Friday, 8 July 2016

शरीर और मन

शरीर और मन

✅    शरीर और मन   ✅   

🐿 समय के हिसाब से हमारा शरीर बचपन से किशोर होता है । किशोर से युवा होता है । युवा से प्रौढ़ होता है और प्रौढ़ से बुड्ढा होता है ।

🐿 जैसे जैसे शरीर बचपन से किशोर होता है वैसे वैसे हमारा मन भी किशोर होता है । मन भी युवा होता है । मन भी प्रौढ़ होता है लेकिन अफसोस यह है कि मन बुड्ढा नहीं होता है ।

🐿 मन सदा ही युवा बना रहता है । हमारी इच्छाएं सदैव युवा बनी रहती हैं ।

Thursday, 7 July 2016

सूक्ष्म सूत्र गागर में सागर भाग 18

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 18

💡 जैसे पंचभूतों में पाँच गुण
एक दूसरे में विद्यमान रहते है जैसे-
1. आकाश में शब्द रहता है
2. वायु में शब्द और स्पर्श रहता है
3. तेज में शब्द, स्पर्श और रूप रहता है
4. जल में शब्द, स्पर्श, रूप और रस हैं
5. पृथ्वी में शब्द स्पर्श रूप रस और गंध हैं ऐसे ही...

💡 1. शांत में शांत रस
2. दास्य में शांत और दास्य रस
3. सख्य में शांत, दास्य और सख्य रास
4.वाात्सल्य में शांत, दास्य, सख्य और वात्सल्य रास
5. मधुर में शांत, दास्य, सख्य वात्सल्य और मधुर रस
ये पाँचो समाविष्ट रहते है. इसलिए
मधुर रस सभी रसो में सर्वश्रेष्ठ है.

💡 बिनु सत्संग विवेकु न होई
राम कृपा बिनु सुलभ न सोई
गो0 तुलसीदास जी लिखते है कि
सत्संग के बिना "विवेक"
प्राप्त नहीं होता. और यह सत्संग
राम कृपा के बिना सुलभ नहीं है.
कलयुग में इस सत्संग का सच्चा
साधन है सद् ग्रंथों का रसास्वादन.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
LBW - Lives Born Works at vrindabn

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अफसोस अवश्य रहे

अफसोस अवश्य रहे


😌 अफसोस अवश्य रहे

🐿शास्त्र में एक साधक के पालन करने के लिए अनेक बातें अनेक आदेश दिए गए हैं । चाहे वह आदेश ना करने के लिए हो या करने के लिए हो

🌳हम गृहस्थी एवं प्राथमिक स्तर के साधक उन आदेश और उपदेशों का पूरा पूरा पालन नहीं कर पाते हैं

🌰और कहीं-कहीं तो बहुत छोटे से आदेश का भी पालन नहीं कर पाते हैं । समझ आते हुए भी ऐसे अनेक लोग हैं जो प्याज खाना भी नहीं छोड़ पा रहे ह ।

🌷ऐसे में शास्त्र के आदेशों का जो पालन हम लोग नहीं कर पा रहे हैं उनमें एक भाव तो यह है कि

🎯अरे भाई अब बड़ा मुश्किल है । कलयुग है । उन्होंने लिख दिया  । कोई ऐसे थोड़ी होता है ।ऐसे थोड़ी हो सकता है । अरे यह तो बड़ा मुश्किल काम है । यह तो हमारे बस का नहीं है यह हो ही नहीं सकता है ।

🎯कोई ऐसा दिखाओ हमको जो ऐसा करता हो यह भाव यदि है तो जीवन में हम उसको प्राप्त नहीं कर पाएंगे

🎯और यदि शास्त्र आदेश का पालन । विधि निषेध का पालन हम नहीं कर पा रहे हैं । साथ ही हमारे मन में एक अफसोस है ।

