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Tuesday, 14 February 2017

Suksham Sutra Part 38

Suksham Sutra Part 38


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 3⃣8⃣

💡 निंद्रा का त्याग और जागना दोनों
एक ही क्षण होता है.
ऐसे ही सांसारिक विषयों का त्याग
और भगवान् की ओर सन्मुखता
एक ही क्षण में होगी. इसलिए
ये सोचना मुर्खता है कि अभी संसार से
मन हटा रहे है फिर भगवान् में लगायेंगे.

💡 कड़वा किन्तु सत्य
जीवन भर प्रवचन सुनते रहना
मोटे मोटे ग्रंथो का स्वाध्याय करना
गुरुचरणों में बैठकर
अनेक ज्ञान की बातें सीखते रहना
ऐसे ही है जैसे जीवन भर एम बी ए की क्लास में
बैठे रहना पर नौकरी के लिए किसी कम्पनी को
ज्वाइन न करना. इसलिए आज ही
भजन करो -भजन.
सुनते ही रहोगे-आचरण में कब लाओगे
   
💡 जाने या अनजाने में भी
यदि किसी वैष्णव के प्रति
अपराध बन जाये तो
सविनय उन्ही के
चरणों में ही जाकर उनसे
क्षमायाचना करनी चाहिए
क्योंकि अपने भक्त के प्रति
किये गये किसी अपराध को
स्वयं प्रभु भी क्षमा नही करते

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Thursday, 2 June 2016

अपराध



  अपराध  

 पाप वो है जो लौकिक विषय में गलत कार्य है । पाप कुछ किया उसका फल कुछ मिलेगा ।

 भोगना ही पड़ता है । यहाँ या नर्क में । अवश्यमेव भोक्तव्यं

 अपराध का
1 लौकिक जगत स कोई सम्बन्ध नही है ।
2 ये भगवत विषय में की जाने वाली भूलें हैं ।
3 दो शब्दों से बना है । आप एवम् राध । राध माने संतोष । आप माने बाधा ।
4 जब संतोष में बाधा लगे । तब समझो अपराध हुआ ।
5 संतोष में बाधा या असंतोष ।
किसमे असंतोष । चार विषय में । क्योंकि अपराध 4 प्रकार के है
6 नाम अपराध
       सेवा अपराध
      वैष्णव अपराध
       भगवद् अपराध
7 जब जब इन चार विषयों में असंतोष हो तो समझो अपराध हुआ है ।
8 वैष्णव अपराध को वैष्णव से क्षमा कराना होता है ।बाकी के तीनो नाम लेने से दूर हो जाते हैं
9 पाप के लिए जेसे नरक हैं ऐसे अपराध के लिए कोई नर्क नही है
10 न ही कोई शारिरिक कष्ट होता है । क्योंकि अपराध का शरीर से कोई लेना देना नही
11 अपराध का सम्बन्ध भजन से है । भजन में असंतोष ही इसका फल है
12 या यों समझिये की प्रोसेस डिले होगा । जो काम 1 साल में होना ह वो 10 साल में होगा ।

अतः पाप और अपराध का अंतर समझे रहिये । बचिए । और डिले होने से बचाइये

🐚 ॥ जय श्री राधे 🐚
🐚 ॥ जय निताई   🐚