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Saturday, 6 August 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 25

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

 भाग 25
 जो अपने द्वारा दिए गए
उपदेश एवं ज्ञान को
स्वयं आचरण में नहीं
उतारता वह अपना और
दूसरों का अमूल्य समय
नष्ट करता है.
 यह प्रभु ने मुझे दिया है. अब मैं
अपनी ओर से दे रहा हूं.
इस भावना से किसी को
दी गई कोई वस्तु या धन
निवेदन
की श्रेणी में आता है.
 यह प्रभु का है. अब मैं
उनकी ओर से दे रहा हूं.
इस भावना से किसी को
दी गई कोई वस्तु या धन
समर्पण
की श्रेणी में आता है.
 ॥ जय श्री राधे ॥ 
 ॥ जय निताई  ॥ 
 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Sunday, 3 July 2016

संतान कैसी



✅   संतान कैसी ✅  

संतान यदि अनुकूल न हो तो हम लोग संतान को ही दोष देते हैं लेकिन हमारी संतान कैसी है इसका बहुत सारा प्रभाव हमारे ही आचरण पर पड़ता है

🔷 नारायणी की माता श्रीवास पंडित की भतीजी

🔷श्रीवास पंडित पंचतत्वों में से एक

🔷महाप्रभु जी का अव्शिष्ट खाने वाली

🔷बृज लीला की किल अंबिका

🔷स्वयं महाप्रभु ने उच्छिष्ट पान दिया

🔷स्वयं महाप्रभु ने उसको रोकर दिखवाया कृपा की और

🔷वह विवाहित होने के बाद शीघ्र ही विधवा हो गई और महाप्रभु एवं श्रीवास के आश्रय में ही रही ।

🔷जिसने जीवनभर महाप्रभु का संकीर्तन सुना और उच्छिष्ट खाया उसका पुत्र फिर वृंदावनदास ठाकुर जैसा नहीं होगा तो कैसा होगा

🔴🔵मेरा आज यह बात कहने का मकसद यह है कि जब महिलाएं गर्भवती हो तो अपने बालक के लिए

🔺अपना आचरण
🔺अपना भजन
🔺अपना भोजन
🔺अपना चरित्र
🔺अपना सब कुछ

🔵यदि शुद्ध रखेंगे तो बालक अच्छा होगा संस्कारवान होगा और

🔴 यदि इन बातों का ध्यान नहीं दिया गया तो बालक अच्छा नहीं होगा और

🔷उसके लिए दोषी होंगे आप और हम

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn

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संतान कैसी

Saturday, 1 October 2011

87. BHAKTI KE VIGHNA


   ✅  भक्ति के विघ्न  ✅  
    ▶ भक्ति रसामृत सिन्धु ग्रन्थ में भक्ति के ८ विघ्नों का वर्णन आया है, हम खुद आत्म निरीक्षण करके देखे - हम कितने पानी में हैं 
    ▶ शास्त्र में जो मना किया है, उसे करना, जैसे बिहारीजी को पति मानकर राधा जी की सौत बनना=निषिद्ध-आचरण
    ▶ नानवज खाना, जीवों को मन, वचन, कर्म, कार्य से दुःख देना=जीव-हिंसा
    ▶ अपने दुखों की निवृत्ति 'मुक्ति' की कामना करना=मुक्ती
    ▶ भक्त का वेश बना कर या भक्ति का आचरण करते हुए सम्मान पाने या अपनी पूजा की कामना=पूजा  ▶ में एक उंचा भक्त हूँ, सामान्य से श्रेष्ठ हूँ, लोग मुझे प्रतिष्ठित समझें,=प्रतिष्ठा
    ▶ भक्ति करते हुए लौकिक लाभ धन, यश आदि की कामना=लाभ
    ▶ भक्ति करते हुए आश्रम, कार, एसी, स्त्री आदि भोगों की कामना=भुक्ति
    ▶ दूसरे मत के लोगो से सत्संग के नाम पर कुतर्क करना, पूछने के नाम पर समझना कम समझाना अधिक , अपनी बात पर ज़बरदस्ती मुहर लगवाना=कुतर्क 


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚

🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚



🖊 लेखक: आदरणीय Dasabhas DrGiriraj Nangia जी जी (Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban)

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