Tuesday, 7 February 2017

Sabhi Ki Alag Alag Kksha

Sabhi Ki Alag Alag Kksha


✔  *सभी की अलग-अलग कक्षा*    ✔


▶ 'जिस प्रकार एक विद्यालय में पढ़ने वाले 400 बच्चे एक ही क्लास में नहीं पढते हैं ।

▶ 'कोई 2 में कोई 8 में कोई 6 में कोई 12  में पड़ता है । उसी प्रकार भजन करने वाले समस्त भक्त एक ही स्तर के नहीं होते हैं ।

▶ 'उनके भी स्तर होते हैं । बहुत से प्राइमरी स्तर वाले किसी के कहने से या अपने मनमाने ढंग से किसी भी देवी देवता की उपासना या मंत्र या आधा-अधूरा जप करते रहते हैं ।

▶ 'करते करते उन्हें किसी वैष्णव से संपर्क होता है वह वैष्णव फिर उन्हें सही जप,  सही मंत्र, सही राय , सही उपाय बताता है ।

Monday, 6 February 2017

Madhurya Kadmbini Part 3



✴️माधुर्य कादम्बिनी कथा ✴️

भाग 3⃣

🎙  स्वर: दासाभास डा गिरिराज

🏚वृन्दावन धाम

🙇🏼 प्रस्तुति : अनंत हरिदास

http://yourlisten.com/Dasabhas/madhurya3-3

Sunday, 5 February 2017

Madhurya Kadmbini Part 2



✴️माधुर्य कादम्बिनी कथा ✴️

भाग 2⃣

🎙  स्वर: दासाभास डा गिरिराज

🏚वृन्दावन धाम

🙇🏼 प्रस्तुति : अनंत हरिदास

http://yourlisten.com/Dasabhas/madhurya-2

Sukshm Sutra Part 37



⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱⚱
सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺🏺

 🔮 भाग 3⃣7⃣

💡 जिस पुष्प में मकरंद होता है
उसका पान करने के लिए
भौरें उसपर मंडराते रहते हैं|
ऐसे ही धन के आ जाने पर योग्य
अथवा योग्य व्यक्ति के पास भी
लोग मंडराने लग जाते है| यह
धन का प्रभाव है परन्तु मनुष्य
कितना भोला है कि इसे वह अपना
प्रभाव समझने लग जाता है|

💡 अपने कर्म द्वारा किए गये
पापों के विनाश के लिए
भगवान को कर्मफल अर्पण
और भगवान की प्रीती के लिए
जो भगवान की पूजा करता है
वह सात्विक भक्त है.

💡 यश, ऐश्वर्य, विषयवासना
और भेद्बुद्दी होकर विबिन्न
प्रतिभाओ में जो
मेरी पूजा करता है
वह राजसिक भक्त है.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Saturday, 4 February 2017

Madhurya Kadmbini Part 1



✴️माधुर्य कादम्बिनी कथा ✴️

भाग 1⃣

🎙 वक्ता: दासाभास डा गिरिराज

🏚वृन्दावन धाम


http://yourlisten.com/Dasabhas/madhurya-1-1


Kacha AAm Khatta Meetha Aam Meetha


✔️  *कच्चा आम, खट्टा मीठा, आम मीठा*    ✔️


▶️ भजन भक्ति करते हुए जो दासाभास सहित हम साधन भक्ति करते हैं, जिसमें श्रवण कीर्तन स्मरण पादसेवन पूजन-वंदन आत्मनिवेदन आदि नवधा भक्ति आती है ।

▶️ भक्ति के इन सब साधनों को इन सब उपायों को भक्ति के इस स्वरूप को शास्त्रों में कच्चा आम की उपाधि दी गई है ।

▶️ इसके बाद इन साधनों को करते-करते हम

▶️ श्रद्धा
▶️ साधु संग
▶️ भजन क्रिया
▶️ अनर्थ निवृत्ति
▶️ निष्ठा
▶️ रुचि
▶️ आसक्ति और
▶️ भाव

▶️ तक की कक्षा में पहुंचते हैं ।
जब हम भाव की कक्षा में पहुंच जाते हैं, जब हमारे अंदर भाव उदित हो जाता है ।उस अवस्था को खट मित्ठा आम कहा गया है ।

▶️ यह ध्यान रहे कि इस वर्तमान शरीर में हम केवल भाव तक ही पहुंच पाते हैं और वह भी करोड़ों में से कोई एक ।

▶️ भाव के बाद जब यह शरीर और हमारा अंतःकरण, हमारा हृदय प्रेम को धारण करने योग्य हो जाता है, तब इस शरीर का पात हो जाता है ।

▶️ ये समझे रहें । इस जीवन म् साधक भाव तक ही पहुँचता है । प्रेम प्राप्ति इस शरीर म् नही होती । प्रेम प्राप्ति की योग्यता आते ही शरीर राधे राधे ।

▶️ अच्छे से अच्छे सन्त भी भाव में ही रहते हैं । और शरीर पात होने पर

▶️ भगवान की लीला शक्ति योग माया हमारे इस जीव को ले जाकर वहां उस ब्रह्मांड में जहां श्रीकृष्ण की प्रकट लीला आज भी हो रही है उनके परिकर भूत किसी गोपी के गर्भ में हमें स्थापित कर देती है ।

▶️ फिर वहां उस गोपी के गर्भ से हमारा जन्म होता है और हम वहीं कृष्ण लीला परिक्र में ही जन्म लेकर अपने भाव के अनुसार धीरे धीरे बड़े होकर कृष्ण की उस लीला में सहायक बनते हुए कृष्ण की नित्य लीला में साक्षात प्रवेश करते हैं ।

