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Monday, 13 June 2016

नवविधा भक्ति


✅  नवविधा भक्ति ✅ 

▶ नवविधा भक्ति के परिचायक
जनरेटर हैं श्री प्रह्लाद

▶ श्रीमद् भागवत में सातवें अध्याय के 5 वे अध्याय में नवविधा भक्ति का वर्णन आता है इसमें

▶ श्रवण
▶ कीर्तन
▶ स्मरण
▶ पाद सेवन
▶ अर्चन
▶ वंदन
▶ दास्य
▶ सख्य और
▶ आत्मनिवेदन

का वर्णन किया गया है  । जब प्रहलाद के पिता ने प्रह्लाद से पूछा के तुम्हारी पढ़ाई कैसे चल रही है तब उन्होंने अपने पिता  हिरण्यकशिपु से कहा की यह नो प्रकार की भक्ति है इसको समझना और उसका आचरण करना ही जीवन की सर्वोत्तम पढ़ाई है । और अध्ययन का फल है ।

▶ तो पिता ने पूछा कि मेरे गुरुदेव शुक्राचार्य के पुत्र षंढ एवं अमर क्या तुम्हें यही पढ़ाते हैं तो प्रह्लाद ने कहा मैं उनकी शिक्षा को ग्रहण नहीं करता हूं

▶ क्योंकि जो भगवद विरोधी शिक्षा दें वह कैसा गुरु । मेरे गुरु तो वास्तव में श्री नारद हैं उन्होंने जो मुझे गर्भ में शिक्षा दी मैं उसी को स्मरण करता हूं और धारण करता हूं ।

▶ आप देखिए भक्ति भजन का सर्वोत्कृष्ट रहस्य एवम् मार्ग नवविधा भक्ति प्रह्लाद जी द्वारा ही श्रीमद्भागवत में प्रकट की गई है और प्रहलाद जी ने इन समस्त भक्तियों का अनुष्ठान किया । विशेषकर श्री कृष्ण के स्मरण में प्रहलाद जी ने दक्षता प्राप्त की ।

▶ इन नौ भक्तियों में

▶ श्रवण भक्ति के आचरण करता है परीक्षित

▶ कीर्तन के आचरण करता है श्री शुकदेव

▶ स्मरण के आचरण करता है श्री प्रहलाद

▶ पाद सेवन करती हैं श्रीलक्ष्मी

▶ पूजन के आचरण करता है राजा पृथु

▶ वंदन के आचरण करता है श्री अक्रुर

▶ सेवा के आचरण करता है श्री हनुमान

▶ और सख््य के आचरण करता है श्री अर्जुन

▶ एवं सर्वतोभाव से आत्म निवेदन करने वाले हैं राजा बलि

▶ यहां यह बात और स्मरणीय है कि नवविधा भक्ति के किसी भी एक अंग को यदि अनन्यता पूर्वक पकड़ लिया जाए तो कृष्ण प्रेम की प्राप्ति हो सकती है

▶ श्री प्रहलाद ने स्मरण का आश्रेय लिया और स्मरण के आश्रय से ही आज के दिन श्री नरसिंह भगवान का प्रादुर्भाव हुआ ।

▶ बोलिए नरसिंह भगवान की जय
▶ प्रह्लाद जी ने ही सर्व प्रथम नव विधा भक्ति का उद्घोष किया । कॉपी पेस्ट नही किया । 😅😀😅😀

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚

🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊  लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया  
LBW - Lives Born Works at vrindabn

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नवविधा भक्ति

Wednesday, 14 December 2011

164. BHAGVAN ME MAN


BHAGVAN ME MAN

भगवान में मन को लगाओ

और कुछ करो न करो
केवल भगवान में मन को लगा लो बस हो गया काम |
यह वाक्य बहुत लोग कहते-सुनते हैं | अच्छा भी लगता है 
और सार का सार भी है |

यह ठीक ऐसी है, जैसा कोई कहे कि
और कुछ करो न करो केवल दो-चार करोड़ रूपए एक बार तुम्हारे पास 
हो जाएँ-बस हो गया काम |

जैसे बिना कुछ करे-धरे दो-चार करोड़ रूपए हमारे पास हो नहीं सकते, 
उसी प्रकार कुछ करे-धरे बिना भगवान में मन लग नहीं सकता 

भगवान में मन लगाने के जो उपाए, जो साधन 
भजन, कीर्तन, सेवा, दर्शन, 
वैष्णव सेवा, अघ्ययन नाम जप, माला, करने ही पड़ेंगे-तभी मन लगेगा 

और मन भी लगते-लगते लगेगा - अतः लगे रहो
वाक्यों में मत उलझो l न इधर के रहोगे न उधर के .

JAI SHREE RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia
made to serve ; GOD  thru  Family  n  Humanity
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban