Wednesday, 7 December 2016

Doctor me Halwayi


Doctor me Halwayi

​​​✔  *​डॉक्टर म हलवाई नहीं?*    ✔

▶ भजन एवम् प्रचार
यह साधक की दो आंखें हैं । कोई कोई वर्ग प्रचार में लगे हुए हैं । उनके द्वारा किया गया प्रचार अद्भुत ह । स्तुत्य है । अनुकरणीय है ।
कोई  वैष्णव भजन में लगे हुए हैं । वह प्रचार नहीं कर रहे हैं । लेकिन उनका भजन स्तुत्य है, अनुकरणीय है ।
हमें यह चाहिए कि जो जिस सेवा में । जिस विधा में लगा हुआ है उसके उस गुणों को देखें ।
यदि कोई भजन में दृढ़ता से लगा है और प्रचार नहीं कर रहा है तो हम यह कहें कि इसमें प्रचार न करने का दोष है तो यह उचित नहीं ।

▶ और कोई यदि जोरदार प्रचार कर रहा है और उसमे भजन की दृढ़ता नहीं तो भजन की दृढ़ता ना होने को दोष उस में देखना उचित नहीं ।
इस दृष्टि को यदि हम रखेंगे तो एक पुरुष में स्त्री न होने का दोष है । और एक स्त्री में पुरुष न होने का दोष ।

Tuesday, 6 December 2016

Granth : Shri HansDoot

​​📖 ग्रन्थ    परिचय 6⃣1⃣    📖

💢 ग्रन्थ   नाम : श्रीहंसदूत     
💢 लेखक  : श्रीपाद रूप गोस्वामी  
💢 भाषा : संस्कृत-हिंदी अनुवाद |
ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
  
   
💢 साइज़ : 14 x 22  सेमी
💢 पृष्ठ     : 56 सॉफ्ट      बाउंड
💢 मूल्य    : 30  रूपये

💢 विषय वस्तु : ब्रजगोपियों ने अपनी विरह वेदना 
              एक हँस के द्वारा मथुरा मैं श्रीकृष्ण 
              को प्रेषित की, उसका भावपूर्ण वर्णन 

💢 कोड : M061-Ed2 


💢 प्राप्ति    स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री

📗🔸📘🔹📙🔶📔

 श्रीहंसदूत

Susksham Sutra Part 29


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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 29

💡 कुत्ता पालने वाले के घर में पितृ दोष
रहता है, संतान होने में बाधा होती है
और उनके पितर श्राद्ध का अन्न
ग्रहण नहीं करते.
श्रीमद्भागवत के अनुसार 29 नरकों
मैं से एक नरक में
उनके लिए सीट आरक्षित रहती है.

💡 हर प्राणी में भगवान है
यह वाक्य उन दुष्ट कसाई लोगों को
शिक्षा देने के लिए है जो पैसों के लिए
जानवरों की हिंसा करते हैं.और
उन मांसाहारी लोगों के लिए भी
जो डेढ़ इंच की जिह्वा के स्वाद के लिए
बेचारे मुक प्राणियों को
उनके मल मुत्र सहित खा जाते हैं.

💡 एक मात्र भगवान श्रीकृष्ण
सोलह कलाओ के स्वामी है.
श्रीराम ने 12 कलाओं के साथ
परशुराम ने 3 कला,
वामन और नरसिंह ने दो-दो कला
मत्स्य-कश्यप और
वराह ने 1-1 कला
के साथ अवतार लिया था.

 ॥ जय श्री राधे ॥ 
 ॥ जय निताई  ॥ 

 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Sunday, 4 December 2016

Granth Prichay : Shri Chaitnya Chintan

​​📖 ग्रन्थ    परिचय 6⃣0⃣    📖
💢 ग्रन्थ   नाम : श्रीचैतन्य चिंतन   
💢 लेखक  : डा. भागवत कृष्ण
💢 भाषा : हिंदी      सचित्र 
   💢 साइज़ : 14 x 22  सेमी
💢 पृष्ठ     : 248 सॉफ्ट      बाउंड
💢 मूल्य    : 200  रूपये

💢 विषय वस्तु शौधार्थियों हेतु श्रीचैतन्य लीला एवं
             दार्शनिक सिद्धांत सम्बन्धी समस्त
             सामग्री का सम्पूर्ण अध्यन

💢 कोड : M060-Ed1 

💢 प्राप्ति    स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री
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 Shri Chaitnya Chintan

Nitya Leela Pravesh

नित्य लीला प्रवेश


​​​✔  *​नित्य लीला प्रवेश*    ✔

▶ अथवा निकुंज लीला प्रवेश । निकुंज गमन । कुंज गमन । ऐसे शब्द हैं जो हम  प्राय प्रयोग करते हैं ।

▶ कुंज वह है जहां सखा एवं
सखियां दोनों का प्रवेश है ।

▶ निकुंज में केवल सखियों
का प्रवेश है और

▶ निभृत निकुंज में केवल मंजरियों का प्रवेश है । न सखियों का ना सखाओं का । इस गहराई को समझे रहना चाहिए ।

▶ दूसरी बात है नित्य लीला प्रवेश की ।
गुरुदेव नाम मंत्र अथवा गोपाल मंत्र देकर भक्ति का बीजारोपण कर देते हैं ।

▶ उस बीज को श्रवण कीर्तन और स्मरण के जल से सींचना होता है । उसको सीचने पर एक भक्ति पौधा उत्पन होता है और पौधे के साथ-साथ खरपतवार भी पैदा होती है पूजा प्रतिष्ठा एवं लाभ की ।

▶ हम भजन क्यों करें हमें क्या लाभ है ।
हम भजन करते हैं हमारी पूजा होनी चाहिए
हम भजन करते हैं हमारी प्रतिष्ठा होनी चाहिए ।

