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Thursday, 30 June 2016

किसकी मानें

 किसकी मानें

✅    किसकी मानें   ✅

▶ किसी भी विषय को समझने या जानने के लिए हमारे पास मुख्य रूप से तीन साधन है

▶ पहला है *शास्त्र*
▶ दूसरे हैं *संत*
▶ तीसरे हैं *श्री गुरुदेव*

▶ लेकिन समय के प्रभाव से इन तीनों ही विधाओं की असलियत वास्तविकता एवं विश्वसनीयता संदेहास्पद है

▶ सर्वप्रथम *शास्त्र* को लेते हैं ।
▶ पहले कोई विरले अनुभव प्राप्त विद्वान या संत ही ग्रंथ लिखते थे और अपने अनेक में से
 ▶ किसी एक अधिकारी शिष्य को उसकी प्रतिलिपि कर के देते थे

Saturday, 12 November 2011

138. मन वचन कर्म



 मन मैं जो  सोचता है 
वही कहता है
वही करता है 
वह संत होता है, सफल होता है 

हम चाहते तो सम्मान हैं 
बात करते हैं भक्ति की 
काम करते है कुछ और 

सम्मान चाहें
सम्मान  प्राप्ति  की ही बात करें
सम्मान प्राप्ति के काम करें - इनमें कोई हर्ज नहीं है 

मन कुछ, बात कुछ, काम कुछ 
सफलता नहीं मिलेगी - 
बात भक्ति की हो, धनकी  हो मान की  हो,सम्मान की हो 


JAI SHRI राधे


DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia
Lives, Born, Works = L B W at वृन्दाबन

Saturday, 22 October 2011

119. बंधन तोड़ना नहीं है





बंधन
तोड़ना नहीं, इसका रास्ता मोड़ना है
अब तक बहिन से राखी बंधवाते थे,अब किसी
संत से भी कंठी बंधवानी है

अब तक संसार से बंधे थे,
रिश्तो से बंधे थे, धन से बंधे थे,
माया से बंधे थे

अब

संसार के स्वामी से बंधना है
भक्तो से बंधना है, भजन से बंधना है
माया से नहीं, मायापति की कृपाशक्ती से बंधना है 
बंधन तोड़ना नहीं, कही और, कही अच्छी जगह जोड़ना है

श्री गुरुदेव से कंठी रूपी पट्टा बंधवा लिया तो
'आवारा' से 'पालतू' हो जाओगे
दुनिया के साथ-साथ दुनिया के स्वामी से भी बंध जाओगे

फिर बंधन तोड़ेगा नहीं, उससे जोड़ने का काम करेगा  

JAI SHRI RADHE