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Thursday, 16 August 2012

237. EK KO CHUNO

 EK KO CHUNO


एक को चुनो

अपनी छोटी बहिन के साथ उसके कॉलेज जाओ 
उसकी कक्षा में बेठो थोडा लिखो पढो और आ जाओ.

दुसरे दिन बड़ी बहिन के साथ जाओ थोडा लिखो पढो और आजाओ

केवल मनोरंजन है तो ठीक हैं
लेकिन यदि आप सेरिअस है और यह कहे की में भी 
तो कीसी न किसी बहिन के साथ रोज़ कॉलेज  जाती हूँ तो आपका भ्रम है 
न आपको रोज़ जाने दिया जाएगा न परीक्षा में बेठने दिया जाएगा ने डिग्री मिलेगी और न नौकरी.

इसी  प्रकार कभी कृष्ण कभी राम कभी शिव कभी माता करोगे तो हाल वही होगा,, 
मनोरंजन ही  होगा बस...

यदि गंभीर हो तो किसी भी एक के हो जाओ एक को पकड़ लो. 
जिस प्रकार पति एक रिश्ते अनेक 

"पति एक" अन्यथा चरित्रहीन कह्लोगी. 
एक को पकड़ो. एक को भजो. एक में निष्ठां.एक की प्रतिस्था 
चुनाव खुद करो सोच समझकर.
JAI SHRI RADHE
DASABHAS Dr GIRIRAJ nangia

Monday, 17 October 2011

112. HAMARI SEEMA


हमारी सीमा 


भ्रम - रस्सी को सांप समझना 
प्रमाद - पता तो है लेकिन भूल जाना
विप्रलिप्सा - आलस्य, मन नहीं है AVOIDING attitude
करना-पातव  - आँख होने पर भी प्रकाश के बिना देख नहीं पाना

JAI SHRI RADHE