▶ यह खरपतवार ऐसी है कि, जो हम श्रवण कीर्तन स्मरण का जल देते हैं । इस खरपतवार को यदि उखाड़ कर फेंका नहीं गया तो यह खरपतवार उस श्रवण कीर्तन स्मरण रुपी जल से स्वयम को पुष्ट करती जाती है और भक्ति रूपी बेल या पौधा शिथिल हो जाता है और कही कभी नष्ट भी हो जाता है ।

▶ इसलिए भजन के साथ साथ हम इस बात की चेष्टा रखें कि कहीं खरपतवार तो नहीं हो गई, कहीं  खरपतवार  हमारे जल को अपनी पुष्टि के लिए प्रयोग तो नहीं कर रही ।

▶ श्रद्धा
▶ साधु संग
▶ भजन क्रिया
▶ अनर्थ निवृत्ति
▶ निष्ठा
▶ रुचि
▶ आसक्ति और
▶ भाव ।

▶ ये उस भक्ति बेल की सीढ़ियां हैं

▶ भाव पर पहुंच कर साधक को साक्षात दर्शन होने लगता है और मन ही मन जो प्रक्रियाएं वह करता है उसका प्रभाव पंच भौतिक स्थिति पर पड़ने लगता है, दिखने लगता है ।

▶ जैसे यदि मानसिक लीला में यह देखा गया कि प्रिया जी का कुछ रंग उड़ कर मेरे ऊपर आ गिरा है तो वास्तव में मेरे वस्त्र पर रंग गिरा दीखता है ।

▶ यह है भाव तक की स्थिति । भाव तक की प्रक्रिया इस पंच भौतिक देह से ही होती  रहता है । जैसे ही प्रेम उदित होता है यह पंच भौतिक देह पात हो जाता है ।

▶ फिर योगमाया इस सुक्ष्म शरीर को वहां ले जाती है जहा इस ब्रह्मांड में इस समय ठाकुर की नित्य लीला चल रही होती है ।

▶ वहां ले जाकर इस जीव को किसी परिकर भूत गोपी के गर्भ में स्थापित कर देती है । फिर यह जीव उस गोपी के गर्भ से जन्म लेता है और परिकर के रूप में कृष्ण की समस्त लीलाओं का दर्शन करता है । सहायता करता है । मंजरी सखी रूप में इसका लीला में प्रवेश होता है ।

▶ नित्य लीला में प्रवेश का यह शास्त्रीय क्रम है जो कि विश्वनाथ चक्रवर्ती पादने भक्ति रसामृत सिंधू बिंदु में वर्णित किया है ।

▶ नित्य लीला प्रवेश । यह गुड़ का चीला नहीं है जो लपेटा और खा गए । बहुत ही चेष्टा, भक्ति भजन गहराई से चिंतन आदि करने पर अगले शरीर में प्राप्त होता ह ।

▶ इस शरीर में साधक केवल भाव् तक ही पहुंच पाता है । और भाव तक  कितने पहुंचते हैं यह आप हम सभी जानते हैं । अतः लगे रहिये । ऊँची ऊँची बातें बनाने की अपेक्षा भजन म  लगिए । बहुत कठिन ह डगर पनघट की ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn​

Friday, 2 December 2016

ग्रन्थ परिचय : श्रीगौरांगलीला

​​📖 ग्रन्थ    परिचय 5⃣ 9⃣    📖

💢 ग्रन्थ   नाम : श्रीगौरांगलीला  
💢 लेखक  : ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
💢 भाषा : संस्कृत-हिंदी अनुवाद-टीका
 
💢 साइज़ : 14 x 18  सेमी
💢 पृष्ठ     : 32 सॉफ्ट      बाउंड
💢 मूल्य    : 10  रूपये

💢 विषय वस्तु :महाप्रभु श्रीगौरांग का संक्षिप्त
             जीवन-परिचय

💢 कोड : M059-Ed1


💢 प्राप्ति    स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

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granth gourangleel

Dasabhas Ji Kahin 021216


Dasabhas Ji Kahin 021216


🙌🏼      🙏🏼     🙌🏼      🔏🔓
🎪जय गौर हरि🎪

📮📮कछ जिज्ञासाएँ❓
💽💽💽उनके समाधान....।
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📮शरद्धा का level....।

~~~> http://yourlisten.com/Dasabhas/db-2

💽⏰05:08
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📮रस कितने प्रकार के?

~~~> http://yourlisten.com/Dasabhas/madhur

💽⏰02:51
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📮मोबाइल से भजन सुनने से नींद।

~~~> http://yourlisten.com/Dasabhas/mobile

💽⏰09:24
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📮जयंती व्रत कब तक।

~~~> http://yourlisten.com/Dasabhas/ram-2

💽⏰01:28
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📮जीव कोटि केवल भाव तक। महाभाव पर प्रकाश।

~~~> http://yourlisten.com/Dasabhas/mahabhav

💽⏰03:14
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📮दो प्रकार की भक्ति...एक वार्ता।

~~~> http://yourlisten.com/Dasabhas/bhakti-3

💽⏰13:39
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📮परेम या विशुद्ध भक्ति।

~~~> http://yourlisten.com/Dasabhas/prem

💽⏰06:01
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📮 परारब्ध पूर्ण होने पर मृत्यु और मरने के बाद सूक्ष्म सवरूप।

~~~> http://yourlisten.com/Dasabhas/prarbdh-2

💽⏰03:14
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🎤 डा:श्री गिरिराज दासाभास नांगिया जी
      श्री धाम वृन्दावन से
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🐚।श्री राधारमणाय समर्पणम्।