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Tuesday, 26 April 2016

सम्मान


✅ सम्मान  ✅

🏺🌹ये कोई बुरी चीज़ नहीं । यदि बुरी होती तो दूसरों को सम्मान देने का आदेश न किया होता शास्त्र में ।

🏺🌹हाँ इसकी इच्छा । चाहना बुरी है ।

जेसे मुक्ति । ये भी कोई बुरी नही । इसकी भी इच्छा करना पिशाची है

🏺🌹आप के आचरण । व्यवहार । कार्य के कारण आपको स्वतः सम्मान मिलेगा । अवश्य मिलेगा । मिलने दीजिये ।

🏺🌹 सम्मान को कीमत मत दीजिये अपितु पड़ा रहने दीजिये एक तरफ कौने में उपेक्षित सा ।

🏺🌹लेकिन सम्मान मिले । ये इच्छा रखकर कार्य करना । ये इच्छा पिशाची ह

🏺🌹सबसे बड़ी बात सम्मान मिले तो हम उच्छलें नही । न मिले या अपमान मिले तो निराश न हों । कठिन ह । असम्भव नही ।

🌹🏺समस्त वैष्णवजन को सादर प्रणाम


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई ॥ 🐚 

🖊  लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया 

LBW - Lives Born Works at vrindabn

Saturday, 12 November 2011

138. मन वचन कर्म



 मन मैं जो  सोचता है 
वही कहता है
वही करता है 
वह संत होता है, सफल होता है 

हम चाहते तो सम्मान हैं 
बात करते हैं भक्ति की 
काम करते है कुछ और 

सम्मान चाहें
सम्मान  प्राप्ति  की ही बात करें
सम्मान प्राप्ति के काम करें - इनमें कोई हर्ज नहीं है 

मन कुछ, बात कुछ, काम कुछ 
सफलता नहीं मिलेगी - 
बात भक्ति की हो, धनकी  हो मान की  हो,सम्मान की हो 


JAI SHRI राधे


DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia
Lives, Born, Works = L B W at वृन्दाबन