✅ टटोलिये ह्रदय को ✅
▶ जब में ये लिखता हूँ कि
▶ में तो एक सामान्य सा इंसान हूँ । सब आप की कृपा है । भजन साधन तो में न कुछ जानता हूँ । न करता हूँ । ▶ माया में फंसा एक पापी तापी प्राणी हूँ।
▶ तो कम से कम मेरे कान या आँखें उत्सुक होती हैं ये देखने सुनने को कि
▶ "*नहीं । नहीं । आप तो बहुत सज्जन हैं* । ऐसा क्यों कहते हो । आप तो ये । आप तो वो । आदि आदि ।
▶ आप भी चेक करिये आपने आप को कि आपके ह्रदय में क्या आता है ।
▶ में सोचता हूँ ।
▶ यदि किसी ने ये कहा
▶ कि । ठीक ही कहा आपने । अब ये नाटक बन्द करो । बहुत हो गया । में तो पहले से ही समझता था । अच्छा ▶ हुआ जो आज खुद तुमको भी पता चल गया । तो मुझे कैसा लगेगा क्या बुरा ही लगेगा ।
▶ अतः दैन्य दिखाने या लिखने के लिए नही है । धारण करने की वास्तु है । दिखाने और लिखने से तो और अहम ▶ बढ़ता है । अपितु अपने दीं होने का भी अहम हो जाता है ।
🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई ॥ 🐚
▶ जब में ये लिखता हूँ कि
▶ में तो एक सामान्य सा इंसान हूँ । सब आप की कृपा है । भजन साधन तो में न कुछ जानता हूँ । न करता हूँ । ▶ माया में फंसा एक पापी तापी प्राणी हूँ।
▶ तो कम से कम मेरे कान या आँखें उत्सुक होती हैं ये देखने सुनने को कि
▶ "*नहीं । नहीं । आप तो बहुत सज्जन हैं* । ऐसा क्यों कहते हो । आप तो ये । आप तो वो । आदि आदि ।
▶ आप भी चेक करिये आपने आप को कि आपके ह्रदय में क्या आता है ।
▶ में सोचता हूँ ।
▶ यदि किसी ने ये कहा
▶ कि । ठीक ही कहा आपने । अब ये नाटक बन्द करो । बहुत हो गया । में तो पहले से ही समझता था । अच्छा ▶ हुआ जो आज खुद तुमको भी पता चल गया । तो मुझे कैसा लगेगा क्या बुरा ही लगेगा ।
▶ अतः दैन्य दिखाने या लिखने के लिए नही है । धारण करने की वास्तु है । दिखाने और लिखने से तो और अहम ▶ बढ़ता है । अपितु अपने दीं होने का भी अहम हो जाता है ।
🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई ॥ 🐚