▶️ और जब कृष्ण की साक्षात लीला में हम प्रवेश करते हैं तब हमें उस प्रेम की प्राप्ति होती है ।

▶️ उस प्रेम को कहा गया मीठा आम ।
जब कृष्ण प्रकट लीला का संवरण करते हैं तब वह अपने परिकर को नित्य गोलोक धाम में ले जाते हैं अथवा अपने साथ वहां उस ब्रह्माण्ड में ले जाते हैं जहाँ अब लीला होनी है ।

▶️ ठीक वैसे जैसे एक कथा करने वाले की टीम उसके साथ साथ चलती है ।

▶️ और वहां पर सब अपनी-अपनी सेवा करते हैं तो हम भी क्योंकि उस परिकर में शामिल हो जाते हैं तो हम भी लीला संवरण के समय कृष्ण के साथ साथ साथ रहते हैं और नित्य उनकी लीला में सेवा करते हैं ।

▶️ ऐसा एक क्रम है । तो
साधन हुआ कच्चा आम
भाव हुआ खट मीठा आम और
प्रेम हुआ मीठा आम
जो कि हमारा साध्य है ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Wednesday, 1 February 2017

Shri Vishnu Priya Devi Ji Janm Mahotsav

Shri Vishnu Priya Devi Ji Janm Mahotsav


🎉श्रीविष्णुप्रियादेवीजी जन्म-महोत्सव🎉

🌿🌼श्रीभगवान् की अनेक-अनेक शक्तियां है, जो उनकी अवतार-लीला को सम्पन्न करने के लिये उनके साथ-साथ पृथ्वीतल पर आविभूर्त होती हैं, मधुररस-भक्ति की परिकर हैं सब कान्तागण।

🌿🌼श्रीगौरगणोद्देशदीपिका में आपका परिचय इस प्रकार दिया गया हैं-

🌿श्रीसनातनमिश्रो$यं पुरा सत्राजितो नृप:।
🌿विष्णुप्रिया जगन्माता यत्कन्या भूस्वरूपिणी।।

🌿🌼व्रज-लीला में जो राजा सत्राजित है, जिनकी कन्या श्रीसत्यभाभा जी हैं, वे नवद्वीप में श्रीसनातन मिश्र हुए और भू स्वरूपिणी जगन्माता श्रीविष्णुप्रिया जी उनकी कन्यारूप में आविर्भूत हुई।

🌿🌼श्रीचैतन्यदेव पृथ्वी की अंश-रुपिणी श्रीविष्णुप्रिया को अपनी कान्ता जानकर उसका पाणिग्रहण करेगें और फिर जगत् को वैराग्य की शिक्षा देने के लिए स्वयं किशोर अवस्था में संन्यास लेकर उस किशोरी का परित्याग कर देगें। श्रीभगवान् की तीन मुख्य शक्तियां है-श्री शक्ति, भू-शक्ति तथा लीला-शक्ति। सौन्दर्य एवं सम्पत्ति की अधिष्ठात्री शक्ति का नाम है श्रीशक्ति। जगत् की उत्पत्ति स्थिति की अधिष्ठात्री शक्ति का नाम है भू-शक्ति और श्रीनारायण की लीला-विधान करने वाली शक्ति को लीला-शक्ति कहते है। श्रीविष्णुप्रियाजी उस भू-शक्ति अर्थात जगत् की उत्पत्ति तथा स्थिति करने वाली अधिष्ठात्री शक्ति की मूर्तरूप हैं।

🌿🌼श्रीसनातन मिश्र नवद्वीप मे ही रहते है, परम उदार, दयालु एवं परम विष्णुभक्त हैं। सत्यवादी, परोपकार है और 'राजपण्डित' कहलाते है। इनकी पत्नी है परम भाग्यशालिनी महामाया देवी। इनके गर्भ से श्रीविष्णुप्रिया जी ने जन्मलीला सम्पन्न की। अनुमानत:सम्वत् १५५० हैं तप्त स्वर्ण कान्ति की भाँति अति सुन्दर अंग-कान्ति हैं श्रीविष्णुप्रियादेवीजी की।

🎉🎈जन्म-महोत्सव मनाया जा रहा हैं। श्रीसनातन मिश्र के भुवन मे अनेक बाजों की ध्वनि के साथ। श्रीगौंराग शिशु खेल रहे है समवयस्क बालकों के साथ। आनन्द ध्वनि सुनकर सबने कहा-चलो-चलो देखें क्या मंगल हो रहा है आज सनातन जी के घर। श्रीगौंराग तो अन्तर्यामी है, जानते है सब बात। सबसे आगे-आगे भागकर चले। दोनों ने एक दूसरे को सहज नहीं, अभूतपूर्व चितवन से देखा, पहचान गए एक दूसरे को। श्रीगौंराग तो सनातन-आंगन में 'हरिबोल' की उच्च ध्वनि कर बालक मण्डली के साथ नाच रहे है।

🎉🎈श्रीविष्णुप्रियादेवी जन्म-महोत्सव की कोटिश बधाई..!!

📯🎉🎈🎊🎈🙏🎉🎈🎊🎈📯
       
📕स्त्रोत एवम् संकलन
 〽व्रजविभूति श्रीश्यामदासजी
🏡श्री हरिनाम प्रैस वृन्दावन द्वारा
📝लिखित-व्रज के सन्त ग्रन्थ से