Tuesday, 6 September 2016

​​ग्रन्थ ​ परिचय : श्रीवृन्दावनमहिमामृताम

� ​​ग्रन्थ ​ परिचय 3⃣3⃣ �

� ग्रन्थ नाम : श्रीवृन्दावनमहिमामृताम
17 शतक सम्पूर्ण
�लेखक : श्रीप्रबोधानन्द सरस्वतिपाद
� भाषा : मूल संस्कृत-हिन्दी-अनुवाद-
टीका ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
� साइज़ : 14 x 22 सेमी
� ​​पृष्ठ : 430 सॉफ्ट बाउंड
� ​​मूल्य : 300 रूपये

� विषय वस्तु :
श्रीवृन्दावन-निष्ठा एवं महिमा का
अद्वितीय ग्रन्थ, श्रीप्रबोधानंद जी का
चमत्कारिक प्रमाणिक जीवन चरित्र


� कोड : M033 -Ed7

� प्राप्ति  स्थान

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

� डाक द्वारा । 09068021415
पोस्टेज फ्री

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श्रीवृन्दावनमहिमामृताम
श्रीवृन्दावनमहिमामृताम

Monday, 5 September 2016

ग्रन्थ परिचय : श्रीमानसी सेवा

📖 ग्रन्थ   परिचय 3⃣0⃣  📖

💢 ग्रन्थ    नाम : श्रीमानसी सेवा
💢 लेखक  : सिद्ध बाबा श्रीकृष्णदास       सचित्र
💢 भाषा : संस्कृत-हिंदी  ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
  
💢 साइज़ : 14 x 22  सेमी
💢 पृष्ठ  : 222 सॉफ्ट बाउंड
💢 मूल्य   : 100 रूपये

💢 विषय वस्तु :
     श्रीनवद्वीप लीला तथा श्रीवृंदावन
     लीला का मानसिक
    अष्टयाम लीला चिंतन

💢 कोड : M030-Ed2

💢 पराप्ति  स्थान

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
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श्रीमानसी सेवा
श्रीमानसी सेवा

श्री राधाष्टमी

​✔     *श्री राधाष्टमी की पूर्व संध्या पर*    ✔

▶ हमारो धन राधा श्री राधा श्री राधा

▶ राधाष्टमी निकट है । श्री राधा जू के बारे में आज कुछ चर्चा की जाए ।

▶ एक होता है विषय । एक होता है आश्रय ।
जैसे यह मोबाइल की डिवाइस है, यह आश्रय है टेलीग्राम या वॉट्सएप्प का  ।

▶ यदि टेलीग्राम का प्रयोग करना है तो यह मोबाइल लेना ही पड़ेगा और केवल इसी मोबाइल को ही हम लक्ष्य मान लें । उसमें कोई सॉफ्टवेयर ना डलवाएं तो मोबाइल का पूर्ण सदु प्रयोग नहीं माना जाएगा ।

▶ यह यद्यपि बहुत निकृष्ट सा उदाहरण है फिर भी समझने में सहायता देता है ।

▶ हमारे आराध्य, हमारे उपास्य, हमारा टारगेट श्री कृष्ण या श्री कृष्ण चरण सेवा है । श्री कृष्ण हमारे विषय हैं । और कृष्ण का आश्रय है श्री राधा रानी ।

▶ यदि हमें श्री कृष्ण चरण सेवा प्राप्त करनी है तो हमें श्री राधा रानी का भजन,  राधा रानी की सेवा, राधारानी की प्रसन्नता विधान करनी पड़ेगी ।

▶ वैसे भी श्री कृष्ण चरण सेवा करने वाली  सर्वोपरि यदि कोई पात्र हैं तो वह राधा रानी है । हमें भी श्री कृष्ण चरण सेवा प्राप्त करनी है तो क्यों ना हम भी उस श्री राधारानी की प्रसन्नता का विधान करें जिससे वह शीघ्र ही हमें श्री कृष्ण चरण सेवा प्राप्त करा दें ।

▶ राधारानी आश्रय तत्व है ।
▶ राधारानी उपास्य तत्व नहीं है ।

▶ इसलिए उपास्य तत्व ब्रजेंद्रनंदन कृष्ण और
प्राप्तव्य धाम श्री वृंदावन
उपासना वहीं जो राधा जी ने की और
प्रमाण श्रीमद् भागवत

