Thursday, 1 December 2016

ग्रन्थ परिचय : श्रीउज्ज्वलनीलमणि

​​📖 ग्रन्थ    परिचय 5⃣ 8⃣    📖

💢 ग्रन्थ   नाम : श्रीउज्ज्वलनीलमणि
💢 लेखक  : श्रीरूपगोस्वामीपाद
 💢 भाषा : संस्कृत-हिंदी अनुवाद-टीका
   ब्रजविभूति श्रीश्यामदास

💢 साइज़ : 14 x 22 सेमी
💢 पृष्ठ     : 432 हार्ड     बाउंड
💢 मूल्य    : 400  रूपये

💢 विषय वस्तु :
      श्रीराधादि-सिद्ध मधुर रस-परिकारों के स्वरूप-
      भावों के सूक्ष्म विवेचन के साथ श्रीराधाकृष्ण
      की निकुंज लीलाओं का अनुपम वर्णन

💢 कोड : M058-Ed3


💢 प्राप्ति    स्थान:

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री

📗🔸📘🔹📙🔶📔

श्रीउज्ज्वलनीलमणि

Giridhar Koun?

Giridhar Koun?


​​✔  *गिरिधर कौन ?*    ✔    

▶ प्रायः कोई सामान्य सा व्यक्ति
कोई बड़ा कार्य कर भी दे तो उसे उतनी प्रशंशा
या पहचान नहीं मिलती जितनी किसी बड़े आदमी
को कोई थोड़ा बड़ा कार्य करने पर मिलती है

▶ कह 'रहीम' हनुमंत को
गिरिधर कहे न कोय

▶ पर्वत या गिरि तो हनुमान जी ने भी
उठाया था , लेकिन उन्हें कोई गिरिधर नहीं कहता है
सभी श्री कृष्ण को ही गिरिधर कहते हं

▶ अतः प्रशंशा या पहचान मिले न मिले
किसी भी बड़े कार्य में लगे तो रहना ही चाहिए


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Wednesday, 30 November 2016

सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर भाग 28



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 28

💡 जो व्यक्ति भगवद बहिर्मुखी हो
और उपदेश सुनकर भी
वह भगवत उन्मुख न हो रहा हो
ऐसे व्यक्ति को भगवद उपदेश
नहीं करना चाहिए
यह नाम अपराध है

💡 अकर्मण्य व्यक्ति की अपेक्षा
वह व्यक्ति श्रेष्ठ है
जो किसी कार्य के लिए
प्रयास करता है और
उसमें असफल हो जाता है.
हारने का मतलब है जीत की
एक सीढ़ी पार कर लेना.

💡 12 वर्ष तक माता के गर्भ में रहने वाले
" मेरी माया तुम्हें नहीं पकड़ेगी "-
भगवान के आश्वासन के बाद
प्रकट होने वाले और प्रकट होते ही
अवधूत अवस्था में घर त्याग कर
चलने वाले श्रीमद्भागवत के गायक
परमहंस रसिक शिरोमणि सर्वज्ञाता
श्री शुकदेव जी ने भी पिता श्री वेदव्यास जी
के कहने से राजा जनक को गुरु बनाया
और उनसे ज्ञान प्राप्त किया.
विशेष ज्ञानवान निगुरे साधकों के लिए
क्या यह संदेश प्रेरक नहीं.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया  
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ग्रन्थ परिचय : श्रीब्रह्म सहिंता

​​📖 ग्रन्थ    परिचय 5⃣ 7⃣   📖
💢 ग्रन्थ   नाम : श्रीब्रह्म सहिंता
💢 लेखक  : श्रीब्रह्मा जी
💢 भाषा : संस्कृत-हिंदी अनुवाद-टीका
💢 साइज़ : 14 x 22 सेमी💢 पृष्ठ     : 76 सॉफ्ट    बाउंड
💢 मूल्य    : 30  रूपये
💢 विषय वस्तु :
      सृष्टि के आरम्भ में ब्रह्मा जी द्वारा
      गोलोकस्थ भगवान श्रीगोविन्द
      की विपुल स्तुति  
💢 कोड : M057-Ed2
💢 प्राप्ति    स्थान:
1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस
📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री

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Tuesday, 29 November 2016

granth shrihari bhkti vilas



​​📖 ग्रन्थ    परिचय 5⃣ 6⃣  📖

💢 ग्रन्थ   नाम : श्रीहरिभक्ति विलास 
💢 लेखक  : श्रीसनातन-श्रीगौपल भट्ट  गोस्वामी
💢 भाषा : संस्कृत-हिंदी | बृज विभूति श्री श्यामदास
💢 साइज़ : 14 x 22 सेमी
💢 पृष्ठ     : 124 सॉफ्ट    बाउंड
💢 मूल्य    : 100  रूपये

💢 विषय वस्तु :
       वैष्णवों का संविधान ग्रन्थ 
       अनेक शंकाओ का शास्त्रीय समाधान 

💢 कोड : M056-Ed1

💢 पराप्ति   स्थान:



1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री

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mere ya unka

mere ya unka
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✔  *mere ya unka*    ✔  

▶ श्री कृष्ण मेरे हैं
श्री कृष्ण मेरे हैं -इस भाव को मदीयता भाव कहते हैं

▶ अर्थात-उनकी सेवा, उनका ध्यान मुझे
रखना है - इसे भक्ति भी कहते हैं
= श्री कृष्ण की अनुकूलता पूर्वक उनकी सेवा।

Monday, 28 November 2016

shri ji ke nupur

​​​✔  *श्री जी के नूपुर*    ✔

▶ यह सारी सृष्टि शब्द सृष्टि है । जब प्रारंभ होती है तो शब्द से ही प्रारंभ होती है । जैसे ठाकुर कहते हैं पृथ्वी । तो पृथ्वी उत्पन्न हो जाती है ।

▶ ठाकुर कहते हैं जल । तो जल उत्पन्न हो जाता है ठाकुर कहते हैं वृक्ष । तो वृक्ष उत्पन्न हो जाते हैं

▶ लेकिन प्रश्न उठता है कि यह शब्द कहां से निकला । क्योंकि शब्द या अक्षर भी ब्रह्म ही है गीता में कहा है " अकारोस्मि" । ॐ  भी शब्द ब्रह्म है ।

▶ श्री अच्यु्त लाल जी भट्ट की भागवत निवास की कथा में उत्कलिका वल्लरी का रसास्वादन करते हुए श्री रूप गोस्वामी पाद ने कहा है।

▶ इस शब्द की उत्पत्ति है सर्वप्रथम वह श्रीजी  के नूपुर से होती है । जब श्री जी चलती है तो उनके नूपुरों से जो ध्वनि होती है सर्व प्रथम शब्द का प्रादुर्भाव, शब्द की पहली उत्पत्ति श्रीजी के
नूपुरों से होती है ।

▶ अ हा हा हा कितनी सुंदर रस भरी बात और दूसरी शब्द की उत्पत्ति लाल जी की बांसुरी से होती है ।

▶ लाल जी की बांसुरी और प्रिया जी के नूपुर इन दोनों से शब्द की उत्पत्ति होती है और फिर शब्द से समस्त सृष्टि की उत्पत्ति होती है  ।


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

shri ji ke nupur