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Friday, 11 November 2011

136.पाप आचरण क्यों ? pics




रजोगुण के कारन ही काम या क्रोध उत्पन्न होता है |
क्रोध से मूढ़ता - स्म्रतिभ्रम , बुध्दिनाश होकर 
ज्ञान आवृत हो जाता है
उचित-अनुचित पाप पुण्य का ज्ञान धक् जाता है
और व्यक्ति पापाचरण करता है |

रजोगुण उत्पन्न न हो या हावी न हो, 
इसके लिए उसे उसकी खुराक मत दो, अर्थात
रजोगुणी कार्यमत करो,
रजोगुणी भोजन मत करो
रजोगुणी दृश्य मत देखो
रजोगुणी बात मत करो आदि.......

इससे रजोगुण भूखा प्यासा कमजोर कहीं एक कोने में 
चुपचाप पड़ा रहेगा, हावी नहीं होगा तो क्रोध भी नही आयेगा
ज्ञान जागृत रहेगा और पाप आचरण से बचे रहेंगे - हम - आप !!!! 

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban


diff poses of shri shyamdas ji

Tuesday, 18 October 2011

115. स्नेह या प्रेम दो प्रकार का





१. घृत-स्नेह

घी जैसा, घी को अकेला नहीं खाया जा सकता
उसमे बूरा मिलाकर, या घी का परांठा या
हलुआ बनाकर खाया जाता है

२. मधु-स्नेह 

मधु यानी शहद
शहद अपने आप में मीठा होता है
इसमे कुछ मिलाना आवश्यक नहीं, अपने आप में पूर्ण है

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ नांगिया
Lives, Born, Works = L B W at Vrindaban