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Monday, 4 July 2016

मनोबल


*मनोबल*

🔴प्राय हम लोग यह रोज़ सुनते हैं कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत

🔵मन यदि हार गया तो हम हार गए और मन यदि जीत गया तो हम जीत गए

🔴हमारा मनोबल कैसे बना रहे यह बात भी विचारणीय है अपितु यही बात विचारणीय है कि मनोबल बना कैसे रहे

🔵मनोबल बना रहे इसके लिए एक तो आत्मबल चाहिए । आत्म बल के लिए

🙏🏻वैष्णव दृष्टि से भजन और

💚व्यावहारिक दृष्टि से कपट रहित जीवन अधिक-से-अधिक सत्य पर आधारित जीवन

🏺अधिक-से-अधिक साफ-साफ बातें

🦁इससे आत्म बल बना रहेगा । आत्म बल रहेगा तो मनोबल भी रहेगा

😢दूसरे मनोबल हमारा जब गिरता है तब हमें ऐसा लगता है के शायद संसार के सबसे अधिक दुखी असहाय या गरीब या भाग्यहीन व्यक्ति हम ही हैं

😄लेकिन ऐसा नहीं होता है । ऐसे में तुरंत ही हम अपने से हीन व्यक्ति का चिंतन करें तो मनोबल बढ़ जाएगा

🔷किसी भी विषय में चाहे वह धन हो तो अपने से कम धन वाले को देखें कि यह भी तो जी रहा है ना

🔷अपने से कम सुंदरता वाले को देखें यह भी तो जी रहा है ना

🔔अपने से कम सुविधा वालों को देखें

👲🏻हमारे यदि पुत्र नहीं है तीन लड़कियां हैं तो ऐसे को देखें जिसकी संतान ही नहीं है

😡हमारा पति यदि क्रोधी है तो ऐसे को देखें जिसका पति

💋व्यभिचारी भी है
😡क्रोधी भी है
👺शराबी भी है
🤑घर पर कोई खर्चा भी नहीं देता है

🐿🐿इस प्रकार पचासों उदाहरण हमारे इर्द-गिर्द होते हैं 🙎🏼एक हमारी बाई भी है जो झूठे बर्तन मांज कर हंसते हुए चेहरे से 😂सुबह हमारे सामने आती है और शाम को हमारे सामने आती है

🍯🍯उसको यदि हम देखें तो ऐसा लगेगा कि हम संसार के सबसे अधिक प्रसन्न और सौभाग्यशाली व्यक्ति हैं इसप्रकार  संसार में अपने से नीचे को देखना है

🙏🏻🔷🙏🏻और भजन में अपने से ऊंचे को देखना है  । मिस्टर वर्मा यदि बिना कार के रह सकते हैं तो हम क्यों नहीं और

🤔🤔राधा चरण दास यदि एक लाख नाम रोज कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn



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Tuesday, 1 November 2011

130. में बोल रहा हूँ - पापी.........




मेरे एक मित्र जब 
फ़ोन मिलाते थे तो मैं....... बोल रहा हूँ 
परम दुष्ट, पापी - तापी अधम, दुराचारी,व्यभिचारी, कपटी 
आपकी कृपा का प्रार्थी | आपके चरणों मैं प्रणाम |

मैंने  उनसे कहा ऐसा न कहें 
आप हम एक ही पथ के  पथिक हैं | नहीं नहीं मैं .........हूँ 
फिर मैंने उनसे कहा आप यह अभ्यास छोड़े | 
दिन मैं आप जितनी बार फ़ोन करते
हैं उतनी बार आप इन दूषित शब्दों का उच्चारण करते हैं | 
अधिक अच्छा हो इतनी बार आप भगवान्
का  नाम लेंगे तो कल्याण होगा
दैन्य दिखाने के लिए नहीं धारण करने हेतु है 
दैन्य दिखाकर - हम कितनी दैन्यता से पेश आते हैं - 
इस बात का अहंकार भी  धीरे - धीरे घर कर जाता हैं 

शब्द का अपना प्रभाव है अत:
प्रयास करके तामसिक शब्दों का प्रयोग नहीं करना 
चाहिए | गुरुदेव का आशीष है | करुना है |  
आदि सात्विक एवं वैष्णव शब्दों का प्रयोग करने से चित्त 
शुद्ध होता हैं | वातावरण शुद्ध रहता हैं | 

यह विशेषता मैंने कवि कर्णपूर विरचित 
श्री चैतन्य चंद्रोदय नाटक में नोट की | 
कवि कर्णपूर महोदय ने पापी, तापी,दुराचारी, पीड़ा, दुष्ट, मृत्यु, 
एवं विरह परक नेगेटिव शब्दों  का प्रयोग न के बरावर किया है | 
यही कारण है की प्रभु की सन्यास लीला हो या जगाई मधाई उद्धार - 
कभी भी मन मैं खिन्नता  का भाव नहीं आता है |
सदैव आनंद ही आनंद का साम्राज्य विराजमान रहता है    

JAI SHRI राधे

DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia
L B W at Vrindaban