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Monday, 11 June 2018

Mukhya Baat | मुख्य बात

Mukhya Baat | मुख्य बात


🏅 मुख्य बात 🏅

🎖श्री  रघुनाथ दास गोस्वामी को
उपदेश देते समय कहा था -

🥇अच्छे वस्त्र नहीं पहनना ,
🥈अच्छा भोजन नहीं करना
🥉सांसारिक बातें न करना
न सुनना।  सांसारिक=विशेषकर स्त्री प्रसंग

🎖इतना तो सब को पता है , लेकिन
जो मुख्य बात है , वह है -
'कृष्ण नाम सदा लबे' 

🎖अर्थात सदा , सदैव कृष्ण नाम लेना
कृष्ण नाम होता रहे - ये बात मुख्य है
नाम होता रहे , उसके लिए ये चार बातें हैं
टारगेट नाम है , न की ये चार बातें
समस्त वैष्णववृन्द को दासाभास का प्रणाम

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

धन्यवाद!!
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Friday, 8 June 2018

Kaaran Ya Bhav | कारण या भाव

कारण या भाव

🌀 कारण या भाव 🌀

🌀 किसी भी कार्य के करने में हमारा भाव
ही महत्वपूर्ण है फल का निर्धारण भी
भाव के अनुसार होता है ।
हम भजन को ही ले भजन करते हुए
हम पहचान चाहते हैं तो पहचान
मिलेगी, भगवान नहीं ।
अनेक बार बाहर से एक सी क्रिया
होने पर भी फल भाव के अनुसार
अलग दीखता है ।

🌀 मन्दिर का एक पेड पुजारी
तनखाह के लिए काम करता है ।
उसका सुंदर श्रृंगार करना
उसकी एक्सपर्टता है, भाव नहीं ।
इसलिए वह हजार रुपये अधिक मिलने
पर दूसरे मन्दिर में चला जाता है ।
अतः हमें भी सदा अपने को टटोलते
रहना चाहिए । हम जो कर रहे हैं
वह मूल उद्देश्य के लिए है
जो दिख रहा है या दिल में कोई
छिपा उद्देश्य भी है ।
छिपा उद्देश्य यदि है
तो यह कपट है ।
और कपट चाहे लोक में हो
या भजन में हो कभी भी
सफलता नहीं मिलेगी ।

🌀 अतः शुद्ध मन से कपट
रहित होकर भजन में लगना चाहिए ।
भजन में लगने का कारण
भजन अर्थात श्रीकृष्ण-सुख ही
होना चाहिए । यहाँ तक कि अपने
दुखों की मुक्ति-मोक्ष
को भी कपट ही कहा गया है ।

🙏 समस्त वैष्णव वृन्द को मेरा सादर प्रणाम

🐚 ।। जय श्री राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय  निताई ।। 🐚

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज
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Wednesday, 23 May 2018

Initiation - A Divine Knowledge । दीक्षा - एक दिव्य ज्ञान


🌎  दीक्षा  -  दिव्य ज्ञान  🌎

🌎 जगत में जिस प्रकार उपनयन ( जनेऊ) के बिना ब्राह्मण को
अपने कर्म, यज्ञ, अध्ययन आदि कर्मों का अधिकार नहीं रहता,
उपनयन के बाद अधिकार होता है, इसी प्रकार अदीक्षित मनुष्यों
का भी भगवत् मंत्र अर्चनादि में अधिकार नहीं है । इसलिए अपने को दीक्षित करना चाहिए ।।

🌎 जो व्यक्ति विष्णु दीक्षा को
प्राप्त नहीं होते, अथवा जो जनार्दन की पूजा नहीं करते, जगत में
उन्हीं को 'पशु' कहा जाता है । उनके जीवन धारण का क्या फल
है ?

