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Friday, 27 April 2018

Dekh Kar Loutna


देख कर लौटना

✔️ देख कर लौटना ✔️

▶️ कुबेर पुत्र व
अप्सराएं गंगा में
जल केली कर रहे थे।
नारद की ध्वनि सुनकर
अप्सराओं ने तन ढक लिया।
जबकि अप्सरा व
वेश्याएं लज्जा हीन होती हैं ।

▶️ कुबेर पुत्र ऐसे के तैसे
 निर्वस्त्र खड़े रहे । नारद ने
दूर से देखा और लौट गये
 \एकबार, फिर चिंतन किया कि
ये एक तो देवता के पुत्र शिवजी
के भक्त, इनको यदि दण्ड नहीं दिया
गया तो उचित नहीं होगा।

▶️ पुनः आये, वृक्ष होने का श्राप दिया।
 गिड़गिड़ाने पर नंद भवन और श्री कृष्ण
दर्शन का वरदान दिया और चले गए ।

▶️ यदि ' अपना कोई ' गलत रास्ते
 पर हैं उसे सही रास्ते पर लाना
लेकिन इतनी योग्यता होना भी मांगता।

समस्त वैष्णववृन्द को दासाभास का प्रणाम



🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚


🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn


धन्यवाद!!

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Tuesday, 12 September 2017

Dasabhas Lekhni Part 5



🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒🖋🗒
             दासाभास लेखनी
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💎 भाग 5⃣

1⃣ जिनकी बात को कोई रद्द न कर सके वे नारद.

2⃣ शरी जगन्नाथ स्नानयात्रा वाले दिन श्री जगन्नाथ जू का जन्मोत्सव भी होता है। अतः जल द्वारा उनका अभिषेक का भी भाव है, जो भक्तजन के समक्ष वर्ष में एक बार होता है।

3⃣ रासलीला में शिव नहीं - श्रीमद्भागवत श्री चैतन्य चरितामृत श्री गोपाल चम्पू एवं अन्य किसी भी प्रमाणिक ग्रंथ में श्री शिव जी द्वारा गोपीवेश धारण एवं रासलीला में भाग लेने का प्रसंग दृष्टि में नहीं पड़ा अभी तक। परम विद्वान पूज्य प्रेमदास जी शास्त्री - सूरमा कुंज भी सहमत है। श्री शिव जी की ये लीलाए दन्तकथा के रूप में प्रचलित हैं और इतना ही है कि शिव जी ने गोपी रूप धारण किया एवं श्रीरासलीला के दर्शन किये। वे गोपीयों के साथ सम्मिलित नही हो पाये । फिर भी शोध बाकी है.

🔔 ।। जय श्री राधे ।। 🔔
🔔 ।। जय निताई  ।। 🔔

🖋लखक
दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at Vrindabn

Wednesday, 30 November 2011

152. kis me कौन हूँ मैं

 kis me कौन  हूँ मैं


सब प्राणियों मैं स्थित - आत्मा 
प्राणियों का - आदि, मध्य, अंत यानी जन्म जीवन मृत्यु
अदिति के  बारह पुत्रों मैं - विष्णु 
ज्योतियों मैं - सूर्य 
उन्चाश देवताओं मैं - तेज 
नसत्रों का अधिपति - चन्द्र 
वेदों मैं - सामवेद 
इन्द्रियों मैं - मन 
प्राणियों मैं - जीवन शक्ति 
एकादश रुद्रों मैं - शंकर 
यक्ष - राक्षसों मैं - कुबेर
आठ वसुओं मैं - अग्नि 
पर्वतों मैं - सुमेरु 
पुरोहितों मैं - ब्रहस्पति 
सेनापतियों मैं - स्कन्द 
जलाशयों मैं - समुद्र 
महर्षियों मैं - भ्रगु 
शब्दों मैं - ॐ 
यज्ञों मैं - जप यग्य 
स्थिर रहने वालों मैं - हिमालय 
वृक्षों मैं - पीपल 
देवर्षियों मैं - नारद 

JAI SHRI RADHE