🌹🌹🌹 ये तीन
🌷 श्रीधाम वास यदि मिल जाए
🌷 श्री राधा दासी भाव यदि पुष्ट हो जाए
🌷 श्री गुरूदेव यदि मिल जाए
तो इससे बड़ा जीवन का सौभाग्य नहीं । इन तीनों को भगवान श्री कृष्ण की स्वरूप शक्ति कहा गया है । स्वरूप शक्ति माने जैसे आग की स्वरुप शक्ति जलाना । ♨️ ♨️
🌹इन तीनों से ही श्रीकृष्ण है । अथवा जैसे एक गुलाब और उसकी सुगंध । यह तीनों यदि मिल गए तो हम यह समझे कि हमें सुगंध मिल गई ।
🌹और यह आप हम जानते हैं की सुगंध जहां होती है उसके बहुत ही करीब वह पुष्प भी होता है ।
🌹इसलिए अध्यात्म में वैष्णव शास्त्रों में इन तीनों की प्राप्ति को बहुत ही दुर्लभ माना गया है और जिन्हें यह तीनों प्राप्त हैं उन्हें बहुत ही महत्व पूर्ण दृष्टि से देखा गया है ।
🌹यह तीनों साधन नहीं है यह तीनों वह है जो हमें प्राप्त करना है ।
🌹धाम मिल गया तो कृष्ण मिल गए
🌹गुरुदेव मिल गए तो कृष्ण मिल गए और
🌹श्री राधा रानी की दासी निष्ठा यदि मिल गई तो कृष्ण मिल गए
🔴मिल गए का अर्थ अब बस बहुत दूर नहीं है अब उनकी चरण सेवा में हमें जाना ही ह ।
🛢अतः सोभाग्यशाली है वह जन
🛢सफल है उनका जीवन
जिन्हें तीनों में से एक भी मिला
