Tuesday, 31 January 2017

Sukshm Sutra Part 37

Sukshm Sutra Part 37


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 3⃣7⃣

💡 क्रोधी, दम्भी, मात्सर्य
ईर्ष्यावश और
भेदबुद्धि होकर
हिंसा करते हुए
जो मेरी पूजा करता है
वह तामसिक भक्त है.

💡 इन्द्रियों का सुख-भोग
प्रारब्ध के अनुसार
निश्चित ही मिलता है.
इसलिए अपने आप
प्राप्त होने वाले
सुख भोग के लिए
अत्यधिक परिश्रम और
प्रयास की क्या आवश्यकता ?

💡 पाप और पुण्य कर्मो के फल
आपस में एडजस्ट नही होते.
पाप का फल दुःख और
पुन्य का फल सुख
भोगना ही पड़ता है .

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Sunday, 29 January 2017

Shri Kashishvar Pandit Ke Gour govind

Shri Kashishvar Pandit Ke Gour govind

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✔  *श्रीकाशीश्वर पंडित के श्रीगौरगोविंद*    ✔

▶ यह महाप्रभु के अंतरंग भक्तों में हैं । आप पूरी धाम में विराजते थे । महाप्रभु जी ने इन्हें आदेश दिया कि आप वृंदावन जाओ और वहां वास करो ।

▶ इन्होंने कहा प्रभु मैं आपको छोड़कर कहीं भी नहीं जाऊंगा । जहां आप हो वही मेरा वृंदावन है। लेकिन प्रभु ने कहा काशीश्वर आप को वृंदावन जाना ही होगा ।

▶ क्योंकि श्री वृंदावन धाम अपने आप में साध्य हैं श्री वृंदावन धाम वास प्राप्त हो गया और चिन्मय दृष्टि प्राप्त हो गई तो समझो ठाकुर प्राप्त हो गए । तद्धाम वृन्दावनं ।

▶ इसीलिए हमारा वास्तव्य धाम श्री वृंदावन ही है ।अतः आप वृंदावन जाओ । लेकिन काशीश्वर किसी भी प्रकार से समझने को तैयार नहीं हुए।

▶ बोले मैं तो आपके साथ ही रहूंगा । तब इनका आग्रह देखकर महाप्रभु जी ने इनको एक विग्रह प्रदान किया । और उस विग्रह को विराजमान करके काशीश्वर ने महाप्रभु को और उस विग्रह को साथ साथ अन्न प्रसाद आदि भोग लगाया ।

▶ महाप्रभु के साथ उस श्रीविग्रह ने भी महाप्रभु की भांति ही प्रसाद पाया । तब महाप्रभु जी ने कहा कि देखो यह विग्रह मेरा ही साक्षात स्वरुप है ।

▶ तुम्हें मेरे साथ रहना है ना  । तुम इस विग्रह को ले जाओ, समझो मैं तुम्हारे साथ हूं । वह विग्रह श्रीकृष्ण विग्रह था ।

▶ तब काशीश्वर को विश्वास हो गया और उस विग्रह का नाम रखा श्री गौर गोविंद । वह गौर गोविंद विग्रह  छोटा सा विग्रह है ।

▶ श्रीगोविंद मंदिर जयपुर में पूजित और सेवित होता है उस के दर्शन अनेक बार यहां पर आए हैं उस विग्रह को लेकर काशीश्वर श्रीधाम में आए । और सदैव श्री महाप्रभु की अनुभूति मानकर उसकी पूजा करते हुए अखंड श्रीधाम वास किया ।

▶ उन्होंने ही इस विग्रह को श्री गोविंद देव के दक्षिण हाथ की तरफ विराजमान किया था जो आज भी विराजित है ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Friday, 27 January 2017

Granth Prichay - Braj Ke Raj Kan

Braj Ke Raj Kan


📖 ग्रन्थ  परिचय   9⃣0⃣  📖

💢 ग्रन्थ नाम : ब्रज के रज कण
💢 लेखक : दासाभास डा गिरिराज
💢 भाषा : हिंदी
💢 साइज़ : 14 x 22  सेमी

💢 पृष्ठ  : 160 सॉफ्ट बाउंड
💢 मूल्य  : 100 रूपये

💢 विषय वस्तु : ब्रज भक्ति को समझने के लिए छोटे छोटे किन्तु महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं पर सरल, रोचक, बोधगम्य सामग्री

💢 कोड : M090 -Ed1

💢 प्राप्ति स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री
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Suksham Sutra Part 36



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 3⃣6⃣

💡 इस जन्म में किये गये पाप कर्मो का प्रायश्चित करने से अथवा सन्त-भागवत कृपा से उनमें कुछ कटौती सम्भव है परन्तु पूर्व में संचित और प्रारब्ध पाप-कर्मों को तो भोगना ही पड़ेगा.