🌎 जो दिव्य ज्ञान प्रदान करती है और पापसमूह को नाश करती
है, तत्व - कोविद गुरुजनों ने उसका नाम "दीक्षा" कहा गया ।।

🌎 जिस प्रकार रस ( पारे) के विधान द्वारा कांसा भी सोना बन जाता
है, अर्थात यथा विधि पारे के संयोग से काँसा भी सुवर्ण बन जाता
है। इसी प्रकार दीक्षा- विधि से मनुष्यों में भी द्विजत्व उत्पन्न हो
आता है । दीक्षित व्यक्ति का शरीर भजन के उपयोगी अप्राप्त शरीर
को प्राप्त करता है ।

🙏 समस्त वैष्णव वृन्द को मेरा सादर प्रणाम

🐚 ।। जय श्री राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय  निताई ।। 🐚

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज
LBW - Lives Born Works at Vrindabn
समस्त वैष्णववृन्द को दासाभास का प्रणाम


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Wednesday, 2 May 2018

Yogya Guru Nahi Mil Rahe । योग्य गुरु नही मिल रहे


💫 योग्य गुरु नहीं मिल रहे ? 💫

🌈 परोपकारी, समाजसेवी, शरीर धर्मा कुछ जन तो ऐसे हैं,
जो बाह्य शरीर धर्म, पाप से मुक्ति और पुण्य प्राप्ति में
लगे हैं, वे तो यह मानते हैं कि हमें 'गुरु' धारण करने की
आवश्यकता ही नहीं, हम इस पचड़े में नही पड़ते।

🌈 दूसरे कुछ बेहतर जन ऐसे हैं,
जिन्हें इन शरीर धर्मों से ऊपर आत्मधर्म का परिचय
मिला है, उन्हें पता चल गया है कि अध्यात्म में अनेक
मत, पथ हैं, मुझे किसी एक पथ पर अनन्यता से
यदि चलना है तो अवश्य किसी सद्गुरु की
शरण लेनी ही होगी- यह आवश्यक है ।

🌈 ऐसे जन भी फिर यह सोचते हैं कि प्रायः धर्माचार्य,
कथावाचक, आश्रम, मठधारी, हमें तो मायात्याग का
उपदेश दे रहे हैं और स्वयं माया बटोरते हुए विलासी जीवन,
प्रतिष्ठा, रजोगुण में व्यस्त हैं- ये गुरु होने लायक नहीं ।

🌈 इन विचारों के मूल में मुख्य है- हमारी स्वयं की
योग्यता- अयोग्यता। ठीक वैसे, जैसे हम प्रवेश परीक्षाएं
देते हैं और हमारा नम्बर आता है हजारवां, तो हमें अच्छे
काॅलेज में प्रवेश नहीं मिलता, हल्के काॅलेज में भी लाखों
रुपये डोनेशन देकर मुश्किल से मिलता है

🌈 एवम् जिनका दसवां, बीसवॉं नम्बर आता है
उनके पास एक नहीं अनेक काॅलेज के आॅफर आ जाते हैं ।
बिना फीस लिए उनका प्रवेश हो जाता है,
डोनेशन की तो कोई बात ही नहीं ।

🌈 अतएव परिणाम यह निकलता है कि यदि हममें एक अच्छे
शिष्य के गुण हैं योग्यता है तो हमें एक अच्छे संत,
सद्गुरु सहज प्राप्त हो जाते हैं। अन्यथा तो हर एक
अयोग्य शिष्य भी भगवद्प्राप्त सिद्ध सद्गुरु चाहता है ।

🌈 लेकिन ऐसा गुरु मिलेगा कैसे और क्यों ?
सन्तों की, भगवद् प्राप्त वैष्णवों की आज भी कमी नहीं,
डिजर्व कीजिए फिर डिजायर कीजिए ।

🌈 आपकी योग्यता अनुसार आपको गुरुदेव प्राप्त होंगे ही।
बिना गुरु के जो भजन होगा, उसी से पहले
गुरु प्राप्त होंगे, फिर गोविंद ।

🙏 समस्त वैष्णव वृन्द को दासाभास का प्रणाम

🐚 ।। जय श्री राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय  निताई ।। 🐚

🖋 लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
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Saturday, 28 April 2018

Bhajan Ka Din | भजन का दिन


⚜ भजन का दिन ⚜

🍓 मुझे तो
कभी - कभी
ऐसा लगता है कि
हर 15 दिन बाद
एकादशी का आना
उन लोगों के लिए है
जिन्हें प्रतिदिन की
 भागदौड़ में
भजन हेतु
पर्याप्त समय
नहीं मिलता ।

🍓 15 दिन में
एक पूरा दिन
भजन के लिए,
आज दुकान,
ऑफिस से छुट्टी
और विशेषकर
 भोजन से छुट्टी ।

