Showing posts with label तुलसी सेवा. Show all posts
Showing posts with label तुलसी सेवा. Show all posts

Sunday, 2 October 2016

क्या कहेंगे इसको

​​​​​✔  *क्या कहेंगे इसको*    ✔

▶ मेरे एक निकट के रिश्तेदार हैं, दीक्षित भी हैं, भजन भी करते हैं, विद्वान भी हैं । पूज्य पिताजी के साथ उन्होंने ग्रंथ लेखन में सहायता भी की है । 2 । 4 ग्रंथों का अनुवाद संपादन भी किया है ।

▶ ग्रहस्थ हैं । अच्छी किसी सरकारी सेवा में थे । वहां से अवकाश मुक्त हुए । 40,000 रु लगभग पेंशन आती है । दो पुत्र हैं , दोनों पर्याप्त पैकेज में कार्यरत हैं ।

▶ जब रिटायर हुए तब मैंने कहा कि अब तो आपके पास समय है, आप अपना समय ग्रन्थसेवा में दीजिए

▶ उन्होंने कोई रुचि नहीं दिखाई । उसके बाद चर्चा हुई । मैंने कहा चलिए 100000 नाम करिए , अध्ययन करिए  , जप करिए । सेवा पूजा करिए । सत्संग करिए । भजन करिए ।

▶ अब आपकी आर्थिक परिस्थिति ठीक है । पति-पत्नी के लिए 40,000 रुपए महीना पर्याप्त है । मकान अपना है ।

▶ वह एक डेढ़ साल तो घर पर रहे भजन वजन पर केंद्र किया नहीं । सामान्य जो एक आधा घंटा प्रतिदिन हम आप लोग करते हैं । वैसे किया और दिन भर अपितू घर  गृहस्थी की बातों में महिलाओं की दखलंदाजी में रहते थे

Friday, 17 June 2016

तुलसी देना मना नहीं


✅   तुलसी देना मना नहीं  ✅ 

▶ भजन भक्ति उपासना की abcd है

▶ तुलसी जी की सेवा ।
▶ नाम संकीर्तन ।
▶ एकादशी व्रत

▶ इनमें से तुलसी सेवा का बहुत ही महत्व है । तुलसी के बिना ठाकुर कुछ भी स्वीकार नहीं करते हैं । यहां तक की गले में तुलसी कंठी माला धारण करना भी इसी भावना के कारण है ।

▶ प्रत्येक वैष्णव के घर में तुलसी पूजा स्नान आदि अवश्य होना चाहिए ।तुलसी की भी 9 प्रकार की नवविधा भक्ति है

▶ 1 तुलसी के दर्शन करना

▶ 2 तुलसी को स्पर्श करना

▶ 3 तुलसी का मन ही मन ध्यान करना

▶ 4 तुलसी के नाम ले ले कर उनका कीर्तन करना

▶ 5 वंदना करना तुलसी की आरती करना दीपक जलाना

▶ 6 नए-नए पौधों का रोपण करना और तुलसी वितरण करना

▶ 7 पौधों की देखरेख करना उन्हें जल देना सिचाई करना देखभाल करना

▶ 8 तुलसी का उसी प्रकार पूजन करना जिस प्रकार श्री विग्रह का करते हैं धूप दीप नैवेद्य माला आरती चुनरी प्रणाम आदि

▶ 9  तुलसी को साष्टांग प्रणाम करना पंचांग प्रणाम करना तुलसी की परिक्रमा करना मानसिक प्रणाम और मानसिक सेवा ।

▶ तुलसी की यह नवविधा भक्ति शास्त्रों में कही गई है । हरिनाम प्रेस द्वारा ब्रज की तुलसी नामक ग्रंथ में तुलसी के बारे में संपूर्ण विवरण दिया गया है

▶ विशेषकर समाज में एक भ्रम है की मांगने पर किसी को तुलसी नहीं देनी चाहिए गरीबी आ जाती है । अनिष्ट होता है । जाने क्या क्या है ।

▶ यह केवल भ्रम ही है । यह तुलसी वितरण के अंतर्गत आता है जितना आप तुलसी देंगे । तुलसी का प्रचार करेंगे । तुलसी को घर-घर पहुंचाएंगे । वहां उनकी सेवा होगी पूजा होगी उतना ही हमारी भक्ति में वृद्धि होगी ।

▶ हां ऐसे लोगों को जो केवल अपने बगीचे की शोभा बढ़ाने के लिए या किसी भी प्रकार से तुलसी को खेल खिलोने के लिए लेना चाहते हों । उन्हें नहीं देनी चाहिए ।

▶ जो भगवद विग्रह की सेवा तुलसी के प्रॉपर सम्मान के लिए तुलसी मांगे उन्हें हर्ष पूर्वक तुलसी देनी चाहिए । यह सोचकर कि हमारी यह तुलसी जी उनके घर में विराजमान ठाकुर की सेवा में काम आएंगी  । कभी भी भ्रमित नहीं होना चाहिए ।


 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया  
LBW - Lives Born Works at vrindabn

💬 फेसबुक पर https://www.facebook.com/dasabhasgirirajnangia

💻 अधिकृत फेसबुक पेज : https://www.facebook.com/ShriHarinamPress

💻 अधिकृत ब्लॉग : http://www.shriharinam.blogspot.in

🖥 वेबसाइट : http://harinampress.com/
📽यूट्यूब चैनल  : https://www.youtube.com/channel/UCP1O_g-hYWlSJVkRiko0qwQ

🎤 वौइस् नोट्स : http://YourListen.com/Dasabhas


तुलसी देना मना नहीं