💡 समस्त पाप-कर्मों का सर्वश्रेष्ठ प्रायश्चित है - श्रीहरिनाम.
अजामिल द्वारा अंतिम समय में अपने पुत्र "नारायण" को पुकारने पर उसकी मुक्ति सर्वज्ञात है.

💡 शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि एकबार श्रीहरिनाम : श्रीकृष्ण नाम लेने से समस्त पाप त्त्कष्ण नष्ट हो जाते हैं, परन्तु ध्यान रहे-वंहा भी शर्ते लागू हैं. (चै. च. अन्त्य-3 )

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn 

Thursday, 26 January 2017

Savtantr Evm Gantantr

स्वतंत्र एवम् गणतंत्र

✔  *स्वतंत्र एवम् गणतंत्र*    ✔

▶ परम् स्वतंत्र हैं हमारे ठाकुर श्री कृष्ण । समस्त सृष्टि के स्वामी । होने न होने वाले कार्य को भी करने में समर्थ ।

▶ जेसे 7 वर्ष की आयु में 7 दिन तक कन्नी ऊँगली पर गिरिराज

▶ हम उन्ही के अंश हैं । वे पूर्ण स्वतंत्र हैं । हम आंशिक स्वतंत्र हैं ।
हम इतने स्वतंत्र अवश्य हैं कि अपने हित अनहित को जान कर निर्णय ले सकें

▶ हमारा संविधान भी संतों ने बनाया हुआ है । लेकिन माया के कारण हम भृमित होकर अपनी स्वतंत्रता का दुरूपयोग करते हैं

▶ स्वतंत्रता के सदुपयोग में कल्याण है । दुरूपयोग में कष्ट है । हम दोनों के चुनने में भी स्वतंत्र हैं । अब निर्णय आपका । हमारा कि हम क्या चुनें आनंद या कष्ट ।

▶ आनंद स्वरूप श्रीकृष्ण के नित्य दास हम उनके नाम का आश्रय यदि ले लें तो इससे बड़ा आनंद कुछ और नही

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn 

Wednesday, 25 January 2017

Granth Prichay : Brij Ki Kheer


Brij Ki Kheer

📖 ग्रन्थ  परिचय   8⃣8⃣  📖

💢 ग्रन्थ नाम : ब्रज की खीर
💢 लेखक : दासभास डा गिरिराज
💢 भाषा : हिंदी
💢 साइज़ : 14 x 22  सेमी

💢 पृष्ठ  : 160 सॉफ्ट बाउंड
💢 मूल्य  : 100 रूपये

💢 विषय वस्तु : ब्रज भक्ति से सम्बन्धित छोटे छोटे बेसिक  विषयों पर सरल संकलन

💢 कोड : M088 -Ed1

💢 प्राप्ति स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री
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Tuesday, 24 January 2017

Granth Prichay : Sangeet Madhav-ShriRadhaKrishnaarchandeepika

Sangeet Madhav-ShriRadhaKrishnaarchandeepika


📖 ग्रन्थ  परिचय   8⃣7⃣  📖

💢 ग्रन्थ नाम : संगीतमाधव-श्रीराधाकृष्णार्चनदीपिका  
💢 लेखक : श्रीप्रबोधान्न्दसरस्वती-श्रीजीवगोस्वामी
💢 भाषा : हिंदी | ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
💢 साइज़ : 14 x 22  सेमी

💢 पृष्ठ  : 160 सॉफ्ट बाउंड
💢 मूल्य  : 100 रूपये

💢 विषय वस्तु : गीतगोविन्द की भांति प्रिया-प्रियतम की श्रृंगार लीलाए एवं दुसरे ग्रन्थ में श्रीकृष्ण की पूजा के साथ श्रीराधा की अनिवार्यता

💢 कोड : M087 -Ed1

💢 प्राप्ति स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 0906821415
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