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Sunday, 5 February 2017

Sukshm Sutra Part 37



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सूक्ष्म सूत्र / गागर में सागर
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 🔮 भाग 3⃣7⃣

💡 जिस पुष्प में मकरंद होता है
उसका पान करने के लिए
भौरें उसपर मंडराते रहते हैं|
ऐसे ही धन के आ जाने पर योग्य
अथवा योग्य व्यक्ति के पास भी
लोग मंडराने लग जाते है| यह
धन का प्रभाव है परन्तु मनुष्य
कितना भोला है कि इसे वह अपना
प्रभाव समझने लग जाता है|

💡 अपने कर्म द्वारा किए गये
पापों के विनाश के लिए
भगवान को कर्मफल अर्पण
और भगवान की प्रीती के लिए
जो भगवान की पूजा करता है
वह सात्विक भक्त है.

💡 यश, ऐश्वर्य, विषयवासना
और भेद्बुद्दी होकर विबिन्न
प्रतिभाओ में जो
मेरी पूजा करता है
वह राजसिक भक्त है.

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

Saturday, 23 July 2016

भगवता का सार

🔴भगवता का सार 🔴

अर्थात सबसे बड़ा भगवान कौन । अथवा भगवान होने के लिए क्या आवश्यक है ।  जिसमें ऐश्वर्य की अधिकता है जिसका बहुत अधिक ऐश्वर्य है वह भगवान हो सकता है लेकिन जिसमें अपरिसीम माधुर्य है ।

🔴जो माधुर्य का स्रोत है जो रस का आधार है जो स्वयं रस है जिसमें माधुर्य कूट कूट के भरा है वह ही सर्वोपरि भगवान है ।और वह माधुर्य हमारे श्यामसुंदर श्रीकृष्ण में है

🛢कष्ण के ही दूसरे स्वरूप द्वारकाधीश में ऐश्वर्य है ऐश्वर्य की अधिकता है माधुर्य की नहीं । लेकिन यहां ब्रिज में माधुर्य की अधिकता है । माधुर्य ही माधुर्य है यहां ऐश्वर्य नहीं ।