Tuesday, 5 July 2016

शरणागति की ए बी सी डी

शरणागति की ए बी सी डी


🍎 शरणागति की ए बी सी डी 🍎

यह एक ऐसा शब्द है जो भक्ति राज्य में अत्यधिक प्रचलित है । भगवान का एक नाम भी है शरणागत वत्सल । हम भी भगवान से कहते हैं प्रभु हम आपके शरणागत हैं

🍎शरणागति को छह प्रकार से शास्त्र में बताया गया है शरणागति की

🔔 पहली सीढ़ी है भगवान की अनुकूलता का संकल्प

अर्थात जो भगवान को प्रिय है जिससे भगवान को अनुकूलता प्राप्त होती है आज से हम वही करेंगे

🔔दूसरा है प्रतिकूलता का त्याग अर्थात जो बात भगवान के प्रतिकूल है अथवा जो व्यक्ति भगवान के प्रतिकूल है जो नास्तिक हैं उनका हम त्याग करेंगे । उन सब क्रियाओं का । बातों का। व्यक्तियों का जो प्रतिकूल है हम त्याग करेंगे

यहां तक कि
ताजिए ताहि कोटि बैरी सम यद्यपि परम स्नेही । दुर्जन माता-पिता का भी त्याग

🔔तीसरा है ऐसा विश्वास कि प्रभु ही मेरे रक्षक है हर परिस्थिति में प्रभु मेरी रक्षा करेंगे अपनी रक्षा के लिए चिंतित ना होना

🔔चौथा है पालक के रूप में प्रभु को ही मानना । मेरे रहने मेरे भोजन मेरे वस्त्र मेरा मकान मेरे जीवन की हर प्रकार से रक्षा करने वाले और पालन करने वाले मेरे प्रभु ही है

🔔 पांचवा है आत्मसमर्पण अपने आप को ठाकुर को समर्पण कर देना अर्थात ठाकुर के लिए जीना ठाकुर के लिए मरना ठाकुर की सेवा में ही अपने जीवन को लगा देना । अपने आय व्यय । जीवन । सुख दुख के लिए कुछ भी प्रयास ना करना और

🔔 छटा और अंतिम है सर्व प्रकार के अभिमान और स्वाभिमान का त्याग करके दैन्य धारण करना । अर्थात अपने आप को दीन-हीन मानना

शरणागति के यह 6 लक्षण हैं । हम लोग स्वयं चेक करें कि हम

♦️कितने अनुकूल है

♦️कितना प्रतिकूलता का त्याग किया है

♦️कितना हमें दृढ़ विश्वास है कि प्रभु हमारी रक्षा करेंगे

♦️कितना हमें विश्वास है कि हमारा पालन पोषण प्रभु करेंगे

♦️कितना हमने अपने आपको प्रभु के समर्पित किया हुआ है

♦️और कितना हमने अभिमान त्याग करके दीनता धारण की हुई है ।

📢मेरे अनुमान से 10 या 5% से अधिक मैं तो नहीं हूं

🏃 आप अपना अपना चेक करें  🏃

यदि ये बातें असम्भव लगती हैं या समझ नही आती तो अभी हम शरणागति की ए बी सी डी भी नही जानते हैं ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
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शरणागति की ए बी सी डी

Monday, 4 July 2016

सूक्ष्म सूत्र गागर में सागर भाग 15

⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱
सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 15

💡 जिन्होंने कभी प्रत्यक्ष में
ठाकुर सेवा नही की है
अंग-राग नही किया,
ठाकुर को वस्त्र नही धराये
श्रृंगार नही किया
मन्दिर नही बुहारा-
उनका मानसी सेवा में
प्रवेश कैसे होगा
यह सन्देहास्पद ही है.

💡 सात्विकता से अर्जन किया गया धन
आवश्यक जरूरतों के साथ-साथ
परोपकार और दान में खर्च होता है.
राजसिकता से प्राप्त धन अत्यधिक
भोग, दिखावे, और अय्याशी में
खर्च होता है और
तामसिकता से प्राप्त धन
परपीड़ा, जुआ,नशा, मुकदमा,
रिश्वत और रोग में खर्च होता है.

