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Saturday, 28 April 2018

Bhajan Ka Din | भजन का दिन


⚜ भजन का दिन ⚜

🍓 मुझे तो
कभी - कभी
ऐसा लगता है कि
हर 15 दिन बाद
एकादशी का आना
उन लोगों के लिए है
जिन्हें प्रतिदिन की
 भागदौड़ में
भजन हेतु
पर्याप्त समय
नहीं मिलता ।

🍓 15 दिन में
एक पूरा दिन
भजन के लिए,
आज दुकान,
ऑफिस से छुट्टी
और विशेषकर
 भोजन से छुट्टी ।

🍓 आज यदि
दबाकर भजन
कर लिया जाये
तो आगामी
15 दिन तक
बैटरी चार्ज रहेगी ।

🍓 और सच
 मानिये
बहुत सारे
वैष्णव ऐसा कर रहे हैं,
मेरे टच में हैं ।
आप भी कुछ
प्रयास करिये

समस्त वैष्णव जन को दासाभास का प्रणाम

🐚 ।। जय श्री राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय  निताई ।। 🐚

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

धन्यवाद!!
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Sunday, 15 January 2017

Suksham Sutra 34



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 3⃣4⃣

💡 एकादशी व्रत नित्य कर्म है क्योंकि या श्रीभगवान की प्रीटी विधान के लिए किया जाता है. और एनी व्रत नैमितिक कर्म हैं जो किसी चाहना या मन्नत के लिए किये जाते हैं और उनकी अवधि निश्चित होती है जैसे- नवरात्र के 9 दिन, सोमवार के 16 दिन, वैभव लक्ष्मी के २१ दिन आदि आदि. फिर उन्हें छोड़ देते हैं. किन्तु एकादशी व्रत कभी भी छोड़ा नही जाता.न ही उसका पारण करना शास्त्र विधान है.

💡 कर्म दो पत्रकार के हैं. एक: नित्य कर्म - दो: नैमितिक कर्म. नित्य कर्म वे है जो बिना किसी निमित्त के सदैव किये जाएं और नैमितिक कर्म वे हैं जो किसी निमित्त के लिए विशेष रूप से किये जाएँ और निमित्त पूरा होने पर छोड़ दिए जायें. जैसे विवाह से पूर्व गणेश या नवग्रह पूजन या सुटक पातक के समय धार्मिक कर्मकाण्ड.

💡 जब फल पक जाता है तो वह मीठा हो जाता है नर्म हो जाता है और उसका रंग आकर्षक हो जाता है. ऐसे हो जब व्यक्ति परिपक्व हो जाता है तो उसकी वाणी में मिठास आ जाती है. वह विनम्र हो जाता है और उसका ललाट तेजोमय हो जाता है.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Monday, 11 July 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 19

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 19

💡 कर्म का फल अवश्यंभावी है
चाहे कितने ही जन्मों के पश्चात
क्यों ना मिले उसका फल जीव को
अवश्य भोगना होता है। 101 जन्म
पूर्व अनजाने में एक सर्प को
कँटीली झाड़ी में फेंकने और इससे
उसके मर जाने के पाप का फल
महान भक्त भीष्म पितामह को
अंतिम अवस्था में शरशैया
पर पड़े रहकर रुकना पड़ा था

💡 सभी व्रत अपनी मनोकामनाओं
की पूर्ति के लिए होते हैं किंतु
एकादशी व्रत भगवान की प्रीति के
लिए है। इस व्रत का लक्ष्य है
अधिक भजन ।शरीर हल्का रहे.
आलस्य ना आए, निंद्रा ना आए,
इसलिए निराहार रहें या केवल
जल पीकर अथवा फलाहार करके
भजन करना चाहिए। मूल में
भजन है ना कि- क्या खाएं -
क्या न खाएं इसी में उलझे रहें।

💡 श्रीमद्भागवत गीता में
भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा है
जो भी मेरी पूजा छोड़कर
अन्य अन्य देवी देवताओं की
पूजा करता है, वह भी
एक प्रकार से मेरी ही पूजा करता है
किंतु वह अविधिपूर्वक है

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
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Wednesday, 8 June 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 1

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

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🔮 भाग 1

💡एक कथावाचक
संत भी हो,
विद्वान भी हो,
आचरणशील भी हो,
ऐसा संयोग
बहुत दुर्लभ
होता है |

💡एकादशी में अन्न का जो विचार है,
वह पाप पुण्य से सम्बन्धित है| और
भजन का जो विचार है, वह भक्ति से
सम्बन्धित है | जो केवल खाने
न खाने पर केन्द्रित है उन्हें
पाप पुण्य मिलेगा |
भक्ति तो भजन से ही मिलेगी |

💡 सृष्टि के
मूल महत्तव 23 है –
१ सात्विक अहंकार एवं इससे
२ इंद्र ३ विष्णु ४ यम ५ प्रजापति
६ अग्नि ७ र्क्ज्सिक अहंकार एवं इससे
८ हाथ ९ पैर १० गुदा ११ उपस्थ
१२ वाणी १३ नेत्र १४ कान
१५ नाक १६ जिह्वा १७ त्वचा
१८ तामसिक अहंकार एवं इससे
१९ आकाश २० वायु २१ जल
२२ अग्नि २३ पृथ्वी

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक: आदरणीय Dasabhas DrGiriraj Nangia जी

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