्य बोलो और असत्य मत बोलो, धर्म का पालन करो और अधर्म का त्याग करो, सत्संग करो और असत्संग का त्याग करो, सबसे प्रेम करो और द्वेष मत करो.

💡 भगवान की और मन लगाने से बिना प्रयास के ही संसार के विषयों से अपने आप दूरी बढ़ने लगेगी जैसे जब आप हाइवे पर दिल्ली की ओर चलते हैं तो आगरा से दूरी बढ़ने लगती है उसके लिए आपको कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता,

💡 जिन महान ग्रंथों के आस्वादन से जगद्गुरु, आचार्य और स्वामी बनने की योग्यता प्राप्त की जा सके, ऐसे अनेकानेक ग्रंथों की रचना करने वाले श्रीपाद जीव गोस्वामी रचनाकार के रूप में अपना नाभ लिखते थे - 'जीवकः'। अर्थात कोई एक जीव। कितनी दैन्यता। कोई उपाधि नहीं। एक भी श्री नहीं। जो कहना वह करना। यह है - प्रतिष्ठा शूकरीविष्ठा का सटीक उदाहरण।

🐚 ।। जय श्र राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय निताई ।। 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vindabn

Saturday, 29 July 2017

Suksham Sutra Part 47



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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🔮 भाग 4⃣7⃣

💡 सरलता और सहजता श्रेष्ठ मानवीय गुण हैं, इसे दिखाने के लिए यदि प्रयास करना पड़े तो वह एक प्रकार की नाटकीयता ही है।

Monday, 24 July 2017

Suksham Sutra Part 46

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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🔮 भाग 4⃣6⃣

💡 भगवान के नाम का उच्चारण
जप - माला - कीर्तन किसी भी रूप में अभी से प्रारंभ करो, क्योंकि जिसका अभ्यास प्रारंभ से रहेगा अन्त समय वही मुख से निकलेगा, जीवन का अन्त कब होगा यह कोई नहीं जानता।

Saturday, 22 July 2017

Suksham Sutra Part 45

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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🔮 भाग 4⃣5⃣

💡 भगवान की कृपा से मनुष्य जन्म प्राप्त होता है और उनकी अति कृपा से भक्ति प्राप्त होती है .

💡 भगवदीय आचरण में संलग्न रहने पर अधिक पूजे जाऔगे, यह ऐसे ही है जैसे हाथी पर भगवान की सवारी निकले और सब लोग उन्हें प्रणाम करें - इस पर हाथी ये समझे कि लोग मुझे प्रणाम कर रहे हैं, यह उसका भ्रम ही तो है, अतः भगवत कृपा को अपना पुरुषार्थ मान अहंकार करना क्या भूल नहीं है?

Tuesday, 14 February 2017

Suksham Sutra Part 38

Suksham Sutra Part 38


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 3⃣8⃣

💡 निंद्रा का त्याग और जागना दोनों
एक ही क्षण होता है.
ऐसे ही सांसारिक विषयों का त्याग
और भगवान् की ओर सन्मुखता
एक ही क्षण में होगी. इसलिए
ये सोचना मुर्खता है कि अभी संसार से
मन हटा रहे है फिर भगवान् में लगायेंगे.

💡 कड़वा किन्तु सत्य
जीवन भर प्रवचन सुनते रहना
मोटे मोटे ग्रंथो का स्वाध्याय करना
गुरुचरणों में बैठकर
अनेक ज्ञान की बातें सीखते रहना
ऐसे ही है जैसे जीवन भर एम बी ए की क्लास में
बैठे रहना पर नौकरी के लिए किसी कम्पनी को
ज्वाइन न करना. इसलिए आज ही
भजन करो -भजन.
सुनते ही रहोगे-आचरण में कब लाओगे
   
💡 जाने या अनजाने में भी
यदि किसी वैष्णव के प्रति
अपराध बन जाये तो
सविनय उन्ही के
चरणों में ही जाकर उनसे
क्षमायाचना करनी चाहिए
क्योंकि अपने भक्त के प्रति
किये गये किसी अपराध को
स्वयं प्रभु भी क्षमा नही करते

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Tuesday, 31 January 2017

Sukshm Sutra Part 37

Sukshm Sutra Part 37


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 3⃣7⃣

💡 क्रोधी, दम्भी, मात्सर्य
ईर्ष्यावश और
भेदबुद्धि होकर
हिंसा करते हुए
जो मेरी पूजा करता है
वह तामसिक भक्त है.

💡 इन्द्रियों का सुख-भोग
प्रारब्ध के अनुसार
निश्चित ही मिलता है.
इसलिए अपने आप
प्राप्त होने वाले
सुख भोग के लिए
अत्यधिक परिश्रम और
प्रयास की क्या आवश्यकता ?

