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Monday, 22 August 2016

अंतर

​​✔  *अंतर*  ✔ 
➡ श्री राम रूप में प्रभु ने अस्त्र । शस्त्र
धारण कर असुरों को मारा
➡ श्री कृष्ण रूप में प्रभु ने
व्रज में अनेक असुर तो मारे
लेकिन अस्त्र नहीं उठाया ।
हाँ द्वारका मथुरा में अस्त्र उठाया
➡ श्री चैतन्य महाप्रभु रूप में प्रभु ने
न तो अस्त्र उठाया
न किसी को मारा ही । अपितु
जो भी दुष्ट थे उन्हें
प्रेम प्रदान कर वैष्णव बना दिया ।
जेसे क़ाज़ी । जगाई माधाइ ​

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

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Wednesday, 19 September 2012

247. 6 BHAG

6 bhag


वैराग्य

१. भगवत स्वरुप में 
श्री, विद्या, यश, वीर्य, वैराग्य,ऐश्वर्य 
इन ६ भगों में 'वैराग्य' भी है.

श्री राम ने तुरंत उसी समय मरते पिता को छोड़कर 
राज - काज  परिवार को छोड़कर बनगमन किया, 
यह उनके अनलिमिटिड वैराग्य का उदहारण है.

वनवास तो लेना ही था 
और चौदह वर्ष काबनवास था, आराम से कुछ दिन रुक कर
पिता का और अन्य राज्य की व्यवस्था आदि करवाकर फिर चले जाते, 
लेकिन वैराग्य की पराकाष्ठा इसी में है की 
तुरंत ही पीछे की व्यवस्थाओ की चिंता किये बिना चल दिए.

२. यही बात कृष्ण ने भी की. 
प्राण प्रियतम  नन्द यशोदा ब्रिजवासी तथा श्री राधा आदि
गोपी गण  को छण   में छोड़कर चले गए .

३. यही बात महाप्रभु गौरांग ने भी दिखाई 
विधवा असहाए वृद्ध शची माँ 
नवविवाहिता विष्णुप्रिया को छोड़कर गृह त्याग दिया.  

श्री, विद्या, यश, वीर्य, वैराग्य,ऐश्वर्य  
यह ६ औरों में भी हो सकते हैं, लेकिन भगवान् में 
ये शत-प्रतिशत होते हैं.

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia

Friday, 6 January 2012

177. hanuman ki upasna


 hanuman ki upasna





✅  *श्री हनुमान की उपासना* ✅ 

▶ श्री हनुमान को 
श्री राम का परमदास मानकर यदि उपासना की जाएगी तो 
वह उपासना एक प्रकार से श्री राम - उपासना ही है |

▶ श्री हनुमान को 
स्वयं उपास्य मानकर की गयी उपासना के फलस्वरूप श्री हनुमान 
उसे अपने स्वामी श्री राम से मिला देंगे, उसे उनकी और मोड़  देंगे | 
अन्ततोगत्वा वह राम उपासक वन ही जायेगा |

▶ लेकिन यह  बात सभी मैं नहीं है 
श्री हनुमान क्योकि राम के परमभक्त हैं अत:वे ऐसा ही करते हैं 

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn