Showing posts with label CHOR. Show all posts
Showing posts with label CHOR. Show all posts

Wednesday, 16 November 2011

141. NISHTHA, DAMBH, CHOR



निष्ठा 

साधन मैं परिपक्व अवस्था का 
नाम ही निष्ठा है

दंभ

हठ पूर्वक ऊपर ऊपर से 
इन्द्रियों को रोककर, अन्दर से 
या मन से यदि इन्द्रियों के विषयों का
चिन्तन करने वाला दम्भी है


चोर

देवताओं द्वारा दिए गए 
भोग या सुविधाओं कोस्वयं ही  भोगता रहे 
और यज्ञ-दान या अन्य किसी भी प्रकार से 
देवताओं को न दे, वह चोर है 
   


JAI SHRI RADHE

अवश्य ज्वाइन करें