🎉श्रीविष्णुप्रियादेवीजी जन्म-महोत्सव🎉
🌿🌼श्रीभगवान् की अनेक-अनेक शक्तियां है, जो उनकी अवतार-लीला को सम्पन्न करने के लिये उनके साथ-साथ पृथ्वीतल पर आविभूर्त होती हैं, मधुररस-भक्ति की परिकर हैं सब कान्तागण।
🌿🌼श्रीगौरगणोद्देशदीपिका में आपका परिचय इस प्रकार दिया गया हैं-
🌿श्रीसनातनमिश्रो$यं पुरा सत्राजितो नृप:।
🌿विष्णुप्रिया जगन्माता यत्कन्या भूस्वरूपिणी।।
🌿🌼व्रज-लीला में जो राजा सत्राजित है, जिनकी कन्या श्रीसत्यभाभा जी हैं, वे नवद्वीप में श्रीसनातन मिश्र हुए और भू स्वरूपिणी जगन्माता श्रीविष्णुप्रिया जी उनकी कन्यारूप में आविर्भूत हुई।
🌿🌼श्रीचैतन्यदेव पृथ्वी की अंश-रुपिणी श्रीविष्णुप्रिया को अपनी कान्ता जानकर उसका पाणिग्रहण करेगें और फिर जगत् को वैराग्य की शिक्षा देने के लिए स्वयं किशोर अवस्था में संन्यास लेकर उस किशोरी का परित्याग कर देगें। श्रीभगवान् की तीन मुख्य शक्तियां है-श्री शक्ति, भू-शक्ति तथा लीला-शक्ति। सौन्दर्य एवं सम्पत्ति की अधिष्ठात्री शक्ति का नाम है श्रीशक्ति। जगत् की उत्पत्ति स्थिति की अधिष्ठात्री शक्ति का नाम है भू-शक्ति और श्रीनारायण की लीला-विधान करने वाली शक्ति को लीला-शक्ति कहते है। श्रीविष्णुप्रियाजी उस भू-शक्ति अर्थात जगत् की उत्पत्ति तथा स्थिति करने वाली अधिष्ठात्री शक्ति की मूर्तरूप हैं।
🌿🌼श्रीसनातन मिश्र नवद्वीप मे ही रहते है, परम उदार, दयालु एवं परम विष्णुभक्त हैं। सत्यवादी, परोपकार है और 'राजपण्डित' कहलाते है। इनकी पत्नी है परम भाग्यशालिनी महामाया देवी। इनके गर्भ से श्रीविष्णुप्रिया जी ने जन्मलीला सम्पन्न की। अनुमानत:सम्वत् १५५० हैं तप्त स्वर्ण कान्ति की भाँति अति सुन्दर अंग-कान्ति हैं श्रीविष्णुप्रियादेवीजी की।
🎉🎈जन्म-महोत्सव मनाया जा रहा हैं। श्रीसनातन मिश्र के भुवन मे अनेक बाजों की ध्वनि के साथ। श्रीगौंराग शिशु खेल रहे है समवयस्क बालकों के साथ। आनन्द ध्वनि सुनकर सबने कहा-चलो-चलो देखें क्या मंगल हो रहा है आज सनातन जी के घर। श्रीगौंराग तो अन्तर्यामी है, जानते है सब बात। सबसे आगे-आगे भागकर चले। दोनों ने एक दूसरे को सहज नहीं, अभूतपूर्व चितवन से देखा, पहचान गए एक दूसरे को। श्रीगौंराग तो सनातन-आंगन में 'हरिबोल' की उच्च ध्वनि कर बालक मण्डली के साथ नाच रहे है।
🎉🎈श्रीविष्णुप्रियादेवी जन्म-महोत्सव की कोटिश बधाई..!!
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📕स्त्रोत एवम् संकलन
〽व्रजविभूति श्रीश्यामदासजी
🏡श्री हरिनाम प्रैस वृन्दावन द्वारा
📝लिखित-व्रज के सन्त ग्रन्थ से