💡 समस्या की बजाय
समाधान
पर फोकस करें
यदि हम समाधान का हिस्सा
नही है
तो सच मानिये
सबसे बड़ी समस्या हम स्वंय है.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

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दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
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मनोबल


*मनोबल*

🔴प्राय हम लोग यह रोज़ सुनते हैं कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत

🔵मन यदि हार गया तो हम हार गए और मन यदि जीत गया तो हम जीत गए

🔴हमारा मनोबल कैसे बना रहे यह बात भी विचारणीय है अपितु यही बात विचारणीय है कि मनोबल बना कैसे रहे

🔵मनोबल बना रहे इसके लिए एक तो आत्मबल चाहिए । आत्म बल के लिए

🙏🏻वैष्णव दृष्टि से भजन और

💚व्यावहारिक दृष्टि से कपट रहित जीवन अधिक-से-अधिक सत्य पर आधारित जीवन

🏺अधिक-से-अधिक साफ-साफ बातें

🦁इससे आत्म बल बना रहेगा । आत्म बल रहेगा तो मनोबल भी रहेगा

😢दूसरे मनोबल हमारा जब गिरता है तब हमें ऐसा लगता है के शायद संसार के सबसे अधिक दुखी असहाय या गरीब या भाग्यहीन व्यक्ति हम ही हैं

😄लेकिन ऐसा नहीं होता है । ऐसे में तुरंत ही हम अपने से हीन व्यक्ति का चिंतन करें तो मनोबल बढ़ जाएगा

🔷किसी भी विषय में चाहे वह धन हो तो अपने से कम धन वाले को देखें कि यह भी तो जी रहा है ना

🔷अपने से कम सुंदरता वाले को देखें यह भी तो जी रहा है ना

🔔अपने से कम सुविधा वालों को देखें

👲🏻हमारे यदि पुत्र नहीं है तीन लड़कियां हैं तो ऐसे को देखें जिसकी संतान ही नहीं है

😡हमारा पति यदि क्रोधी है तो ऐसे को देखें जिसका पति

💋व्यभिचारी भी है
😡क्रोधी भी है
👺शराबी भी है
🤑घर पर कोई खर्चा भी नहीं देता है

🐿🐿इस प्रकार पचासों उदाहरण हमारे इर्द-गिर्द होते हैं 🙎🏼एक हमारी बाई भी है जो झूठे बर्तन मांज कर हंसते हुए चेहरे से 😂सुबह हमारे सामने आती है और शाम को हमारे सामने आती है

🍯🍯उसको यदि हम देखें तो ऐसा लगेगा कि हम संसार के सबसे अधिक प्रसन्न और सौभाग्यशाली व्यक्ति हैं इसप्रकार  संसार में अपने से नीचे को देखना है

🙏🏻🔷🙏🏻और भजन में अपने से ऊंचे को देखना है  । मिस्टर वर्मा यदि बिना कार के रह सकते हैं तो हम क्यों नहीं और

🤔🤔राधा चरण दास यदि एक लाख नाम रोज कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


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Sunday, 3 July 2016

संतान कैसी



   संतान कैसी   

संतान यदि अनुकूल न हो तो हम लोग संतान को ही दोष देते हैं लेकिन हमारी संतान कैसी है इसका बहुत सारा प्रभाव हमारे ही आचरण पर पड़ता है

🔷 नारायणी की माता श्रीवास पंडित की भतीजी

🔷श्रीवास पंडित पंचतत्वों में से एक

🔷महाप्रभु जी का अव्शिष्ट खाने वाली

🔷बृज लीला की किल अंबिका

🔷स्वयं महाप्रभु ने उच्छिष्ट पान दिया

🔷स्वयं महाप्रभु ने उसको रोकर दिखवाया कृपा की और

🔷वह विवाहित होने के बाद शीघ्र ही विधवा हो गई और महाप्रभु एवं श्रीवास के आश्रय में ही रही ।

🔷जिसने जीवनभर महाप्रभु का संकीर्तन सुना और उच्छिष्ट खाया उसका पुत्र फिर वृंदावनदास ठाकुर जैसा नहीं होगा तो कैसा होगा

🔴🔵मेरा आज यह बात कहने का मकसद यह है कि जब महिलाएं गर्भवती हो तो अपने बालक के लिए

🔺अपना आचरण
🔺अपना भजन
🔺अपना भोजन
🔺अपना चरित्र
🔺अपना सब कुछ

🔵यदि शुद्ध रखेंगे तो बालक अच्छा होगा संस्कारवान होगा और

🔴 यदि इन बातों का ध्यान नहीं दिया गया तो बालक अच्छा नहीं होगा और

🔷उसके लिए दोषी होंगे आप और हम

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
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संतान कैसी

