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Saturday, 27 August 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 26

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

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 भाग 26

 यदि आप कष्ट में हैं
तो सोचो पाप कट रहें हैं,
यदि आनंद में हैं तो सोचो
पूण्य घट रहे हैं इसलिए
जो घट रहा हैं अगले
जन्म के लिए उसका संचय
करना प्रारम्भ कर दो

Sunday, 9 October 2011

103. असत्संग - नरक का द्वार

✅   असत्संग – नरक का द्वार  ✅  

▶ सत्संग का अपोजिट है असत्संग
▶ सत्संग करते हुए चेष्टा पूर्वक असत्संग का भी त्याग करना चाहिए
▶ आप सत्शास्त्रों का संग कर रहे हैं
▶ भजन कर रहे हैं, चिंतन कर रहे पूर्ण आनंद है
▶साथ ही एक
▶आपका कोई दुष्ट मित्र रोज आपके पास आता है
▶उलटे-सीधे नानवेज चुटकुले सुनाता है
▶ बुरी बुरी बातों में ही श्रेष्ठता स्थापित करता है,
▶ इसी प्रकार के ही समस्त  क्रिया - कर्म असत्संग हैं, इनसे बचना चाहिये
▶ अन्यथा विवेक भ्रमित  होता है और
▶ भटकने  की संभावना जाग्रत हो जाती है और
▶ नरकों का द्वार खुल जाता है
▶ अत: सत्संग के साथ साथ असत्संग - त्याग पर भी केन्द्रित रहना चाहिये
▶ वैसे द्रढ़ भाव से सत्संग करने और
▶असत्संग की अवहेलना करने पर, उससे किनारा करने पर असत्संग
▶ स्वत: ही भाग जाता है, फिर भी ध्यान  रखना आवश्यक है

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया  
LBW - Lives Born Works at vrindabn

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