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Tuesday, 31 January 2017

Sukshm Sutra Part 37

Sukshm Sutra Part 37


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 3⃣7⃣

💡 क्रोधी, दम्भी, मात्सर्य
ईर्ष्यावश और
भेदबुद्धि होकर
हिंसा करते हुए
जो मेरी पूजा करता है
वह तामसिक भक्त है.

💡 इन्द्रियों का सुख-भोग
प्रारब्ध के अनुसार
निश्चित ही मिलता है.
इसलिए अपने आप
प्राप्त होने वाले
सुख भोग के लिए
अत्यधिक परिश्रम और
प्रयास की क्या आवश्यकता ?

💡 पाप और पुण्य कर्मो के फल
आपस में एडजस्ट नही होते.
पाप का फल दुःख और
पुन्य का फल सुख
भोगना ही पड़ता है .

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Tuesday, 23 August 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 26


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर


 भाग 26

 पाप करने से दुःख और
पूण्य करने से सुख
मिलेगा. किन्तु भक्ति
करने से भक्ति मिलेगी
और अगले जन्म में
भक्ति की अगली कक्षा में
प्रवेश मिलेगा.

Saturday, 29 September 2012

252. ARE BABA ! KUCHH KARO !!

ARE BABA ! KUCHH KARO !!

अरे बाबा कुछ करो !

यदि भगवान् चाहते की हम कुछ न करें  तो
हमें एक गोल पत्थर बना कर हिमालय के ऊपर रख देते

हमें आँख, नक्, कान, हाथ, मन, मस्तिष्क 
बुद्धि, वाणी, आदि-आदि देकर सब तरह से लैस 
करके किस लिए भेजा ??

खाली बैठ कर प्रारब्ध-प्रारब्ध रोने के लिए नहीं
अपितु कुछ करने के लिए ये सब दिया है

दिए हुए का उपयोग नहीं करोगे तो अगले जन्म में 
नहिं मिलेगा, मिलेगा भी तो बन्दर की तरह
आँख, नक् आदि सब है, लेकिन किसी काम का नहीं

अतः कुछ करो ! बहुत ही अच्छा हो की भजन करो !!!!!!!!!!
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Thursday, 3 May 2012

206. praarabdh



प्रारब्ध 

१. हानि
२. लाभ 
३. जीवन 
४. मरण 
५. यश 
६. अपयश 
-ये ६ प्रारब्ध के वश में हैं. प्रारब्ध क्या है? पिछले जन्म 
में किये गये अच्छे-बुरे कर्मों के फल का इस जन्म में मिलना ही प्रारब्ध है.

-'दैव-दैव आलसी पुकारा'-सब कुछ प्रारब्ध या दैव के अधीन है-ऐसा आलसी कहते हैं.
-यदि ये मान ही लिया जाए कि पूरा जीवन प्रारब्ध के वशीभूत है 
और पिछले जन्म के कर्मों के फल का नाम प्रारब्ध है तो आगामी जन्म का 
प्रारब्ध बनाने के लिये भी तो इस जन्म में कर्म करने चाहिए.

-अतः अवश्य ही कर्म-कार्यों में परिश्रम से अवश्य लगे रहना चाहिए.
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia

praarabdh