🍓 आज यदि
दबाकर भजन
कर लिया जाये
तो आगामी
15 दिन तक
बैटरी चार्ज रहेगी ।

🍓 और सच
 मानिये
बहुत सारे
वैष्णव ऐसा कर रहे हैं,
मेरे टच में हैं ।
आप भी कुछ
प्रयास करिये

समस्त वैष्णव जन को दासाभास का प्रणाम

🐚 ।। जय श्री राधे ।। 🐚
🐚 ।। जय  निताई ।। 🐚

🖋लेखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
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Friday, 27 April 2018

Dekh Kar Loutna


देख कर लौटना

✔️ देख कर लौटना ✔️

▶️ कुबेर पुत्र व
अप्सराएं गंगा में
जल केली कर रहे थे।
नारद की ध्वनि सुनकर
अप्सराओं ने तन ढक लिया।
जबकि अप्सरा व
वेश्याएं लज्जा हीन होती हैं ।

▶️ कुबेर पुत्र ऐसे के तैसे
 निर्वस्त्र खड़े रहे । नारद ने
दूर से देखा और लौट गये
 \एकबार, फिर चिंतन किया कि
ये एक तो देवता के पुत्र शिवजी
के भक्त, इनको यदि दण्ड नहीं दिया
गया तो उचित नहीं होगा।

▶️ पुनः आये, वृक्ष होने का श्राप दिया।
 गिड़गिड़ाने पर नंद भवन और श्री कृष्ण
दर्शन का वरदान दिया और चले गए ।

▶️ यदि ' अपना कोई ' गलत रास्ते
 पर हैं उसे सही रास्ते पर लाना
लेकिन इतनी योग्यता होना भी मांगता।

समस्त वैष्णववृन्द को दासाभास का प्रणाम



🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
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Monday, 16 April 2018

Bandhan Bhi Sukhkari


✔  *बन्धन भी सुखकारी*    ✔

▶ सामान्यतः बन्धन दुःख व कष्टकारक ही होता है। इसलिए कृष्ण बन्धना नहीं चाहते थे किन्तु जब उन्होंने मैया का परिश्रम व विकलता देखी तो अपना दुःख भूल कर तत्क्षण बंध गये।

▶ बंध गये तो मैया के अपने रसोईघर आदि के काम में जाने पर सखाओं द्वारा उस बंधन को खोलने का प्रयास भी किया। किन्तु प्रेम बंधन था न ! खुला नहीं ।
कृष्ण ने सोचा बंधन में ही आनंद लो ।
ऊखल को इधर उधर खेचना लुड़काना भी उनका खेल बन गया । उनके प्रिय सखा भी वहाँ थे ही।

▶ यही दो दुःख के कारण थे कि वे बंधना नहीं चाह रहे थे
1 - सखाओं के साथ खेल, जो कि बंधन में भी चल रहा है ।
2 - माखन चोरी, उसका भी रास्ता निकाल लिया ।
सखाओं से कहा कि
रोज मैं चोरी करता था, तुम खाते थे। आज तुम चोरी करके लाओ- मैं खाऊँगा। ऐसा ही हुआ ।
फिर तो कृष्ण भी निश्चिंत हो गये।
बंधन से खुलने की छट-पटाहट भी समाप्त हो गई ।
वैसे भी प्रेम बंधन था न, उसमें तो आनंद ही आनंद था ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
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Saturday, 18 November 2017

Viray Sahayak hi he


विरह सहायक ही है

हम लोग प्रायः संयोग या मिलन को ही श्रेष्ठ मानते हैं और मिलन में ही आनंदित होते हैं

यदि थोड़ा सा भी सूक्ष्मता से देखेंगे तो मिलन में आनंद तो है ही लेकिन लगातार एक साथ रहते हुए या मिलन की स्थिति में रहते हुए धीरे-धीरे एक उकताव सा आता है

उस उकताव को कम करने के लिए  विरह बहुत अच्छा कार्य करता है । जब कोई अपना प्रिय सदस्य सदा साथ रहे तो उसके प्रति स्नेह और आसक्ति में धीरे-धीरे कमी तो होती है, अपितु उसके दोष भी दिखने लगते हैं ।

वही अपना प्रिय यदि एक माह के लिए बाहर चला जाए और फिर एक माह बाद वह आए तो उससे मिलन की जो स्थिति और आनंद होता है वह कई गुना बढ़ जाता है ।