▶ इन चारों का आश्रय लेते हुए हम श्री राधा रानी की सखी श्री ललिता विशाखा ।

▶ ललिता विशाखा के आनुगत्य में हमारी संप्रदाय के आचार्य ।

▶ हमारी संप्रदाय के आचार्य के आनुगत्य में हमारे गुरुदेव

और गुरुदेव के आनुगत्य में हम

▶ इस प्रॉपर चैनल से हम श्री कृष्ण की कृपा श्रीकृष्ण की चरण सेवा प्राप्त कर सकते हैं।

▶ राधारानी क्योंकि कृष्ण को सर्वाधिक प्रिय है। प्रिय क्या, राधा रानी श्री कृष्ण ही है , एक प्रकार से कृष्ण में निहित अनंत शक्तियां में से सर्वोपरि जो शक्ति है वह है आल्हादिनी शक्ति ।

▶ श्रीकृष्ण को आनंद देने वाली शक्ति । और वह है हमारी श्री राधा रानी । श्रीकृष्ण अपना नाम सुनकर भी उतना प्रसन्न नहीं होते हैं, जितना वह श्री राधा का नाम सुनकर प्रसन्न होते हैं ।

▶ श्री राधा के जन्मोत्सव में जब हम नाचते हैं तो कृष्ण इतने प्रसन्न होते हैं, इतने प्रसन्न होते हैं कि अपने जन्मोत्सव जन्माष्टमी पर नाचने में भी नहीं होते ।

▶ श्रीराधा का जन्मोत्सव निकट है  । हम राधा जी का अभिषेक करें । राधे राधे की ध्वनि करें । राधा का नाम ले तो शीघ्र ही हमें श्री कृष्ण चरण सेवा प्राप्त हो जाएगी । इसलिए किे कृष्ण प्रसन्न होते हैं ।

▶ इस तात्विक दृष्टि को ध्यान में रखते हुए श्री राधा की उपासना । श्री राधा का आनुगत्य ।  श्री राधा नाम करते करते हम कृष्णचरण सेवा प्राप्त कर लेंगे ।

▶ वृंदावन में अनेक संप्रदायी कोई जय निताई बोलता है । कोई जय हरिदास बोलता है । कोई जय बिहारी जी बोलता है । कोई जय दामोदर बोलता है । कोई जय गौर बोलता है ।

▶ लेकिन जय श्री राधे सभी बोलते हैं । आइए हम भी बोलें । जय जय श्री राधे ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn
 
श्री राधाष्टमी

Sunday, 4 September 2016

ग्रन्थ परिचय: श्रीराधारससुधानिधि

📖 ग्रन्थ परिचय 2⃣9⃣ 📖

💢 ग्रन्थ नाम : श्रीराधारससुधानिधि
💢 लेखक : श्रीप्रबोधानन्द सरस्वतिपाद
💢 भाषा : संस्कृत-हिन्दी-अनुवाद-टीका
ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
💢 साइज़ : 19 x 25 सेमी
💢 पृष्ठ : 200 हार्ड बाउंड
💢 मूल्य : 300 रूपये

💢 विषय वस्तु :
श्रीराधादास्यनिष्ठां का प्रकाशक
अद्भुत रसोपासना ग्रन्थ
अनेक लीलाओं के साथ

💢 कोड : M029 -Ed2

💢 प्राप्ति स्थान

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
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📬 डाक द्वारा । 09068021415
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श्रीराधारससुधानिधि

18 कैरेट सोना

🔴 18 कैरेट सोना 🔴

🚗 जिस प्रकार सोना 18 कैरेट का भी होता है 20 कैरेट का भी होता है 22 का भी होता है और 24 का भी होता है

🚕 उसी प्रकार भगवान की भक्ति भी है तो सोना ही कम महत्वपूर्ण नहीं है । 18 केरेट का भी आभूषण हो तो कीमत तो है ही चमक भी है ही लेकिन वह शुद्ध सोना नहीं माना जाता है । जब बेचने जाओ तो काफी पैसे कट कर मिलते हैं

 🚙 उसी प्रकार अपने सुख के लिए की गई भक्ति भी 18 16 12 केरेट है । है वह भी भक्ति । लेकिन वह विशुद्ध भक्ति नहीं है

🚌 विशुद्ध भक्ति वह है जो कृष्ण के सुख के लिए की जाए कृष्ण चरण सेवा प्राप्ति के लिए की जाए

🚎 एक महिला मुझे मिली । वह बोलती है कि मुझ पर तो ठाकुर की बड़ी कृपा है मैंने जो चाहा मेरे चाहने के साथ-साथ मुझे प्राप्त हो जाता है

