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Saturday, 27 August 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 26

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर

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 भाग 26

 यदि आप कष्ट में हैं
तो सोचो पाप कट रहें हैं,
यदि आनंद में हैं तो सोचो
पूण्य घट रहे हैं इसलिए
जो घट रहा हैं अगले
जन्म के लिए उसका संचय
करना प्रारम्भ कर दो

Tuesday, 18 October 2011

115. स्नेह या प्रेम दो प्रकार का





१. घृत-स्नेह

घी जैसा, घी को अकेला नहीं खाया जा सकता
उसमे बूरा मिलाकर, या घी का परांठा या
हलुआ बनाकर खाया जाता है

२. मधु-स्नेह 

मधु यानी शहद
शहद अपने आप में मीठा होता है
इसमे कुछ मिलाना आवश्यक नहीं, अपने आप में पूर्ण है

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ नांगिया
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban