Showing posts with label श्रद्धया हेलया वा नरमात्रं. Show all posts
Showing posts with label श्रद्धया हेलया वा नरमात्रं. Show all posts

Thursday, 29 June 2017

Naam me Shuddi Ashuddhi ka vichar

Naam me Shuddi Ashuddhi ka vichar

🔔 नाम में शुद्धि अशुद्धि का विचार 🔔

  शास्त्रों में यह स्पष्ट आदेश है

" खाइते शुइते यथा तथा नाम लय"

अथवा

"श्रद्धया हेलया वा नरमात्रं तारयेत्
 श्री कृष्ण नाम"

अर्थात् । खाते समय, सोते समय, जैसे तैसे । यानी पूरी छूट हो गई कि किसी भी अवस्था में नाम लिया जा सकता है । 🔴

यहां तक भी कह दिया कि श्रद्धा या उपेक्षा से भी लिया गया नाम नर मात्र को तार देता है ।

यह बात सामान्यतया कही गई और सामान्यतः समझी भी जाती है । लेकिन इसमें एक विशेष भाव दासाभास को समझ आया कि 🔴

जब ऐसी परिस्थितियां खड़ी हो कि शुद्धि हम रख नहीं सकते । अशुद्ध हम हो गए हैं । तो अब नाम न किया जाए । 🔴

ऐसी परिस्थिति । जब नाम बंद होने की, नाम रूकने की, नाम न करने की स्थिति आ जाए तब इस वाक्य को ध्यान करके । 🔴

शुद्धि हो, चाहे अशुद्धि हो, चाहे खा रहे हो, चाहे सो रहे हो, लेटे हुए हो, नाम को जारी रखना है, नाम को चालू रखना है । 🔴

क्योंकि नाम की शक्ति अधिक है नाम निर्पेक्ष है शुद्धि या नाम अशुद्धि के लिए नाम बंद कर दिया जाए । ऐसा कभी नहीं होना चाहिए । 🔴

यह इसका निहित भाव दासाभास ने समझा है । सामान्यतः यथासंभव यदि शुद्धि सम्भव है, शुद्धि के साधन हैं तो अवश्य ही शुद्धि का पालन करते हुए नाम जप करना चाहिए । 🔵

शुद्धि भी अंतः शुद्धि और बाह्य शुद्धि 2 प्रकार की है । शरीर का स्नान, हाथों का शुद्ध होना, आसन का शुद्ध होना, वातावरण का शुद्ध होना यह आता है बाह्य शुद्धि में । 🔵

और अंतर शुद्धि में अंतःकरण का शुद्ध होना आता है । अंतकरण की शुद्धि नाम द्वारा होती है और बाह्य शुद्धि, शरीर की शुद्धि हमारे प्रयासों द्वारा होती है । 🔵

अतः नाम के लिए यथासंभव शुद्धि का विचार अवश्य किया जाए । लेकिन कभी-कभी दासाभास या आप ऐसे फस जाए की शुद्धि का कोई उपाय न मिले तो नाम को बंद न किया जाए । 🔵

अशुद्ध अवस्था में, सोते जागते कैसे भी नाम को चालू रखा जाए । इससे कोई अपराध भी नहीं होगा । 👌👌

इस भाव को सदा ही दासाभास एवम् सब साधकों को ध्यान में रखना चाहिए और "खाइते सुइते" इस बात का दुरूपयोग ना किया जाए ।

🐚 ॥ जय श्री राधे ॥ 🐚
🐚 ॥ जय निताई  ॥ 🐚

 🖊 लेखक
दासाभास डा गिरिराज नांगिया
LBW - Lives Born Works at vrindabn