इसलिए आनंद वृद्धि के लिए विरह बहुत ही आवश्यक है । विरह के बाद या वियोग के बाद जो संयोग होता है उसमें आनंद अतिवृद्धि को प्राप्त होता है ।

और विरह के कारण दर्शन न होते हुए अपने प्रिय से सदा ही वह मिलने की ललक लगी रहती है उस ललक से प्रेम वृद्धि होती है, आनंद वृद्धि होती है ।

इसीलिए ही ठाकुर जी की लीलाओं में भी संयोग और वियोग दोनों ही होते हैं । अनेक बार तो ऐसी स्थिति हो जाती है कि संयोग में भी साथ साथ होते हुए भी ऐसा लगता है कि प्रियतम गए ।

शास्त्र कहता है कि जब कोई हमारे पास होता है तब हमारा यही चिंतन होता है कि अब यह कल चला जाएगा , अब यह कल चला जाएगा , अब यह कल चला जाएगा ।

और जब कोई दूर होता है तब सदा ही यह चिंतन होता है कि अब बस एक दिन में वह आने वाला है  । एक दिन में आने वाला है ।

आने के बारे में सोचने में आनंद अधिक होता है और जाने के बारे में सोचने में आनंद का अभाव होता है । अतः विरह बहुत ही महत्वपूर्ण है और आनंद का एक आवश्यक स्रोत है ।

समस्त वैष्णववृन्द को दासाभास का प्रणाम

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
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🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
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Monday, 31 July 2017

Kripa Kese Ho

Kripa Kese Ho

​ ✔  *कृपा कैसे हो*    ✔

▶ कृपा बहुत ही सामान्य रुप में प्रयोग होने वाला शब्द है । लेकिन यह एक तत्व है ।

▶ कृपा का अर्थ साक्षात राधा रानी । कृपा सर्वतंत्र स्वतंत्र है । यहां तक कि भगवान श्री कृष्ण के वश में भी नहीं है ।

▶ भगवान का मन तो करता है कि मैं अपने अंश स्वरुप सब जीवो सहित दासाभास पर थोक में कृपा कर दूं । लेकिन कृपा भगवान के वश में नहीं है । कृपा सर्वतंत्र स्वतंत्र है ।

▶ जब जीव में भजन साधन द्वारा की गई योग्यता को देखती है तो स्वत उदित होती है ।  कृपा के बिना कृष्ण को पाना , कृष्ण चरण सेवा को पाना असंभव है ।

▶ इसीलिए राधा दास्य या राधा दासी का स्वरूप निर्धारित किया गया कि राधा रानी को प्रसन्न करो ।

▶ राधा रानी बातों से  प्रसन्न नहीं होती है । राधा रानी को प्रसन्न करने के लिए जो विधान है, जो नियम है, जो भजन है, जो आचरण है, वह आप सहित दासाभास को करना ही होगा ।

▶ संत, सदगुरु, वैष्णव के हाथ में तो कृपा बिल्कुल ही नहीं है । क्योंकि कौन गुरु चाहता है कि मेरे सारे चेले एक से वैष्णव न हों ?

▶ गुरु के हाथ में होती तो वह भी रेवड़ी की तरह सबको कृपा बांट देते । गुरुदेव के हाथ में भी नहीं है । जब कृष्ण के हाथ में नहीं तो गुरु संत वैष्णव के हाथ में कहां से आई ।

▶ और राधा रानी के चरण पर पलौटते हुए श्री कृष्ण सदा ही रहते हैं यह हम सब जानते ही हैं ।

▶ बहुत से वैष्णव बात बात में यह कहते हैं ।दासाभास ! आपकी कृपा हो जाए या आप मेरे सिर पर हाथ रख दो आप मुझ पर कृपा करो । संत मुझ पर कृपा करें, धाम मुझ पर कृपा करें, वैष्णव मुझ पर कृपा करें ।

▶ अरे भाई वह सब तो तैयार बैठे हैं । तुम वह योग्यता पैदा करो । जिस दिन दासाभास में वह योग्यता पैदा हो जाएगी उस दिन कृपा बरस जाएगी ।

▶ इस सिद्धांत को यदि हम ध्यान में रखेंगे तो भ्रम नहीं होगा । यह वैसे ही है जैसे पांचवी क्लास पास बच्चा यह कहे कि मुझे इंटर के पेपर में बैठवा दो ।

