Showing posts with label दैन्य विनम्रता. Show all posts
Showing posts with label दैन्य विनम्रता. Show all posts

Wednesday, 14 September 2016

अंतरंग या साक्षात भजन ही श्रेष्ठ लक्ष्य

​✔  *अंतरंग या साक्षात भजन ही श्रेष्ठ लक्ष्य*    ✔

▶ एक है साक्षात भजन । अर्थात नवविधा भक्ति । और नवविधा भक्ति पूर्ण नाम हैत हैय ।

▶ नाम जप या नाम संकीर्तन ही देखा जाए तो कलयुग का साक्षात भजन है ।क्योंकि नाम और नामी अभिन्न है । अपितु हरि से बड़ा हरि का नाम । कलौ केशव कीर्तनात ।

▶ कुल मिलाकर नाम में निष्ठा । नाम जप । नाम संकीर्तन और यदि प्रभु कृपा करें तो धाम का वास । यह दो चीज हमे  यदि प्राप्त हो गई तो समझिए बहुत कुछ प्राप्त हो गया