Friday, 12 October 2012

259. RASTRAPATI NHI BAN SKTE




राष्ट्रपति नहीं बन सकते 

आज एक आप-हम जैसा साधारण व्यक्ति 
एड़ी छोटी का जोर लगा ले तब भी वह अगले पञ्च वर्षों में 
भारत का राष्ट्रपति नहीं बन सकता 

लेकिन यदि कोई हम -आप जैसा साधारण व्यक्ति 
पांच वर्ष तक एड़ी- छोटी का जोर लगाकर 
भजन में लग जाय तो भगवद भक्ति प्राप्त कर सकता है 

कहाँ सामान्य सा पद और कहाँ परम पद 
लेकिन कितना सहज 

JAI SHRI RADHE

DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

 RASTRAPATI NHI BAN SKTE

Thursday, 11 October 2012

258. gandee baat


गन्दी बातें 

गन्दी बातों की प्रशंसा करो या विरोध 
दोनों ही स्थितियों में 
नैगाटिव वाईबरेशंस प्रचारित होती है 

भ्रष्टाचार का विरोध तो जो हुआ सो हुआ,
इससे भ्रस्ताचार का प्रचार अधिक हुआ है 

जिन्हें पता नहीं था, उन्हें भी पता चल गया 
और शायद वे भी अब बिना डरे भ्रष्टाचार का आश्रय लेंगे 

अतः केवल व केवल अच्छी बातों के बारे में ही 
बात होनी चाहिए, गंदी बातें सदा से थी , सदा रहेंगी 
इन्हें दफनाते रहना चाहिए  

JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Tuesday, 9 October 2012

257. MAN DHAN



मन चाहिये या धन ?

किसी लोकिक व्यक्ति  से 
हम कहें  कि -भइया ! मन से हम 
तुम्हारे साथ है , हमारा मन तुम्हारे साथ  है,
तन असमर्थ है ,धन हमारे पास है नहीं 
तो वह आपको अपने पास फटकने  नहीं देगा 

और श्री कृष्ण !
वे तो तन और धन चाहते ही नहीं है 
उन्हे तो केवल और केवल मन ही चाहिए 
मन दिया तो सब दिया , हो गए वे आपके और आप उनके
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Friday, 5 October 2012

256. RAS KA PATR

RAS KA PATR


रस का पात्र

'रसो वै सः'
भगवान् रस स्वरुप है

रस के विषय में जाननने के लिए
आवश्यक है कि एक पात्र हो, जिसमे रस 
डाल कर रस के स्वरूप, मात्रा, आनंद आदि का
ज्ञान प्राप्त हो .

Tuesday, 2 October 2012

255. SAHAAYATAA KYON NAHI ??



सहायता क्यों नहीं??

एक बालक एक बार अपने पिता के साथ किसी कैदी
से मिलने जेल गया

वहां उसने देखा कि-
१. एक व्यक्ति की पिटाई हो रही है
२. एक व्यक्ति को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है
३. एक व्यक्ति=कैदी को मिलने वालों से मिलने नहीं दिया गया
आदि...आदि.....

बच्चे ने अपने पिता से कहा-
आप इतनी समाज सेवा करते हो, आप इन लोगिन की सहायता 
क्यों नहीं करते हो ???

पिता ने कहा- बेटे ये अपराधी हैं, इन्होने क़त्ल किया है, चोरी की है
अत्याचार किया है, - ये लोग अपने बुरे कामों की सज़ा काट रहे हैं
इन्हें इसलिए दण्डित किया जा रहा है जिससे ये दुबारा बुरे काम=अपराध न करें

ठीक इसी प्रकार विभिन्न जीव जो दुःख भोग रहे हैं
ये उनके बुरे कामों की सज़ा है, जैसे बालक नहीं जानता
वैसे ही हम नहीं जानते हैं, लेकिन जो शास्त्र हैं, संत हैं, वे त्र्कालाग्य है
वे जानते हैं, वैसे भी भगवान् से तो पाप पुण्य का कोई सम्बन्ध नहीं है
भगवान् तो भक्ति व भक्त से सम्बन्ध रखते है.
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

254. tumhare PAAP KA FAL



तुम्हारे पाप का फल है ये !

एक व्यक्ति का मकान अचानक चकनाचूर हो गया
वह दुबारा मकान बनाने की स्थिति में नहीं था, अतः झल्लाकर
धर्माचार्यों के पास गया और कहा कि-

आप भगवान् के अति निकट हैं, आप भगवान् से
प्रार्थना करके मेरा मकान दुबारा बनवा दीजिये

धर्माचार्यों ने भगवान् से बात की, और असलियत का पता लगाया
और उस बन्दे को बताया कि -

तुम पिछले जन्म में एक बिल्डर थे, तुमने बहुतों को बेघर किया था
तुम्हे उस पाप कि सज़ा मिली है, और अब तुम्हे भी पूरे जीवन
इधर-उधर भटकना होगा, अब तुम्हारे भाग्य में मकान नहीं है

वह बन्दा झल्ला गया, बोला में पिछले जन्म को नहीं मानता हूँ
धर्माचार्यों ने कहा, ठीक है, तो भगवान् को भी मत मानो
पिछ्ला जन्म, भगवान्, धर्म, शास्त्र, कर्म, पाप, पुण्य आदि यह पूरा package है
मानो तो पूरा, न मानो तो पूरा मत मानो,

नहीं मानते तो फिर तुम्हारा मकान गिरा, 
तुम जानो, इससे धर्म का , भगवान् का क्या मतलब ???
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA

Monday, 1 October 2012

253, SHUDDH PREM



शुद्ध प्रेम

कामना, वासना, स्वार्थ, या किसी
मकसद के लिए किया गया प्रेम लौकिक है
यह उद्देश्य-पूर्ती के साथ-साथ समाप्त हो जाता है या ढीला पड़ जाता है

विशुद्ध प्रेम आत्मिक है, आत्मा की वस्तु है
शरीर रहे न रहे, मकसद रहे न रहे, प्रेम  रहता ही है
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ NANGIA