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Friday, 24 November 2017

Gyan Kriya Bal


ज्ञान
क्रिया
बल

ये तीन स्थिति हैं
सर्व प्रथम भजन का ज्ञान प्राप्त होता है,
जानकारी होती है

जानकारी के बाद भजन में लगते हैं
क्रिया, करना प्रारम्भ करते हैं

क्रिया करने से बल, आत्मविश्वास
होता है । तभी व्यास जी कहते हैं

व्यास भरोसे कुंवरि के
सोवत पांव पसार

अथवा
हम श्री राधाजू के बल अभिमानी

समस्त वैष्णवजन को दासाभास का प्रणाम


समस्त वैष्णववृन्द को दासाभास का प्रणाम

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn 

Sunday, 11 September 2016

बल बुद्धि विद्या

✔  *बल बुद्धि विद्या*    ✔

▶ सामर्थ्य या उपलब्धि या कुछ पाने के लिए या जीवन म कुछ बनने के लिए तीन विधा हैं

1। बल
अर्थात परिश्रम । मेहनत ।
यदि अपने सम्पूर्ण बल से कोई लग जाय तो वह स्फलता प्राप्त कर लेता है

2। बुद्धि
अर्थात । विचार द्वारा  । सोच द्वारा । योजना द्वारा भी अपेक्षाकृत कम परिश्रम करके भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता ह ।

▶ कम्पनियों म पालिसी मेकर इसी श्रेणी के होते हैं
व् खुद नही भागते हैं । उनकी बुद्धि भागती है ।

3। विद्या
का सामान्य अर्थ ह शिक्षा । लेकिन यहाँ है । विशेष योग्यता यानी प्रोफ़ेस्सिनल्स । जेसे डॉक्टर । वकील । कोई एक्सपर्ट । जो अपने हुनर म माहिर होता है ।

▶ तुलसीदास जी ने हनुमान जी से तीनो ही मांगे हैं

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि
करहु क्लेश विकार ।

▶ अर्थात हे हनुमान जी । आप मुझे ये तीनो विधा प्रदान करो , जिससे म बल से, बुद्धि से, विद्या से अपने प्रभु राम की सेवा में आपकी भांति लगा रहूँ ।

▶ विदित हो कि हनुमान जी म
बल
बुद्धि
विद्या
तीनों ही अनलिमिटेड मात्रा में हैं और इनका प्रयोग वे श्री राम सेवा म करते हैं ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

बल बुद्धि विद्या