Tuesday, 4 September 2012

240. BHGVAAN SBKE SAATH


 BHGVAAN SBKE SAATH

 भगवान  सबके साथ

जब  रजोगुन या   तमोगुण  की वृद्धि सृष्टि  में अपेक्षित होती है
तो भगवान रज-तमोगुण की वृद्धि को  होने देते है 

जब सतोगुण  की वृद्धि की आवश्यकता होती है उसे भी होने देते है.

लेकिन प्रायः देखने में ये आता है की वे देवताओं  के साथ है . सात्विक  लोगो  के साथ है.

सत्वगुण  प्रकाशमय या ट्रांसपरेंट होता है. 
अतः भगवन की उपस्तिथि दिखती है.

तमो-रजो  गुन  आवरनात्मक   होते है अतः भगवन की उपस्थिति  दीखटी  नहीं . 
ठीक वैसे, जैसे-  शीशे के बर्तन मे अन्दर जो है वह दिखता है स्टील या मिटटी के बर्तन में नहीं दिखता. 
  
भगवन पक्षपाती तो नहीं है लेकिन निष्ठुर भी नहीं है .
रजा ह्रियान्यकशिपू ने जब वर मांग कर देवताओं को अपने आधीन कर लिया तो प्रभु शांत रह आये 
उस समय भी हिरान्यकशिपू को असहयोग कर सकते थे,

लेकिन जब अपने भक्त प्रहलाद पर कष्ट आया तो खम्बे से प्रकट हो गए.
JAI SHRI RADHE

Monday, 3 September 2012

239. DVESH KISSE



द्वेष किससे  ?



शिव 
दक्ष प्रजापति से नहीं 
उनके अज्ञान से द्वेष करते थे.

दक्ष प्रजापति 
शिव से द्वेष करते थे.

पाप से घृणा में दोष नहीं, 
पापी से घृणा में दोष है.

JAI SHRI RADHE

Wednesday, 29 August 2012

238. RAJ - RANI


रज रानी 

एक रानी ही से दूसरी रानी से मिला सकती हैं . 
राधारानी से मिलना है 
तो सहज प्राप्त वृन्दावन  की रज रानी की सेवा उपासना करो.

रज रानी  ही राधारानी से  मिला देंगी . 

JAI SHRI RADHE

Thursday, 16 August 2012

237. EK KO CHUNO

 EK KO CHUNO


एक को चुनो

अपनी छोटी बहिन के साथ उसके कॉलेज जाओ 
उसकी कक्षा में बेठो थोडा लिखो पढो और आ जाओ.

दुसरे दिन बड़ी बहिन के साथ जाओ थोडा लिखो पढो और आजाओ

केवल मनोरंजन है तो ठीक हैं
लेकिन यदि आप सेरिअस है और यह कहे की में भी 
तो कीसी न किसी बहिन के साथ रोज़ कॉलेज  जाती हूँ तो आपका भ्रम है 
न आपको रोज़ जाने दिया जाएगा न परीक्षा में बेठने दिया जाएगा ने डिग्री मिलेगी और न नौकरी.

इसी  प्रकार कभी कृष्ण कभी राम कभी शिव कभी माता करोगे तो हाल वही होगा,, 
मनोरंजन ही  होगा बस...

यदि गंभीर हो तो किसी भी एक के हो जाओ एक को पकड़ लो. 
जिस प्रकार पति एक रिश्ते अनेक 

"पति एक" अन्यथा चरित्रहीन कह्लोगी. 
एक को पकड़ो. एक को भजो. एक में निष्ठां.एक की प्रतिस्था 
चुनाव खुद करो सोच समझकर.
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia

Wednesday, 15 August 2012

236. 15th august

स्वतंत्रता दिवस
आज १५ अगस्त को भारत स्वतन्त्र हुआ था
पर-तंत्रता, पर-शासन समाप्त हुआ था
 
सर्वतंत्र - स्वतन्त्र,  परम - स्वतन्त्र भगवान्
श्री कृष्ण के चर्नारविन्द को प्राप्त करने की
इच्छा को लेकर लोभ, मोह, द्वेष, क्रोध, आदि मायिक
लौकिक प्रवृत्तियों से न जाने हम कब स्वतन्त्र होंगे ?
 
इनसे स्वतन्त्र होकर भगवद सेवा प्राप्त होने पर ही
हम वास्तविक स्वतन्त्र होंगे !
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia

Monday, 13 August 2012

235. KHEENCH - TAAN


KHEENCH - TAAN

खींच - तान 

बिल्ली के गले में रस्सी बाँध दो 
और उसके दुसरे छोर को पकड़ लो तो 
बिल्ली निश्चित ही उसे खिचेगी  
फिर हम यह कहते हैं की :  मेने तो केवल पकड़ राखी है, 
खीच तो बिल्ली रही है.

हम यदि संसार की रस्सी पकडे रहगे तो 
खींचतान मची रहेगी 
संसार में  रहो भले  ही  रस्सी को छोड़ दो 
खींचतान समाप्त हो जाएगी
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia

Friday, 10 August 2012

234. JANMASHTAMI

जन्माष्टमी

कन्हैया का जन्म हुया तो 
रोते ही जा रहे थे

साथ खड़े एक जन के पास मेसज आया
उसने मोबाईल में मैसेज पढ़ा

दूर खड़े दूसरे जन ने पूछा-
क्या मैसेज आया

उसने जोर से बोल कर बताया-
जय श्री राधे

क्या ?
जय श्री राधे 

हाँ जय श्री राधे !!!

जानते हैं लाला का रोना बंद हो गया
और लाला जोर-जोर से खिलखिलाने लगे

बोलिए-
जय श्री राधे

दासाभास डा गिरिराज