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Sunday, 2 October 2016

क्या कहेंगे इसको

​​​​​✔  *क्या कहेंगे इसको*    ✔

▶ मेरे एक निकट के रिश्तेदार हैं, दीक्षित भी हैं, भजन भी करते हैं, विद्वान भी हैं । पूज्य पिताजी के साथ उन्होंने ग्रंथ लेखन में सहायता भी की है । 2 । 4 ग्रंथों का अनुवाद संपादन भी किया है ।

▶ ग्रहस्थ हैं । अच्छी किसी सरकारी सेवा में थे । वहां से अवकाश मुक्त हुए । 40,000 रु लगभग पेंशन आती है । दो पुत्र हैं , दोनों पर्याप्त पैकेज में कार्यरत हैं ।

▶ जब रिटायर हुए तब मैंने कहा कि अब तो आपके पास समय है, आप अपना समय ग्रन्थसेवा में दीजिए

▶ उन्होंने कोई रुचि नहीं दिखाई । उसके बाद चर्चा हुई । मैंने कहा चलिए 100000 नाम करिए , अध्ययन करिए  , जप करिए । सेवा पूजा करिए । सत्संग करिए । भजन करिए ।

▶ अब आपकी आर्थिक परिस्थिति ठीक है । पति-पत्नी के लिए 40,000 रुपए महीना पर्याप्त है । मकान अपना है ।

▶ वह एक डेढ़ साल तो घर पर रहे भजन वजन पर केंद्र किया नहीं । सामान्य जो एक आधा घंटा प्रतिदिन हम आप लोग करते हैं । वैसे किया और दिन भर अपितू घर  गृहस्थी की बातों में महिलाओं की दखलंदाजी में रहते थे