▶ इंटर के पेपर में बैठने के लिए इंटर की पढ़ाई कर के वहां तक पहुंचना होगा फिर किसी की ताकत नहीं कि आप को इंटर की परीक्षाओं में रोक सके ।

▶ और यदि फॉर्मेलिटी पूरी नहीं है तो अनेकों को रोकते हुए भी देखा है ।

▶ साथ ही कृपा और करुणा के अपवाद भी हैं अकारण कृपा भी होती है । लेकिन नियम यही है कि कृपा की योग्यता साधन और भजन द्वारा प्राप्त करिए ।

▶ कृपा अपने आप ही आएगी । कृपा मांगिए मत, कृपा की योग्यता पैदा करिए । इंग्लिश मैं कहते हैं न

▶ फर्स्ट डिज़र्व देन डिजायर

▶ इसलिए भ्रम से निकलिए और साधन-भजन में लग जाइये । भजन भजन भजन ।

▶ समस्त वैष्णवजन को दासाभास का प्रणाम!

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
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Wednesday, 19 July 2017

Youtube Channel



दासाभास डा गिरिराज नांगिया, वृन्दावन धाम द्वारा आध्यत्मिक और भक्ति भाव सम्बन्धी जिज्ञासाओं का जन साधारण की भाषा में समाधान और रसिक भैया कृष्णदास भूटानी (सिरसा वाले) के सुमधुर भजनों का अनमोल संग्रह और लगभग प्रतिदिन अपडेट होने वाला youtube चैनल। आज ही सब्सक्राइब करें और आनंद प्राप्त करें।

http://www.youtube.com/user/hemangnangia 

Tuesday, 6 June 2017

Granth Prichay : Shri Priti Sandarbh

​​​​​​​​​📖 ग्रन्थ  परिचय 5⃣1⃣  📖

💢 ग्रन्थ नाम : श्रीप्रीति    सन्दर्भ
💢 लेखक  : श्रीजीव गोस्वमिपाद
💢 भाषा : संस्कृत-हिंदी अनुवाद-टीका |
     ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
💢 साइज़ : 15 x 23  सेमी
💢 पृष्ठ   : 572 हार्ड   बाउंड
💢 मूल्य  : 450  रूपये

💢 विषय वस्तु :
   परब्रह्म भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति के प्रमुख प्रयोजन प्रीति तत्व का
   निरूपण (छठा  संदर्भ )

💢 कोड : M051-Ed1

💢 प्राप्ति  स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

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📗🔸📘🔹📙🔶📔


Thursday, 1 June 2017

Granth Prichay : Shri Tatv Sandarbh

📖 ग्रन्थ परिचय 4⃣6⃣ 📖

💢 ग्रन्थ  नाम : श्रीतत्व सन्दर्भ
💢 लेखक  : श्रीजीव गोस्वमिपाद
💢भाषा : संस्कृत-हिंदी अनुवाद-टीका  |
     ब्रजविभूति श्रीश्यामदास

Ye Teen


🌹🌹🌹 ये तीन

🌷 श्रीधाम वास यदि मिल जाए
🌷 श्री राधा दासी भाव यदि पुष्ट हो जाए
🌷 श्री गुरूदेव यदि मिल जाए

तो इससे बड़ा जीवन का सौभाग्य नहीं । इन तीनों को भगवान श्री कृष्ण की स्वरूप शक्ति कहा गया है । स्वरूप शक्ति माने जैसे आग की स्वरुप शक्ति जलाना । ♨️ ♨️

🌹इन तीनों से ही श्रीकृष्ण है । अथवा जैसे एक गुलाब और उसकी सुगंध  । यह तीनों यदि मिल गए तो हम यह समझे कि हमें सुगंध मिल गई ।

🌹और यह आप हम जानते हैं की सुगंध जहां होती है उसके बहुत ही करीब वह पुष्प भी होता है ।

🌹इसलिए अध्यात्म में वैष्णव शास्त्रों में इन तीनों की प्राप्ति को बहुत ही दुर्लभ माना गया है और जिन्हें यह तीनों प्राप्त हैं उन्हें बहुत ही महत्व पूर्ण दृष्टि से देखा गया है ।