Saturday, 2 July 2016

जीव का स्वरूप

✅    जीव का स्वरूप   ✅   

▶ जीव का स्वरूप है
▶ श्री कृष्ण का दास ।

▶ वह अपने स्वरूप को भूलकर आचार्य बन जाता है
▶ यहां भी पेट नहीं भरता तो वह जगद्गुरु बन जाता है

▶ जगतगुरु में भी पेट नहीं भरता तो वह जगद्गुरु तम बन जाता है
▶ वहां भी पेट नहीं भरता तो मूल जगत गुरु बन जाता है

▶ कितनी विडंबना है
▶ वास्तव में प्रत्येक जीव दासही है

▶ दास और मूल पंचम जगद्गुरु कैसा तालमेल है मुझे तो कम से कम समझ नहीं आता है।

▶ केसी विडम्बना है । अफ़सोस

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


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जीव का स्वरूप

Friday, 1 July 2016

श्रीहरिनाम साप्ताहिकी से आज ही जुड़े।

श्रीहरिनाम साप्ताहिकी से आज ही जुड़े।☺🙏

एकादशी व्रत

Ekadshi Fast

✅    एकादशी व्रत   ✅   

▶ एकादशी व्रत

▶ दो रीतियों से रखा जाता है
▶ एक तो लौकिक कामना । पाप निवारण  । शाप निवारण । धन प्राप्ति । पुत्र प्राप्ति ।आदि की कामना से रखा जाता ह ।ै उसमें कर्मकांड की प्रमुखता रहती है । कर्मकांड की प्रमुखता रहने से उसमें विधि निषेध एवं पारण के समय पंडितों को दान आदि अनेक ध्यान रखने पड़ते हैं ।

▶ जिसका वर्णन प्राय बाजार में मिलने वाली पांच ₹10 की एकादशी की पुस्तकों में प्राप्त हो जाता है और मुझे उसका कोई भी ज्ञान नहीं है।

▶ दूसरी तरह का जो वैष्णव व्रत है उसका मूल उद्देश्य है भजन भजन भजन । किसी भी प्रकार से हमारा भजन उस दिन प्रतिदिन के भजन से डबल या अधिक होना चाहिए ।

▶ रात्रि में भी जागरण होना चाहिए और जागरण होकर भजन करना चाहिए यानी भजन भजन भजन ।

▶ इस वैष्णव व्रत की कोई विशेष विधि नहीं है अधिकारी भेद से साधक की अपनी अवस्था के अनुसार जिसे जैसी सुविधा हो भजन करना चाहिए ।

▶ भजन अधिक हो। मन में रजोगुण । तमोगुण आदि की वृद्धि ना हो इसके लिए भोजन की छुट्टी ।

▶ थोड़ा बहुत अपने शरीर रक्षा के लिए दूध दही आलू फल आदि खा लिया जाए और भजन में लग लिया जाए।

▶ अब यह तो है शत प्रतिशत है ।  इसमें हम अपने स्तर के अनुसार जैसे भी जितना भी कर पाएं धीरे धीरे करते रहें और भजन को बढ़ाते रहें यही इसकी विधि है

▶ भगवान को एकादशी व्रत बेहद प्रिय है और जो वैष्णव व्रत रख के भजन करते हैं उसे भगवान की प्रसन्नता साधित होती है

▶ एक वैष्णवों को भगवान की प्रसन्नता से अधिक चाहिए भी क्या

▶ इसलिए आज के दिन अन्न न खाते हुए फल फूल आदि पर निर्भर रहते हुए भजन को केंद्र में रखना ही एकादशी की विधि है

▶ वेसे एकादशी में तो जो शास्त्रीय आदेश है वह निर्जल रहने का है और आज बहुत संत निर्जल रहते भी है

▶ लेकिन शायद हम गृहस्थी निर्जल नहीं रह सकते तो हमें छूट दी गई है कि हम कुछ फल फूल खा लें

▶ रही पारण की बात तो पारण के लिए सूर्योदय से लेकर लगभग नौ साडे 9:00 बजे तक का एक समय होता है जो व्रत के साथ लिखा रहता है उस समय के बीच में कुछ अन्य खाकर ठाकुर को प्रणाम कर देना और इस व्रत को प्रणाम कर देना ही पर्याप्त है

▶ किसी भी प्रकार ब्राह्मण भोजन दान दक्षिणा की आवश्यकता नहीं है । फिर भी साधक को अपनी श्रद्धा अपनी अवस्था अपने स्तर के अनुसार यथासंभव जैसा बन पड़े वैसा प्रारंभ कर देना चाहिए और धीरे धीरे उसे आगे बढ़ाना चाहिए

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया  
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