💡 पाप और पुण्य कर्मो के फल
आपस में एडजस्ट नही होते.
पाप का फल दुःख और
पुन्य का फल सुख
भोगना ही पड़ता है .

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Tuesday, 27 December 2016

Suksham Sutra 32



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 32

💡 मित्र दुराचारी है, अहंकारी है,
मतलबी है, पसन्द नही है,
उसकी मित्रता एकपक्षीय है,
ये सब पीठ पीछे कहने के लिए है.
पर सामने ससब कुछ नजरअंदाज
करते है हम लोग और
उसका साथ नही छोड़ते. क्यों?
क्योंकि वह धनवान है.
'सर्वे गुणाः कांचनमाश्रयन्ति'

💡 सबसे बड़ा धनी वह है जो
अपनी आय से कम व्यय करता है
किसी से ऋण से नही लेता.
किसी का धन बाकि नही रखता.
उधार खरीदारी नही करता,
यदि कोई कारण बन जाए तो
मांगने से पूर्व ही उसे चूका देता है.

💡 धन अर्जन करना साधन है.
साध्य है-उस धन को भोगना,
परिवार का पालन करना,
समाज और राष्ट्र कल्याण करना.
परन्तु कभी कभी मनुष्य धनोपार्जन में ही
इतना तल्लीन हो जाता है की
साध्य को भूल जाता है और केवल साधन में ही
लगा रह जाता है. परिणामतः जीवन पर्यन्त
क्लेश और कष्ट भोगता रहता है|

 ॥ जय श्री राधे ॥ 
 ॥ जय निताई  ॥ 

 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Tuesday, 6 December 2016

Susksham Sutra Part 29


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 29

💡 कुत्ता पालने वाले के घर में पितृ दोष
रहता है, संतान होने में बाधा होती है
और उनके पितर श्राद्ध का अन्न
ग्रहण नहीं करते.
श्रीमद्भागवत के अनुसार 29 नरकों
मैं से एक नरक में
उनके लिए सीट आरक्षित रहती है.

💡 हर प्राणी में भगवान है
यह वाक्य उन दुष्ट कसाई लोगों को
शिक्षा देने के लिए है जो पैसों के लिए
जानवरों की हिंसा करते हैं.और
उन मांसाहारी लोगों के लिए भी
जो डेढ़ इंच की जिह्वा के स्वाद के लिए
बेचारे मुक प्राणियों को
उनके मल मुत्र सहित खा जाते हैं.

💡 एक मात्र भगवान श्रीकृष्ण
सोलह कलाओ के स्वामी है.
श्रीराम ने 12 कलाओं के साथ
परशुराम ने 3 कला,
वामन और नरसिंह ने दो-दो कला
मत्स्य-कश्यप और
वराह ने 1-1 कला
के साथ अवतार लिया था.

 ॥ जय श्री राधे ॥ 
 ॥ जय निताई  ॥ 

 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Thursday, 16 June 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 6

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 6

💡 भक्त की संगति
करने वाला व्यक्ति
यदि भक्ति के रंग में न रंगे
तो मानना चाहिए
भक्त की भक्ति कच्ची है.

💡 किसी वैष्णव में श्रीगुरुदेव के
संग से यदि श्रीकृष्ण भक्ति का
उदय नही हो रहा है तो
गुरु या शिष्य दोनों में से
एक की पात्रता में कमी है,
ऐसा समझना पड़ेगा.
   
💡 बाह्य शुद्धि स्नान से होती है और
अन्तः शुद्धि होती है –
भगवद भजन से, संकीर्तन से
ध्यान से, चिन्तन से, मनन से,
सत्शास्त्र अध्यन और सत्संग से.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊  लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 6

Wednesday, 8 June 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 1

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

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🔮 भाग 1

💡एक कथावाचक
संत भी हो,
विद्वान भी हो,
आचरणशील भी हो,
ऐसा संयोग
बहुत दुर्लभ
होता है |

💡एकादशी में अन्न का जो विचार है,
वह पाप पुण्य से सम्बन्धित है| और
भजन का जो विचार है, वह भक्ति से
सम्बन्धित है | जो केवल खाने
न खाने पर केन्द्रित है उन्हें
पाप पुण्य मिलेगा |
भक्ति तो भजन से ही मिलेगी |

💡 सृष्टि के
मूल महत्तव 23 है –
१ सात्विक अहंकार एवं इससे
२ इंद्र ३ विष्णु ४ यम ५ प्रजापति
६ अग्नि ७ र्क्ज्सिक अहंकार एवं इससे
८ हाथ ९ पैर १० गुदा ११ उपस्थ
१२ वाणी १३ नेत्र १४ कान
१५ नाक १६ जिह्वा १७ त्वचा
१८ तामसिक अहंकार एवं इससे
१९ आकाश २० वायु २१ जल
२२ अग्नि २३ पृथ्वी

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक: आदरणीय Dasabhas DrGiriraj Nangia जी

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