🌹यह तीनों साधन नहीं है यह तीनों वह है जो हमें प्राप्त करना है ।

🌹धाम मिल गया तो कृष्ण मिल गए
🌹गुरुदेव मिल गए तो कृष्ण मिल गए और
🌹श्री राधा रानी की दासी निष्ठा यदि मिल गई तो कृष्ण मिल गए

🔴मिल गए का अर्थ अब बस बहुत दूर नहीं है अब उनकी चरण सेवा में हमें जाना ही ह ।

🛢अतः सोभाग्यशाली है वह जन
🛢सफल है उनका जीवन
जिन्हें तीनों में से एक भी मिला

Wednesday, 31 May 2017

Granth Prichqy : Mahat Kripa Tatv

​​​​​​​ ग्रन्थ परिचय 4⃣5⃣ 

 ग्रन्थ नाम : महत कृपा तत्व 
 लेखक : श्रीगणेश दास चुघ 
भाषा : हिंदी 
 साइज़ : 12 x 18 सेमी
 पृष्ठ : 38 सॉफ्ट बाउंड
 मूल्य : 5 रूपये

Tuesday, 30 May 2017

Granth Prichay : Shri Narottam Prarthna

​​​​​​📖 ग्रन्थ परिचय 4⃣4⃣ 📖

💢 ग्रन्थ  नाम : नरोत्तम प्रार्थना
💢 लेखक  : श्रीनारोत्तम  ठाकुर महाशय
💢भाषा : संस्कृत-मूल- हिंदी | ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
💢 साइज़ : 14 x 22  सेमी
💢 पृष्ठ  : 32  सॉफ्ट  बाउंड
💢 मूल्य : 30  रूपये

💢 विषय वस्तु :
    करुण  प्रार्थना  वैष्णवों के प्राण

💢 कोड : M044-Ed3
💢 प्राप्ति स्थान:

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2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

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Friday, 26 May 2017

Granth Prichay : Parbraham Swayn Bhagwan Krishan

​​​📖 ग्रन्थ परिचय4⃣1⃣ 📖

💢 ग्रन्थ  नाम : परब्रह्म स्वयं भगवान श्रीकृष्ण 
💢 लेखक  : ब्रजविभूति श्रीश्यामदास 
💢 भाषा :  संस्कृत-हिंदी अनुवाद टीका   
💢 साइज़ : 14 x 22  सेमी
💢 पृष्ठ  : 80  सॉफ्ट  बाउंड
💢 मूल्य : 40  रूपये

Thursday, 25 May 2017

Granth Prichay : Shri Mukta Chritr

​​📖 ग्रन्थ परिचय4⃣0⃣ 📖

💢 ग्रन्थ  नाम : श्रीमुक्ता चरित्र
💢 लेखक  : श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी
💢 भाषा :  हिंदी | सचित्र
💢 साइज़ : 19 x 25  सेमी
💢 पृष्ठ :104  सॉफ्ट  बाउंड
💢 मूल्य : 25  रूपये

Sunday, 21 May 2017

Granth Prichay : ब्रज के संत (छोटा )

​📖 ग्रन्थ परिचय 3⃣6⃣  📖

💢 ग्रन्थ  नाम :ब्रज के संत (छोटा )
💢 लेखक :डा नित्यान्न्द
💢 भाषा : हिंदी
💢 साइज़ : 12  x 18  सेमी
💢 पृष्ठ : 72  सॉफ्ट  बाउंड
💢 मूल्य : 15   रूपये

💢 विषय वस्तु :
      ब्रज के अनेक सिध्द संतो की
      चमत्कारी गाथाएं

💢 कोड : M036  -Ed3

💢 प्राप्ति   स्थान
1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस
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ब्रज के संत (छोटा )

Wednesday, 3 May 2017

Granth Prichay: Shri Nitai Chand

📖   ग्रन्थ    परिचय 2⃣ 0⃣ 📖

💢 ग्रन्थ नाम : श्रीनिताई चाँद

💢 लेखक : 
      ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
💢 भाषा :  हिन्दी
   

Tuesday, 2 May 2017

Granth Prichay - Braj Ki Ashtyaam Lila

📖   ग्रन्थ    परिचय 1⃣  8⃣ 📖

💢 ग्रन्थ   नाम : ब्रज की अष्टयामलीला—
      श्रीगोविन्दलीलामृत