🚓 मरे पास सब सुख हैं ठाकुर मुझे बहुत सुख प्रदान करते हैं । मैंने उससे कहा की बहुत अच्छी बात है । तुम ठाकुर को क्या सुख प्रदान करती हो और

🚑 ठाकुर ना तो तुम्हारा सुंदर तन चाहता है ना तुम्हारा धन चाहता है केवल मन से अपना नाम स्वयं अपनी गुण लीला चिंतन चाहता है

🚒 तो बोली हम ठाकुर को सुख दे भी कैसे सकते हैं ठाकुर के पास तो पहले से ही अनंत सुख है

🚐 मने कहा कि आप वैसे ही सुख दे सकते हो जैसे एक अरबपति सेठ को एक 10 या 5000 महीने का नौकर सुख देता है

 🚘 कयोंकि बेसिकली हम लोग श्री कृष्ण के दास हैं कृष्ण ने हमें इस संसार में अपने गुणगान के लिए अपॉइंट किया है । उसके बदले में उसने हमें सूर्य चंद्र धूप नदी मानव जीवन आदि अनेक उपहार दिए हैं

🚐 और हम फिर भी उनसे और और और सुख मांग रहे हैं । एक कर्मचारी एक दास एक सेवक के रूप में क्या हम यह ठीक कर रहे हैं । शायद नहीं

🚜 सवक का प्रधान कार्य है कि स्वामी को सुख प्रदान करना । और स्वामी निश्चित ही सेवक से करोड़ गुना अधिक समृद्धि शाली सुखवान होता ही है फिर भी सेवक की सब को आवश्यकता होती है

🚚 जितना बड़ा आदमी है उतने अधिक सेवक और वे सेवक यदि स्वामी की सेवा न करें तो इसका अर्थ हुआ कि वह अपने दायित्व से च्युत हो गए

🚛 इसलिए 16 कैरेट ठीक है 18 कैरट भी ठीक है 22 कैरेट भी ठीक है 24 कैरेट भी ठीक है । हम लोग 24 तो शायद नहीं बन सकते । लेकिन 22 के लिए हमेशा कोशिश की जाए

🚨 सदैव कृष्ण चरण सेवा प्राप्ति के लिए प्रयास किए जाएं । सुख दुख तो आते रहेंगे जाते रहेंगे और ईश्वर समाधान करता भी रहेगा

🙏🏻 समस्त वैष्णव जन के चरणों में सादर प्रणाम


🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn

18 कैरेट सोना


Saturday, 3 September 2016

ग्रन्थ परिचय~श्रीललितमाधव नाटक

📖 ग्रन्थ  परिचय 2⃣7⃣  📖

💢 ग्रन्थ   नाम : श्रीललितमाधव नाटक
💢 लेखक : श्रीमद रूपगोस्वामिपाद
💢 भाषा : हिन्दी| ब्रजविभूति श्रीश्यामदास
   
💢 साइज़ : 19 x 25 सेमी
💢 पृष्ठ : 140 सॉफ्ट बाउंड
💢 मूल्य  : 100 रूपये

💢 विषय वस्तु :
     मथुरा-द्वारका-लीलामय
     आश्चर्यपूर्ण आनंदमय नाटक

💢 कोड : M027-Ed2

💢 प्राप्ति  स्थान

1⃣ खण्डेलवाल बुक स्टोर वृन्दाबन
2⃣ हरिनाम प्रेस वृन्दाबन
3⃣ रामा स्टोर्स, लोई बाजार पोस्ट ऑफिस

📬 डाक द्वारा । 09068021415
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श्रीललितमाधव नाटक
श्रीललितमाधव नाटक

इसे प्रेम का नाम न दो

 🌹  इसे प्रेम का नाम न दो 🌹

🍎प्रेम  के विषय श्री कृष्ण है । प्रेम केवल श्रीकृष्ण से ही हो सकता है । किसी अन्य से यदि हमारा प्रेम है तो वह निश्चित ही स्वार्थ के कारण है

🌷माता का प्रेम जो छोटे बालक के प्रति होता है वह वात्सल्य के का रण होता है बड़े होने पर 50 मौके ऐसे हैं जो माता पिता । माता पुत्र के झगड़े के हैं

🍉भाई बहन  । भाई भाई । पिता पुत्र । यहां तक कि प्रेमी-प्रेमिका । पति पत्नी । रोज ब्रेकअप हो रहे हैं ।  रोज तलाक हो रहे ।