🕹अरे क्या करें हम तो फस रहे हैं ।

🕹हम चाहते हुए भी एक लाख नाम नहीं कर पा रहे हैं ।

🕹हम चाहते हुए भी प्याज नहीं छोड़ पा रहे हैं

🕹हमारी आसक्ति नहीं छूट रही है

🕹हमारी निष्ठा नहीं बन पा रही है

🕹हम क्या करें हमें बड़ा अफसोस है

🕹प्रभु कब कृपा करेंगे जब हमारा यह सब ठीक होगा

🕹संत कब कृपा करेंगे

🕹गुरुदेव कब कृपा करेंगे जब हम इन आदेशों का पालन कर पाएंगे

🕹यह ग्लानी और यह अफ़सोस यदि बना रहेगा तो एक ना एक दिन छूटने वाली चीजें छूट जाएंगी और प्राप्त करने वाली चीज अवश्य प्राप्त हो जाएगी

🏇क्योंकि हमारे मन में कहीं ना कहीं उस प्राप्ति का या उसको न कर पाने का जो खेद है वही हमें उस और बढ़ाएगा

🏆इसलिए शास्त्र का पालन जितना हो सके उतना हम करें यदि न हो सके तो दादागिरी न करते हुए मन में ग्लानि या अफसोस अवश्य रखें तो सफलता प्राप्त हो जाएगी



🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
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अफसोस अवश्य रहे


श्री हरिनाम साप्ताहिकी

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💠 दासाभास डा गिरिराज नांगिया 💠

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Wednesday, 6 July 2016

सूक्ष्म सूत्र गागर में सागर भाग 17



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 17

💡 ऋषि मुनियों और अप्सराओं का
उदाहरण देकर
सर्वदा कामिनी और कंचन की
बाते करने वाले पुरुष
महाकामी है.
साधक को इनके संग और
वार्ता से भी बचना चाहिए.

💡 मनुष्य जीवन पाकर
खाओ पीओ और मौज करो
वाला दर्शन वैसे ही है जैसे
वर्क ऑफिस में कंप्यूटर पर
ऑफिस का काम न करके
आठ घंटे गेम खेलकर
घर वापस आ जाना.

💡 मनुष्य योनी सर्वश्रेष्ठ है
केवल इसी योनी में
पिछले जन्मो के पाप-पुण्य
भोगते हुए नये कर्म
करके अपना अगला जन्म
सुखमय बना सकते है.
तो देर किस बात की है – जुट जाओ.

🐚 जय श्री राधे 🐚
🐚 जय निताई  🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 
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रथयात्रा

🚩🚩 रथयात्रा 🚩🚩

🏺🏺आज पुरी में श्री जगन्नाथ देव जू की रथयात्रा है । पुरी में जहां पर श्री जगन्नाथ जी विराजते हैं उस मंदिर में वैष्णवों का ऐसा भाव है कि

⚱⚱यहां यह द्वारिका में विराजमान है । एक बात और बताता चलूँ कि जगन्नाथ मंदिर में चार विग्रह है ।

⚙एक सुदर्शन है
☝️एक श्री कृष्ण है
🤘मध्य में सुभद्रा है कृष्ण बलराम की बहन औ
🖕दसरी साइड में बलराम

कृष्ण सुभद्रा बलराम और सुदर्शन इन चारों को जगन्नाथ कहा जाता है

Tuesday, 5 July 2016

सूक्ष्म सूत्र गागर में सागर भाग 16

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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 16

💡 आजकल कुछ नए नए साधक
मानसी सेवा की उपासना की
बड़ी-बड़ी बातें करते हैं.
उन्हें अपने श्री गुरुदेव से समझना
चाहिए कि यह मानसी सेवा है क्या?
केवल नए शब्द सुन लेना और
उनका प्रयोग चाहे जहां कर लेना
हास्यास्पद ही है

💡 'मानसी सेवा'
मैं कोई साधक यदि प्रिया-प्रीतम
की होली लीला में प्रवेश कर जाता है
तो इसकी सफलता तभी मानी जाएगी
जब कि साधक का आवेश टूटने के बाद
उसके वस्त्रों पर होली के रंग दिखें.
अन्यथा उसका मानसी में प्रवेश
हुआ ही नहीं ऐसा मानना होगा।

💡 दैन्यता
शब्दों में नहीं-प्रदर्शन में नहीं
आचरण में होनी चाहिए.
आपको प्रयास ना करना पड़े सामने वाला स्वत: अनुभव करे
वह है दीनता.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
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